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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 634] नई दिल्ली, शुक्रवार, सितम्बर 26, 2025/आश्विन 4, 1947 No. 634] NEW DELHI, FRIDAY, SEPTEMBER 26, 2025/ASVINA 4, 1947
विद्युत मंत्रालय अधिसूचना
नई दिल्ली, 25 सितम्बर, 2025
सा.का.नि. 718(अ).—केंद्रीय सरकार, कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 129 की उप-धारा (1) के दूसरे परंतुक के साथ पठित विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का 36) की धारा 176 की उप-धारा (1) और उप-धारा (2) के खंड (य) के अनुसरण में और विद्युत वितरण (लेखा और अतिरिक्त प्रकटीकरण) नियम, 2024, तारीख 10 अक्तूबर, 2024 को और भारत के राजपत्र में तारीख 14 अक्तूबर, 2024 को प्रकाशित, उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किया गया है या करने का लोप किया गया है, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ—(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम विद्युत वितरण (लेखे और अतिरिक्त प्रकटीकरण) नियम, 2025 है।
(2) ये तारीख 01 अप्रैल, 2026 से प्रवृत्त होंगे।
2. लागू होना— ये नियम विनिर्दिष्ट इकाई पर लागू होंगे।
3. परिभाषा—(1) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं, और इन नियमों में परिभाषित नहीं हैं, के वही अर्थ होंगे जो यथास्थिति, उस अधिनियम या कंपनी अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों, में क्रमशः ऐसे शब्दों और पदों को दिए गए हैं।
4. विनियामक आस्थगत खाता शेष या भावी टैरिफ से वसूली योग्य आय की मान्यता।—(1) टैरिफ के माध्यम से वसूली योग्य लाभों या राशियों के लिए, यदि कोई हो, तो विनिर्दिष्ट इकाई लागू लेखांकन मानकों और दर विनियमित क्रियाकलापों के लिए लेखांकन पर मार्गदर्शन के अनुसार अपने वित्तीय टिप्पण विवरण में विनियामक आस्थगत खाता शेष या भविष्य के टैरिफ से वसूली योग्य आय को मान्यता देगी।
(2) विनिर्दिष्ट इकाई वर्तमान सर्वोत्तम अनुमानों को प्रतिबिंबित करने के लिए कम से कम वित्तीय वर्ष के अंत में वसूल, वापसी या समायोजित की जाने वाली अनुमानित राशि की समीक्षा करेगी।
(3) यदि अपेक्षा पिछले अनुमानों से भिन्न है, तो परिवर्तनों को लागू लेखांकन मानकों की सुसंगत अपेक्षाओं के अनुसार लेखांकन अनुमानों में परिवर्तन के रूप में हिसाब में लिया जाना चाहिए।