724 GI/2026
(1)
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
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असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)
PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
अधिसूचना
नई दिल्ली, 2 फरवरी, 2026
सा.का.नि. 99(अ).—केंद्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 में आगे संशोधन करने के लिए कतपय नियमों का
निम्नलिखित प्रारूप, जिसे केंद्रीय सरकार मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 110 की उप-धारा (छ)
द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बनाने का प्रस्ताव करती है, उक्त अधिनियम की धारा 212 की उप-धारा (1) के
अनुसार सभी प्रभावित व्यक्तियों की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है; और एतद्द्वारा नोटिस दिया जाता है कि प्रारूप
नियमों को उस तारीख से तीस दिन की अवधि समाप्त होने के बाद विचारार्थ स्वीकार कर लिया जाएगा जिस तारीख से
सरकारी राजपत्र में यथा प्रकाशित इस अधिसूचना की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध करायी जाती हैं;
इन प्रारूप नियमों के प्रति आक्षेपों एवं सुझावों, यदि कोई हो, अपर सचिव (एमवीएल, परिवहन और सड़क सुरक्षा), सड़क
परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, परिवहन भवन, संसद मार्ग, नई दिल्ली-110001 को या ईमेल: comments-
morth@gov.in पर भेजा जा सकता है।
विर्निदिष्ट अवधि समाप्त होने के पहले उक्त प्रारूप नियमों के संबंध में किसी भी व्यक्ति से प्राप्त होने वाले आक्षेपों या सुझावों
पर केंद्रीय सरकार द्वारा विचार किया जाएगा।
प्रारूप नियम
- संक्षिप्त शीर्षक एवं प्रारंभ - (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम केन्द्रीय मोटर यान (........संशोधन) नियमावली, 2026 है।
सं. 94]
नई दिल्ली, मंगलवार, फरवरी 3, 2026/माघ 14, 1947
No. 94]
NEW DELHI, TUESDAY, FEBRUARY 3, 2026/MAGHA 14, 1947
सी.जी.-डी.एल.-अ.-05022026-269848
CG-DL-E-05022026-269848
2
THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY
[PART II—SEC. 3(i)]
- ये आधिकारिक राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।
- केंद्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 (जिसे इसके बाद उक्त नियम कहा गया है) में, नियम 126 के स्थान पर निम्नलिखित
प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:
- प्रत्येक मोटर वाहन के प्रोटोटाइप का परीक्षण किया जाएगा।
केंद्रीय मोटर यान (संशोधन) नियमावली, 1993 के लागू होने की तारीख से, कृषि ट्रैक्टर, निर्माण उपकरण वाहन, कंबाइन
हारवेस्टर, पावर टिलर, ट्रेलर, सेमी-ट्रेलर और मॉड्यूलर हाइड्रोलिक ट्रेलर सहित मोटर वाहनों के प्रत्येक विनिर्माता या
आयातक, जिसमें ई-रिक्शा के लिए पंजीकृत संघ (संबंधित राज्य परिवहन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त) भी शामिल है, अपने
द्वारा विनिर्मित या आयात किए जाने वाले वाहन का प्रोटोटाइप भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के वाहन अनुसंधान एवं विकास
प्रतिष्ठान या ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, पुणे, या केंद्रीय कृषि मशीनरी परीक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान,
बुधनी (मध्य प्रदेश), या भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून, या केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान, पुणे, या इंटरनेशनल सेंटर
फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, मानेसर, या नॉर्दर्न रीजन फार्म मशीनरी रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट, हिसार (कंबाइन हारवेस्टर
के परीक्षण के लिए), या ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर, चेन्नई, या नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स (नैरेक्स), इंदौर, या
दक्षिणी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, अनंतपुर, आंध्र प्रदेश (पावर टिलर के परीक्षण के लिए) और केंद्रीय
सरकार द्वारा विर्निदिष्ट अन्य एजेंसियां भी अधिनियम और इन नियमों के प्रावधानों के अनुपालन के संबंध में प्रमाण पत्र प्रदान
कर सकती हैं।
परंतुक 1
यह भी प्रावधान है कि इस नियम में विर्निदिष्ट सभी परीक्षण एजेंसियां, इस नियम के अधीन ऐसे मानकों के प्रकाशन की तारीख
से एक वर्ष के भीतर गुणवत्ता मानक, विशेष रूप से एआईएस (ऑटोमोटिव उद्योग मानक) का अनुपालन सुनिश्चित करेंगी,
और इस नियम के अधीन अधिसूचित की जाने वाली परीक्षण एजेंसियां ऐसे मानकों की अधिसूचना की तारीख या इस नियम
के अधीन आवेदन की तारीख, जो भी बाद में हो, से मानक का अनुपालन करेंगी:
परंतुक 2
आगे यह भी प्रावधान है कि इस उप-नियम के अंतर्गत परीक्षण एजेंसियों के प्रत्यायन, पंजीकरण और विनियमन के प्रयोजन
के लिए, इस नियम के अंतर्गत अधिसूचित एआईएस में निर्धारित गुणवत्ता नियंत्रण और प्रक्रिया का पालन किया जाएगा:
परंतुक 3
यह भी प्रावधान है कि इन नियमों के अनुपालन हेतु मोटर वाहनों के प्रकार अनुमोदन और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया समय-
समय पर यथा संशोधित एआईएस: 017-2000 या केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया (यदि कोई हो) के अनुसार होगी
और वाहन विनिर्माता द्वारा तकनीकी विशिष्टताओं संबंधी जानकारी समय-समय पर यथा संशोधित एआईएस-007(संशोधन
5):2014 के अनुसार प्रस्तुत की जाएगी।
परंतुक 4
यह भी प्रावधान है कि परिवर्तित, संशोधित या अनुकूलित मोटर वाहनों का परीक्षण और टाइप अनुमोदन इस नियम में
विर्निदिष्ट परीक्षण एजेंसियों द्वारा किया जाएगा, या मूल उपकरण विनिर्माताओं द्वारा स्व-प्रमाणित किया जाएगा, या राज्य
सरकार द्वारा अधिकृत कार्यशालाओं द्वारा अधिनियम की धारा 52 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार स्व-
प्रमाणित किया जाएगा।
परंतुक 5
यह भी प्रावधान है कि वाहन विनिर्माता के संबंध में, जो भारत में बाएं हाथ के स्टीयरिंग नियंत्रण वाले वाहनों की अप्रयुक्त
पूर्णतः विनिर्मित (सीबीयू) या पूर्णतः अलग-अलग पुर्जों में विभाजित (सीकेडी) इकाइयों का आयात सीधे या अपने अधिकृत
प्रतिनिधि के माध्यम से करते हैं, एम 1 या एल श्रेणी के वाहनों की 2500 इकाइयों तक और अन्य श्रेणियों के वाहनों की 500
इकाइयों तक, जो अंतरराष्ट्रीय मानक, अर्थात् ईईसी या ईसीई या जापानी मानक के अनुरूप हों, ऐसे वाहन की बिक्री और
नियम 47 के अधीन पंजीकरण के लिए अनुपालन स्थापित माना जाएगा, जो किसी अधिकृत एजेंसी या मान्यता प्राप्त प्रमाणन
एजेंसी द्वारा जारी संबंधित मानक के अनुपालन प्रमाण पत्र द्वारा सिद्ध होगा।