Laws and sections by number or title, due dates, pages, and updates.
No summary yet. Read the gazette notification below or open the official source.
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
सी.जी.-डी.एल.-अ.-23122025-268757 CG-DL-E-23122025-268757
असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 827] नई दिल्ली, सोमवार, दिसम्बर 22, 2025/पौष 1, 1947 No. 827] NEW DELHI, MONDAY, DECEMBER 22, 2025/PAUSHA 1, 1947
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग) अधिसूचना
नई दिल्ली, 12 दिसम्बर, 2025
सा.का.नि. 913(अ).–– केंद्र सरकार, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (2016 का 49) की धारा 100 की उप-धारा (1) और (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, दिव्यांगजन अधिकार नियमावली, 2017 में संशोधन करने हेतु उक्त नियमावली के कतिपय नियमों का मसौदा उक्त धारा की उप-धारा (1) द्वारा यथा-अपेक्षित प्रभावित होने वाले सभी संभावित व्यक्तियों के सूचनाथ एतद्द्वारा प्रकाशित करती है; और एतद्द्वारा सूचित किया जाता है कि जन सामान्य को उपलब्ध कराने हेतु इस अधिसूचना के सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से तीस दिनों के पश्चात उक्त मसौदा नियमों पर विचार किया जाएगा;
यदि कोई आपत्ति या सुझाव हो, तो उसे श्री राम चरण मीणा, अवर सचिव, भारत सरकार, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, कमरा नंबर 11ए, 5वीं मंज़िल, पंडित दीन दयाल अंत्योदय भवन, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली, 110003 को अथवा ईमेल आईडी - rcmeena.79@gov.in. पर भेजा जा सकता है।
उपरोक्त विनिर्दिष्ट अवधि के समाप्त होने से पहले, उक्त मसौदा नियमों के संबंध में किसी भी व्यक्ति से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर केंद्र सरकार द्वारा विचार किया जाएगा।
मसौदा नियम
1. लघु शीर्षक और प्रारंभ — (1) इन नियमों को भवनों और निर्मित वातावरण में गैर-पराक्रम्य सुगम्यता मानकों पर दिव्यांगजन अधिकार (संशोधन) नियमावली, 2025 कहा जाएगा।
(2) ये सरकारी राजपत्र में अपने प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।
2. नियम 15 में उप-नियम का समावेश— दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 में नियम 15 के उप-नियम (1) के खंड (त) के पश्चात निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:
“(थ) भवनों और निर्मित वातावरण में गैर-पराक्रम्य सुगम्यता मानक”
(क) परिभाषा— जब तक कि संदर्भ के होते हुए अन्यथा अपेक्षित न हो— (क) जो अभिव्यक्तियाँ यहाँ प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं, परंतु इस अधिनियम में परिभाषित हैं, उनके वही अर्थ होंगे जो इस अधिनियम में उनके लिए दिए गए हैं; (ख) “गैर-पराक्रम्य मानक” का अर्थ इन नियमों की अधिसूचना के प्रभावी होने की तारीख से प्रभावी होने वाले मानकों से है, जिनका पालन न करने पर इस अधिनियम के अनुसार परिणाम भुगतने के लिए उत्तरदायी होंगे, जिसमें भवन निर्माण की अनुमति या मंजूरी देने से मना करना, पूर्णता/अधिभोग प्रमाण पत्र देने से मना करना, और जुर्माना लगाना शामिल है; (ग) “सार्वजनिक भवन” और “जन सुविधाएं और सेवाएं” का इस अधिनियम की धारा 2(ब) तथा 2(भ) में निर्विष्ट अर्थ होंगे; (घ) “सार्वभौमिक पहुंच” का आशय सभी आयु और क्षमताओं के लोगों के लिए निर्बाध पहुंच से है; (ङ) “सार्वभौमिक डिज़ाइन” का अर्थ एक ऐसे डिज़ाइन से है जिसे सभी लोग, बिना किसी बदलाव की ज़रूरत के, अधिकतम संभव सीमा तक उपयोग कर सकें।
(ख) सामान्य— (1) अनुसूची में निर्विष्ट गैर-परक्राम्य सुगम्यता मानक समय-समय पर यथा-संशोधित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) और भारतीय सडक कांग्रेस (आईआरसी) कोड से प्राप्त हैं, और उन्हें समय-समय पर यथासंशोधित रूप के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से पढ़ा जाएगा। (2) दायरा और प्रयोज्यता— ये मानक इस अधिनियम की धारा 44, 45 और 46 में उल्लिखित सभी भवनों और निर्मित वातावरण पर लागू हैं, इसमें सामूहिक आवास के अंदर अस्थायी अवसंरचनाएं और सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली जगहें शामिल हैं, चाहे वे केंद्र, राज्य या स्थानीय सरकारों या निजी प्रतिष्ठानों के स्वामित्व या नियंत्रण में हों, जहां तक ऐसी जगहें सार्वजनिक भवन हैं अथवा जन सुविधाएं और सेवाएं प्रदान करती हैं। (3) प्रकटन — सार्वजनिक भवनों के मालिक, ऑपरेटर और नियामक अपनी वेबसाइट पर और उस स्थल पर सुगम्यता संबंधी विशेषताएं आसान फॉर्मेट में प्रदर्शित करेंगे। (4) अनुमति और पूर्णता — स्वीकृति देने वाले प्राधिकरण भवन के संबंध में अनुमति और पूर्णता/अधिभोग प्रमाणपत्र तभी जारी करेंगें, जब इन नियमों का पालन किया गया हो और दिव्यांगजनों और सुगम्यता विशेषज्ञों के प्रतिनिधि सहित सक्षम अधिकारी द्वारा इन भवनों का सुगम्यता ऑडिट किया गया हो। (5) प्रवर्तन समय-सीमा — ये मानक उन परियोजनाओं पर तत्काल लागू होंगे जहां पूर्णता प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ है या जिन परियोजनाओं पर अधिभोग नहीं किया गया है। (6) जवाबदेही — अधिसूचना के तीन महीने के अंदर, प्रत्येक ज़िम्मेदार प्रतिष्ठान अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी की नियुक्ति करेंगे और इस संबंध में प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे। (7) आवधिक समीक्षा — केंद्र सरकार एनबीसी/आईआरसी और भारत में सार्वभौमिक सुगम्यता के लिए सुसंगत दिशा-निर्देश और स्थान मानक (2021) की अद्यतन स्थिति को दर्शाने के लिए हर तीन साल में इन मानकों की समीक्षा करेगा।