IRDAI circular IRDAI/F&I/CIR/INV/28/2/2026 · 12 Feb 2026
Official title
Clarifications on provisions with respect to investment in Alternative Investment Funds(AIFs)
Summary
Check the official recordThe Insurance Regulatory and Development Authority of India has issued clarifications regarding insurer investments in Alternative Investment Funds (AIFs) to broaden investment opportunities while ensuring compliance with Section 27E of the Insurance Act, 1938. Insurers may invest in AIFs with overseas exposure provided they invoke 'Excusal Rights' to ensure their capital is not utilized for investments outside India. The circular mandates specific contractual clauses in Private Placement Memoranda and Contribution Agreements, requires formal declarations from insurers, and establishes a comprehensive operating framework involving negative confirmations, dual-ledger accounting, and multi-tier audit certifications. Additionally, the regulation updates the exposure limit calculation for insurers regarding direct and indirect investments in single AIFs.
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Who is affected
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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण INSURANCE REGULATORY AND DEVELOPMENT AUTHORITY OF INDIA
परिपत्र सं. आईआरडीएआई/एफ&आई/सीआईआर/आईएनवी/28/2/2026 Cir No. IRDAI/F&I/CIR/INV/28/2/2026 दिनांक / Date 12/02/2026
विषय: वैकल्पिक निवेश निधियों (एआईएफएस) में निवेश के संबंध में उपबंधों संबंधी स्पष्टीकरण Sub: Clarifications on provisions with respect to investment in Alternative Investment Funds (AIFs)
i. बीमाकर्ता केवल निधियों की निधि (एफओएफ) में निवेश करेगा जो बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 27ई की अपेक्षा का अनुपालन करती हैं।
ii. बीमाकर्ता धारा 27ई का अनुपालन ऐसी एफओएफ को इस प्रकार की एआईएफएस, जो विदेशी कंपनियों/निधियों में निवेश करती हैं, में निवेश करने से रोकने के लिए एफओएफ द्वारा निष्पादित निधि प्रस्ताव संबंधी दस्तावेजों में एक खंड रखने के द्वारा सुनिश्चित करेगा।
iii. बीमाकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 27ई के उपबंधों का अनुपालन करने के लिए एआईएफएस भारत के बाहर निगमित कंपनियों की प्रतिभूतियों में निवेश नहीं करतीं।
iv. कोई भी बीमाकर्ता ऐसी एआईएफ में निवेश नहीं करेगा, जिसका फिर ऐसी एफओएफ में एक्सपोज़र है, जिसमें बीमाकर्ता ने एक्सपोज़र लिया हो।
क) निम्नलिखित शर्तों का अनुपालन बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्यों संबंधी मास्टर परिपत्र के पैरा 1.5 के उप-पैरा 4(ख), (ग) और 5 की शर्तों को पूरा करेगा:
i. समय-समय पर यथासंशोधित सेबी परिपत्र सेबी/एचओ/एएफडी-1/पीओडी/पी/सीआईआर/2023/053 दिनांक 10 अप्रैल, 2023 के अनुसार ऐसी एआईएफएस में बीमाकर्ताओं के निवेश “छूट अधिकारों” (एक्सक्यूज़ल राइट्स) के साथ हैं तथा बीमाकर्ताओं के निवेशों की प्राप्त राशियों का निवेश ऐसी एआईएफएस के द्वारा भारत के बाहर नहीं किया जाता।
ii. निवेश करते समय, बीमाकर्ता एआईएफ के विदेशी निवेशों में सहभागिता करने के लिए अपनी असमर्थता के आधार के रूप में बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 27ई का उल्लेख करते हुए एक औपचारिक घोषणा अनिवार्यतः प्रस्तुत करेगा।
iii. यह व्यक्त करते हुए निजी स्थानन ज्ञापन में एक खंड होगा कि बीमाकर्ता से प्राप्त पूँजी (किन्हीं प्राप्त राशियों सहित) में भारत के बाहर किसी निवेश के लिए आहरण द्वारा कमी नहीं की जाएगी, उसका उपयोग नहीं किया जाएगा अथवा उसे गिरवी नहीं रखा जाएगा।
iv. एआईएफ के सांविधिक लेखा-परीक्षक यह पुष्टि करेंगे कि बीमाकर्ता की पूँजी का निवेश भारत के बाहर नहीं किया गया है।
v. बीमाकर्ता यह पुष्टि करते हुए एआईएफ से एक अनुपालन प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा कि सभी विदेशी निवेश बीमाकर्ता को प्रकट किये गये हैं, बीमाकर्ता के निवेशों के लिए “छूट अधिकारों” (एक्सक्यूज़ल राइट्स) को विधिसम्मत रूप में लागू किया गया है तथा विदेशी आस्तियों से संबंधित कोई भी लागत बीमाकर्ता के लिए प्रभारित नहीं की गई है।
vi. बीमाकर्ता का समवर्ती लेखा-परीक्षक भारत के बाहर एक्सपोज़र से युक्त एआईएफएस में बीमाकर्ता के निवेश के संबंध में “छूट अधिकारों” (एक्सक्यूज़ल राइट्स) के उपबंधों के अनुपालन को प्रमाणित करेगा।
उपर्युक्त बिन्दु (i) से (vi) तक पर बीमाकर्ताओं के द्वारा उपयुक्त रूप में अपनाया जानेवाला एक संदर्भ का ढाँचा अनुबंध में प्रस्तुत है।
ख) बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्यों पर मास्टर परिपत्र के पैरा 1.5 के उप-पैरा 4(घ) को निम्नलिखित उपबंध से प्रतिस्थापित किया गया है: