e-Gazette statutory gazette instrument G.S.R. 120(E) · 10 Feb 2026
Official title
Notification (Extraordinary) regarding Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Amendment Rules, 2025 for publication in Part II, Section 3, sub section (i) of the Gazette of India
Official record
Open source pageSummary
The Ministry of Electronics and Information Technology amends the 2021 Intermediary Guidelines to regulate synthetically generated information. Intermediaries must deploy technical measures to prevent the creation or dissemination of unlawful synthetic content. All synthetic content must carry prominent labels and embedded metadata. Significant social media intermediaries must verify user declarations regarding synthetic content before publication. The rules reduce response timelines for grievance officers and law enforcement requests. Intermediaries must inform users of these policies every three months. These rules take effect on 20 February 2026.
What you must do
Key dates
Who is affected
Exceptions
If you do not comply
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय अधिसूचना नई दिल्ली, 10 फरवरी, 2026
सा.का.नि. 120(अ).— केन्द्रीय सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 87 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के खंड (य) और खंड (यछ) के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवती दिशािनर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:—
(2) ये तारीख 20 फ़रवरी, 2026 को प्रवृत्त होंगे।
(क) उप-नियम (1) में,—
(i) खंड (ग) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:—
सं. 114] नई दिल्ली, मंगलवार, फरवरी 10, 2026/माघ 21, 1947 No. 114] NEW DELHI, TUESDAY, FEBRUARY 10, 2026/MAGHA 21, 1947
सी.जी.-डी.एल.-अ.-10022026-269993 CG-DL-E-10022026-269993
“(गक) ‘श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना’ से कोई भी श्रव्य, प्रतिबिंब, फोटोग्राफ, ग्राफिक, वीडियो, मर्चमान दृश्य अभिलेख, ध्वनि अभिलेख या कोई अन्य श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य अंतर्वस्तु अभिप्रेत है, चाहे वह संसर्त श्रव्य सहित हो या बिना संसर्त श्रव्य के, और चाहे वह किसी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से सृजित, निर्मित, उपांतरित या परिवर्तित की गई हो;”।
(ii) खंड (ब) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:—
“(बक) ‘संश्लेषित रूप से निर्मित सूचना’ से ऐसी श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना अभिप्रेत है, जो किसी कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके कृत्रिम रूप से या एल्गोरि्मिक रूप से सृजित, निर्मित, उपांतरित या परिवर्तित की गई हो, इस प्रकार कि ऐसी सूचना वास्तविक, प्रामाणिक या सत्य प्रतीत होती हो और किसी भी व्यक्ति या घटना का इस प्रकार चित्रण या चित्रांकन करती हो कि वह किसी प्राकृतिक व्यक्ति या वास्तविक संसार की घटना से अभेद्य होने के रूप में, या अभेद्य होने की संभावना के रूप में, प्रत्यक्ष हो अथवा प्रत्यक्ष होने की संभावना हो;
परंतु यह कि इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना को ‘संश्लेषित रूप से निर्मित सूचना’ नहीं समझा जाएगा, जहां ऐसी श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना निम्नलिखित से उत्पन्न होती है—
(क) नियमित या सद्भावपूर्ण संपादन, स्वरूपण, उन्नयन, तकनीकी सुधार, रंग समायोजन, शोर न्यूनीकरण, प्रतिलेखन, या संपीड़न से उत्पन्न होती है, जिससे मूलभूत श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना के तत्व, संदर्भ या अर्थ में कोई भौतिक परिवर्तन, विकृति या ममिया प्रस्तुतीकरण नहीं होता है; या
(ख) दस्तावेजों, प्रस्तुतियों, पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट (PDF) फाइलों, शैक्षिक या प्रशिक्षण सामग्रियों, शोध आउटपुट के नियमित या सद्भावपूर्ण सृजन, तैयारी, स्वरूपण, प्रस्तुतीकरण या अभिकल्प से, जिसके अंतर्गत दृष्टांतकारात्मक, काल्पनिक, मसौदा, टेम्पलेट-आधारित या अवधारणात्मक अंतर्वस्तु का उपयोग भी शामिल है, जहां ऐसा सृजन या प्रस्तुतीकरण किसी ममिया दस्तावेज या किसी ममिया इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के सृजन या निर्मित का परिणाम नहीं होता है; या
(ग) पहुंचनीयता, स्पष्टता, गुणवत्ता, अनुवाद, विवरण, खोजनीयता या अन्वेषणीयता में सुधार करने के लिए केवल कंप्यूटर संसाधनों के उपयोग से, और मूलभूत श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना के किसी भी भौतिक भाग को निर्मित किए बिना, उपांतरित किए बिना, परिवर्तित किए बिना या अभिनचालित किए बिना;”।
(ख) उप-नियम (1) के पश्चात् निम्नलिखित उप-नियम अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:—