e-Gazette statutory gazette instrument · 07 Nov 2025
7324 GI/2025 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY वाजणज्य एवं उद्योग मंत्रालय (उद्योग संवधधन और आंतररक व्यापार जवभाग) अजधसूचना नई दिल्ली, 31 अक्तू…
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Open source page7324 GI/2025 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY वाजणज्य एवं उद्योग मंत्रालय (उद्योग संवधधन और आंतररक व्यापार जवभाग) अजधसूचना नई दिल्ली, 31 अक्तूबर, 2025 सा.का.जन. 813(अ).–– व्यापार जचन्ह जनयम, 2017 में आगे और संिोधन करने के जलए, व्यापार जचन्ह अजधजनयम, 1999 की धारा 157 की उप-धारा (2) द्वारा प्रित्त िजियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार जनम्नजलजखत मसौिा जनयम बनाने का प्रस्ट्ताव करती है, जिन्हें इनसे प्रभाजवत होने की संभावना वाले सभी व्यजियों की िानकारी के जलए एतिद्वारा प्रकाजित दकया िाता है और यह नोरिस दिया िाता है दक उि मसौिा जनयमों पर, इस अजधसूचना को प्रकाजित करने वाले भारत के रािपत्र की प्रजतयां िनसामान्य को उपलब्ध कराए िाने की तारीख से तीस दिनों की अवजध के समाप्त होने के बाि जवचार दकया िाएगा; आपजत्तयां या सुझाव, यदि कोई हों, सजचव, उद्योग संवधधन और आंतररक व्यापार जवभाग, वाजणज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, वाजणज्य भवन, नई दिल्ली- 110011 को या ipr4-dipp@gov.in पर ई-मेल द्वारा भेि दिए िाएं। जनर्िधष्ट अवजध की समाजप्त से पहले, उि मसौिा जनयमों के संबंध में दकसी भी व्यजि से प्राप्त होने वाली आपजत्तयों और सुझावों पर केंद्र सरकार द्वारा जवचार दकया िाएगा। मसौिा जनयम 1. व्यापार जचन्ह जनयम 2017 (इसके बाि इसे मूल जनयम कहा गया है) में, जनयम 2(1)(ङ) के पश्चात् जनम्नजलजखत को अंतर्वधष्ट दकया िाएगा, अर्ाधत्: - “- 2(1)(ङक) “आचार संजहता” का आिय उस आचार संजहता से है, जिसे रजिस्ट्रार व्यापार जचन्ह द्वारा जनयम 143(2) के अनुसार समय-समय पर पांचवी अनुसूची और िनधल में प्रकाजित दकया िा सकता है। सं. 727] नई दिल्ली, सोमवार, नवम् बर 3, 2025/कार्तधक 12, 1947 No. 727] NEW DELHI, MONDAY, NOVEMBER 3, 2025/KARTIKA 12, 1947 सी.जी.-डी.एल.-अ.-07112025-267443 CG-DL-E-07112025-267443 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] 2. मूल जनयम में, जनयम 2(1)(छ) के पश्चात् जनम्नजलजखत अंतर्वधष्ट दकया िाएगा, अर्ाधत्: - “2(1)(छक).“अनुिासन सजमजत” का आिय जनयम 151घ के अनुसार गरित सजमजत से है।” 3. मूल जनयम में, जनयम 2(ड) के पश्चात्, जनम्नजलजखत को अंतर्वधष्ट दकया िाएगा, अर्ाधत्:- ‘‘2(डक) जनयम 151ग के प्रयोिनों के जलए “अजधकारी” का आिय उस अजधकारी से है, जिसे व्यापार जचन्ह अजधजनयम, 1999 की धारा 3 के अंतगधत रजिस्ट्रार व्यापार जचन्ह द्वारा प्राजधकृत दकया गया है।” 4. मूल जनयम में, धारा 151 की उप-धारा (2) के खण्ड (ख) का लोप दकया िाएगा। 5. मूल जनयम में, जनयम 151 के पश्चात्, जनम्नजलजखत को अंतर्वधष्ट दकया िाएगा, अर्ाधत्:- “151क.- व्यापार जचन्ह एिेंि/अिॉनी द्वारा किाचार: (1) रजिस्ट्रार और/या व्यापार जचन्ह अजधजनयम 1999 की धारा 3 के प्रावधान के अनुसार जनयुि दकसी अन्य अजधकारी के समक्ष उपजस्ट्र्त होने और कायध करने वाला प्रत्येक व्यापार जचन्ह एिेंि या अिॉनी आचार संजहता का पालन करेगा। (2) रजिस्ट्रार आचार संजहता से संबंजधत अद्यतन िानकाररयां आजधकाररक िनधल में प्रकाजित करेगा। (3) यदि व्यापार जचन्ह एिेंि/अिॉनी पांचवी अनुसूची और िनधल में यर्ा उजल्लजखत जनधाधररत आचार संजहता का उल्लंघन करता है, तो वह किाचार का िोषी माना िाएगा।” 6. मूल जनयम में, जनयम 151ख के बाि, जनम्नजलजखत को अंतर्वधष्ट दकया िाएगा, अर्ाधत्: - “151ख. रजिस्ट्रार को किाचार की जिकायत: (1) कोई भी पीज़ित व्यजि, उि जनयम की पांचवी अनुसूची के अंतगधत उजल्लजखत ऐसे किाचार की िानकारी होने की जतजर् से छह महीने के भीतर इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से रजिस्ट्रार को प्रपत्र-िीएम-डीपी में जिकायत ििध करा सकता है। 7. मूल जनयम में, जनयम 151ख के बाि जनम्नजलजखत को अंतर्वधष्ट दकया िाएगा, अर्ाधत्: - “151ग. जनयम 151ख के अंतगधत प्राप्त जिकायत से जनपिने की प्रदिया: (1) जनयम 151ख के अंतगधत जिकायत प्राप्त होने पर, रजिस्ट्रार, मामले पर जवचार करने के जलए जिकायत को अनुिासन सजमजत को भेिेगा। अनुिासन सजमजत की अनुिंसा पर जवचार करने के बाि, यदि रजिस्ट्रार की राय है दक िांच होनी चाजहए, तो वह जिकायत के सार् एक नोरिस िारी करेगा, जिसमें ऐसे एिेंि/अिॉनी को नोरिस प्राप्त होने के एक महीने के भीतर समर्धक साक्ष्य और िस्ट्तावेिों के सार् उत्तर प्रस्ट्तुत करने के जलए कहा िाएगा। बिते दक यदि अनुिासन सजमजत को जिकायत में कोई मेररि नहीं जमलती है, तो वह रजिस्ट्रार को इस आिय की ररपोिध प्रस्ट्तुत करेगी तर्ा जिकायत को खाररि करने की अनुिंसा करेगी। (2). ऐसे एिेंि/अिॉनी से उत्तर प्राप्त होने पर, रजिस्ट्रार, मामले में जनणधय हेतु इस उत्तर को अनुिासन सजमजत को भेिेगा। यदि धारा 151ग(1) के तहत दिए गए जनिेिानुसार उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो रजिस्ट्रार, अनुिासन सजमजत को ररकाडध पर उपलब्ध साक्ष्यों पर जवचार करते हुए मामले में एकपक्षीय जनणधय करने का जनिेि िेगा। अनुिासन सजमजत की अनुिंसा पर जवचार करने के बाि, रजिस्ट्रार जलजखत रूप में यर्ोजचत आिेि पाररत करेगा। (3). रजिस्ट्रार, स्ट्वप्रेरणा से, अनुिासन सजमजत को दकसी भी व्यापार जचन्ह एिेंि/अिॉनी के जवरुद्ध कायधवाही आरंभ करने का जनिेि िे सकता है, यदि पयाधप्त साक्ष्यों के आधार पर, उसकी राय में ऐसी िांच आवश्यक है। (4). अनुिासन सजमजत अपनी कायधवाही, पीिासीन अजधकारी द्वारा उजचत समझे िाने पर, भौजतक, वचुधअल या हाइजिड मोड में कर सकती है। (5). अनुिासन सजमजत, पीिासीन अजधकारी द्वारा उजचत समझे िाने पर, पक्षकारों को अभ्यावेिन प्रस्ट्तुत करने की अनुमजत िे सकती है। (6). यदि ऐसा व्यापार जचन्ह एिेंि/अिॉनी भरोसेमंि और सत्यापन योग्य साक्ष्य के सार् यह जनवेिन करता है दक उसने सद्भावनापूवधक कायध दकया है, या अपने कायों में उजचत सावधानी बरती है, तो यह माना िा सकता है दक वह व्यावसाजयक किाचार का िोषी नहीं है। (7). यदि व्यापार जचन्ह एिेंि/अिॉनी या जिकायतकताध सुनवाई के जलए जनधाधररत तारीख को अनुिासन सजमजत के समक्ष उपजस्ट्र्त होने में जवफल रहता है, उपेक्षा करता है या उपजस्ट्र्त होने से इनकार करता है, तो सजमजत ऐसा करने के कारणों को ििध करने के बाि, ऐसे व्यजि की अनुपजस्ट्र्जत में, अपनी िांच आगे बढा सकती है।