IRDAI circular IRDAI/GA&HR/CIR/MISC/49/03/2025 · 26 Mar 2025
Official title
Circular on Cyber Incident or Crisis Preparedness
Summary
Check the official recordThe Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) has reiterated mandatory compliance requirements for all Regulated Entities (REs), including insurance intermediaries, regarding cyber incident and crisis preparedness. REs must adhere to existing guidelines concerning incident reporting within six hours, maintenance of ICT logs for 180 days, synchronization of system clocks with authorized NTP servers, and the implementation of Cyber Crisis Management Plans. Additionally, REs are required to pre-empanel forensic auditors to ensure immediate response and root cause analysis. To prevent conflicts of interest, vendors currently providing security services such as SOC, red teaming, or annual audits are prohibited from acting as forensic auditors for the same entity. Compliance must be reviewed by the Board and reported to the Authority.
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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण INSURANCE REGULATORY AND DEVELOPMENT AUTHORITY OF INDIA
संदर्भ सं.: आईआरडीएआई/जीए&एचआर/सीआईआर/विविध/49/03/2025 24 मार्च 2025 Ref No: IRDAI/GA&HR/CIR/MISC/49/03/2025 24th Mar, 2025
विषय:- साइबर घटना अथवा संकट हेतु तैयारी के संबंध में Sub: - Regarding Cyber Incident or Crisis Preparedness
प्रति / To, सभी विनियमित संस्थाएँ, आईआईबी और प्रशिक्षण संस्थान All Regulated Entities, IIB and Training Institutes
आज के डिजिटल युग में कोई भी साइबर घटना और / या संकट संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण आशंकाएँ उत्पन्न करता है और इसलिए ग्राहक डेटा सहित सूचना आस्तियों के लिए किसी भी क्षति को रोकने या उसे न्यूनतम करने तथा व्यवसाय की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दर्शाने के लिए तैयार रहना निर्णायक होता है।
इस संबंध में, शीर्षांकित विषय के संबंध में आईआरडीएआई सूचना और साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश, 2023 के विभिन्न उपबंधों की ओर ध्यान आकर्षित किया जाता है:
क) पालिसी सं. 2.10 के अंतर्गत पैरा 3.5 तथा आईआरडीएआई परिपत्र संदर्भ: आईआरडीएआई/जीए&एचआर/सीआईआर/विविध/128/06/2023 दिनांक 13. 06. 2023 अर्थात् विनियमित संस्थाएँ (आरईएस) ऐसी घटनाओं के बारे में किन्हीं साइबर घटनाओं की सूचना उसका पता लगने या जानकारी में लाये जाने से 6 घंटे के अंदर निर्धारित फॉर्मेट में आईआरडीएआई को दें।
ख) पालिसी सं. 2.16 के अंतर्गत पैरा 3.3 अर्थात् निगरानी, लागिंग और निर्धारण पैरा: I. सभी आईसीटी अवसंरचना और अनुप्रयोग लागों का अनुरक्षण और निगरानी 180 दिन की निरंतर अवधि के लिए की जाए; II. संस्था अथवा सुरक्षा क्षेत्र के अंदर सभी संगत सूचना प्रसंस्करण प्रणालियों की घड़ियाँ राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एनआईसी) अथवा राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) अथवा एनटीपी सर्वरों के साथ इन एनटीपी सर्वरों के लिए खोज के लायक नेटवर्क समय प्रोटोकाल (एनटीपी) के साथ समकालिक कर दी जाएँगी।
ग) पालिसी सं. 2.18 के अंतर्गत पैरा 3.3 अर्थात् परिस्थितिगत जागरूकता साइबर आक्रमणों के लिए संस्थाओं की प्रतिक्रिया के भाग के रूप में साइबर संकट प्रबंध योजना (सीसीएमपी) हेतु व्यवस्था करती है;
घ) पालिसी सं. 2.20 के अंतर्गत पैरा 3.4 अर्थात् साइबर आघात-सहनीयता, तीव्र सूचना सुरक्षा घटनाओं के लिए न्यायिक जाँच निष्पादित करने हेतु व्यवस्था करती है। सीआईएसओ का एक कार्य भी ऐसे न्यायिक विशेषज्ञों की संबद्धता के लिए व्यवस्था करता है जो प्रमाणित हैं एवं आवश्यकता होने पर इस कार्य के लिए सक्षम हैं।
ङ) सामान्य दिशानिर्देशों के अंतर्गत पैरा 1.10 ने व्यवस्था की है कि विनियमित संस्थाएँ समय-समय पर सर्ट-इन द्वारा जारी किये गये निर्देशों का पालन करेंगी जिनमें सूचना सुरक्षा प्रथाओं, प्रक्रिया, निवारण, प्रतिक्रिया तथा सुरक्षित और विश्वसनीय इंटरनेट के लिए साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग के संबंध में सर्ट-इन निर्देश दिनांक 28 अप्रैल 2022 के अनुसार सर्ट-इन को घटना की रिपोर्टिंग से संबंधित निर्देश भी शामिल है।
यह पुनः एक बार दोहराया जाता है कि सभी विनियमित संस्थाएँ प्रभावी तैयारी को सुनिश्चित करने के लिए साइबर घटना/संकट के लिए तैयारी संबंधी उपर्युक्त उपबंधों का अवश्य कड़ाई से पालन करें।
उपर्युक्त के अतिरिक्त, सभी विनियमित संस्थाओं से अपेक्षित है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए एक सुपरिभाषित प्रक्रिया / प्रथा स्थापित करें कि न्यायिक संपरीक्षक पहले से ही सूचीबद्ध हों तथा उन्हें अविलंब साइबर घटना/ओं की न्यायिक जाँच संचालित करने और उनका मूल कारण विश्लेषण करने के लिए संबद्ध किया जा सके।
इसके अलावा, यह अवश्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सुरक्षा परिचालन केंद्र (एसओसी), आक्रमण तल निगरानी, रेड टीमिंग, अथवा वार्षिक आश्वासन संपरीक्षण अथवा विनियमित संस्था के किसी भी साइबर सुरक्षा पहलू को संभालनेवाले विक्रेता को घटना के लिए न्यायिक संपरीक्षक के रूप में संबद्ध न किया जाए जिससे हितों के संघर्ष का निवारण किया जा सके।
बीमा मध्यवर्तियों सहित, सभी विनियमित संस्थाओं को सूचित किया जाता है कि वे बोर्ड की आगामी बैठक में उपर्युक्त उपबंधों का अनुपालन प्रस्तुत करें और बैठक का कार्यवृत्त सूचनार्थ प्राधिकरण को प्रस्तुत करें।