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5779 GI/2024 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY कारपोरेट कार्य मंत्रालर् अजधसूचना नई दिल्ली, 9 जसतम्बर, 2024 सा.का.जन. 554(अ).—केंद्रीर् सरकार,…
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
xxxGIDHxxx
xxxGIDExxx
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)
PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 512] नई दिल्ली, सोमवार, सितम्बर 9, 2024/भाद्र 18 1946
No. 512] NEW DELHI, MONDAY, SEPTEMBER 9, 2024/BHADRA 18, 1946
सी.जी.-डी.एल.-अ.-09092024-257020
CG-DL-E-09092024-257020
कारपोरेट कार्य मंत्रालय
अधिसूचना
नई दिल्ली, 9 सितम्बर, 2024
सा.का.नि. 554(अ)।—केन्द्रीय सरकार, कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 469 के साथ पठित धारा 133 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण के परामर्श से तथा उसके द्वारा की गई सिफारिशों की जांच के पश्चात, कंपनी (भारतीय लेखा मानक) नियम, 2015 में और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्: -
"102क प्रारंभिक तारीख के पश्चात, विक्रेता-पट्टेदार पट्टा-वापसी से उत्पन्न प्रयोग-अधिकार आस्ति पर अनुच्छेद 29-35 और पट्टा-वापसी से उत्पन्न पट्टा-दायित्व पर अनुच्छेद 36-46 को लागू करेगा। अनुच्छेद 36-46 को लागू करते हुए, विक्रेता-पट्टेदार 'पट्टा-भुगतानों' या पुनरीक्षित पट्टा-भुगतानों को इस तरह से निर्धारित करेगा कि विक्रेता-पट्टेदार उसके द्वारा प्रति धारित प्रयोग अधिकार से संबंधित फायदे या नुकसान की किसी भी राशि को मान्यता नहीं देगा। इस अनुच्छेद की अपेक्षाओं का प्रयोग विक्रेता पट्टेदार को इस बात के लिए बाधित नहीं करता कि वह अनुच्छेद 46(क) द्वारा अपेक्षित एक पट्टे के पूर्ण या आंशिक समापन से संबंधित किसी लाभ या हानि को लाभ या हानि में मान्यता दे।“
"ग1घ बिक्री एवं पट्टा वापसी में पट्टा दायित्व, अनुच्छेद ग2 संशोधित किए गए एवं अनुच्छेद 102क व ग20ङ जोड़े गए। एक विक्रेता पट्टेदार इन संशोधनों को पहली अप्रैल, 2024 को या इसके पश्चात प्रारंभ होने वाली वार्षिक रिपोर्टिंग अवधियों के लिए लागू करेगा।"
"ग2 अनुच्छेद ग1-ग20ङ की अपेक्षाओं के प्रयोजनों के लिए प्रारंभिक लागू की तिथि उस वार्षिक रिपोर्टिंग अवधि को प्रारम्भ होगी जिसमें प्रतिष्ठान इस मानक का प्रथमबार प्रयोग करता है।"
"बिक्री एवं पट्टा वापसी में पट्टा-दायित्व
ग20ङ एक विक्रेता-पट्टेदार एक बिक्री एवं पट्टा वापसी में पट्टा-दायित्व (देखें अनुच्छेद ग1घ) को प्रारंभिक प्रयोग की तारीख के पश्चात बिक्री एवं पट्टा वापसी लेनदेनों पर भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 2 के अनुसरण में पूर्व प्रभाव से लागू करेगा।"
" परिशिष्ट घ
विस्तृत उदाहरण(यह परिशिष्ट भारतीय लेखा मानक (इंड एएस 116 के साथ संलग्न तो है लेकिन यह इस लेखा मानक का भाग नहीं है। यह परिशिष्ट भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के कुछ पहलुओं के दृष्टांत प्रस्तुत करता है, किंतु यह कोई निर्वचनात्मक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए आविष्ट नहीं है।)
नियत भुगतानों एवं उपरोक्त बाजार शर्तों के साथ बिक्री एवं पट्टा वापसी लेनदेन(यह उदाहरण विक्रेता-पट्टेदार एवं क्रेता-पट्टाकर्ता के लिए भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेद 99-102 की अपेक्षाओं के लागू होने के उदाहरण दृष्टांत करता है।)
एक प्रतिष्ठान (विक्रेता-पट्टेदार) दूसरे प्रतिष्ठान (क्रेता-पट्टाकर्ता) को 20,00,000/- रुपये नकद में एक भवन बेचता है। इस लेनदेन के तत्काल पूर्व, यह भवन 10,00,000/- रुपये की लागत पर लिया जाता है। उसी समय, विक्रेता-पट्टेदार क्रेता-पट्टाकर्ता के साथ भवन को 18 वर्ष के लिए प्रयोग -अधिकार के लिए अनुबंधित करता है जिसके अनुसार वह (विक्रेता-पट्टेदार) क्रेता-पट्टाकर्ता को प्रत्येक वर्ष के अन्त में देय 1,20,000 रुपये का भुगतान करेगा। इस लेनदेन की शर्तें एवं निबंधन, ऐसी हैं कि विक्रेता पट्टेदार द्वारा भवन का हस्तांतरण (ट्रांसफर) भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 115, ग्राहकों के साथ अनुबंधों से राजस्व की अपेक्षाओं को पूरा करता है और इसका लेखा भवन की बिक्री के रूप में किया जाएगा। तद्नुसार, विक्रेता-पट्टेदार एवं क्रेता-पट्टाकर्ता दोनों ही इस लेनदेन का लेखा बिक्री और पट्टा वापसी के रूप में करेंगे।
बिक्री की तारीख को, भवन का उचित मूल्य 18,00,000 रुपये है। चूंकि भवन की बिक्री से प्राप्त राशि भवन का उचित मूल्य नहीं है अतः विक्रेता-पट्टेदार एवं क्रेता पट्टाकर्ता दोनों ही बिक्री राशि को उचित मूल्य पर माप के लिए समायोजन करेंगे। भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेद 101(ख) का प्रयोग करते हुए, बिक्री कीमत की अधिक राशि 20,00,000 रुपये (20,00,000 -18,00,000 रुपये) का क्रेता-पट्टाकर्ता द्वारा विक्रेता-पट्टेदार को दिए गए अधिक वित्त पोषण (फाइनेंसिंग) के रूप में मान्यता दी जाएगी।
पट्टे में निहित ब्याज-दर 4.5 प्रतिशत वार्षिक है, जो विक्रेता-पट्टेदार द्वारा तुरंत निर्धारण योग्य है। वार्षिक भुगतानों का वर्तमान मूल्य (4.5 प्रतिशत वार्षिक दर पट्टाकृत 1,20,000 रुपये के 18 भुगतान) 14,59,200 रुपये है और इनमें से 2,00,000/-रुपये अतिरिक्त वित्त पोषण से संबंधित हैं जबकि 12,59,200 रुपये पट्टा से संबंधित हैं - जो क्रमशः 16,447 रुपये तथा 1,03,553 रुपये के 18 वार्षिक भुगतानों के अनुसार हैं।
क्रेता-पट्टाकर्ता भवन के पट्टे को एक परिचालन पट्टे के रूप में वर्गीकृत करता है।
विक्रेता-पट्टाधारीभारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेद 100(क) का प्रयोग करते हुए, विक्रेता-पट्टेदार प्रारंभिक तारीख को भवन की पट्टा-वापसी से उत्पन्न आस्ति के प्रयोग-अधिकार का माप करता है जो कि विक्रेता-पट्टेदार द्वारा प्रतिधारित प्रयोगाधिकार से संबंधित भवन की गत अग्रणीत राशि के अनुपात में है और वह 6,99,555 रुपये है। विक्रेता पट्टेदार इस राशि की गणना इस प्रकार करता है अर्थात् 10,00,000/- रुपये (भवन की अग्रणीत राशि) x 12,59,200/- रुपये (18 वर्ष के लिए प्रयोगाधिकार आस्ति का बट्टाकृत पट्टा भुगतान)÷18,00,000/- रुपये (भवन का उचित मूल्य)।
विक्रेता-पट्टेदार केवल लाभ की राशि को ही मान्यता देता है जो क्रेता पट्टाकर्ता को 2,40,355/- रुपये की राशि के रूप में हस्तांतरित अधिकारों से संबंधित है और निम्नलिखित ढंग से जिसकी गणना की गई है। भवन की बिक्री पर लाभ 8,00,000/- रुपये के हैं(18,00,000/- रुपये - 10,00,000/- रुपये) जिसमें से :-
(क) पट्टेदार द्वारा प्रतिधारित प्रयोगाधिकारी भवन से संबंधित राशि 5,59,645 रुपये (8,00,000/- रुपये x 12,59,200 रुपये÷18,00,000/- रुपये) हैं, एवं
(ख) हस्तांतरित अधिकारों से संबंधित 2,40,355 रुपये (8,00,000/-रुपये) X (18,00,000/- रुपये-12,59,200 रुपये) ÷ 18,00,000/- रुपये) है।
प्रारंभिक तारीख पर, विक्रेता-पट्टेदार लेनदेन का लेखा इस प्रकार करता है:-
नकद 20,00,000 रुपये
प्रयोगाधिकार आस्ति 6,99,555 रुपये
भवन 10,00,000 रुपये
पट्टा दायित्व 12,59,200 रुपये
वित्तीय दायित्व 2,00,000 रुपये
हस्तांतरित अधिकारों से लाभ 2,40,355 रुपये
क्रेता-पट्टाकर्ता
प्रारंभिक तारीख पर, क्रेता-पट्टाकर्ता लेनदेन का लेखा इस प्रकार करता है:-
भवन 18,00,000 रुपये
वित्तीय आस्ति 2,00,000 (4.5 प्रतिशत वार्षिक दर पर बट्टाकृत 16,447 रुपये के 18 भुगतान)
नकद 20,00,000 रुपये
प्रारंभिक तारीख के पश्चात, क्रेता-पट्टाकर्ता पट्टा का लेखा पट्टा भुगतानों के रूप में 1,20,000/- रुपये के वार्षिक भुगतानों को 1,03,553/- रुपये के रूप में करता है। विक्रेता-पट्टेदार से प्राप्त वार्षिक भुगतान की देय राशि 16,447 रुपये का लेखा (क) 2,00,000/- रुपये की वित्तीय आस्ति के निपटान से प्राप्त भुगतान के रूप में, और (ख) ब्याज राजस्व के रूप में करता है।
परिवर्तनशील पट्टा भुगतानों सहित, जो किसी सूचकांक या दर पर निर्भर नहीं करते हैं, बिक्री एवं पट्टावापसी लेनदेन में प्रयोग-अधिकार एवं पट्टा दायित्व का पश्चात्वर्ती माप
(परिवर्तनशील पट्टा भुगतानों सहित बिक्री एवं पट्टावापसी लेनदेन, जो किसी सूचकांक या दर पर निर्भर नहीं करता है, भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेद 102क एवं अनुच्छेदों 29-46 की अपेक्षाओं को लागू करने का उदाहरण दृष्टांत करता है)।
एक प्रतिष्ठान (विक्रेता-पट्टेदार) एक भवन दूसरे प्रतिष्ठान (क्रेता-पट्टाकर्ता) को नकद 18 लाख रुपये में बेचता है। (बिक्री की तारीख को यह भवन का उचित मूल्य है)। इस लेनदेन के तत्काल पूर्व, भवन की अग्रणीत लागत 10 लाख रुपये है। उसी समय, विक्रेता-पट्टेदार क्रेता-पट्टाकर्ता के साथ भवन को पांच वर्ष के लिए प्रयोग-अधिकार के रूप में लेन देन का एक अनुलग्नक कर लेता है। वार्षिक आधार पर पट्टे का भुगतान नियत राशि व परिवर्तनशील राशि के रूप में संदेय है जो किसी सूचकांक या दर पर आधारित नहीं है।
इस लेनदेन की शर्तें व निबंधन कुछ ऐसे हैं कि विक्रेता-पट्टेदार द्वारा भवन का हस्तांतरण भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 115, ग्राहकों के साथ अनुबंधों से राजस्व की अपेक्षाओं को पूरा करते हैं। इसका लेखा भवन की बिक्री के रूप में किया जाएगा। तद्नुसार, विक्रेता-पट्टेदार इस लेनदेन का लेखा एक बिक्री व पट्टा-वापसी के रूप में करता है।
पट्टे में निहित ब्याज दर तत्काल रूप से निर्धारण योग्य नहीं है। विक्रेता पट्टेदार की उधार की वृद्धिशील दर 3 प्रतिशत वार्षिक है।
भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेद 100(क) का प्रयोग करते हुए, विक्रेता-पट्टेदार क्रेता-पट्टाकर्ता को हस्तांतरित भवन के अनुपात में निर्धारित करता है जो प्रतिधारित प्रयोग-अधिकार 25 प्रतिशत (क) के रूप से संबंधित है। परिणामस्वरूप, प्रारंभिक तारीख पर विक्रेता-पट्टेदार लेनदेन का लेखा इस प्रकार करता है:-
नकद 18,00,000/- रुपये
प्रयोग-अधिकारी 2,50,000/- रुपये
(10,00,000/- रुपये x 25 प्रतिशत)
भवन 10,00,000 रुपये
पट्टा दायित्व 4,50,000 रुपये
हस्तांतरित अधिकारों पर लाभ 450000 रुपये
(18,00,000 - रुपये 10,00,000 रुपये) x 75 प्रतिशत)
विक्रेता - पट्टेदार यह आशा करता है कि वह पट्टा-अवधि के दौरान आस्ति के प्रयोग-अधिकार के भावी आर्थिक लाभों का समान रूप से उपयोग करेगा। इस प्रकार, वह प्रयोग-अधिकार आस्ति के मूल्यह्रास का लेखा स्ट्रेटलाइन आधार पर ही करेगा।
भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेदों 36-46 का प्रयोग करते हुए, पट्टा दायित्व के माप के लिए, विक्रेता-पट्टेदार पट्टा भुगतानों को निर्धारित करने के लिए एक ऐसी लेखानीति विकसित करेगा कि वह प्रतिधारित प्रयोग-अधिकार से संबंधित किसी फायदे की राशि को मान्यता नहीं देगा। परिस्थितियों पर निर्भर करते हुए (जिनमें विक्रेता-पट्टेदार द्वारा पद्धति का प्रयोग-भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेद 100(क) का प्रयोग - प्रयोग-अधिकार आस्ति के माप का निर्धारण एवं प्रारंभिक तारीख को लेनदेन पर मान्य लाभ सम्मिलित हैं) या तो दृष्टिकोण 1 या फिर दृष्टिकोण 2 अनुच्छेद 102क की अपेक्षाओं को पूरा कर सकता है।
दृष्टिकोण 1- प्रारंभिक तारीख को प्रत्याशित पट्टा-भुगतान
भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 116 के अनुच्छेद 102क का प्रयोग करते हुए, विक्रेता-पट्टेदार प्रारंभिक तारीख के प्रत्याशित पट्टा भुगतानों को वर्णित करने के लिए इस प्रकार निर्धारित करता है अपनी वृद्धिशील उधारी दर का प्रयोग कर बट्टाकृत करने पर उस तारीख को बट्टा दायित्व की अग्रणीत राशि 450000 रुपये होती है।
पट्टा-वापसी से उत्पन्न प्रयोग अधिकार आस्ति एवं पट्टा-दायित्व इस प्रकार है:-