Laws and sections by number or title, due dates, pages, and updates.
The Insurance Regulatory and Development Authority issues regulations for micro-insurance products to promote insurance access for marginalized groups. Life and non-life insurers offer approved micro-insurance products through designated micro-insurance agents. These agents include non-government organizations, self-help groups, and micro-finance institutions. Insurers execute an agreement with agents, provide training, and pay commissions within set limits. Insurers file product designs under the file and use procedure. Insurers issue contracts in vernacular languages. Insurers maintain compliance with rural and social sector obligations. The regulations specify coverage limits, terms, and entry ages for general and life micro-insurance products in two schedules.
What you must do
Key dates
Who is affected
Thresholds
If you do not comply
Ask about this regulation
रजिस्ट्री सं० डीएल्--33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 147] No. 147]
नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, नवम्बर 10, 2005/कार्तिक 19, 1927 NEW DELHI, THURSDAY, NOVEMBER 10, 2005/KARTIKA 19, 1927
अधिसूचना हैदराबाद, 10 नवम्बर, 2005
फा. सं. आईआरडीए/एमआई/3/2005.— प्राधिकरण, बीमा अधिनियम, प्राधिकरण, बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 26 और 114 क द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999 (1999 की 41) प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति से सलाह लेते हुए, यहाँ निम्नलिखित विनियम बनाये हैं, अर्थात् :-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ - (1) इन विनियमों का संक्षिप्त नाम बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (सूक्ष्म बीमा) विनियम 2005 है।
(2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. परिभाषाएं - इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
इस प्रावधान के साथ कि यदि तीन से अधिक संतान की संख्या हो तो 'उपरोक्त' के अन्तर्गत पहली तीन संतानों को ही परिवार संगठन के लिए शामिल किया जाएगा।
आगे ऐसा प्रावधान है कि एक बीमाकर्ता, पूर्वोक्त मापदंड जो परिवार के संगठन के लिए शामिल किये गये हैं, आवश्यकता अनुसार व्यक्ति तथा समूह का निर्धारण करते हैं।
स्पष्टीकरण :- इन विनियमों के प्रयोजन के लिए
(I) स्वयं-सेवी संस्था (एनजीओ) से अभिप्रायः एक गैर लाभ कारी संस्था से है जो किसी भी विधि के अन्तर्गत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत हो, तथा कम से कम तीन वर्ष से सीमांत समूह के साथ कार्यरत हो, तथा उसका प्रमाणपत्र कार्य-निष्पादन रिकार्ड रहा हो, स्पष्ट रूप से लक्ष्य, उद्देश्य, पारदर्शिता तथा जवाबदेही जो ज्ञापन, नियम, उप नियम अथवा विनियम, जैसा की मामला का हो का प्रदर्शन प्रतिबद्ध लोगो द्वारा किया जाना चाहिये।
(II) स्वयं मदद समूह (एसएचजी) से अभिप्रायः एक अनोपचारिक समूह से है जिसमें दस से बीस अथवा अधिक व्यक्ति हो तथा वह सीमांत समूह के साथ कम से कम तीन वर्ष से कार्यरत हो, उसका प्रमाणपत्र कार्य-निष्पादन रिकार्ड रहा हो, स्पष्ट रूप से लक्ष्य, उद्देश्य, पारदर्शिता तथा जवाबदेही जो ज्ञापन, नियम, उप नियम अथवा विनियम, जैसा की मामला का हो का प्रदर्शन प्रतिबद्ध लोगो द्वारा किया जाना चाहिये।
(III) सूक्ष्म वित्त संस्थान से अभिप्राय ऐसे संस्थानों अथवा इकाई या संघ से है जो किसी भी विधि के अन्तर्गत संस्था अथवा सहकारी संस्था के रूप में पंजीकृत हुए हों तथा अंतर्सम्बन्ध के रूप में अपने सदस्यों के लिए ऋण/वित्त की व्यवस्था करते हों।