IRDAI order · 02 Apr 2026
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संदर्भ : 892/आईआरडीएआई/एचएलटी/जीईएन/आईएसी-एससीओएचआई/26-27
Ref: 892/IRDAI/HLT/GEN/IAC-SCOHI/26-27
दिनांक / Date: 02.04.2026
आदेश / ORDER
विषयः बीमा सलाहकार समिति – स्वास्थ्य बीमा संबंधी उप-समिति का गठन
Re: Constitution of Insurance Advisory Committee - Sub-committee on Health Insurance
1. बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सलाहकार समिति) विनियम, 2000 (“विनियम”) के विनियम 3(4) के अनुसार इसके द्वारा स्वास्थ्य बीमा संबंधी एक उप-समिति का गठन निम्नलिखित संरचना के साथ किया जाता है:
| क्रम सं. | उप-समिति की संरचना | |
|---|---|---|
| 1 | श्री अजय सेठ, अध्यक्ष, आईआरडीएआई | अध्यक्ष |
| 2 | श्री दीपक सूद, सदस्य, गैर-जीवन, आईआरडीएआई | सदस्य |
| 3 | डा. इंदु भूषण, भूतपूर्व सीईओ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) – समिति के अध्यक्ष | सदस्य |
| 4 | सुश्री मोनिका हलान, वित्तीय लेखिका, वक्ता, ग्रंथकार एवं सहायक प्रोफेसर, वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान | सदस्य |
| 5 | श्री संजीव मंत्री, एमडी व सीईओ, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि. | स्थायी आमंत्रिती |
| 6 | श्री कृष्णन रामचंद्रन, एमडी व सीईओ, निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड | स्थायी आमंत्रिती |
| 7 | सचिव – बोर्ड सचिवालय, आईआरडीएआई | संयोजक |
उक्त उप-समिति आवश्यक समझे गये रूप में विशेषज्ञों को सहयोजित/आमंत्रित कर सकती है।
2. उक्त उप-समिति के विचारार्थ विषय निम्नलिखित होंगे:
कवरेज, व्यापन, दावा अनुभव, उत्पाद अभिकल्प, शिकायत निवारण और उपभोक्ता अनुभव सहित, भारत में निजी स्वास्थ्य बीमा के वर्तमान परिदृश्य की समीक्षा।
स्वास्थ्य बीमा में पहुँच, वहनीयता, और कार्यकुशलता के लिए बाधाओं की जाँच करना।
उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं और प्रणाली के कौशल के परिप्रेक्ष्य से, क्षतिपूर्ति, लाभ-आधारित, सामूहिक, और खुदरा उत्पादों सहित, वर्तमान स्वास्थ्य बीमा उत्पादों की उपयुक्तता की समीक्षा।
दावा प्रक्रियाओं, शिकायत निवारण, पारदर्शिता, उत्पाद सुवाह्यता, और पालिसीधारक संरक्षण से संबंधित समस्याओं का निर्धारण करना तथा विश्वास और उपभोक्ता अनुभव में सुधार लाने के लिए उपाय सुझाना।
धनराशि के मूल्य में सुधार लाने तथा प्रशासनिक अकुशलताओं को कम करने में स्वास्थ्य-रक्षा प्रदाता नेटवर्कों, अस्पतालों के शुल्कों, धोखाधड़ी नियंत्रण, तथा डिजिटल प्रणालियों की भूमिका की जाँच करना।
उत्पादों के कीमत-निर्धारण और औचित्य की जाँच करना।
जहाँ उपयुक्त हो वहाँ पूरकता, सुवाह्यता, और अभिरूपता के लिए अवसरों सहित, निजी स्वास्थ्य बीमा और सरकारी स्वास्थ्य बीमा/आश्वासन योजनाओं के बीच परस्पर सक्रियता (इंटर-ऐक्शन) की समीक्षा।
दोनों निजी स्वास्थ्य बीमा और सरकारी योजना डेटा का उपयोग करते हुए एक मास्टर डेटा भंडार (रिपोजिटरी) का निर्माण करने तथा उसका उपयोग निगरानी और सुधारित अभिशासन के लिए करने के लिए सिफारिशें प्रस्तावित करना।
स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से नवोन्मेषण, अधिक व्यापक कवरेज, बेहतर जोखिम समूहन, और सुधारित वित्तीय संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विनियामक, नीतिगत, और परिचालगत उपायों की सिफारिश करना।
भारतीय उद्योग महापरिसंघ (सीआईआई) ने स्वास्थ्य बीमा पारिस्थितिक तंत्र (ईको-सिस्टम) से संबंधित मुख्य समस्याओं की जाँच करने के लिए पाँच कार्य-दलों का गठन किया है, जिनमें बीमाकर्ताओं और प्रदाताओं के लिए एक संयुक्त आचरण संहिता, वाणिज्यिक नियुक्तियों और प्रदाताओं के वर्गीकरण के लिए कार्यपद्धति, राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा विनिमय केन्द्र (एनएचसीएक्स) का अंगीकरण और प्रवर्धन, दावों की प्रवृत्तियों और चिकित्सा स्फीति संबंधी वैश्लेषिकीगत अध्ययन, तथा संपूर्ण स्वास्थ्य कवर से युक्त एक आधारभूत उत्पाद शामिल हैं। उक्त उप-समिति इन कार्य-दलों से उभरनेवाली सिफारिशों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करेगी तथा जहाँ भी उपयुक्त हो, वहाँ उन्हें अपने स्वयं के विश्लेषण और रिपोर्ट के अंतर्गत समन्वित करेगी।
बीमा सलाहकार समिति (आईएसी) द्वारा सौंपा गया कोई अन्य कार्य।
3. उक्त उप-समिति का कार्यकाल इस अधिसूचना की तारीख से एक वर्ष होगा।