रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
सी.जी.-डी.एल.-अ.-25112025-267955
CG-DL-E-25112025-267955
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i)
PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 779] नई दिल्ली, मंगलवार, नवम्बर 25, 2025/अग्रहायण 4, 1947
No. 779] NEW DELHI, TUESDAY, NOVEMBER 25, 2025/AGRAHAYANA 4, 1947
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
(उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 25 नवम्बर, 2025
सा.का.नि. 865(अ).— पेटेंट नियम, 2003 को और संशोधित करने के लिए पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) की धारा 159 की उप-धारा (3) की अपेक्षानुसार, कतिपय नियमों के मसौदे को, भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग की अधिसूचना के माध्यम से सां.का.नि. 475 (अ) दिनांक 16 जुलाई, 2025 के द्वारा भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग II, खंड 3, उप-खंड (i) में प्रकाशित किया गया था, जिसमें ऐसे सभी व्यक्तियों से, जिनके इससे प्रभावित होने की संभावना है, उक्त अधिसूचना को प्रकाशित करने वाले राजपत्र की प्रतियां, आम लोगों को उपलब्ध कराए जाने की तारीख से, तीस दिन की अवधि समाप्त होने से पूर्व आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए थे;
और जबकि, उक्त राजपत्र की प्रतियां आम लोगों को 16 जुलाई, 2025 को उपलब्ध करा दी गई थीं;
और जबकि, उक्त मसौदा नियमों के संबंध में आम लोगों से प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर केंद्र सरकार द्वारा विचार किया गया है;
अतः अब, पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) की धारा 159 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतदद्वारा पेटेंट नियम, 2003 में और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, नामतः-
- संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ :- (1) इन नियमों को पेटेंट (संशोधन) नियम, 2025 कहा जाएगा।
- (2) ये नियम आधिकारिक राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रभावी होंगे।
- पेटेंट नियम, 2003 (इसके बाद इन्हें मूल नियम कहा गया है) में अध्याय XIVक को निम्नलिखित अध्याय से प्रतिस्थापित किया जाएगा अर्थात्:-
अध्याय XIV-क
शास्ति और अपील का न्यायनिर्णयन
‘107क परिभाषाएं – (1) इस अध्याय में, जब तक कि अन्यथा संदर्भ अपेक्षित न हो-
- (क) "न्यायनिर्णयन अधिकारी" का आशय अधिनियम की धारा 124क के तहत अधिकृत अधिकारी से है;
- (ख) "अपीलकर्ता" का आशय ऐसे व्यक्ति से है, जो न्यायनिर्णयन अधिकारी के आदेश से असंतुष्ट है और अधिनियम की धारा 124ख की उप-धारा (1) के तहत अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील करता है;
- (ग) "अपीलीय प्राधिकारी" का आशय अधिनियम की धारा 124ख की उपधारा(1) के तहत अधिकृत अधिकारी से है।
107ख शिकायत — कोई भी व्यक्ति अधिनियम की धारा 120, 122 और 123 के तहत किए गए किसी उल्लंघन के संबंध में न्यायनिर्णयन अधिकारी के समक्ष इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रपत्र-32 में शिकायत दर्ज करा सकता है।
107ग जांच करना – (1) अधिनियम की धारा 124क के तहत इस न्यायनिर्णयन के प्रयोजन के लिए कि क्या किसी व्यक्ति ने उक्त धारा में यथाविनिर्दिष्ट कोई उल्लंघन किया है, न्यायनिर्णयन अधिकारी ऐसे व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस जारी करेगा, जिसमें उसे नोटिस में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, जो कि तामील की तारीख से सात दिन की अवधि से कम न हो, कारण बताना अपेक्षित होगा कि उसके विरुद्ध जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए।
- (2) उप-नियम (1) के तहत जारी प्रत्येक नोटिस में किए गए कथित उल्लंघन की प्रकृति का उल्लेख किया जाएगा।
- (3) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए कारण, यदि कोई हो, पर विचार करने के बाद, यदि न्यायनिर्णयन अधिकारी की राय है कि जांच की जानी चाहिए, तो वह उस व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए या उसके द्वारा विधिवत रूप से अधिकृत अपने वकील के माध्यम से नोटिस में यथानिर्धारित तारीख को उपस्थिति होने हेतु एक नोटिस जारी करेगा।
- (4) नियत तारीख को, न्यायनिर्णयन अधिकारी, उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गई है, उसके द्वारा किए गए उल्लंघन और उस अधिनियम के उपबंधों, जिसके संबंध में उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, के बारे में स्पष्ट रूप से समझाएगा।
- (5) तत्पश्चात न्यायनिर्णयन अधिकारी द्वारा, उप-नियम (3) में निर्दिष्ट उस व्यक्ति को ऐसे दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा, जिन्हें वह जांच के लिए प्रासंगिक समझे और यदि आवश्यक हो, तो सुनवाई को किसी भावी तारीख तक स्थगित किया जा सकता है।
- (6) इस नियम के अधीन जांच करते समय न्यायनिर्णयन अधिकारी, आवश्यक समझे जाने पर साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए, जो उसकी राय में जांच की विषय-वस्तु के लिए उपयोगी या संगत हो सकता है, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित कर सकता है।
- (7) यदि कोई व्यक्ति इस नियम के तहत यथानिर्दिष्ट रूप में न्यायनिर्णयन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने में विफल रहता है, उपेक्षा करता है या उपस्थित होने से इनकार करता है, तो न्यायनिर्णयन अधिकारी ऐसे व्यक्ति की अनुपस्थिति में, ऐसा करने के कारणों को दर्ज करने के बाद, जांच को आगे बढ़ा सकता है।
- (8) यदि, न्यायनिर्णयन अधिकारी अपने समक्ष प्रस्तुत किए गए साक्ष्य पर विचार करने पर, संतुष्ट हो जाता है कि व्यक्ति ने उल्लंघन किया है, तो वह, लिखित आदेश द्वारा, अधिनियम के तहत, ऐसी शास्ति लगा सकता है, जो वह उचित समझे।
- (9) इस नियम के तहत किए गए प्रत्येक आदेश में अधिनियम के उन प्रावधानों को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिनके संबंध में उल्लंघन किया गया है और शास्ति लगाने के कारणों को शामिल किया जाएगा।
- (10) इस नियम के तहत किए गए आदेश की एक प्रति और कार्यवाही की अन्य सभी प्रतियां उस व्यक्ति को बिना किसी शुल्क के दी जाएंगी, जिसके विरुद्ध आदेश पारित किया गया है।
- (11) न्यायनिर्णयन अधिकारी, उप-नियम (3) के अधीन नोटिस जारी करने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर जांच पूरी करेगा और इस नियम के अधीन आदेश पारित करेगा।
- (12) न्यायनिर्णयन अधिकारी, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (2023 का 47) के प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होगा।