6317 GI/2024
(1) रजजस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
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ऄसाधारण
EXTRAORDINARY
भाग II—खण् ड 3—ईप-खण् ड (i)
PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राजधकार से प्रकाजित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 560] नइ ददल्ली, िजनवार, जसतम् बर 28, 2024/अज वन 6, 1946
No. 560] NEW DELHI, SATURDAY, SEPTEMBER 28, 2024/ASVINA 6, 1946
सी.जी.-डी.एल.-अ.-30092024-257596
CG-DL-E-30092024-257596
कारपोरेट कायय मंत्रालय
नइ ददल् ली, 28 जसतम् बर, 2024
**सा.का.जन. 602(ऄ).—**केन्द्रीय सरकार, कंपनी ऄजधजनयम, 2013 (2013 का 18) की धारा 469 के साथ पठठत धारा 133 द्वारा प्रदत्त िजियों का प्रयोग करते हुए, कंपनी (भारतीय लेखा मानक) जनयम, 2015 में और संिोधन करने के जलए जनम्नजलजखत जनयम बनाती है ऄथायतः-
- (1) आन जनयमों का संजिप्त नाम कंपनी (भारतीय लेखा मानक) तीसरा संिोधन जनयम, 2024 है।
- (2) ये राजपत्र में आनके प्रकािन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
- कंपनी (भारतीय लेखा मानक) जनयम, 2015 (जजसे आसके पश्चात् ईि जनयम कहा गया है) के, जनयम 5 में, जनम्नजलजखत परंतुक को ऄंतःस्ट्थाजपत दकया जाएगा, ऄथायतः-
“परंतु बीमाकताय या बीमा कंपनी ऄपनी मूल कंपनी या जनवेिक या ईद्यमकताय द्वारा समेदकत जवत्तीय जववरणों के प्रयोजन के जलए बीमा जवजनयामक और जवकास प्राजधकरण द्वारा (आंड ए एस) 117 को ऄजधसूजचत दकए जाने तक (आंड ए एस) 104 के ऄनुसार ऄपना जवत्तीय जववरण प्रदान कर सकती है, और आस प्रयोजन के जलए आन जनयमों की ऄनुसूची में यथाजवजनर्ददष्ट (आंड ए एस) 104 लागू होना जारी रहेगा।”
- ईि जनयमों के ऄनुलग्नक और ईससे सम्बंजधत प्रजवजष्टयों के पश्चात्, जनम्नजलजखत ऄनुसूची ऄंतःस्ट्थाजपत की जाएगी, ऄथायतः-
“ऄनुसूची
[जनयम 5 में परंतुक को देखें]
भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) 104
बीमा ऄनुबंध
(आस भारतीय लेखा मानक में मोटे टाआप व सामान्द्य टाआप में ऄनुच्छेद हैं जजनका समान प्राजधकार है। मोटे टाआप में ऄनुच्छेद मुख्य जसद्ांतों के सूचक हैं।)
ईद्देय
- आस भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) का ईद्देय दकसी प्रजतष्ठान (आस भारतीय लेखा मानक में जजसे बीमाकताय के रूप में वर्णणत दकया गया है), जो बीमा ऄनुबंध जारी करता है, द्वारा ईन बीमा ऄनुबंधों के जलए जवत्तीय ठरपोर्टटग जवजनर्ददष्ट करना है। जविेष रूप से, आस भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) में जनम्नजलजखत की ऄपेिा की जाती हैः
- (क) बीमा ऄनुबंधों के जलए बीमाकतायओं द्वारा लेखा में सीजमत सुधार
- (ख) प्रकटन, जो बीमा ऄनुबंधों से ईत्पन्न एक बीमाकताय के जवत्तीय जववरणों की राजियों की पहचान करता है और ईन्द्हें स्ट्पष्ट करता है, और ईन जवत्तीय जववरणों के ईपयोगकतायओं को बीमा ऄनुबंधों के भावी नकदी प्रवाहों की राजि, समय तथा ऄजनजश्चतता को समझाने में सहायता करता है।
काययिेत्र
- एक प्रजतष्ठान आस भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) को जनम्नजलजखत पर लागू करेगा:
- (क) आसके द्वारा जारी बीमा ऄनुबंधों (पुनबीमा ऄनुबंधों सजहत) और आसके द्वारा धाठरत पुनबीमा ऄनुबंध।
- (ख) जवत्तीय जलखतें, जजन्द्हें वह जववेकाधीन सहभाजगता जविेषता (देखें ऄनुच्छेद 35) के साथ जारी करता है, भारतीय लेखा मानक 107, जवत्तीय जलखतें: प्रकटन, जवत्तीय जलखतों सजहत ईन जवत्तीय जलखतों के बारे में प्रकटन की ऄपेिा करता है जजनमें ऐसी जविेषताएं जनजहत हैं।
-
यह भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) बीमाकतायओं द्वारा लेखा के ऄन्द्य पहलुओं पर चचाय नहीं करता है, जैसे बीमाकतायओं द्वारा धाठरत जवत्तीय अजस्ट्तयों तथा बीमाकतायओं द्वारा जारी जवत्तीय दाजयत्वों का लेखा (देखें भारतीय लेखा मानक 32, जवत्तीय जलखतेंःः प्रस्ट्तुजतकरण, भारतीय लेखा मानक 107 एवं भारतीय लेखा मानक 109, जवत्तीय जलखतें)।
-
एक प्रजतष्ठान आस भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) को जनम्नजलजखत पर लागू नहीं करेगा:
- (क) एक जनमायता, डीलर ऄथवा खुदरा व्यापारी द्वारा प्रत्यि रूप से जारी ईत्पाद वारंठटयां (देखें भारतीय लेखा मानक 115 ग्राहकों के साथ ऄनुबंध से राजस्ट्व एवं भारतीय लेखा मानक 37, प्रावधान, अकजस्ट्मक दाजयत्व एवं अकजस्ट्मक अजस्ट्तयां) ।
- (ख) कमयचारी लाभ योजनाओं के ऄंतगयत जनयोिाओं की अजस्ट्तयां एवं दाजयत्व (देखें भारतीय लेखा मानक 19, कमयचारी लाभ एवं भारतीय लेखा मानक 102, िेयर अधाठरत भुगतान) और जनजश्चत सेवा जनवृजत्त लाभ योजनाओं द्वारा ठरपोटय दकये गये सेवाजनवृजत्त लाभ बाध्यताएं।
- (ग) ऄनुबंधात्मक ऄजधकार ऄथवा ऄनुबंधात्मक बाध्यताएं जो एक गैर-जवत्तीय मद के भावी ईपयोग ऄथवा ईपयोग के ऄजधकार (ईदाहरण के जलए कुछ लाआसेंस िुल्क, रॉयजल्टयां, पठरवतयनीय पट्टा भुगतान तथा आसी प्रकार की ऄन्द्य मदें) तथा आसी तरह में एक पट्टे में पट्टेदार की सजन्नजहत ऄवजिष्ट मूल्य गारंटी पर अकजस्ट्मक हैं। (देखें भारतीय लेखा मानक 116 पट्टे, भारतीय लेखा मानक 115, ग्राहकों के साथ ऄनुबंधों से राजस्ट्व एवं भारतीय लेखा मानक 38, ऄमूतय अजस्ट्तयां।
- (घ) जवत्तीय गारंटी ऄनुबंधों जब तक दक जारीकताय ने पहले से स्ट्पष्ट रूप से घोषणा न की हो दक वह आन ऄनुबंधों को बीमा ऄनुबंध के रूप में मानता है तथा बीमा ऄनुबंधो पर लागू लेखों का ईपयोग करता है और आस मामले में जारीकताय या तो भारतीय लेखा मानक 32, भारतीय लेखा मानक 107 और भारतीय लेखा मानक 109 या दिर आस भारतीय लेखा मानक की ऐसी जवत्तीय गारंटी ऄनुबंधों पर लागू करने के जलए चयन करता है। ऄपठरवतयनीय जारीकताय यह चयन ऄनुबंध-दर-ऄनुबंध कर सकता है परंतु प्रत्येक ऄनुबंध के जलए यह चयन ऄजवकल्पी है।
- (ङ) एक व्यावसाजयक संयोजन में देय ऄथवा प्राप्य अकजस्ट्मक प्रजतिल (देखें भारतीय लेखा मानक 103, व्यावसाजयक संयोजन)।
- (च) प्रत्यि बीमा ऄनुबंध जजन्द्हें प्रजतष्ठान धारण करता है (ऄथायत् ऐसी प्रत्यि बीमा ऄनुबंध जजनमें प्रजतष्ठान पॉजलसीधारक हैं) लेदकन, एक ऄपयणकताय (सीडेंट) आस मानक को ईन पुनबीमा ऄनुबंधों पर लागू करेगा जजन्द्हें वह धारण करता है।
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संदभय की सुजवधा के जलए यह भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) एक प्रजतष्ठान को बीमाकताय के रूप में वर्णणत करता है जो बीमा ऄनुबंध जारी करता है, चाहे जारीकताय को कानूनी रूप से ऄथवा पययवेिण के प्रयोजन से बीमाकताय माना जाये ऄथवा नहीं।
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एक पुनबीमा ऄनुबंध एक प्रकार की बीमा ऄनुबंध ही है। ऄतः, आस भारतीय लेखा मानक (आंड ए एस) के बीमा ऄनुबंधों से संबंजधत सभी संदभय पुनबीमा ऄनुबंधों पर भी लागू होते हैं।