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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
सी.जी.-डी.एल.-अ.-27102025-267177 CG-DL-E-27102025-267177
असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 706] नई दिल्ली, सोमवार, अक्टूबर 27, 2025/कार्तिक 5, 1947 No. 706] NEW DELHI, MONDAY, OCTOBER 27, 2025/KARTIKA 5, 1947
वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवाएं विभाग) अधिसूचना नई दिल्ली, 27 अक्टूबर, 2025
सा.का.नि. 790(अ).––केंद्रीय सरकार, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45यक, धारा 45यग, धारा 45यड. और धारा 56 के साथ पठित धारा 52 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श करने के पश्चात् और बैंककारी कंपनी (नामनिर्देशन) नियम 1985 और सहकारी बैंक (नामनिर्देशन) नियम 1985 को, उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किया गया है या करने का लोप किया गया है, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.– (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम बैंककारी कंपनी (नामनिर्देशन) नियम 2025 है।
(2) ये तारीख 1 नवंबर, 2025 को प्रवृत्त होंगे।
2. निक्षेपों की बाबत नामनिर्देशन. – (1) एक या अधिक व्यक्तियों के नाम में किसी बैंककारी कंपनी द्वारा धारित किसी निक्षेप की बाबत, यथास्थिति, निक्षेपक या सभी निक्षेपकों द्वारा मिलकर किया जाने वाला नामनिर्देशन, एक या अधिक व्यक्तियों के पक्ष में किंतु चार से अनधिक अनुक्रमश: या समसामयिक रुप से किया जा सकेगा।
(2) नामनिर्देशन निम्नलिखित में से किसी एक में किया जाएगा, -
(क) इन नियमों से उपाबद्ध नामनिर्देशन प्ररुप; या
(ख) इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मोड (“ई-नामनिर्देशन”) यदि बैंककारी कंपनी ने ऐसी सुविधा उपलब्ध कराई हो।
(3) बैंककारी कंपनी ई-नामनिर्देशन की अनुज्ञा तभी दे सकेगी, यदि, वह –
(क) यथास्थिति, निक्षेपक या सभी निक्षेपकों को, चार से अनधिक एक या अधिक व्यक्तियों को नामनिर्देशित करने के लिए, अनुक्रमश: या समसामयिक रुप से सक्षम बनाता है;
(ख) नामनिर्देशन प्ररुप या ई-नामनिर्देशन में विहित सभी आवश्यक ब्यौरे अभिप्राप्त करता है;
(ग) यह सुनिश्चित करता है कि नामनिर्देशन निक्षेपक के प्रत्यय पत्र को अधिप्रमाणित, विधिमान्य और पुष्टि करता है; और
(घ) इसमें किए गए सभी नामनिर्देशन के लिए निक्षेपकों को सतर्क करने की प्रणाली है।
(4) नामनिर्देशन के अधिप्रमाणन की पद्धतियों में निम्नलिखित सम्मलित होंगे –
(क) इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर;
(ख) इलेक्ट्रॉनिक अधिप्रमाणन तकनीक जो विश्वसनीय हो और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हो; और
(ग) इंटरनेट या मोबाइल बैंककारी अनुप्रयोग:
परंतु अधिप्रमाणन की (क) और ख पद्धतियों की दशा में, एकल कारक अधिप्रमाणन जो नामनिर्देशन करने वाले निक्षेपक के प्रत्यय पत्र को विधिमान्य और पुष्टि करता है, पर्याप्त होगा और पद्धति (ग) की दशा में, न्यूनतम दो कारक अधिप्रमाणन जो नामनिर्देशन करने वाले निक्षेपक के प्रत्यय पत्र को विधिमान्य या पुष्टि करता है, अनिवार्य होगा।
(5) नामनिर्देशन केवल उस निक्षेप की बाबत किया जा सकेगा जो निक्षेपक की व्यक्तिगत हैसियत में धारित हो न कि किसी पद के धारक के रुप में किसी प्रतिनिधि की हैसियत में या अन्यथा।
(6) जहां नामनिर्देशिती अवयस्क है, वहां यथास्थिति, निक्षेपक या सभी निक्षेपक मिलकर, नामनिर्देशन करते समय, किसी अन्य व्यक्ति को जो अवयस्क न हो, यथास्थिति, निक्षेपक या सभी निक्षेपकों की मृत्यु की दशा में, नामनिर्देशिती की अवयस्कता के दौरान नामनिर्देशिती की ओर से निक्षेप की रकम प्राप्त करने के लिए नियुक्त कर सकेगा या सकेंगे।
(7) किसी अवयस्क के नाम में किए गए निक्षेप की दशा में, नामनिर्देशन किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाएगा जो अवयस्क की ओर से कार्य करने के लिए विधिपूर्वक हकदार हो।
(8) निक्षेपक या सभी निक्षेपकों द्वारा मिलकर किया जाने वाला पूर्ववर्ती नामनिर्देशन या ई-नामनिर्देशन में फेरफार या रद्दकरण पश्चातवर्ती नामनिर्देशन या ई-नामनिर्देशन के माध्यम से किया जाएगा।