e-Gazette statutory gazette instrument · 13 Oct 2025
6791 GI/2025 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY संचार मंत्रालय (दूरसंचार जिभाग) अजधसूचना नई ददल्ली, 9 अक् तूबर, 2025 सा.का.जन. 746(अ).––जनम्नजलज…
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Open source page6791 GI/2025 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY संचार मंत्रालय (दूरसंचार जिभाग) अजधसूचना नई ददल्ली, 9 अक् तूबर, 2025 सा.का.जन. 746(अ).––जनम्नजलजखत मसौदा जनयम, जिन्हें केन्रीय सरकार दूरसंचार अजधजनयम, 2023 (2023 का 44 ) की धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (क) के साथ पठित धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (ख) द्वारा प्रदत्त िजियों का प्रयोग करते हुए बनाने का प्रस्ट्ताि करती है, इसके द्वारा प्रभाजित होने की संभािना िाले सभी व्यजियों की सूचना के जलए प्रकाजित दकए िाते हैं और इसके द्वारा नोठिस ददया िाता है दक उि मसौदा जनयमों पर उस तारीख से तीस ददन की अिजध की समाज त के पश् चात जिचार दकया िाएगा जिस तारीख से सरकारी रािपत्र में यथाप्रकाजित इस अजधसूचना की प्रजतयां सिवसाधारण को उपलब् ध कराई िाती हैं; यदद कोई आपजत्त या सुझाि हो तो उसे संयुि सजचि (दूरसंचार), दूरसंचार जिभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार, संचार भिन, 20, अिोक रोड, नई ददल्ली- 110001 को भेिा िा सकता है, केन्रीय सरकार द्वारा उपयुवक् त अिजध की समाजि से पूिव उक् त मसौदा जनयमों के संबंध में दकसी व्यजि से प्रा त आपजत्तयों या सुझािों पर जिचार दकया िाएगा। सं. 662] नई ददल्ली, बृहस्ट् पजतिार, अक् तूबर 9, 2025/आजश् िन 17, 1947 No. 662] NEW DELHI, THURSDAY, OCTOBER 9, 2025/ASVINA 17, 1947 सी.जी.-डी.एल.-अ.-13102025-266903 CG-DL-E-13102025-266903 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] अध्याय 1: प्रारंजभक 1. संजिि नाम और प्रारंभ (1) इन जनयमों को दूरसंचार (दूरसंचार नेििकव के जलए प्राजधकरण) जनयम, 2025 कहा िाएगा। (2) ये सरकारी रािपत्र में प्रकािन की जतजथ से प्रिृत्त होंगे। (3) ये जनयम भारतीय िेलीग्राफ अजधजनयम, 1885 (1885 का 13) या भारतीय िायरलेस िेलीग्राफी अजधजनयम, 1933 (1933 का 17) के अधीन की गई कारविाइयों के जनबंधनों और ितों को अजधभूत नहीं करेंगे, जिनमें भारतीय िेलीग्राफ अजधजनयम, 1885 (1885 का 13) या भारतीय िायरलेस िेलीग्राफी अजधजनयम, 1933 (1933 का 17) के अनुसरण में दकए गए लाइसेंस, पंिीकरण या अनुमजत, चाहे दकसी भी नाम से ज्ञात हों, िारी करना िाजमल है, िो अजधजनयम की धारा 3 की उपधारा (6) के अनुसार िारी रहेगा। 2. पठरभाषाएं (1) इन जनयमों में िब तक संदभव से अन् यथा अपेजित न हो, (क) "एक्सेस नेििकव" का अजभप्रेत दूरसंचार नेििकव से है िो प्राजधकृत इकाई के कोर दूरसंचार नेििकव को उपयोगकताव के उपकरणों या उसके पठरसर से िोड़ता है; (ख) "एक्सेस सेिा" का अजभप्रेत, िायरलाइन या िायरलेस दूरसंचार नेििकव के माध्यम से ध्िजन या गैर-ध्िजन संदेिों के संप्रेषण के जलए उपयोगकतावओं को प्राजधकृत इकाई द्वारा प्रदान की गई दूरसंचार सेिा, और "िायरलाइन एक्सेस सेिा" और "िायरलेस एक्सेस सेिा" िब्दों को तदनुसार समझा िाएगा ; (ग) "एक्सेस स्ट्पेक्रम " से अजभप्रेत है उपयोगकताव िर्मवनल (यूिी) और बेस स्ट्िेिन के बीच ध्िजन या गैर-ध्िजन संदेिों के संप्रेषण के जलए प्राजधकृत इकाई को सौंपा गया स्ट्पेक्रम; (घ) “अजधजनयम” से दूरसंचार अजधजनयम, 2023 (2023 का 44) अजभप्रेत है; (ङ) “ प्राजधकरण का िेत्र ” का अजभप्राय उस भौगोजलक िेत्र से है जिसके जलए दूरसंचार नेििकव स्ट्थाजपत करने, बनाए रखने, संचाजलत करने या जिस्ट्तार करने का प्राजधकरण प्रदान दकया िाता है, िो दो प्रकार का हो सकता है: (i) राष्ट्रीय िेत्र िो अजधजनयम की धारा 55 के अनुसार भारत के िेत्र, भारत के प्रादेजिक िल और भारत के महाद्वीपीय िेल्फ और अनन्य आर्थवक िेत्र को संदर्भवत करता है; और (ii) आंचजलक िेत्र िो इन जनयमों की अनुसूची सी में सूचीबद्ध प्राजधकृत िेत्रों को संदर्भवत करता है; (च) " प्राजधकरण िुल्क " से इन जनयमों में जनर्दवष्ट प्राजधकरण की अिजध के जलए दरों और अंतरालों पर प्राजधकृत इकाई द्वारा देय िुल्क से अजभप्रेत है; [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 3 (छ) "प्राजधकृत एिेंसी" का अथव है: (i) संदेिों के अपरोधन के जलए, दूरसंचार (संदेिों के जिजधपूणव अपरोधन के जलए प्रदिया और रिोपाय) जनयम, 2024 के तहत पठरभाजषत प्राजधकृत एिेंसी; और (ii) दकसी अन्य उद्देश्य के जलए, केंरीय सरकार द्वारा नाजमत एिेंसी; (ि) "बेस स्ट्िेिन" का अथव है एक जनजित रेजडयो रांसमीिर और ठरसीिर स्ट्िेिन, िो उपयोगकताव िर्मवनल और कोर दूरसंचार नेििकव के बीच ललंक प्रदान करता है; (झ) "कॉल" से अजभप्राय दूरसंचार के माध्यम से स्ट्थाजपत कनेक्िन से है िो ध्िजन संचार को सिम बनाता है; (ञ) “मुख्य दूरसंचार सुरिा अजधकारी” से अजभप्राय है दूरसंचार (दूरसंचार साइबर सुरिा) जनयम, 2024 के जनयम 6 के तहत जनयुि मुख्य दूरसंचार सुरिा अजधकारी; (ि) "कंपनी अजधजनयम" का अजभप्राय कंपनी अजधजनयम, 1956 या कंपनी अजधजनयम, 2013 से है, िैसा भी मामला हो; (ि) "जनयंत्रण" में जनदेिकों के बहुमत को जनयुि करने या दकसी व्यजि या व्यजियों द्वारा व्यजिगत रूप से या सामूजहक रूप से, प्रत्यि या अप्रत्यि रूप से, उनके िेयरधाठरता या प्रबंधन अजधकारों या िेयरधारकों के समझौतों या मतदान समझौतों या दकसी अन्य तरीके से कायव करने िाले प्रबंधन या नीजत जनणवयों को जनयंजत्रत करने का अजधकार िाजमल है: बिते दक दकसी प्राजधकृत इकाई के जनदेिक या अजधकारी को केिल ऐसे पद पर आसीन होने के आधार पर प्राजधकृत इकाई पर जनयंत्रण रखने िाला नहीं माना िाएगा; (ड) "कोर दूरसंचार नेििकव" का अजभप्राय है दूरसंचार उपकरणों की एक प्रणाली या प्रणाजलयों की श्ृंखला से है िो दूरसंचार नेििकव के जिजभन्न भागों के बीच दूरसंचार यातायात के प्रिाह को जनयंजत्रत करने और जनयंजत्रत करने के जलए जिम्मेदार है और कनेजक्िजििी, रूटिंग, गजतिीलता प्रबंधन, प्रमाणीकरण, प्राजधकरण, उपयोगकताव प्रबंधन, नीजत प्रबंधन, दूरसंचार नेििकव के एक्सपोिर का प्रबंधन और एजलकेिन प्रोग्राम इंिरफेस (एपीआई) की सर्िवलसंग सजहत कई आिश्यक कायों को संभालता है; (ढ) “प्रभािी जतजथ” से अजभप्रेत है प्राजधकरण में जनर्दवष्ट जतजथ िो प्राजधकरण की प्रभािी जतजथ हो; (ण) "प्रिेि िुल्क" का अजभप्राय दकसी प्राजधकरण के िेत्र में दूरसंचार नेििकव की स्ट्थापना, संचालन, रखरखाि या जिस्ट्तार के जलए प्राजधकरण प्रदान करने के जलए भुगतान की िाने िाली अप्रजतदेय िुल्क की गैर-िापसी योग्य राजि से है; (त) "अनन्य आर्थवक िेत्र " का अजभप्राय प्रादेजिक िल, महाद्वीपीय िेल्फ, अनन्य आर्थवक िेत्र और अन्य समुरी िेत्र अजधजनयम, 1976 की धारा 7 के तहत पहचाने गए िेत्र से है; (थ) "अप्रत्याजित घिना" से अजभप्रेत है जनजधयों की अनुपलब्धता के अलािा दकसी भी कारण या घिना से है, िो ऐसी घिना से प्रभाजित होने का दािा करने िाली प्राजधकृत इकाई द्वारा गैर-जनष्पादन या प्रदिवन में देरी का कारण बनता है, िो हैं: