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The Insurance Regulatory and Development Authority issues the Insurance Regulatory and Development Authority (Registration of Indian Insurance Companies) (Fourth Amendment) Regulations, 2013 to revise definitions and the calculation method for foreign equity capital holdings. Every registered insurer submits a statement to the Authority within 15 days of the end of every quarter to indicate changes exceeding 1% of the issued capital in the holding of the shares in his company and those of the promoter. The regulations come into force on the date of publication in the Official Gazette.
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रजिस्ट्री सं० डी० ३३००४/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 38] नई दिल्ली, बुधवार, फरवरी 13, 2013/माघ 24, 1934 No. 38] NEW DELHI, WEDNESDAY, FEBRUARY 13, 2013/MAGHA 24, 1934
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 7 फरवरी, 2013
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
(भारतीय बीमा कंपनियों का पंजीकरण) (चौथा संशोधन) विनियम, 2013
फा. सं. बी.वि.वि.प्रा./आईजी/3/61/2013.—बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 4) की धारा 14 और धारा 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114अ द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद एतद्द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
2. परिभाषाए विनियम 2(छ) निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा :- (छ) ''भारतीय प्रवर्तक'' से अभिप्रेत है---
2
THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY
[PART III—SEC. 4]
विनियम 11 निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा :-
11. विदेशी कंपनी द्वारा धारित छब्बीस प्रतिशत ईक्विटी पूँजी के परिकलन की विधि :-
स्पष्टीकरण : ऊपर उल्लिखित परिकलन के प्रयोजनों के लिए, जिस सीमा तक विदेशी संस्थागत निवेशकों और भारतीय म्युचुअल फंडों के निवेश भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा अपने नियमों, विनियमों अथवा समय-समय पर जारी किये गये दिशा-निर्देशों के अंतर्गत निर्धारित अनुमतित सीमाओं के भीतर हैं, उस सीमा तक आवेदक के विदेशी प्रवर्तकों और उनकी सहायक संस्थाओं और नामितियों, एवं भारतीय म्युचुअल फंडों को छोड़कर, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय प्रवर्तक में ईक्विटी की धारिताओ को हिसाब में लेने की आवश्यकता नहीं है।