572 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण् ड 4 PART III—Section 4 प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण अजधसूचना ग ांधीनगर, 27 जनवरी, 2026 अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण (…
572 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण् ड 4 PART III—Section 4 प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण अजधसूचना ग ांधीनगर, 27 जनवरी, 2026 अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण (जनजध प्रबंधन) (संिोधन) जिजनयम, 2026 आईएफएससीए/जीएन/2026/006.—अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण, अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण अजधजनयम, 2019 की धारा 12 की उप-धारा (1) और धारा 13 की उप-धारा (1) के साथ पठित धारा 28 की उप-धारा (1) और भारतीय प्रजतभूजत और जिजनमय बोडड अजधजनयम, 1992 की धारा 28ग द्वारा प्रदत्त िजियों का प्रयोग करते हुए, अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण (जनजध प्रबंधन) जिजनयम, 2025 (जिसे इसके बाद प्रमुख जिजनयम कहा िाएगा) में और संिोधन करने के जलए एतद्द्वारा जनम्नजलजखत जिजनयम बनाता है, अथाडत्: - 1. (1) इन जिजनयमों को अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण (जनजध प्रबंधन) (संिोधन) जिजनयम, 2026 कहा िाएगा। (2) ये जिजनयम आजधकाठरक रािपत्र में इनके प्रकािन की तारीख से प्रभािी होंगे। 2. मुख्य जिजनयमों के जिजनयम 7 में, उप-जिजनयम (5) में, खंड (ख) को, जनम्नजलजखत खंड से प्रजतस्ट्थाजपत ककया िाएगा, अथाडत्: - “खंड (क) के अधीन दिाडई गई अहडताओं के अजतठरि, ककसी पात्र संस्ट्थान में प्रजतभूजत बािार या जित्तीय उत्पाद में संबंजधत कायडकलापों में कम से कम पांच (5) िर्ड का अनुभि: सं. 65] नई कदल्ली, बुधिार, िनिरी 28, 2026/माघ 8, 1947 No. 65] NEW DELHI, WEDNESDAY, JANUARY 28, 2026/MAGHA 8, 1947 सी.जी.-जी.जे.-अ.-30012026-269662 CG-GJ-E-30012026-269662
2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC.4] बिते कक उप-जिजनयम (2) के अधीन बताए गए केएमपी के जलए, यकद ऐसे केएमपी के पास व्यािसाजयक अहडता है, खंड (ख) में दिाडया गया अनुभि न्यूनतम 3 (तीन) िर्ड की अिजध के जलए आिश्यक होगा: बिते यह भी कक आईएफएससी, भारत या ककसी भी जिदेिी अजधकार क्षेत्र में अहडता के बाद ककसी पात्र संस्ट्थान में कम से कम 2 (दो) िर्ड के अनुभि िाला व्यजि और जिसके पास प्राजधकरण द्वारा जनर्दडष्ट िैध प्रमाणन (प्रमाणपत्र) हैं, उसे उप-जिजनयम (2) के अधीन बताए गए केएमपी के जलए पात्र माना िाएगा: बिते यह भी कक आईएफएससी, भारत या ककसी भी जिदेिी अजधकार क्षेत्र में ककसी पात्र संस्ट्थान में अहडता के बाद कम से कम 3 (तीन) िर्ड का अनुभि रखने िाले व्यजि और जिनके पास प्राजधकरण द्वारा जनर्दडष्ट िैध प्रमाणन (प्रमाणपत्र) हैं, उन्हें उप-जिजनयम (1), (3) और (4) के अधीन दिाडए गए केएमपी के जलए पात्र माना िाएगा।
स्ट्पष्टीकरण। – इस खंड के प्रयोिन के जलए, “पात्र संस्ट्थान” में जनम्नजलजखत िाजमल होंगे -
i) बािार अिसंरचना संस्ट्थान, पूंिी बािार मध्यस्ट्थ, जित्तीय क्षेत्र जनयामक, एफएमई बैंक, जित्त कंपजनयां, बीमा कंपजनयां, और आईएफएससी में बीमा मध्यस्ट्थ, और भारत या ककसी भी जिदेिी अजधकार क्षेत्र में समकक्ष संस्ट्थान;
ii) आईएफएससी, भारत या ककसी भी जिदेिी अजधकार क्षेत्र में ऊपर (i) में उजल्लजखत संस्ट्थानों को जित्तीय उत्पाद के संबंध में सेिाएं प्रदान करने िाली परामिड कंपनी / सलाहकार कंपनी / चार्डड अकाउंर्ेंर् / कंपनी सजचि / लागत लेखाकार कंपनी; और iii) जनिी या सािडिजनक कोई कंपनी, यकद उसे ऐसी कंपनी के जित्त/लेखा/सजचिीय/जिजध जिभागों से संबंजधत अनुभि प्राप्त है। 3. मुख्य जिजनयमों के जिजनयम 19 में, उप-जिजनयम (3) में, परंतुक को जनम्नजलजखत परंतुक से प्रजतस्ट्थाजपत ककया िाएगा, अथाडत्: - “बिते कक यकद कोई एफएमई, जिजनयम 23 के उप-जिजनयम (1) के अधीन जनर्दडष्ट न्यूनतम कोर् का आकार, जनर्दडष्ट समय अिजध के भीतर प्राप्त करने में जिफल रहती है, तो उसके पास जनयोिन ज्ञापन की िैधता बढाने का जिकल्प होगा, जिसमें, जनयोिन ज्ञापन की जिद्यमान िैधता के समाप्त होने के अगले कदन से प्रत्येक ऐसा जिस्ट्तार छ: (6) माह की अिजध के जलए होगा, और इसके जलए जनयोिन ज्ञापन की िैधता समाप्त होने से पूिड आिेदन फाइल करना होगा और इसके साथ जनम्न के बराबर िुल्क देना होगा - i) पहले जिस्ट्तार के जलए, नई योिना फाइल करने के जलए ऐसे जिस्ट्तार के समय यथा-प्रचजलत लागू िुल्क का पच्चीस प्रजतित (25%) ; और
ii) हर अगले जिस्ट्तार के जलए, नई योिना फाइल करने के जलए ऐसे जिस्ट्तार के समय यथा-प्रचजलत लागू िुल्क का पचास प्रजतित (50%)।” 4. मुख्य जिजनयमों के जिजनयम 35 में, i. उप-जिजनयम (1) में, परंतुक के बाद, जनम्नजलजखत परंतुक सजममजलत ककया िाएगा, अथाडत: - “बिते कक एक ओपन-एंडेड योिना द्वारा गैर-सूचीबद्ध प्रजतभूजतयों में जनिेि केिल 3 जमजलयन अमेठरकी डॉलर का न्यूनतम कॉपडस प्राप्त करने के बाद ही ककया िाएगा।” ii. उप-जिजनयम (2) में, परंतुक के बाद, जनम्नजलजखत परंतुक समाजिष्ट ककया िाएगा, अथाडत: -
[भाग III—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 3 “बिते कक यकद कोई एफएमई तय समय सीमा के भीतर 3 जमजलयन अमेठरकी डॉलर का न्यूनतम कोर् आकार प्राप्त करने में जिफल रहता है, तो उसके पास जनयोिन ज्ञापन की िैधता बढाने का जिकल्प होगा, जिसमें ऐसा प्रत्येक जिस्ट्तार छ: (6) माह की अिजध के जलए होगा, िो जनयोिन ज्ञापन की जिद्यमान िैधता समाप्त होने के अगले कदन से िुरू होगा, और इसके जलए जनयोिन ज्ञापन की िैधता समाप्त होने से पूिड आिेदन फाइल करना होगा, साथ में जनम्न के बराबर िुल्क देना होगा - i) पहले जिस्ट्तार के जलए, नई योिना फाइल करने के जलए ऐसे जिस्ट्तार के समय यथा-प्रचजलत लागू िुल्क का पच्चीस प्रजतित (25%); ii) प्रत्येक आगामी जिस्ट्तार के जलए, नई योिना फाइल करने के जलए ऐसे जिस्ट्तार के समय यथा- प्रचजलत लागू िुल्क का पचास प्रजतित (50%); 5. मुख्य जिजनयमों के जिजनयम 131 में, उप-जिजनयम (1) में, खंड (ख) के बाद, जनम्नजलजखत खंड समाजिष्ट ककये िाएंगे, अथाडत्: - “(ग) यकद एफएमई ने योिना के अधीन जनिेिकों से जनजध िुर्ाई है, लेककन जनयोिन ज्ञापन या पेिकि दस्ट्तािेि की िैधता या जिस्ट्तार िैधता, िो भी लागू हो, के दौरान िह न्यूनतम कोर् प्राप्त करने में जिफल रहता है, और एफएमई ने आिश्यक आिेदन द्वारा और प्राजधकरण को िुल्क का भुगतान करके इसकी िैधता नहीं बढाई है। (घ) िब योिना में ककसी जनिेिक को िाजमल नहीं ककया गया है और कोई जनजध संग्रहीत नहीं की गई है और एफएमई स्ट्िेच्छा से इसे बंद करना चाहता है।” 6. मुख्य जिजनयमों के जिजनयम 132 में, स्ट्पष्टीकरण II को जनम्नजलजखत स्ट्पष्टीकरण से प्रजतस्ट्थाजपत ककया िाएगा, अथाडत्: - “स्ट्पष्टीकरण II. – ऐसी योिनाओं के मामले में जिन्हें उपयुडि उपबंध के अनुसार आईएफएससी में संरक्षक जनयुि करना आिश्यक है, ऐसी जनयुजि अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण (जनजध प्रबंधन) (संिोधन) जिजनयम, 2026 के आरंभ होने की तारीख से चौबीस (24) माह के भीतर की िा सकती है, इस अिजध के दौरान एफएमई भारत में, या ककसी भी जिदेिी अजधकार क्षेत्र में, िो उस अजधकार क्षेत्र में जित्तीय क्षेत्र जनयामक द्वारा जिजनयजमत हो, स्ट्ितंत्र संरक्षक जनयुि कर सकता है और िब भी ऐसा करने का जनदेि कदया िाए, िह प्राजधकरण को ऐसी िानकारी प्रदान करने के जलए आिश्यक व्यिस्ट्था कर सकता है।” प्रवीण त्रिवेदी, कायडकारी जनदेिक [जिज्ञापन-III/4/असा./640/2025-26] नोर्: 1. अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण (जनजध प्रबंधन) (संिोधन) जिजनयम, 2025, िो मुख्य जिजनयम हैं, को 13 फरिरी, 2025 को फ़ाइल संख्या आईएफएससीए/िीएन/2025/002 के अधीन भारत के रािपत्र में प्रकाजित ककया गया था। 2. अंतरराष्ट्रीय जित्तीय सेिा केंद्र प्राजधकरण (जनजध प्रबंधन) (संिोधन) जिजनयम, 2025 को 30 िुलाई, 2025 को फ़ाइल संख्या आईएफएससीए/िीएन/2025/007 के अधीन भारत के रािपत्र में प्रकाजित ककया गया था।
4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC.4] INTERNATIONAL FINANCIAL SERVICES CENTRES AUTHORITY
NOTIFICATION
Gandhinagar, the 27th January, 2026
International Financial Services Centres Authority (Fund Management) (Amendment) Regulations, 2026
IFSCA/GN/2026/006.—In exercise of the powers conferred by sub-section (1) of Section 28 read with sub- section (1) of Section 12 and sub-section (1) of Section 13 of the International Financial Services Centres Authority Act, 2019, and Section 28C of the Securities and Exchange Board of India Act, 1992, the International Financial Services Centres Authority hereby makes the following regulations, further to amend the International Financial Services Centres Authority (Fund Management) Regulations, 2025, (hereinafter referred to as the principal regulations), namely: -
[भाग III—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 5 “Provided further that the investments by an open-ended scheme in unlisted securities shall be undertaken only upon achieving the minimum corpus of USD 3 Million.” ii. n sub-regulation (2), after the proviso, the following proviso shall be inserted, namely: - “Provided further that if a FME fails to achieve the minimum size of corpus of USD 3 Million within the specified time period, it shall have the option to extend the validity of the placement memorandum, wherein each such extension shall be for a period of six (6) months starting from the day after the expiry of the existing validity of the placement memorandum, by filing an application at such time when the placement memorandum is still valid, accompanied by a fee equal to - i) for the first extension, twenty-five per cent. (25%) of the applicable fee for filing of a fresh scheme, as may be prevalent at the time of such extension; and ii) for each subsequent extension, fifty per cent. (50%) of the applicable fee for filing of a fresh scheme, as may be prevalent at the time of such extension” 5. In regulation 131 of the principal regulations, in sub-regulation (1), after clause (b), the following clauses shall be inserted, namely: - “(c) If the FME has raised funds from the investors under the scheme but fails to achieve the minimum corpus during the validity or extended validity of the placement memorandum or offer document, as applicable, and the FME has not extended the validity thereof by making the requisite filing and payment of fee to the Authority. (d) When no investors have been onboarded into the scheme and no funds have been collected and the FME voluntarily desires to wind up the same.” 6. In regulation 132 of the principal regulations, for the Explanation II, the following Explanation shall be substituted, namely: - “Explanation II. – In case of schemes which are required to appoint custodian in IFSC in terms of the abovementioned provision, such appointment may be made within twenty four (24) months from the date of commencement of the International Financial Services Centres Authority (Fund Management) (Amendment) Regulation, 2026, during which period the FME may appoint an independent custodian in India, or any foreign jurisdiction, which is regulated by the financial sector regulator in that jurisdiction and make necessary arrangement to provide such information to Authority whenever directed to do so.”
PRAVEEN TRIVEDI, Executive Director [ADVT.-III/4/Exty./640/2025-26]
Note:
Uploaded by Dte. of Printing at Government of India Press, Ring Road, Mayapuri, New Delhi-110064 and Published by the Controller of Publications, Delhi-110054. GORAKHA NATH YADAVA Digitally signed by GORAKHA NATH YADAVA Date: 2026.01.30 16:01:16 +05'30'
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