IRDAI circular IRDAI/F&I/CIR/MISC/72/5/2026 · 25 May 2026
Official title
प्रबंधन के प्रमुख व्यक्तियों (केएमपीएस) को पारिश्रमिक / Remuneration to Key Management Persons (KMPs)
Summary
Check the official recordThe IRDAI has amended the Master Circular on Corporate Governance for Insurers, 2024, to mandate specific performance-based criteria for the remuneration of Key Management Persons (KMPs). Insurers must now disclose performance metrics on their websites, including financial soundness, product performance, claim responsiveness, and grievance redressal, alongside three years of historical data. For FY 2026-27, variable pay and incentives for KMPs must be assessed against six mandatory parameters, including adherence to Indian Accounting Standards and the removal of dark patterns in public interactions. These six parameters carry a 50% weightage, with the remaining 50% determined by the Board or Nomination and Remuneration Committee based on the insurer's business plan. Disclosures must be easily accessible and updated on a monthly or quarterly basis.
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संदर्भ: आईआरडीएआई/एफ&आई/सीआईआर/विविध/72/5/2026 Ref: IRDAI/F&I/CIR/MISC/72/5/2026 दिनांक / Date: 25.05.2026
परिपत्र Circular
विषयः प्रबंधन के प्रमुख व्यक्तियों (केएमपीएस) को पारिश्रमिक Subject: Remuneration to Key Management Persons (KMPs)
आईआरडीएआई (बीमाकर्ताओं के लिए कारपोरेट अभिशासन) विनियमन, 2024 (“सीजी विनियमन, 2024”) 21.3.2024 को अधिसूचित किये गये थे। प्राधिकरण ने सामान्य तौर पर उक्त सीजी विनियमन, 2024 के अंतर्गत बीमाकर्ताओं के प्रबंधन में बोर्ड के अभिशासन दायित्वों की रूपरेखा दी है। सभी बीमाकर्ताओं के द्वारा अंगीकरण के लिए विभिन्न परिचालनगत और प्रक्रियागत पहलू उपलब्ध कराने के लिए, बीमाकर्ताओं के लिए कारपोरेट अभिशासन संबंधी एक मास्टर परिपत्र, 2024 (“सीजी संबंधी मास्टर परिपत्र”) संदर्भ: आईआरडीएआई/एफएण्डआई/सीआईआर/विविध/82/5/2024 दिनांक 22.5.2024 के द्वारा जारी किया गया था।
बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 34, आईआरडीए अधिनियम, 1999 की धारा 14 और सीजी विनियमन, 2024 के विनियमन 12 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, सीजी संबंधी मास्टर परिपत्र में निम्नलिखित संशोधन तत्काल प्रभाव के साथ किये जाते हैं:
(क) खंड 8.1 (ज) और (झ) को निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाता है:
“(ज) पैरामीटर जो एमडी और सीईओ तथा सभी अन्य निदेशकों और प्रबंधन के प्रमुख व्यक्तियों के पारिश्रमिक पैकेज (प्रोत्साहनों सहित) का आधार बनते हैं (झ) समूह संस्थाओं और संबंधित पक्षकारों को किये गये भुगतान”।
(ख) खंड 8.2 के बाद, निम्नलिखित खंड निविष्ट किया जाता है:
“8.3 सभी केएमपीएस के पारिश्रमिक के लिए अपनाये गये पैरामीटरों के संबंध में बीमाकर्ताओं के कार्यनिष्पादन का प्रकटीकरण
क) सभी केएमपीएस के पारिश्रमिक के लिए अपनाये गये पैरामीटरों (पैरा 9.2 (घ) देखें) के संबंध में बीमाकर्ता के कार्यनिष्पादन का प्रकटीकरण कंपनी की वेबसाइट पर जनता और पालिसीधारकों के द्वारा प्रामाणिक निर्णय को सुसाध्य बनाने के लिए आगंतुक की टेलीफोन संख्या सहित व्यक्तिगत विवरण की अपेक्षा किये बिना “पहुँचने के लिए आसान” और “समझने के लिए आसान” तरीके से पिछले 3 वर्ष के लिए तदनुरूपी सूचना के साथ किया जाएगा।
ख) विशिष्ट रूप से, इयर टू डेट (वाईटीडी) सूचना निम्नानुसार प्रकट किया जाएगा।
i. वित्तीय सुदृढ़ता (पैरा 9.2(घ)(i) देखें) तिमाही आधार पर, तथा ii. उत्पादों का कार्यनिष्पादन, दावों से संबंधित अनुक्रियाशीलता, शिकायत निवारण, तथा उसके संबंध में सुधार (पैरा 9.2(घ)(ii) से (iv) तक देखें) मासिक आधार पर।”
(ग) खंड 9.2 (ख) और (घ) को निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाता है:
“(ख) बीमाकर्ता की नामांकन और पारिश्रमिक समिति जोखिम प्रबंध समिति के साथ परामर्श करने के बाद पारिश्रमिक नीति के निर्माण के प्रति एक समाकलित दृष्टिकोण रखने के लिए समन्वित प्रयास करेगी। वह सुनिश्चित करेगी कि,
(i) पारिश्रमिक पालिसीधारक परिणामों के साथ सुयोजित किया जाए, (ii) पारिश्रमिक का समायोजन सभी प्रकार के जोखिम के लिए किया जाए, (iii) पारिश्रमिक परिणाम जोखिम परिणामों के साथ संतुलित हों, (iv) पारिश्रमिक भुगतान जोखिम के समय क्षितिज (हारिजन) के प्रति संवेदनशील हों, तथा (v) नकदी और इक्विटी का मिश्रण जोखिम सुयोजन के साथ सुसंगत हों।
(घ) वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए, परिवर्ती वेतन या प्रोत्साहनों के भुगतान के लिए तथा उपर्युक्त 8.3 के अंतर्गत प्रकटीकरण के प्रयोजन के लिए सभी केएमपीएस के कार्यनिष्पादन के निर्धारण हेतु जो न्यूनतम पैरामीटर अनिवार्यतः हिसाब में लिये जायेंगे, वे हैं:
(i) समग्र वित्तीय सुदृढ़ता और उसके सुधार अर्थात्, क. जीवन बीमाकर्ताओं के लिए-