रजिस्ट्री सं० डी० एल०–33004/99
REGD. NO. D. L.–33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 465] | नई दिल्ली, बुधवार, दिसम्बर 5, 2018/अग्रहायण 14, 1940 |
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| No. 465] | NEW DELHI, WEDNESDAY, DECEMBER 5, 2018/AGRAHAYANA 14, 1940 |
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 30 नवम्बर, 2018
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पुनर्बीमा) विनियम, 2018
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्र./विनियम/4/151/2018.—बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धाराओं 14 और 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 114ए द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है—
1) संक्षिप्त नाम, प्रारंभ और प्रयोज्यता:
- ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पुनर्बीमा) विनियम, 2018 के नाम से जाने जाएँगे।
- ये विनियम 1 जनवरी 2019 से प्रवृत्त होंगे।
- ये विनियम अधिनियम की धारा 2 (9) के अंतर्गत यथापरिभाषित बीमाकर्ताओं, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र (आईएफएससी) बीमा कार्यालय (आईआईओ) और अधिनियम की धारा 118 (सी) के अंतर्गत यथापरिभाषित छूट-प्राप्त बीमाकर्ताओं पर लागू होंगे।
2) परिभाषाएँ:
इन विनियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न होः
- ‘अधिनियम’ से बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है;
- ‘वैकल्स्पिक जोखिम अंतरण’, जो इन विनियमों में इसके बाद प्रथम अक्षर से ‘एआरटी’ कहलाएंगे, (जो जीवन व्यवसाय में ‘वित्तीय पुनर्बीमा’ भी कहलाएंगे) से गैर-परंपरागत संरचित पुनर्बीमा समाधान अभिप्रेत हैं, जो किसी बीमाकर्ता अथवा पुनर्बीमाकर्ता की विशिष्ट आवश्यकताओं अथवा प्रोफाइल के अनुकूल बनाये गये हों;
- ‘प्राधिकरण’ से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
- इन विनियमों के प्रयोजनों के लिए ‘बोर्ड’ से अभिप्रेत है—
- (क) आईआईओ को छोड़कर प्रत्यक्ष बीमा व्यवसाय अंकित करनेवाले भारतीय बीमाकर्ताओं, (ख) भारतीय पुनर्बीमाकर्ताओं और (ग) लॉयड्स इंडिया की सेवा कंपनी — का निदेशक बोर्ड;
- आ. अपनी आवेदक कंपनियों के निदेशक बोर्ड द्वारा विधिवत प्राधिकृत, विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं की शाखाओं (एफआरबी) और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र बीमा कार्यालयों (आईआईओ) की कार्यकारिणी समिति;
- इ. छूट-प्राप्त बीमाकर्ताओं के बीमा प्रभाग अथवा विभाग का प्रमुख;
- ‘अध्यर्पक (सेडेंट)’ से वह भारतीय बीमाकर्ता अभिप्रेत है जो प्रत्यक्ष बीमा व्यवसाय अंकित करता है और संविदागत तौर पर जोखिम के एक अंश का अंतरण करता (अध्यर्पण करता) है;
- ‘अध्यर्पण’ (सेशन) से जोखिम का वह अंश अभिप्रेत है जो अध्यर्पक द्वारा पुनर्बीमाकर्ता को अंतरित किया जाता है;
- ‘कवर नोट’ पुनर्बीमा संविदा की शर्तों का विवरण देते हुए पुनर्बीमा व्यवसाय अंकित करनेवाले भारतीय बीमाकर्ता अथवा सीबीआईआर अथवा पुनर्बीमा द्वारा प्राधिकृत पुनर्बीमा दलाल द्वारा जारी किया गया लिखित दस्तावेज़ है;
- ‘सीमापार पुनर्बीमाकर्ता’, जो इन विनियमों में इसके बाद प्रथम अक्षरों से ‘सीबीआर’ कहलाएगा, से लॉयड्स के समूहों सहित विदेशी पुनर्बीमाकर्ता अभिप्रेत है, जिसके व्यवसाय का स्थान भारत के बाहर स्थापित है और जिसका पर्यवेक्षण उसके स्वदेश के विनियमनकर्ता द्वारा किया जाता है। सीमापार पुनर्बीमाकर्ता में शामिल है:
- अ. एफआरबी की मूल अथवा समूह कंपनियाँ;
- आ. आईआईओ की मूल अथवा समूह कंपनियाँ।
- ‘छूट-प्राप्त बीमाकर्ता’ से अधिनियम की धारा 118(सी) के अधीन बीमा व्यवसाय करनेवाला व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का वर्ग अभिप्रेत है;
- ‘विकल्पि पुनर्बीमा’ (फैक्लेटिव रीइश्योरेंस) से एक एकल जोखिम अथवा जोखिमों का परिभाषित पैकेज अभिप्रेत है, जहाँ न तो अध्यर्पक ये जोखिम पुनर्बीमाकर्ता को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है और न ही पुनर्बीमाकर्ता पुनर्बीमा संरक्षण देने के लिए बाध्य है;
- ‘वित्तीय वर्ष’ से कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (41) के अंतर्गत यथापरिभाषित अवधि अभिप्रेत है;
- ‘विदेशी पुनर्बीमाकर्ता की शाखा’ जो इन विनियमों में इसके बाद प्रथम अक्षरों से ‘एफआरबी’ कहलाएगी, से पुनर्बीमा व्यवसाय में लगी विदेशी कंपनी की शाखा अभिप्रेत है, जिसे प्राधिकरण द्वारा भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (लॉयड्स को छोड़कर अन्य विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के शाखा कार्यालयों का पंजीकरण और परिचालन) विनियम, 2015 के अधीन अथवा भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (लॉयड्स इंडिया) विनियम, 2016 के अधीन पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया गया हो;
- ‘फ्रेंटिंग’ से जोखिम का अंतरण करने की वह प्रक्रिया अभिप्रेत है जिसमें भारतीय बीमाकर्ता किसी पुनर्बीमाकर्ता अथवा वापसीकर्ता (रेट्रोशनेयर) को अधिकांश अथवा समस्त अभिगृहीत (अम्यूंस्ड) जोखिम का अध्यर्पण अथवा वापसी करता है;
- ‘भारतीय बीमाकर्ता’ से इन विनियमों के प्रयोजन के लिए अधिनियम की धारा 2(9) के अंतर्गत यथापरिभाषित वह ‘बीमाकर्ता’ अभिप्रेत है जिसे प्राधिकरण द्वारा पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया गया हो, तथा इसमें छूट-प्राप्त बीमाकर्ता और आईआईओ भी शामिल हैं;
- ‘बीमा समूह’ से बीमा अथवा पुनर्बीमा का कोई संयुक्त जोखिम-अंकन परिचालन अभिप्रेत है जिसमें सहभागी भारतीय बीमाकर्ता समस्त अंकित व्यवसाय में एक पूर्वनिर्धारित अंश ग्रहण करते हैं;
- इन विनियमों के लिए, ‘बीमा खंड’ से निम्नलिखित अभिप्रेत और सम्मलित हैं—
- क. फायर (तेल और ऊर्जा को छोड़कर);
- ख. मरीन हल;
- ग. मरीन कार्गो;
- घ. इंजीनियरिंग;
- ङ. विमानन;
- च. मोटर;
- छ. स्वास्थ्य (वैद्यकीय दुर्घटना और यात्रा सहित), जीवन बीमा व्यवसाय करनेवाले बीमाकर्ताओं द्वारा जारी की गई पॉलिसियों को छोड़कर अन्य;
- ज. फ़सल;
- झ. व्यापारिक उधार;
- ञ. तेल और ऊर्जा;
- ट. देयता;
- ठ. विविध;
- ड. जीवन (जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा जारी की गई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों सहित);
- ढ. कोई अन्य खंड (विविध खंड के अंतर्गत) जो विविध वर्ग के सकल अंकित प्रीमियम के दस प्रतिशत से अधिक अंशदान करता हो;
- ण. समय-समय पर प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित कोई अन्य खंड;
- ‘अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र (आईएफएससी) बीमा कार्यालय’ जो इन विनियमों में इसके बाद प्रथम अक्षरों से ‘आईआईओ’ कहलाएगा, से भारत में अथवा भारत के बाहर अधिवास करनेवाले बीमाकर्ता अथवा पुनर्बीमाकर्ता का शाखा कार्यालय अभिप्रेत है, जिसे बीमा व्यवसाय अथवा पुनर्बीमा व्यवसाय अथवा दोनों करने के लिए आईएफएससी-एसईजेड में अपना कार्यालय खोलने के लिए प्राधिकरण द्वारा पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया गया हो;
- ‘पुनर्बीमा संविदा’ एक वाणिज्यिक करार है तथा सभी पक्षों पर कानूनी तौर पर बाध्यकारी है जो एक पुनर्बीमा पर्ची अथवा कवर नोट अथवा ऐसे अन्य दस्तावेज़ द्वारा प्रमाणित हो;
- ‘पुनर्बीमा पर्ची’ एक दस्तावेज़ जो पुनर्बीमा के लिए प्रस्तावित जोखिम एवं शर्तों का संक्षिप्त विवरण उपलब्ध कराता है;
- ‘प्रतिधारण’ से जोखिम का वह अंश अभिप्रेत है जो भारतीय बीमाकर्ता अपने स्वयं के खाते के लिए ग्रहण करता है;
- ‘वापसी’ (रेट्रोसेशन) से ऐसा पुनर्बीमा लेनदेन अभिप्रेत है जिसके द्वारा ग्रहण किये गये पुनर्बीमित जोखिम का एक अंश आगे अन्य भारतीय बीमाकर्ता अथवा सीबीआर को अध्यर्पण किया जाता है;
- ‘समझौता’ (ट्रीटी) से अध्यर्पक और पुनर्बीमाकर्ता के बीच अथवा पुनर्बीमाकर्ता और वापसीकर्ता के बीच सामान्यतः एक वर्ष की एक पुनर्बीमा संविदा अभिप्रेत है, जो व्यवसाय के परिभाषित वर्ग (वर्गों) अथवा खंडों के पुनर्बीमा के लिए लागू तकनीकी विवरण और वित्तीय शर्ते निर्धारित करती है;
- इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु अधिनियम अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) अथवा साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) अथवा जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31), उनके अधीन बनाये गये नियमों अथवा विनियमों में परिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन अधिनियमों अथवा नियमों में क्रमशः उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।