रजिस्टर्ड सं० डी० एल०-33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 323]
No. 323]
नई दिल्ली, मंगलवार, सितम्बर 22, 2015/भाद्र 31, 1937
NEW DELHI, TUESDAY, SEPTEMBER 22, 2015/BHADRA 31, 1937
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 16 सितम्बर, 2015
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
(अभ्यर्पण और प्रदत्त मूल्यों का अधिग्रहण) विनियम, 2015
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/15/105/2015.—बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 26 के साथ पठित, बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 114(ए) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, जीवन बीमा पॉलिसियों के अंतर्गत अभ्यर्पण और प्रदत्त मूल्यों के अधिग्रहण के लिए इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात्:-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
- (क) इन विनियमों का संक्षिप्त नाम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (अभ्यर्पण और प्रदत्त मूल्यों का अधिग्रहण) विनियम, 2015 है।
- (ख) उपर्युक्त विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे तथा जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा प्रस्तावित सभी उत्पादों पर लागू होंगे जो इन विनियमों की अधिसूचना की तारीख के बाद प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित होंगे।
- (ग) प्राधिकरण उन उत्पादों को हटाने के लिए अलग अनुदेश जारी कर सकता है जो इन विनियमों के अनुसार नहीं हैं, परंतु वर्तमान में जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा प्रस्ताव किये गये हैं और जो प्राधिकरण द्वारा इन विनियमों की अधिसूचना की तारीख से पहले अनुमोदित हैं।
- (घ) जब तक कि इन विनियमों में प्रावधान हो, तब तक इन विनियमों के लागू होने से पहले जारी की गई बीमा पॉलिसियों को अमान्य न समझा जाए।
2. परिभाषाएँ: इन विनियमों में यदि यह संदर्भ लगते हैं:-
- (क) "अधिनियम" से बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है।
- (ख) "प्राधिकरण" से अभिप्राय भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण जिसका गठन धारा 3 की उपधारा (1) के अंतर्गत बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) द्वारा हुआ है।
- (ग) "मृत्यु पर बीमाकृत राशि" से लाभ की वह समग्र राशि अभिप्रेत है जो प्रत्यावर्ती बोनस और गारंटिड परिवर्धनों, यदि कोई हों, को छोड़कर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमाकृत जीवन की मृत्यु पर देय होने के लिए गारंटित है।
- (घ) "परिपक्वता पर बीमित राशि" से लाभ की वह समग्र राशि अभिप्रेत है जो प्रत्यावर्ती बोनस और गारंटिड परिवर्धनों, यदि कोई हों, को छोड़कर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पॉलिसी की परिपक्वता पर देय होने के लिए गारंटित है।
- (ङ) "अभ्यर्पण" से संपूर्ण पॉलिसी का पूरा प्रत्याहार अथवा समापन अभिप्रेत है।
- (च) "अभ्यर्पण मूल्य" से वह राशि, यदि कोई हो, अभिप्रेत है जो पॉलिसी के नियम व शर्तों के अनुसार अभ्यर्पण की स्थिति में देय होती है।
- (छ) इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरपरिभाषित, परंतु बीमा अधिनियम, 1938 अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) अथवा उनके अधीन बनाये गये किसी भी नियम अथवा विनियम में परिभाषित सभी शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन अधिनियमों अथवा नियमों अथवा विनियमों में क्रमशः उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
3. जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा प्रस्तावित बीमा पॉलिसियों के अंतर्गत अभ्यर्पण मूल्य और प्रदत्त मूल्य
- (क) जीवन बीमाकर्ता द्वारा संबद्ध मंच (लिंक्ड प्लेटफॉर्म) के अंतर्गत प्रस्तावित प्रत्येक पॉलिसी
- (i) समय-समय पर यथासंशोधित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (संबद्ध बीमा उत्पाद) विनियम, 2013 के अनुसार अभ्यर्पण मूल्य उपलब्ध कराएगी।
- (ii) समय-समय पर यथासंशोधित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (संबद्ध बीमा उत्पाद) विनियम, 2013 के अनुसार अभ्यर्पण अथवा समापन से संबंधित सभी उपबंधों का पालन करेगी।
- (ख) जीवन बीमाकर्ता द्वारा असंबद्ध मंच (नॉन-लिंक्ड प्लेटफॉर्म) के अंतर्गत प्रस्तावित प्रत्येक पॉलिसी
- (i) समय-समय पर यथासंशोधित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (असंबद्ध बीमा उत्पाद) विनियम, 2013 के अनुसार अभ्यर्पण मूल्य उपलब्ध कराएगी।
- (ii) समय-समय पर यथासंशोधित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (असंबद्ध बीमा उत्पाद) विनियम, 2013 के अनुसार अभ्यर्पण से संबंधित सभी उपबंधों का पालन करेगी।
- (iii) जिसने अभ्यर्पण मूल्य अधिग्रहीत किया हो, अगले प्रीमियमों का भुगतान न करने के कारण से व्यपगत नहीं होगी, परंतु बीमाकृत प्रदत्त राशि और गारंटिड परिवर्धनों, यदि कोई हों, सहित अवस्थित प्रत्यावर्ती बोनस की सीमा तक प्रचलित रखी जाएगी।
- (iv) 3(ख)(iii) में बीमाकृत प्रदत्त राशि का परिकलन प्राधिकरण द्वारा यथाअनुमोदित और पॉलिसी की शर्तों में निहित फार्मूले के जरिये किया जाएगा।
- (v) उन पॉलिसियों के लिए जिनमें देय प्रीमियम की राशि नियत हो और एकसमान मात्रा की हो, बीमाकृत प्रदत्त राशि (प्रत्यावर्ती बोनस अथवा गारंटीकृत परिवर्धनों, यदि कोई हों, को सम्मिलित करने से पहले)
- मृत्यु पर उस कुल अवधि के अनुपात से कम नहीं होगी जिसके लिए प्रीमियम अदा किये जा चुके हों जिसका संबंध उस अधिकतम अवधि से हो जिसके लिए प्रीमियम मूल रूप से देय थे जिसे मृत्यु पर बीमाकृत राशि द्वारा गुणा किया गया हो।
- परिपक्वता पर उस कुल अवधि के अनुपात से कम नहीं होगी जिसके लिए प्रीमियम अदा किये जा चुके हों जिसका संबंध उस अधिकतम अवधि से हो जिसके लिए प्रीमियम मूल रूप से देय थे जिसे परिपक्वता पर बीमाकृत राशि द्वारा गुणा किया गया हो।
- अदा किये गये उत्तरजीविता (सर्वाइवल) लाभों, यदि कोई हों, के कारण उपयुक्तानुसार परिकलित बीमाकृत प्रदत्त राशि में समायोजित किया जाएगा।
- (vi) उपर्युक्त 3(ख)(v) में यथाउल्लिखित पॉलिसियों को छोड़कर अन्य पॉलिसियों के लिए, प्राधिकरण बीमाकृत प्रदत्त राशि के परकलन के लिए एक अलग फार्मूले का अनुमोदन कर सकता है।
- (vii) उपर्युक्त विनियम 3(ख)(iii) निम्नलिखित के लिए लागू नहीं होगा,
- (क) जहाँ पॉलिसी की बीमाकृत प्रदत्त राशि संलग्न बोनस और गारंटिड परिवर्धनों, यदि कोई हों, को छोड़कर (सूक्ष्म बीमा और स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय को छोड़कर अन्य के अंतर्गत) एक हजार दो सौ पचास रुपये से कम हो।
- (ख) जहाँ पॉलिसी की बीमाकृत प्रदत्त राशि संलग्न बोनस और गारंटिड परिवर्धनों, यदि कोई हों, को छोड़कर (सूक्ष्म बीमा और स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय के अंतर्गत) एक सौ रुपये से कम हो।
- (ग) जहाँ बीमाकृत प्रदत्त राशि दो सौ पचास रुपये प्रति माह से कम की वार्षिकी का रूप लेती हो।