e-Gazette statutory gazette instrument · 10 Nov 2025
7438 GI/2025 (1) रजजस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx ऄसाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—ईप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY नागर जिमानन मंत्रालय ऄजधसूचना नइ ददल्ली, 7 निम्बर, 2025 सा.का.जन.829(ऄ).––िायुयान (दुघघटनाओं और…
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सी.जी.-डी.एल.-अ.-10112025-267513 CG-DL-E-10112025-267513
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 743] | नई दिल्ली, शुक्रवार, नवम्बर 7, 2025/ कार्तिक 16, 1947 |
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| No. 743] | NEW DELHI, FRIDAY, NOVEMBER 7, 2025/ KARTIKA 16, 1947 |
नागर विमानन मंत्रालय
अधिसूचना
नई दिल्ली, 7 नवम्बर, 2025
सा.का.नि.829(अ).—वायुयान (दुर्घटनाओं और घटनाओं का अन्वेषण) नियम, 2025 का प्रारूप, भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 (2024 का16) की धारा 34 की अपेक्षानुसार, भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग 2, खंड 3, उप-खंड (i), तारीख 14 मई, 2025 में भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय की अधिसूचना संख्या सा.का.नि. 310(अ) द्वारा उन सभी व्यक्तियों से जिनके इससे प्रभावित होने की संभावना हो, उक्त अधिसूचना की प्रतियां राजपत्र में उपलब्ध कराए जाने की तारीख़ से तीस दिनों की अवधि समाप्त होने से पूर्व, आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित करते हुए प्रकाशित किया गया था;
और, उक्त प्रारूप नियमों को 14 मई, 2025 को जनता के लिए उपलब्ध कराया गया था;
और, विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर उक्त प्रारूप नियमों पर जनता से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार कर लिया गया है;
अत:, अब, केंद्रीय सरकार भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 (2024 का 16) की धारा 11, धारा 12, धारा 19, धारा 30, धारा 32 और धारा 33 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् : –
(क) "दुर्घटना" से किसी विमान के प्रचालन से जुड़ी ऐसी घटना अभिप्रेत है जो, –
(i) किसी मानव युक्त वायुयान के मामले में, किसी व्यक्ति के उड़ान के इरादे से वायुयान पर सवार होने के समय से लेकर ऐसे सभी व्यक्तियों के उतरने के समय के बीच घटित हो; या
(ii) किसी मानव रहित वायुयान के मामले में, किसी वायुयान के उड़ान के उद्देश्य से चलने के लिए तैयार होने के समय से लेकर उड़ान के अंत में रुक जाने और प्रमुख प्रचालन प्रणाली के बंद किए जाने के बीच घटित हो, जिसमें –
(क) कोई व्यक्ति निम्न के परिणामस्वरूप घातक रूप से या गंभीर रूप से चोट-ग्रस्त हुआ हो,
(i) वायुयान में सवार होने से, या
(ii) वायुयान के किसी भी हिस्से जिसमे वायुयान से अलग हुए हिस्से भी शामिल है, के साथ सीधे संपर्क में आने से; या
(iii) जेट ब्लास्ट के सीधे संपर्क में आने से,
उन स्थितियों को छोड़कर, जब चोट प्राकृतिक कारणों से, स्वयं द्वारा उत्पन्न की गई हो या अन्य व्यक्तियों द्वारा उत्पन्न की गई हो, या चोट यात्रियों और कर्मीदल के लिए सामान्यतः उपलब्ध क्षेत्रों से बाहर लगी हो; या
(ख) वायुयान को ऐसी क्षति या संरचनागत विफलता हुई हो जिससे –
(i) वायुयान की संरचनागत शक्ति, कार्य निष्पादन या उड़ान संबंधी विशिष्टताएं प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हों; और
(ii) जिसके लिए प्रभावित पूर्जे की सामान्यतया बड़ी मरम्मत या बदले जाने की अपेक्षा हो, सिवाय इंजन की विफलता या क्षति के, जब यह क्षति सिंगल इंजन (जिसमें इसके कॉलिंग या सहायक पुर्जे शामिल हैं), प्रोपेलर, विंगटिप, एंटीना, प्रोब, वेन, टायर, ब्रेक, पहिये, फैरिंग, पैनल, लैंडिंग गियर डोर, विंड स्क्रीन, एयरक्राफ्ट स्कीन (जैसे छोटे डेंट या पंक्चर होल) या मेन रोटर ब्लेड, टेल रोटर ब्लेड, लैंडिंग गियर को हुई मामूली क्षति और ओले पड़ने या पक्षी के टकराने के परिणामस्वरूप हुई मामूली क्षति (जिसमें रेडोम में हुए छिद्र शामिल हैं) तक सीमित हो; या
(ग) वायुयान लापता हो गया हो या पूरी तरह से पहुँच से बाहर हो।
स्पष्टीकरण: इस खंड के प्रयोजनार्थ, यह स्पष्ट किया जाता है कि –
(1) वायुयान को हुई क्षति के निर्धारण हेतु दिशानिर्देश अनुसूची "ख" में दिए गए हैं।
(2) केवल उस मानव रहित वायुयान पर विचार किया जाएगा जिसे किसी देश द्वारा डिजाइन या परिचालन के लिए मंजूरी दी गई हो।
(3) किसी वायुयान को लापता तब माना जाएगा जब उसकी आधिकारिक तलाश को बंद कर दिया गया हो और उसका मलबा न मिला हो।
(ख) "दुर्घटना अन्वेषण प्राधिकरण" से किसी देश द्वारा नामनिर्दिष्ट प्राधिकरण अभिप्रेत है जिसे अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के उपाबंध 13 के सन्दर्भ में वायुयान दुर्घटनाओं और घटनाओं के अन्वेषण की जिम्मेदारी दी गई हो;
(ग) "प्रत्यायित प्रतिनिधि" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे किसी देश द्वारा उसकी अर्हता के आधार पर नामनिर्दिष्ट किया गया हो ताकि वह किसी अन्य देश द्वारा किए जाने वाले अन्वेषण में भाग ले सके और प्रत्यायित प्रतिनिधि सामान्यतः उस देश के दुर्घटना अन्वेषण प्राधिकरण से होगा;
(घ) "अधिनियम" से भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 (2024 का 16) अभिप्रेत है।
(ङ) "सलाहकार" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे किसी देश द्वारा उसकी अर्हता के आधार पर किसी अन्वेषण में अपने प्रत्यायित प्रतिनिधि को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से नियुक्त किया गया हो;
(च) "वायुयान" से ऐसी कोई मशीन अभिप्रेत है जो वायुमंडल में, भू-सतह के विरुद्ध वायु की प्रतिक्रियाओं से भिन्न, वायु की प्रतिक्रियाओं से सहायता प्राप्त कर सके;
(छ) "वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो या एएआईबी" से अधिनियम की धारा 7 के अनुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा गठित दुर्घटना अन्वेषण प्राधिकरण अभिप्रेत है;
(ज) "उपाबंध 13" से तारीख 7 दिसंबर, 1944 को शिकागो में हस्ताक्षरित अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन से संबंधित अभिसमय के उपाबंध 13 अभिप्रेत है;
(झ) "अपीलीय अधिकारी" से एएआईबी के ऐसे अधिकारी अभिप्रेत है जिसे नामनिर्दिष्ट अधिकारी द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा करने के लिए प्राधिकृत किया गया हो;
(ञ) "कारण" से ऐसी कार्रवाइयों, विलोपन, घटनाओं, स्थितियों, या उनके संयोजन अभिप्रेत है जिसके परिणामस्वरूप कोई दुर्घटना या घटना घटित हुई है किन्तु वे दोष समुद्देशित करने या प्रशासनिक, सिविल या आपराधिक दायित्व निर्धारित करने की कोटि में नहीं आते;
(ट) "सी2 लिंक" - से दूरस्थ रूप से संचालित विमान और दूरस्थ पायलट स्टेशन के बीच उड़ान प्रबंधन के उद्देश्य से जोड़ा गया डेटा अभिप्रेत है;
(ठ) "शिकागो अभिसमय" से तारीख 7 दिसंबर, 1944 को शिकागो में हस्ताक्षरित अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन से संबंधित अभिसमय अभिप्रेत है;
(ड) "सहायक घटक" से कार्रवाइयों, विलोपन, घटनाओं, स्थितियों, या उनके संयोजन अभिप्रेत है जिसकी समाप्ति, टाले जाने या अनुपस्थिति ने दुर्घटना या घटना के घटित होने की संभावना को कम कर दिया होगा, या दुर्घटनाओं या घटनाओं के परीणामों की तीव्रता को कम कर दिया होगा और सहायक घटकों की पहचान प्रशासनिक, सिविल या आपराधिक दायित्व के निर्धारण या गलती का संकेत नही करता है;
(ढ) "नामनिर्दिष्ट अधिकारी" से एएआईबी के अधिकारी अभिप्रेत है जिसे इन नियमों के उल्लंघन की गम्भीरता स्तर के आधार पर अनुसूची 'ग' की सारणी-1 और सारणी-2 मे विनिर्दिष्ट उपबंधों के अनुसार किसी व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध उचित कार्यवाही करने के लिए प्राधिकृत किया गया हो;
(ण) "महानिदेशक, नागर विमानन महानिदेशालय" से महानिदेशक अभिप्रेत है जो नागर विमानन महानिदेशालय का प्रमुख होगा;
(त) "महानिदेशक, वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो" से महानिदेशक अभिप्रेत है जो वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो का प्रमुख होगा;
(थ) "अंतिम प्रारूप रिपोर्ट" से नियम 14 के उप-नियम (1) के अधीन परामर्श के लिए किसी देश को अग्रेषण के लिए, नियम (11) या नियम (12) के अधीन नियुक्त अन्वेषकों द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट अभिप्रेत है;
(द) "घातक चोट" से ऐसी चोट अभिप्रेत है जो किसी व्यक्ति को किसी दुर्घटना में लगी हो, जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटना के तीस दिन के भीतर उसकी मृत्यु हो गई हो;
(ध) "प्लाईट रिकार्डर" से वायुयान में दुर्घटना या घटना के अन्वेषण में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से संस्थापित किसी प्रकार का रिकार्डर अभिप्रेत है;
(न) "आईसीएओ" से 07 दिसंबर, 1944 को शिकागो में हस्ताक्षरित अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन से संबंधित अभिसमय के अधीन बनाया गया अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन अभिप्रेत है;
(प) "घटना" से दुर्घटना को छोड़कर, किसी वायुयान के प्रचालन से जुड़ी कोई ऐसी घटना अभिप्रेत है जिसके प्रचालन से सुरक्षा प्रभावित हुई हो या हो सकती हो;
(फ) "अन्वेषण" से दुर्घटना की रोकथाम के प्रयोजनार्थ आयोजित ऐसी प्रक्रिया अभिप्रेत है, जिसमें कारणों, सहायक घटकों के निर्धारण सहित सूचना एकत्रण और विश्लेषण, निष्कर्ष निकालने और जहाँ उपयुक्त हो, रिपोर्ट के रूप में सुरक्षा संबंधी सिफारिशें किया जाना शामिल है;
(ब) "अन्वेषक" से वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो द्वारा नियम 11 के अधीन दुर्घटना, अथवा किसी गंभीर घटना का अन्वेषण करने के लिए प्रभारी अन्वेषक के रूप में नियुक्त, अथवा नियम 12 के अधीन औपचारिक अन्वेषण के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा, अथवा ब्यूरो द्वारा नियम 9 के उप-नियम (1) अथवा नियम 7 के उप-नियम (2) के अधीन प्राथमिक अन्वेषण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति; अथवा नियम 13 के अधीन महानिदेशक नागर विमानन महानिदेशालय द्वारा नियुक्त प्रभारी अन्वेषक अभिप्रेत है;
(भ) "प्रभारी अन्वेषक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे उसकी अर्हता के आधार पर किसी अन्वेषण के संगठन, संचालन और नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
परन्तु इस खंड में कुछ भी नियम 12 में निर्दिष्ट कोर्ट या अन्य निकाय को प्रभारी अन्वेषक के कार्य सौंपने से नहीं रोकेगा;
(म) "अधिकतम मास" से अधिकतम प्रमाणित टेक-ऑफ़ मास अभिप्रेत है;
(य) "गुमशुदा वायुयान" से जब आधिकारिक खोज समाप्त हो गई हो और वायुयान के मलबे को ढूँढा नहीं जा सका हो, अभिप्रेत है;
(यक) "घटना" से किसी सुरक्षा-संबंधी घटना जो जोखिम में डालती है या जिसे यदि सुधारा अथवा ध्यान नहीं दिया जाए तो किसी वायुयान, उसके यात्रियों या किसी अन्य व्यक्ति को जोखिम में डाल देगी, इसमें घटना, गंभीर घटना और दुर्घटना शामिल है, अभिप्रेत है;
(यख) "प्रचालक" से किसी वायुयान के प्रचालन में संलिप्त या संलिप्त होने के लिए प्रस्ताव करने वाले किसी व्यक्ति या संगठन या उद्यम अभिप्रेत है;
(यग) "प्रारंभिक रिपोर्ट" से अन्वेषण की प्रारंभिक अवस्थाओं के दौरान प्राप्त किए गए आंकड़ों के त्वरित प्रसारण के लिए प्रयुक्त संचार साधन अभिप्रेत है;
(यघ) "दूरस्थ पायलट स्टेशन" से दूरस्थ रूप से संचालित विमान प्रणाली का वह घटक अभिप्रेत है जिसमें दूरस्थ रूप से संचालित विमान को संचालित करने के लिए उपयोग किए जाने वाला उपस्कर शामिल होता है;
(यङ) "दूरस्थ रूप से संचालित विमान" से ऐसा मानव रहित विमान अभिप्रेत है जिसे दूरस्थ पायलट स्टेशन से संचालित किया जाता है;
(यच) "दूरस्थ रूप से संचालित विमान प्रणाली" से एक दूरस्थ रूप से संचालित विमान, उससे संबंधित दूरस्थ पायलट स्टेशन, आवश्यक सी2 लिंक और टाइप डिजाइन में निर्दिष्ट कोई अन्य घटकों अभिप्रेत है;
(यछ) "सुरक्षा सिफारिश" से, –
(i) किसी अन्वेषण से व्युत्पन्न जानकारी के आधार पर दुर्घटनाओं या घटनाओं को रोकने के आशय से किसी दुर्घटना अन्वेषण प्राधिकरण द्वारा किए गए प्रस्ताव अभिप्रेत है और जिसमें किसी दुर्घटना या घटना के लिए आरोप या दायित्व की धारणा बनाने का उद्देश्य न हो; या
(ii) विविध स्रोतों और सुरक्षा अध्ययनों से प्राप्त सिफारिशें अभिप्रेत है;
(यज) "वैश्विक प्रतिष्ठानों की संरक्षा संबंधी सिफारिश" से प्रणालीगत कमी से संबंधी संरक्षा सिफारिश अभिप्रेत है, जिनके किसी वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण परिणामों सहित पुन: होने की संभावना हो और सुरक्षा में सुधार के लिए समय पर कार्रवाई अपेक्षित हो;
(यझ) "अनुसूची" से इन नियमों के साथ संलग्न अनुसूची अभिप्रेत है;
(यञ) "गंभीर घटना" से ऐसी घटना अभिप्रेत है, जिसमें ऐसी परिस्थितियां शामिल हों जो यह इंगित कराती हों कि किसी दुर्घटना की अत्यधिक संभावना थी और यह ऐसे वायुयान के प्रचालन से संबंधित हो जो –
(i) किसी मानव युक्त वायुयान के मामले में, किसी व्यक्ति के उड़ान के इरादे से वायुयान पर सवार होने के समय से लेकर ऐसे सभी व्यक्तियों के उतरने के समय के बीच घटित हो; या
(ii) किसी मानव रहित वायुयान के मामले में, किसी वायुयान के उड़ान के उद्देश्य से चलने के लिए तैयार होने के समय से लेकर उड़ान के अंत में रुक जाने और प्रमुख प्रचालन प्रणाली के बंद किए जाने के बीच घटित हो, जिसमें-
स्पष्टीकरण- संदेह दूर करने हेतु यह स्पष्ट किया जाता है कि गंभीर घटनाओं के उदाहरण अनुसूची क में निर्दिष्ट हैं।
(यट) "गंभीर चोट" से किसी घटना में व्यक्ति द्वारा लगी चोट अभिप्रेत है, जिसमें –
(i) चोट लगने की स्थिति के सात दिन के भीतर 48 घंटें से अधिक समय के लिए अस्पताल में रहना अपेक्षित हो; या
(ii) जिसके परिणामस्वरूप कोई हड्डी टूट गई हो (अँगु parseFloatलियों, अंगूठों या नाक के मामूली फ्रैक्चर को छोड़कर); या
(iii) ऐसी चोटें लगी आई हों जिनमें रक्तस्राव, स्नायु, मांसपेशी या नस को अत्यधिक क्षति हुई हो; या
(iv) किसी आन्तरिक अंग को चोट लगी हो; या
(v) दूसरी या तीसरी डिग्री का ज्वलन, या पांच प्रतिशत से अधिक प्रभावित करने वाले ज्वलन शामिल हों; या
(vi) जिसमें संक्रामक वस्तुओं या घातक विकिरण से प्रमाणित संक्रमण शामिल हो;
(यठ) "डिजाइन का देश" से वह देश अभिप्रेत है जिसके अधिकार क्षेत्र में वायुयान टाइप डिजाइन के लिए उत्तरदायी संगठन आता हो;
(यड) "विनिर्माता देश" से वह देश अभिप्रेत है जिसके अधिकार क्षेत्र में वायुयान, दूरस्थ पायलट स्टेशन, इंजन या प्रोपेलर की फाइनल असेंबली के लिए उत्तरदायी संगठन आता हो;
(यढ) "घटना संबंधी देश" से वह देश अभिप्रेत है जिसके अधिकार क्षेत्र में कोई दुर्घटना या घटना घटी हो;
(यण) "प्रचालक का देश" से वह देश अभिप्रेत है जिसमें प्रचालक का मुख्य कारोबार स्थल स्थित हो या, यदि ऐसा कोई कारोबार स्थल न हो तो प्रचालक का स्थाई निवास हो;
(यत) "रजिस्ट्री का देश" से वह देश अभिप्रेत है जिसके रजिस्टर में वायुयान की प्रविष्टि हुई हो;
स्पष्टीकरण: राष्ट्रीय आधार से भिन्न किसी अंतर्राष्ट्रीय संचालन एजेंसी के वायुयान की रजिस्ट्री के मामले में, एजेंसी को गठित करने वाले देश संयुक्त रूप से और भिन्न-भिन्न रूप से उन दायित्वों का निर्वहन करेंगे जो उपाबंध 13 के अधीन रजिस्ट्री देश से जुड़े हैं।
(यथ) "देश के सुरक्षा कार्यक्रम" से सुरक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से विनियमों और गतिविधियों का एकीकृत सेट अभिप्रेत है;
(यद) "यूटीसी" से युनिवर्सल टाईम कोऑर्डिनेटेड अभिप्रेत है;
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं है किन्तु भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 (2024 का 16) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उनके इस अधिनियम में है।
(क) इसकी सूचना अपने पास उपलब्ध तीव्रतम संचार साधनों द्वारा वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो और नागर विमानन महानिदेशालय को प्रेषित करेगा; और
(ख) भारत में घटित हुई किसी दुर्घटना या गंभीर घटना के मामले में, उस दुर्घटना अथवा गंभीर घटना तथा उसके घटित होने के स्थान की सूचना सम्बन्धित क्षेत्र के जिलाधीश और निकटतम थाने के प्रभारी को देगा :
बशर्ते कि मानवरहित विमान के मामले में, दूरस्थ मुख्य पायलट उपर्युक्त अनुसार घटना की सूचना अधिसूचित करेगा।
(2) अधिसूचना सहज भाषा में होगी और उसमें निम्नलिखित जानकारी में से जितनी तुरंत उपलब्ध हो सके उतनी जानकारी शामिल होगी, अर्थात् :-
(क) दुर्घटनाओं की पहचान के लिए संक्षिप्त अक्षर ए.सी.सी.आई.डी. (ACCID) और घटनाओं के लिए आई.एन.सी.आई.डी. (INCID), गंभीर घटनाओं के लिए एस.आई.एन.सी.आई.डी. (SINCID);
(ख) वायुयान के निर्माता, माडल, राष्ट्रीयता और रजिस्ट्री चिन्ह तथा वायुयान का क्रमांक;
(ग) वायुयान के स्वामी, प्रचालक या उसे भाड़े पर लेने वाले, यदि कोई हो, का नाम;
(घ) मुख्य पायलट की योग्यता और कर्मीदल तथा यात्रियों की राष्ट्रीयता;
(ङ) दुर्घटना या गंभीर घटना की तारीख और समय स्थानीय समय या यूटीसी में;
(च) प्रस्थान का अंतिम बिंदु और वायुयान की नियत लैंडिंग स्थल;
(छ) आसानी से परिभाषित किसी भौगोलिक बिंदु और अक्षांश और देशांतर की दृष्टि से वायुयान की अवस्थिति;
(ज) वायुयान में सवार मृत और गंभीर रूप से घायल कर्मीदल और यात्रियों की संख्या, अन्य मृत और गंभीर रूप से घायलों की संख्या;
(झ) दुर्घटना या गंभीर घटना का विवरण और जहाँ तक ज्ञात हो वायुयान को हुई क्षति की सीमा;
(ञ) दुर्घटना या गंभीर घटना के क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताएं और साथ ही स्थल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों या विशेष आवश्यकताओं का कोई संकेत; और
(ट) वायुयान में उड़ान के दौरान खतरनाक वस्तुओं की विद्यमानता और विवरण, किन्तु पूर्ण सूचना के अभाव में अधिसूचना में विलम्ब नहीं किया जाना चाहिए।
(3) यदि उप-नियम (2) में निर्दिष्ट ब्यौरा या अन्य ज्ञात सुसंगत सूचना छूट जाए तो ऐसी सूचना भी यथासंभव शीघ्र प्रेषित की जाएगी।
(4) उप- नियम (2) के अधीन अपेक्षित अधिसूचना निम्न के द्वारा वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो को भी प्रस्तुत की जाएगी –
(क) हवाईअड्डा प्रचालक;
(ख) संबंधित विमान यातायात सेवा प्रभारी;
(ग) महानिदेशक, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), जहाँ कहीं लागू हो।
(5) वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो भारतीय सीमा या भारत की सीमा से परे समुद्री वायु क्षेत्र में दुर्घटना या गंभीर घटना के तथ्यों को उप-नियम (2) में निर्दिष्ट अधिकतम उपलब्ध जानकारी के अविलम्ब तथा उपलब्ध सर्वाधिक उपयुक्त एवं तीव्रतम साधनों द्वारा निम्न को सूचित करेगा –
(क) रजिस्ट्री देश;
(ख) प्रचालक देश;
(ग) डिजाइन देश;
(घ) विनिर्माता देश; और
(ङ) अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ), जब वायुयान में 2,250 किग्रा से अधिक अधिकतम मास शामिल है या वह टर्बोजेट – पवार युक्त वायुयान है।
(6) वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो उप- नियम (5) के अनुसरण में सूचना को अधिसूचित करते समय निम्नलिखित सूचना को भी जोड़ेगा, अर्थात् :-
(क) यह संकेत कि वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो द्वारा किस सीमा तक जाँच की जाएगी या वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अन्य देश को प्रत्यायोजित करना प्रस्तावित है; और
(ख) मूल प्राधिकरण की पहचान और प्रभारी अन्वेषणकर्ता या नियम 12 में निर्दिष्ट कोर्ट से संपर्क करने का तरीका, जैसा भी मामला हो;
(7) यदि वह देश जहां दुर्घटना हुई है, भारतीय रजिस्ट्री वायुयान या भारतीय प्रचालक द्वारा प्रचलित वायुयान के साथ हुए गंभीर घटना या दुर्घटना से अवगत नहीं है, तो वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो ऐसी गंभीर घटना या दुर्घटना की सूचना की अधिसूचना डिजाइन देश, विनिर्माता देश और घटना वाले देश को अग्रेषित करेगा।
(क) महानिदेशक, वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो उस दुर्घटना की परिस्थितियों का अन्वेषण आरंभ करेगा और अन्वेषण करने के लिए उत्तरदायी होगा;
(ख) महानिदेशक, वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो उस गंभीर घटना की परिस्थितियों का अन्वेषण आरंभ करेगा जब संबंधित वायुयान का अधिकतम भार 2250 किलोग्राम से अधिक हो या टर्बो-जेट विमान हो।
(ग) महानिदेशक, नागर विमानन महानिदेशालय खंड (ख) के अधीन न आने वाले वायुयान से संबंधित सभी घटनाओं और गंभीर घटनाओं की परिस्थितियों का अन्वेषण आरंभ करेगा;
(घ) केन्द्रीय सरकार किसी भी भारतीय रजिस्ट्री वायुयान की किसी घटना की परिस्थितियों का औपचारिक अन्वेषण कर सकती है, यदि उन्हें इस प्रकार के अन्वेषण करना उचित प्रतीत होता है।
(2) उप–नियम (1) के खंड (ग) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ वायुयान अन्वेषण ब्यूरो को यह प्रतीत होता है कि उक्त खंड (ग) के अधीन आने वाली किसी भी गंभीर घटना की परिस्थितियों का अन्वेषण कराना आवश्यक या उचित है, तो वह आदेश द्वारा किसी भी वायुयान की गंभीर घटना की परिस्थितियों का अन्वेषण आरंभ कराएगा।
(3) वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो द्वारा किसी भी घटना का दुर्घटना या गंभीर घटना या घटना के रूप स्पष्टीकरण अंतिम और बाध्यकारी होगा।
(4) यदि भारत में रजिस्ट्रीकृत वायुयान की किसी ऐसे स्थल पर दुर्घटना या गंभीर घटना हो जाती है, जो किसी देश का राज्य क्षेत्र नहीं है, तो वायुयान दुर्घटना ब्यूरो उस दुर्घटना या गंभीर घटना की परिस्थितियों का अन्वेषण कराएगा तथा अन्वेषण करवाने के लिए उत्तरदायी होगा।
(5) यदि भारत में रजिस्ट्रीकृत न किए गए या किसी भारतीय प्रचालक द्वारा प्रचालित न किए जा रहे किसी वायुयान की अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक क्षेत्र में दुर्घटना होती है और भारत दुर्घटना के स्थल का निकटतम देश है, तो वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो रजिस्ट्री के देश को अन्वेषण प्रारंभ करने की सलाह देगा और ऐसी स्थिति में वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो यथासंभव सीमा तक सहायता प्रदान कराएगा और इसी प्रकार रजिस्ट्री के देश द्वारा किए गए अनुरोधों का प्रत्युत्तर देगा।
6. अन्वेषण में भागीदारी. — (1) यदि वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो नियम 5 के अनुसार किसी दुर्घटना या किसी गंभीर घटना का अन्वेषण आरंभ कर चुका है, तो उन प्रत्यायित प्रतिनिधियों को अन्वेषण में भाग लेने की अनुमति प्रदान की जाएगी, जिनकी नियुक्ति निम्नलिखित देशों द्वारा की जाती है, अर्थात : –
(क) रजिस्ट्री देश;
(ख) प्रचालक देश;
(ग) परिकल्पना देश;
(घ) विनिर्माता देश;
(2) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट देश अपने प्रत्यायित प्रतिनिधियों की सहायता करने के लिए एक या एक से अधिक सलाहकारों की नियुक्ति के भी हकदार होंगे।
(3) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट देशों के उपाबन्ध 13 के अधीन अनुबद्ध मानकों के अनुसार अधिकार एवं हक होंगे।
(4) कोई देश जो दुर्घटना के कारण अपने नागरिकों के हताहत होने अथवा गंभीर रूप से घायल होने के कारण अन्वेषण में विशेष रुचि रखता है, वह विशेषज्ञ को नियुक्त करने का हक़दार होगा जिसे उपाबंध 13 के अधीन अनुबद्ध मानकों के अनुसार अधिकार एवं हक होंगे।
(5) कोई अन्य देश, जो उप-नियम (1) के खंड (क) से (घ) में सूचीबद्ध न हो, अनुरोध किए जाने पर वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो को सूचना, सुविधाएं या विशेषज्ञ उपलब्ध कराता है, तो वह भी अन्वेषण में भाग लेने हेतु प्रत्यायित प्रतिनिधि की नियुक्ति करने का हकदार होगा जिसे उपाबंध 13 के अधीन अनुबद्ध मानकों के अनुसार अधिकार एवं हक होंगे।
(6) वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो किसी अन्य देश के राज्य क्षेत्र में भारतीय रजिस्ट्रीकृत वायुयान की किसी दुर्घटना या गंभीर घटना की सूचना की अधिसूचना प्राप्त होने पर, अन्वेषण में भाग लेने के लिए प्रत्यायित प्रतिनिधि और सलाहकार की नियुक्ति कर सकेगा और इसकी सूचना घटना वाले देश को देगा।
(7) यदि वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो के पास किसी दुर्घटना या घटना में शामिल विमान के फ्लाइट रिकॉर्डर से संबंधित कोई डेटा उपलब्ध है, तो वह :-
(क) बिना किसी विलंब के, उस डेटा को उस देश को प्रदान करेगा जो जांच का संचालन कर रहा है; और
(ख) उस डेटा को तब तक प्रकट नहीं करेगा जब तक कि जांच का संचालन करने वाले देश से स्पष्ट सहमति प्राप्त न हो।