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The Central Government issues the Energy Conservation Compliance Enforcement Rules 2025 to govern compliance verification and penalty adjudication for specified entities under the Energy Conservation Act 2001. The Bureau of Energy Efficiency verifies compliance, obtains information, and represents cases before the adjudicating officer of the State Commission. Penalties collected under these rules credit to the Central Energy Conservation Fund, and authorities transfer ninety percent to the State Government and ten percent to the Central Government. These rules apply to persons under section 13A, manufacturers or importers under section 14 clause (c), and designated consumers under section 14 clauses (n) and (x). The rules come into force on the date of publication in the Official Gazette.
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
The Gazette of India
सी.जी.-डी.एल.-अ.-29102025-267250 CG-DL-E-29102025-267250
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 704] नई दिल्ली, शुक्रवार, अक्तूबर 24, 2025/कार्तिक 2, 1947 No. 704] NEW DELHI, FRIDAY, OCTOBER 24, 2025/KARTIKA 2, 1947
विद्युत मंत्रालय
अधिसूचना
नई दिल्ली, 22 अक्तूबर, 2025
सा.का.नि. 788(अ).— ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (जिसे इसमें इसके पश्चात् उक्त अधिनियम कहा गया है) को अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टर में ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग और उसके संरक्षण का संप्रवर्तन करने और आज्ञापक करने के लिए अधिनियमित किया गया था और उक्त अधिनियम ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (जिसे इसमें इसके पश्चात् ब्यूरो कहा गया है) को उक्त अधिनियम के अधीन स्थापित एक कानूनी निकाय के रूप में उपबंध करता है;
और उक्त अधिनियम की धारा 26 धारा 13क की उपधारा (1), धारा 14 के खंड (ग) या खंड (घ) या खंड (च) या खंड (झ) या खंड (ट) या खंड (थ), धारा 15 के खंड (ग) या खंड (च) और धारा 52 के उपबंधों का अनुपालन करने में असफलता की दशा में शास्ति का उपबंध करती है;
और उक्त अधिनियम की धारा 27 न्यायनिर्णायक अधिकारी की नियुक्ति का उपबंध करती है और धारा 28 न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा विचार में ली जाने वाली बातों का उपबंध करती है;
और न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा शास्ति अधिरोपित करने की कठिनाइयों से बचने के लिए, ब्यूरो को राज्य आयोग द्वारा नियुक्त न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष अननुपालन विषयों का पता लगाने, सत्यापन करने, निर्धारण करने और प्रस्तुत करने के लिए सशक्त बनाना आवश्यक या समीचीन हो गया है;
और इस आशय की प्रारूप अधिसूचना जनता के परामर्श के लिए तारीख 4 अगस्त, 2025 को भारत के राजपत्र में सम्यक रूप से प्रकाशित की गई थी;
और उक्त प्रारूप अधिसूचना के प्रत्युत्तर में जनता से आक्षेप और सुझाव प्राप्त किए गए हैं और उन पर केन्द्रीय सरकार द्वारा सम्यक रूप से विचार किया गया है।
अतः अब, केंद्रीय सरकार उक्त अधिनियम की धारा 13 की उपधारा 2 के खंड (प), धारा 13 क, धारा 14, धारा 20 की उपधारा (1) के खंड (ग) और धारा 52 के साथ पठित धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (ङ) और (फ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसरण में, ब्यूरो के परामर्श से निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्: –
(2) किसी कमी की स्थिति में, उक्त अधिनियम की धारा 14 के खंड (भ) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा यथाविनिर्दिष्ट मान और मानक ऐसी कमी के विस्तार तक लागू होंगे, और विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का 36) के अधीन किसी राज्य आयोग द्वारा उपबंधित किए गए मानों और मानकों के साथ संचयी रूप से लागू नहीं होंगे:
परंतु नियम 2 में यथानिर्दिष्ट इकाइयों द्वारा लक्ष्यों की प्राप्ति में किसी कमी के लिए शास्ति उक्त अधिनियम के उपबंधों के अनुसार अधिरोपित की जाएगी।
रिपोर्ट करना - ब्यूरो उक्त अधिनियम के उपबंधों के अनुसार नियम 2 में यथानिर्दिष्ट इकाइयों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगा;
सत्यापन - ब्यूरो अनुपालन का सत्यापन करेगा तथा केन्द्रीय सरकार को यथा अपेक्षित रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
अनुपालन की प्रक्रिया - (1) ब्यूरो या अभिहित अभिकरण के माध्यम से उक्त अधिनियम के अधीन अनुपालन का सत्यापन किया जाएगा और अनुपालन में असफलता के लिए उल्लंघन करने वाली इकाइयों को सूचना की तामील की जाएगी।