TRAI regulation 324-5/2018-CA · 16 Jan 2020
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Check the official recordThe Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) has amended the Telecommunication Consumers Education and Protection Fund Regulations, 2007, to clarify and expand the scope of unclaimed or unrefundable amounts that service providers must deposit into the Telecommunication Consumers Education and Protection Fund (TCEPF). The amendment aims to remove ambiguities by explicitly including various types of unclaimed consumer funds, such as security deposits and plan charges from failed activations, in addition to excess billing charges. Service providers are required to transfer these unclaimed amounts to the TCEPF after failing to refund them within the prescribed timelines. This measure ensures that such funds are utilized for consumer welfare activities.
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(भारत के असाधारण राजपत्र, भाग III अनुभाग 4 में प्रकाशनार्थ) भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण
अधिसूचना
नई दिल्ली, 16 जनवरी, 2020
संख्या 324-5/2018-सीए - भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 (1997 का 24) की धारा 36 के अंतर्गत उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण दूरसंचार उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण निधि विनियम, 2007 (2007 का 6) में अगला संशोधन करने के लिए एतद् द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :-
दूरसंचार उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण निधि (पांचवां संशोधन) विनियम, 2020 (2020 का 3)
(एस. के. गुप्ता) सचिव, भादूविप्रा
टिप्पणी 1--- मूल विनियम अधिसूचना संख्या 322/4/2006/क्यूओएस (सीए) के तहत दिनांक 15 जून, 2007 को भारत के असाधारण राजपत्र, भाग III, अनुभाग 4 में प्रकाशित किए गए थे।
टिप्पणी 2--- मूल विनियमों में अधिसूचना संख्या 322-8/2010-सीए के द्वारा संशोधन किए गए थे और 7 मार्च, 2011 को भारत के असाधारण राजपत्र, भाग III, अनुभाग 4 में प्रकाशित किए गए थे।
टिप्पणी 3--- मूल विनियमों में अधिसूचना संख्या 324-2/2013-सीए के द्वारा संशोधन किए गए थे और ये 10 जुलाई, 2013 को भारत के असाधारण राजपत्र, भाग III, अनुभाग 4 में प्रकाशित किए गए थे।
टिप्पणी 4--- मूल विनियमों में अधिसूचना संख्या 324-2/2013-सीए के द्वारा संशोधन किए गए थे और 26 जून, 2014 को भारत के असाधारण राजपत्र, भाग III, अनुभाग 4 में प्रकाशित किए गए थे।
टिप्पणी 5--- मूल विनियमों में अधिसूचना संख्या 324-5/2018-सीए के द्वारा संशोधन किए गए थे और 18 जुलाई, 2018 को भारत के असाधारण राजपत्र, भाग III, अनुभाग 4 में प्रकाशित किए गए थे।
टिप्पणी 6--- व्याख्यात्मक ज्ञापन दूरसंचार उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण निधि (पांचवां संशोधन) विनियम, 2020 (2020 का 3) के उद्देश्यों और कारणों को स्पष्ट करता है।
व्याख्यात्मक ज्ञापन
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने 15 जून 2007 को दूरसंचार उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण निधि विनियम, 2007 (2007 के 6) [इसके बाद प्रमुख विनियमों के रूप में संदर्भित] को अधिसूचित किया था। इन विनियमों के अनुसार, "दूरसंचार उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण निधि" (टीसीईपीएफ) नामक एक कोष बनाया गया है। निधि से होने वाली आय का उपयोग उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण से संबंधित कार्यक्रमों और गतिविधियों को शुरू करने के लिए किया जाता है।
वर्तमान ढांचे के अनुसार बिलिंग ऑडिट में पता चले कोई भी अतिरिक्त शुल्क उपभोक्ताओं को वापस किया जाना चाहिए। हालांकि, यदि कोई सेवा प्रदाता विनियमों द्वारा अनुमत समयावधि के भीतर अपने प्रयास के बावजूद राशि वापस नहीं कर पाता है, तो सेवा प्रदाता को अदावाकृत/अप्रतिदाय योग्य राशि टीसीईपीएफ में जमा करनी होगी।
प्राधिकरण ने देखा कि जिस आधार पर सेवा प्रदाताओं द्वारा धन जमा किया जा रहा है, उसमें कुछ असंगतियां हैं। सेवा प्रदाताओं के साथ हुई बातचीत और जमा की गई राशि के विश्लेषण से पता चला है कि जहां कुछ सेवा प्रदाता ऑडिट में उजागर अतिरिक्त बिलिंग के कारण ही धन जमा कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य सेवा प्रदाता अदावाकृत धन जैसे धरोहर राशि और असफल सक्रियण के प्लॉन प्रभार जमा कर रहे हैं, जिसे वे उपभोक्ताओं के पता न चल पाने के कारण उपभोक्ताओं को वापस करने में असमर्थ हैं। उपभोक्ताओं से संबंधित ऐसी किसी भी अदावाकृत/अप्रतिदाय योग्य राशि को टीसीईपीएफ फंड में जमा करना विवेकसम्मत है क्योंकि इसका उपयोग उपभोक्ताओं के कल्याणकारी उपायों के लिए किया जाएगा। तदनुसार यह महसूस किया गया कि किसी भी प्रकार की अस्पष्टता को दूर करने और उपभोक्ता के किसी भी अदावाकृत धन जैसे अधि-शुल्क, धरोहर राशि और असफल सक्रियण के प्लॉन प्रभार आदि को जमा करने में सुविधा प्रदान करने के लिए टीसीईपीएफ विनियम में संशोधन किया जाना चाहिए।
उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, हितधारकों की टिप्पणियों के लिए 18.10.2019 को ट्राई की वेबसाइट पर नियमन में संशोधन का मसौदा रखा गया था जिसमें 18.11.2019 तक का समय दिया गया था तथा हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को ट्राई की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। लगभग सभी हितधारकों ने प्रस्तावित संशोधनों के साथ सहमति जताई। कुछ हितधारकों ने इस संबंध में अपने सुझाव भेजे। संबंधित सुझावों का विश्लेषण अगले पैराग्राफों में किया गया है।
एक सेवा प्रदाता ने सुझाव दिया कि प्राधिकरण को उन सभी खातों/शीर्षों को स्पष्ट एवं सूचीबद्ध किया जाना चाहिए जिनके तहत उपभोक्ताओं को नहीं किए जा सके भुगतानों को निधि में प्रेषित किया जाना हो। इस संबंध में यह बताया जाता है कि पिछले अनुभव और टीसीईपीएफ खाते में जमा की गई राशियों के आधार पर, प्रमुख खाता/शीर्षों को इस व्याख्यात्मक ज्ञापन के पैरा 3 में उल्लेखित किया गया है। तथापि, यदि किसी सेवा प्रदाता के पास कोई ऐसी राशि हो, जो इन खातों/शीर्षों के तहत नहीं आती है तो वे इसका उल्लेख करते हुए उसे भी टीसीईपीएफ खाते में जमा करें। अतः संशोधित विनियम इस संबंध में सेवा प्रदाताओं को पर्याप्त सुविधा प्रदान करता है।
एक सेवा प्रदाता ने सुझाव दिया कि प्राधिकरण को उस प्रक्रिया को निर्धारित करना चाहिए जब उपभोक्ता, जिसकी देय राशि निधि में जमा कर दी गई हो, ऐसा भुगतान वापस प्राप्त करने हेतु सेवा प्रदाताओं से संपर्क करता है। इस संबंध में, यह बताया जाता है कि विगत में जमा की गई राशियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि प्रति उपभोक्ता की वापसी योग्य राशि बहुत अधिक नहीं है। सेवा-गुणवत्ता विनियमों में पहले ही धरोहर राशि अथवा अतिरिक्त धनराशि की वापसी हेतु अनिवार्य समय सीमा निर्धारित की गई है। सेवा प्रदाता को इन समय सीमा के भीतर उपभोक्ता को वापसी योग्य किसी भी शुल्क/राशि/जमा को वापस करने के लिए अपने समुचित प्रयास करने चाहिए। इसके अलावा, टीसीईपीएफ विनियमों में यह प्रावधान है कि सेवा प्रदाता बारह महीने की समाप्ति अथवा तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि के अंतर्गत निर्दिष्ट सीमा की अवधि, जो भी बाद में हो, तक अदावाकृत/अप्रतिदेय राशि को टीसीईपीएफ को हस्तांतरित करेंगे। तथापि, यदि कोई भी व्यक्ति टीसीईपीएफ को ऐसी राशि के हस्तांतरण के बाद, किसी भी राशि की वापसी का हकदार बन जाता है, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत या किसी अदालत या न्यायाधिकरण द्वारा उपभोक्ता फोरम द्वारा किए गए आदेश के अनुपालन में मूल विनियमों के विनियमन 16 के प्रावधानों के अनुसार इसका दावा किया जा सकता है।
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