Laws and sections by number or title, due dates, pages, and updates.
The Central Government makes the Boilers (Adjudication and Appeal) Rules, 2025 to govern inquiries, adjudications, and appeals under the Boilers Act, 2025 across all Union territories. Any person or inspector files a complaint in Form-I for violations of sections 27, 28, 30, or 31. The adjudicating officer issues a show cause notice in Form-II providing at least seven days for a reply. The officer completes the proceeding within six months and gives copies of the order free of cost. Aggrieved persons file an appeal in Form-IV to the appellate authority within sixty days with a fee of one thousand rupees. The appellate authority disposes of the appeal within sixty days.
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
सी.जी.-डी.एल.-अ.-30102025-267268 CG-DL-E-30102025-267268
असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 683] | नई दिल्ली, बुधवार, अक्तूबर 22, 2025/ आश्विन 30, 1947 |
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| No. 683] | NEW DELHI, WEDNESDAY, OCTOBER 22, 2025/ ASHVINA 30, 1947 |
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग) अधिसूचना नई दिल्ली, 17 अक्तूबर, 2025
सा.का.नि. 767(अ).– केन्द्रीय सरकार, बॉयलर अधिनियम, 2025 (2025 का 12) की धारा 39 की उप-धारा (2) के खंड (ट) और (ठ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा बॉयलर (जांच, न्यायनिर्णयन और अपील) नियमावली, 2024 को, उन बातों के सिवाय अधिक्रान्त करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किया गया है, या करने का लोप किया गया है, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् :-
1. संक्षिप्त नाम और आरंभ – (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम बॉयलर (न्यायनिर्णयन और अपील) नियम, 2025 है।
(2) ये इनके राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. परिभाषाएं – (1) इन नियमों में, जब तक कि अन्यथा संदर्भ अपेक्षित न हो, -
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं है, वही अर्थ होंगे, जो उनके इस अधिनियम में है।
3. लागू होना – ये नियम सभी संघ राज्य क्षेत्रों में लागू होंगे।
4. शिकायत —निरीक्षक सहित कोई भी व्यक्ति अधिनियम की धारा 27, 28, धारा 30 की उप-धारा (1) और धारा 31 के अधीन किए गए किसी उल्लंघन के संबंध में न्यायनिर्णयन अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम अथवा स्पीड पोस्ट अथवा व्यक्तिगत रूप से प्ररूप-1 में शिकायत अभिलेखित करा सकता है।
5. न्यायनिर्णयन के लिए जांच करना – (1) अधिनियम की धारा 35 के अधीन न्यायनिर्णयन के प्रयोजन के लिए, यदि न्यायनिर्णयन अधिकारी के पास यह विश्वास का कारण है कि किसी व्यक्ति ने उस धारा में विनिर्दिष्ट उपबंधों का उल्लंघन किया है, तो वह ऐसे व्यक्ति को प्ररूप-II में नोटिस जारी करेगा, जिसमें उसे नोटिस में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, जो कि तामील की तारीख से सात दिन की अवधि से कम न हो, कारण बताना अपेक्षित होगा कि उसके विरुद्ध जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए।
(2) उप-नियम (1) के अधीन प्रत्येक नोटिस, किए गए कथित उल्लंघन की प्रकृति को इंगित करेगा।
(3) ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए कारण, यदि कोई हों, पर विचार करने के पश्चात्, यदि न्यायनिर्णयन अधिकारी की राय है कि जांच की जानी चाहिए, तो वह उस व्यक्ति को नोटिस में यथाधारित तारीख को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए या उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत प्रतिनिधि के जरिए उपस्थित होने के लिए एक नोटिस जारी करेगा।
(4) उपस्थित होने की नियत तारीख को, न्यायनिर्णयन अधिकारी, उस व्यक्ति या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि को, जिसके विरुद्ध कार्यवाही प्रारंभ की गई है, यह समझाएगा कि ऐसे व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर कौन-सा उल्लंघन किया गया है।
(5) तत्पश्चात, न्यायनिर्णयन अधिकारी द्वारा, उस व्यक्ति को प्ररूप-III के अधीन ऐसे दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा, जिन्हें वह जांच के लिए सुसंगत समझे और यदि आवश्यक हो, तो सुनवाई को किसी आगामी तारीख तक स्थगित किया जा सकता है।
(6) इस नियम के अधीन जांच करते समय न्यायनिर्णयन अधिकारी, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी ऐसे व्यक्ति से साक्ष्य लेने या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकता है तथा उसे बुला सकता है, जो न्यायनिर्णयन अधिकारी की राय में जांच की विषय-वस्तु के लिए उपयोगी या संगत हो सकता है।