रजिस्टर्ड सं० डी०-33004/99
REGD NO. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 35] | नई दिल्ली, बुधवार, फरवरी 13, 2013/माघ 24, 1934 |
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| No. 35] | NEW DELHI, WEDNESDAY, FEBRUARY 13, 2013/MAGHA 24, 1934 |
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 7 फरवरी, 2013
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (साधारण बीमा - पुनर्बीमा) विनियम, 2013
एफ. सं. बी.वि.वि.प्रा./आईजी/5/63/2013.—बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 114क तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 14 और धारा 26 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, एतद्द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ :
- (1) ये विनियम बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (साधारण बीमा - पुनर्बीमा) विनियम, 2013 कहलाएँगे।
- (2) ये विनियम बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (साधारण बीमा - पुनर्बीमा) विनियम, 2000 को प्रतिस्थापित करेंगे।
- (3) ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनकी अधिसूचना की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. परिभाषाएँ :
इन विनियमों में जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो :
- क) 'अधिनियम' से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) अभिप्रेत है;
- ख) 'प्राधिकरण' से उक्त अधिनियम की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
- ग) 'अर्पणकर्ता' से वह बीमाकर्ता अभिप्रेत है जो पुनर्बीमा संविदा करता है अथवा वह पुनर्बीमाकर्ता है जो पुनः अर्पण संविदा करता है;
- घ) 'अर्पण' से बीमाकर्ता द्वारा, जिससे मूल बीमाकृत व्यक्ति को पॉलिसी जारी की गई है, पुनर्बीमाकर्ता को दिया गया बीमे का अंश अथवा पुनर्बीमाकर्ता द्वारा पुनःअर्पणकर्ता को दिया गया संविदा का अंश अभिप्रेत है;
- ङ) 'कवर नोट' से पुनर्बीमाकर्ता अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत पुनर्बीमा दलाल के द्वारा जारी किया गया वह लिखित दस्तावेज अभिप्रेत है जिसमें संविदा की शर्तों का विवरण और प्रत्येक पुनर्बीमाकर्ता के पास रखी गई जोखिम के प्रतिशत का विवरण दिया गया है। 'जोखिम पुनर्बीमा' से ऐसी एकल पॉलिसी का आंशिक रूप से अथवा पूर्ण रूप से पुनर्बीमा अभिप्रेत है जिसमें अभ्यर्पण के लिए अलग से बातचीत की गई है तथा पुनर्बीमाकर्ता और बीमाकर्ता के पास प्रत्येक व्यष्टि निवेदन को स्वीकार करने अथवा अस्वीकार करने का विकल्प है;
- च) 'भारतीय पुनर्बीमाकर्ता' से वह/वे बीमाकर्ता अभिप्रेत है/हैं जो केवल पुनर्बीमा व्यवसाय करता है/करते हैं तथा जिसे/जिन्हें इस उद्देश्य के लिए प्राधिकरण द्वारा बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 101क के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है।
- छ) 'पूल' से बीमा अथवा पुनर्बीमा का कोई ऐसा संयुक्त हामीदारी कार्य अभिप्रेत है जिसमें सहभागी बीमाकर्ता अथवा पुनर्बीमाकर्ता द्वारा व्यवसाय में एक पुर्विनर्धारित और नियत हित धारण किया करता है / करते हैं;
- ज) 'पुनः अर्पण' से वह लेनदेन अभिप्रेत है जिसके द्वारा एक पुनर्बीमाकर्ता किसी अन्य बीमाकर्ता अथवा पुनर्बीमाकर्ता को अपने द्वारा पूर्व में धारित सारा पुनर्बीमा अथवा उसका अंश अर्पणarit करता है;
- झ) 'प्रतिधारण' से जोखिम वह अंश अभिप्रेत है जिसे बीमाकर्ता अपनी ओर से ग्रहण करता है;
- ञ) 'पुनःबीमा संविदा' से सभी पक्षों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी वह दस्तावेज अभिप्रेत है जो पुनर्बीमा संविदा की सभी शर्तों और अन्य अनुबंधों का एक संपूर्ण, सही और निश्चित अभिलेख उपलब्ध कराता है।
- ट) 'संधि' से बीमाकर्ता और पुनर्बीमाकर्ता के बीच पुनर्बीमा की वह व्यवस्था अभिप्रेत है, जो सामान्यतः एक वर्ष अथवा उससे अधिक अवधि के लिए होती है तथा जो व्यवसाय के किसी वर्ग अथवा इन्हीं वर्गों के पुनर्बीमा के लिए लागू तकनीकी विवरण और वित्तीय शर्तें निर्धारित करती है;
- ठ) इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिवاشित किंतु बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अथवा साधारण बीमा कारोबार राष्ट्रीयकरण अधिनियम, 1972 (1972 का 57) अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) और उसके अंतर्गत बनाये गये नियमों में परिभाषित सभी शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ क्रमशः वही होंगे जो यथास्थिति उन अधिनियमों अथवा नियमों में उनके निर्देश किए गए हैं।