IRDAI circular IRDAI/IFRS/CIR/MISC/45/4/2026 · 01 Apr 2026
Official title
भारतीय लेखांकन मानकों (इंड एएस) के कार्यान्वयन संबंधी स्पष्टीकरण / Clarifications on implementation of Indian Accounting Standards (Ind AS)
Summary
Check the official recordThe Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) has issued clarifications regarding the implementation of Indian Accounting Standards (Ind AS) for insurers, effective April 1, 2026. Insurers are required to maintain parallel reporting of financial statements and financial information for two years. The circular outlines requirements for quarterly submissions, limited reviews by chartered accountants, and the reconciliation of financial statements. Insurers seeking a one-year forbearance must apply by April 30, 2026, with a board-approved action plan. The circular also clarifies that the adoption of Ind AS does not alter existing frameworks for actuarial investigations, surplus determination, or solvency assessments. Specific guidance is provided for discounting insurance contract liabilities using government security-based yield curves.
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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण INSURANCE REGULATORY AND DEVELOPMENT AUTHORITY OF INDIA
संदर्भ: आईआरडीएआई/आईएफआरएस/सीआईआर/विविध/45/4/2026 1 अप्रैल, 2026 Ref: IRDAI/IFRS/CIR/MISC/45/4/2026 1st April, 2026
परिपत्र / CIRCULAR
प्रति / To, सभी बीमाकर्ता / All Insurers
विषय: भारतीय लेखांकन मानकों (इंड एएस) के कार्यान्वयन संबंधी स्पष्टीकरण Subject: Clarifications on implementation of Indian Accounting Standards (Ind AS)
1. पृष्ठभूमि
1.1 यह परिपत्र आईआरडीएआई (बीमाकर्ताओं के बीमांकक, वित्त और निवेश कार्य) विनियम, 2024 के विनियम 7 और विनियम 8 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 34 एवं आईआरडीए अधिनियम, 1999 की धारा 14 के उपबंधों के अधीन जारी किया जाता है।
1.2 प्राधिकरण ने बीमाकर्ताओं द्वारा भारतीय लेखांकन मानकों (इंड एएस) के कार्यान्वयन के लिए व्यवस्था करते हुए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमाकर्ताओं के बीमांकक, वित्त और निवेश कार्य) विनियम, 2024 ['विनियम'] में संशोधन अधिसूचित किये हैं जो 1 अप्रैल 2026 से प्रवृत्त होंगे।
1.3 कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होनेवाले कुछ परिचालनगत, लेखांकन और विनियामक पहलुओं के संबंध में स्पष्टता उपलब्ध कराने के लिए तथा हितधारकों से प्राप्त प्रतिसूचना (फीडबैक) के आधार पर समूचे उद्योग में कार्यान्वयन की एकरूपता को सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण इसके द्वारा निम्नलिखित स्पष्टीकरण जारी करता है।
2. भारतीय लेखांकन मानकों (इंड एएस) के अंतर्गत वित्तीय विवरण
2.1 इंड एएस के अंतर्गत तैयार किये गये वित्तीय विवरण उक्त विनियमों की अनुसूची – IIक के अनुसार होंगे तथा यह वित्तीय रिपोर्टिंग का आधार होगा।
2.2 बीमाकर्ता कार्यान्वयन की तारीख से दो वर्ष की अवधि के लिए अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट की जानेवाली अवधि के लिए, वित्तीय विवरणों और वित्तीय सूचना की समांतर रिपोर्टिंग करेंगे।
2.3 वित्तीय सूचना विनियमों की अनुसूची-II के अंतर्गत विनिर्दिष्ट रूप में तैयार की जाएगी।
2.4 वित्तीय विवरण और वित्तीय सूचना उक्त विनियमों में क्रमशः अनुसूची-IIक और अनुसूची- II के अंतर्गत विनिर्दिष्ट रूप में निर्धारित फार्मेटों में तिमाही आधार पर तैयार किये जाएँगे और प्रस्तुत किये जाएँगे। दोनों, वित्तीय विवरण और वित्तीय सूचना का प्रकटीकरण बीमाकर्ता की वेबसाइट पर किया जाएगा।
2.5 वित्तीय विवरण प्रथम तीन तिमाहियों के लिए भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) द्वारा समीक्षा विषयक वचनबद्धताओं (एंगेजमेंट्स) के संबंध में प्रयोज्य मानकों के अनुसार सीमित समीक्षा के अधीन होंगे। वार्षिक वित्तीय विवरण बीमा अधिनियम, 1938 और कंपनी अधिनियम, 2013 के उपबंधों के अनुसार लेखा-परीक्षा के अधीन होंगे।
2.6 सभी चार तिमाहियों के लिए वित्तीय सूचना भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) द्वारा जारी किये गये समीक्षा विषयक वचनबद्धताओं (एंगेजमेंट्स) संबंधी प्रयोज्य मानकों के अनुसार सीमित समीक्षा के अधीन होगी।
2.7 वित्तीय विवरणों के भाग के रूप में, बीमाकर्ता इंड एएस 101 के अनुसार वित्तीय विवरणों और वित्तीय सूचना के बीच उपयुक्त समाधान प्रस्तुत करेंगे।
2.8 वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए, प्रथम तीन तिमाहियों के लिए वित्तीय विवरण और वित्तीय सूचना संबंधित तिमाही की समाप्ति से तीन महीने की अवधि के अंदर प्रस्तुत किये जाएँगे। तथापि, सूचीबद्ध बीमाकर्ताओं के लिए, वित्तीय विवरणों के प्रकटीकरणों हेतु समय-सीमाएँ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के मानदंडों के अनुसार जारी रहेंगी।
3. स्थगन (फारबेअरन्स) – प्रस्तुतीकरण अपेक्षाएँ और निगरानी
3.1 उक्त विनियमों के अंतर्गत इंड एएस वित्तीय विवरण तैयार करने के लिए एक वर्ष के स्थगन की अपेक्षा करनेवाले बीमाकर्ता, बोर्ड-अनुमोदित कार्य योजना के साथ एक आवेदन प्राधिकरण को 30 अप्रैल 2026 या उससे पहले प्रस्तुत करेंगे।
3.2 उक्त आवेदन में मासिक लक्ष्यों (माइलस्टोनों), प्रणाली के लिए समय-सीमाओं और डेटा की तैयारी, बीमांकक और वित्त कार्यों की तैयारी की स्थिति, तथा परिवर्तन की निगरानी के लिए विद्यमान अभिासन ढांचे को विनिर्दिष्ट करनेवाली एक विस्तृत कार्यान्वयन की रूपरेखा शामिल होगी।