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4778 GI/2025 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY वाजणज्य और उद्योग मंत्रालय (उद्योग संवधधन और आंतररक व्यापार जवभाग) अजधसूचना नई दिल् ली,16 िुलाई,…
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Open source page4778 GI/2025 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY वाजणज्य और उद्योग मंत्रालय (उद्योग संवधधन और आंतररक व्यापार जवभाग) अजधसूचना नई दिल् ली,16 िुलाई, 2025 सा.का.जन. 475(अ).––पेटेंट जनयम, 2003 में और संिोधन करने के जलए, पेटेंट अजधजनयम, 1970 की धारा 159 की उप-धारा (3) द्वारा प्रित्त िजियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार जनम्नजलजखत मसौिा जनयम बनाने का प्रस्ट्ताव करती है, जिन्हें इनसे प्रभाजवत होने की संभावना वाले सभी व्यजियों की िानकारी के जलए एतिद्वारा प्रकाजित दकया िाता है और यह नोरटस दिया िाता है दक उि मसौिा जनयमों पर, इस अजधसूचना को प्रकाजित करने वाले भारत के रािपत्र की प्रजतयां आम लोगों को उपलब्ध कराए िाने की तारीख से तीस दिनों की अवजध समाप्त होने के बाि, जवचार दकया िाएगा; आपजत्तयां या सुझाव, यदि कोई हों, सजचव, उद्योग संवधधन और आंतररक व्यापार जवभाग, वाजणज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, वाजणज्य भवन, नई दिल्ली- 110001 को या ipr-patents@gov.in पर ई-मेल द्वारा भेि दिए िाएं; जनर्िधष्ट अवजध की समाजप्त से पहले, उि मसौिा जनयमों के संबंध में दकसी भी व्यजि से प्राप्त होने वाली आपजत्तयों और सुझावों पर केंद्र सरकार द्वारा जवचार दकया िाएगा। सं. 432] नई दिल्ली, बृहस्ट् पजतवार, िुलाई 17, 2025/आषाढ़ 26, 1947 No. 432] NEW DELHI, THURSDAY, JULY 17, 2025/ASHADHA 26, 1947 सी.जी.-डी.एल.-अ.-18072025-264785 CG-DL-E-18072025-264785 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] मसौिा जनयम (1) पेटेंट जनयम 2003 (इसके बाि इसे मूल जनयम कहा गया है) में मूल जनयम के जनयम 107क को जनम्नजलजखत से प्रजतस्ट्थाजपत दकया िाएगा अथाधत:–– “– धारा 107क पररभाषाएं – (1) इस अध्याय में, िब तक दक अन्यथा संिभध अपेजित न हो,–– (क) "न्यायजनणधयन अजधकारी" का आिय अजधजनयम की धारा 124क के तहत अजधकृत अजधकारी से है; (ख) "अपीलकताध" का आिय ऐसे व्यजि से है, िो न्यायजनणधयन अजधकारी के आिेि से असंतुष्ट है और अजधजनयम की धारा 124ख की उप-धारा (1) के तहत अपीलीय प्राजधकारी के समि अपील करता है; (ग) "अपीलीय प्राजधकारी" का आिय अजधजनयम की धारा 124ख की उपधारा(1) के तहत अजधकृत अजधकारी से है; (घ) इन जनयमों में प्रयुि उन िब्िों और अजभव्यजियों, िो जनयम में पररभाजषत नहीं है परंतु अजधजनयम में पररभाजषत हैं, का वही अथध होगा िो अजधजनयम में उनके जलए जनधाधररत है।” 2. मूल जनयम में, जनयम 107 ख को जनम्नजलजखत से प्रजतस्ट्थाजपत दकया िाएगा: - 107ख जिकायत — (1) कोई भी व्यजि अजधजनयम की धारा 120, 120 और 123 के तहत दकए गए दकसी उल्लंघन के संबंध में न्यायजनणधयन अजधकारी के समि इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से प्रपत्र-32 में जिकायत ििध करा सकता है। 3. मूल जनयम में, जनयम ‘107 ग’ को जनम्नजलजखत से प्रजतस्ट्थाजपत दकया िाएगा: “-107ग िांच करना – (1) अजधजनयम की धारा 124क के तहत इस न्यायजनणधयन के प्रयोिन के जलए दक क्ट्या दकसी व्यजि ने उि धारा में यथाजवजनर्िधष्ट कोई उल्लंघन दकया है, न्यायजनणधयन अजधकारी ऐसे व्यजि को इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से नोरटस िारी करेगा, जिसमें उसे नोरटस में जवजनर्िधष्ट अवजध के भीतर (िो दक तामील की तारीख से सात दिन की अवजध से कम न हो) कारण बताना अपेजित होगा दक उसके जवरुद्ध िांच क्ट्यों नहीं की िानी चाजहए। (2) उप-जनयम (1) के तहत िारी प्रत्येक नोरटस में दकए गए कजथत उल्लंघन की प्रकृजत का उल्लेख दकया िाएगा। (3) ऐसे व्यजि द्वारा प्रस्ट्तुत दकए गए कारण, यदि कोई हो, पर जवचार करने के बाि, यदि न्यायजनणधयन अजधकारी की राय है दक िांच की िानी चाजहए, तो वह उस व्यजि को व्यजिगत रूप से उपजस्ट्थत होने के जलए या उसके द्वारा जवजधवत रूप से अजधकृत अपने वकील के माध्यम से नोरटस में यथाजनधाधररत तारीख को उपजस्ट्थजत होने हेतु एक नोरटस िारी करेगा। (4) जनयत तारीख को, न्यायजनणधयन अजधकारी, जिसके जवरूद्ध कायधवाही िुरू की गई है उस व्यजि या उसके वकील को, ऐसे व्यजि द्वारा दकए गए उल्लंघन और उस अजधजनयम के उपबंधों, जिसके संबंध में उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, के बारे में स्ट्पष्ट रूप से समझाएगा। (5) तत्पश्चात न्यायजनणधयन अजधकारी द्वारा, उस व्यजि को ऐसे िस्ट्तावेि या साक्ष्य प्रस्ट्तुत करने का अवसर दिया िाएगा, जिन्हें वह िांच के जलए प्रासंजगक समझे और यदि आवश्यक हो, तो सुनवाई को दकसी भावी तारीख तक स्ट्थजगत दकया िा सकता है और ऐसे साक्ष्य लेने में न्यायजनणधयन अजधकारी भारतीय साक्ष्य अजधजनयम 2023 (2023 का 47) के प्रावधानों का पालन करने के जलए बाध्य नहीं होगा। (6) इस जनयम के अधीन िांच करते समय न्यायजनणधयन अजधकारी को, मामले के तथ्यों और पररजस्ट्थजतयों से पररजचत दकसी भी ऐसे व्यजि की उपजस्ट्थजत की आवश्यकता हो जिसे साक्ष्य िेने या कोई िस्ट्तावेि प्रस्ट्तुत करने के जलए, िो न्यायजनणधयन अजधकारी की राय में िांच की जवषय-वस्ट्तु के जलए उपयोगी या संगत हो सकता है, तो वह उसे उपजस्ट्थत होने के जलए प्रवर्तधत कर सकता है। (7) यदि कोई व्यजि इस जनयम के तहत यथाअपेजित रूप में न्यायजनणधयन अजधकारी के समि उपजस्ट्थत होने में जवफल रहता है, उपेिा करता है या उपजस्ट्थत होने से इंकार करता है, तो न्यायजनणधयन अजधकारी ऐसे व्यजि की अनुपजस्ट्थजत में, ऐसा करने के कारणों को ििध करने के बाि, िांच को आगे बढ़ा सकता है। [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 3 (8) यदि, न्यायजनणधयन अजधकारी के समि प्रस्ट्तुत दकए गए साक्ष्य पर जवचार करने पर, न्यायजनणधयन अजधकारी संतुष्ट हो िाता है दक व्यजि ने उल्लंघन दकया है, तो वह, जलजखत आिेि द्वारा, अजधजनयम के तहत, ऐसी िाजस्ट्त लगा सकता है िो वह उजचत समझे। (9) इस जनयम के तहत दकए गए प्रत्येक आिेि में अजधजनयम के उन प्रावधानों को जनर्िधष्ट दकया िाएगा, जिनके संबंध में उल्लंघन दकया गया है और िाजस्ट्त लगाने के कारणों को िाजमल दकया िाएगा। (10) इस जनयम के तहत दकए गए प्रत्येक आिेि पर तारीख अंदकत होगी और न्यायजनणधयन अजधकारी द्वारा हस्ट्तािर दकए िाएंगे। (11) इस जनयम के तहत दकए गए आिेि की एक प्रजत और कायधवाही की अन्य सभी प्रजतयां उस व्यजि को जबना दकसी िुल्क के िी िाएंगी, जिसके जवरुद्ध आिेि पाररत दकया गया है। (12) न्यायजनणधयन अजधकारी, उस पि को जिसके जवरुद्ध जिकायत प्राप्त हुई थी िारी नोरटस की अवजध के तीन महीने की अवजध के भीतर कायधवाही को पूरा करेगा। 4. मूल जनयम में, जनयम ‘107 घ’ को जनम्नजलजखत से प्रजतस्ट्थाजपत दकया िाएगा: “-107घ अपील- (1) कोई भी व्यजि, िो इस जनयम के तहत न्यायजनणधयन अजधकारी के आिेि से असंतुष्ट है, तो वह इस आिेि के िारी होने की तारीख से साठ दिनों के भीतर अपीलीय प्राजधकारी को इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से प्रपत्र-33 में अपील कर सकता है। बिते दक, अपीलीय प्राजधकारी उि अवजध की समाजप्त के बाि अपील पर कायधवाही कर सकता है यदि, वह संतुष्ट है दक व्यजि के पास उि अवजध के भीतर अपील न करने के पयाधप्त कारण मौिूि थे। (2) अपील प्राप्त होने पर अपीलीय प्राजधकारी एक नोरटस िारी करेगा, जिसमें उत्तरिाता से यह अपेिा होगी दक वह उस अवजध के भीतर अपना उत्तर प्रस्ट्तुत करे िैसा दक नोरटस में जनधाधररत दकया गया हो। (3) अपीलीय प्राजधकारी, पिकारों को सुनवाई का उजचत अवसर प्रिान करने के पश्चात, एक संगत आिेि पाररत करेगा, जिसमें स्ट्थगन के आिेि भी िाजमल हैं, और सामान्य रूप से अपील की प्राजप्त की तारीख से छ: माह के भीतर कायधवाही पूरी करेगा। 5. मूल जनयम में, जनयम ‘107ि’ को जनम्नजलजखत से प्रजतस्ट्थाजपत दकया िाएगा: “-107ङ िोनों पिों को तामील - (1) इस अध्याय के तहत सभी पत्राचार केवल इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से दकए िाएंगे। (2) इस प्रकार के संप्रेषण को जसद्ध करने के जलए यह प्रिर्िधत करना पयाधप्त होगा दक पत्राचार सही पते पर दकया गया था और इसे इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से संप्रेजषत दकया गया था। 6. मूल जनयम में, जनयम ‘107झ’ को जनम्नजलजखत से प्रजतस्ट्थाजपत दकया िाएगा: “-107च- समयावजध बढ़ाना - न्यायजनणधयन अजधकारी अथवा अपीलीय प्राजधकारी, जलजखत रूप में ररकाडध दकए िाने वाले कारणों से, िहां जवलंब या इस दििा में कारधवाई न करने के उजचत कारण मौिूि हैं, इस अध्याय में जवजनर्िधष्ट दकसी भी समयावजध को, लागत सजहत या उसके जबना, तब तक बढ़ा सकता है िैसा दक वह उजचत समझे। 7. मूल जनयम में, जनयम ‘107ठ’ को जनम्नजलजखत से प्रजतस्ट्थाजपत दकया िाएगा: “-107छ आिेि और िाजस्ट्त - (1) इस अध्याय के तहत प्रत्येक आिेि पर तारीख डाली िाएगी, उस पर जडजिटल रूप से हस्ट्तािर दकए िाएंगे और सभी पिों को सूजचत दकया िाएगा तथा उसे आजधकाररक वेबसाइट पर भी अपलोड दकया िाएगा। (2) इस अध्याय के तहत िाजस्ट्त के िररए वसूल की गई समस्ट्त राजि भारत की समेदकत जनजध में िमा की िाएगी।” 8. मूल जनयम की िूसरी अनुसूची में, 4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (क) प्रपत्र िीषध के तहत, “प्रपत्र सं 30” के बाि धारा 124क से संबंजधत प्रपत्र 31 से संबंजधत प्रजवजष्टयां और 124 ख से संबंजधत प्रपत्र 32 को हटाया िाएगा। (ख) प्रपत्र िीषध के तहत, “धारा” 31 से संबंजधत प्रपत्र संख्या 31” और उससे संबंजधत प्रजवजष्टयों के बाि, जनम्नजलजखत को अंतर्वधष्ट दकया िाएगा अथाधत:–– “-32 धारा 124क, जनयम 107 ख धारा 120, 122 और 123 से संबंजधत उल्लंघन के मामले में जिकायत 33 धारा 124ख, जनयम 107 घ न्यायजनणधय अजधकारी के आिेि के जवरुद्ध अपील (ग) मूल जनयम की िूसरी अनुसूची में, प्रपत्र 30 के बाि, 124 क से संबंजधत प्रपत्र 31 और 124ख से संबंजधत प्रपत्र 32 को हटाया िाएगा। (घ) मूल जनयम की िूसरी अनुसूची में धारा 31 से संबंजधत प्रपत्र 31 के बाि जनम्नजलजखत प्रपत्रों को अंतर्वधष्ट दकया िाएगा, अथाधत:–– “प्रपत्र 32 पेटेंट अजधजनयम, 1970 (1970 का 39) तथा पेटेंट जनयम, 2003 धारा 120,122 और 123 के उल्लंघन या चूक के मामले में जिकायत [धारा 124क, जनयम, 107 (ख) िेखें] 1. जिकायतकताध का जववरण (अजनवायध): - क. नाम: ख. तामील (सर्वधस) के जलए पता: ग. संपकध सूत्र: घ. ई-मेल (सर्वधस के जलए): 2. जिकायत का जववरण: -