IRDAI regulation F. No. IRDAI/Reg/2/216/2026 · 30 Mar 2026
Official title
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्य ) (संशोधन) विनियम, 2026 / IRDAI (Actuarial, Finance and Investment Functions of Insurers), (Amendment) Regulations, 2026
Summary
Check the official recordThe IRDAI has amended the 2024 regulations to mandate the preparation and reporting of financial statements in accordance with Indian Accounting Standards (Ind AS). All insurers, including life, general, health, and reinsurers, are affected. The regulations introduce Schedule IIA, detailing Ind AS finance functions, disclosure requirements, and policy positions to align with the Insurance Act, 1938. Insurers unable to comply may request forbearance from the Competent Authority by April 30, 2026, for a one-year period, subject to a board-approved transition roadmap. During the transition, insurers must submit quarterly financial information and maintain parallel reporting. The regulations also establish a Joint Expert Group to address implementation issues and require independent validation of processes during the first year.
What you must do
Key dates
Who is affected
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र The Gazette of India
सी.जी.-टी.एल.-अ.-30032026-271416 CG-TL-E-30032026-271416
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 225] नई दिल्ली, सोमवार, मार्च 30, 2026/चैत्र 9, 1948 No. 225] NEW DELHI, MONDAY, MARCH 30, 2026/CHAITRA 9, 1948
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिसूचना हैदराबाद, 30 मार्च, 2026
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्य) (संशोधन) विनियम, 2026
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/2/216/2026.–– बीमा अधिनियम, 1938(1938 का 4) की धारा 114ए की उप-धारा (2) के खंड (एफ), (जी), (एच), (आई), (आईए), (आईबी), (वाई), (जेड), (जेडए), (जेडडी) और (जेडएबी), धाराओं 11, 13, 20, 27, 28, धारा 29 की उप-धारा (3) के खंड (ए), 49, 64वी, और 64वीए तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 14 और 26 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, आईआरडीएआई (बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्य) विनियम, 2024 का संशोधन करने के लिए इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभः (1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्य) (संशोधन) विनियम, 2026 कहलाएंगे। (2) ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से अथवा 1 अप्रैल 2026 से, जो भी बाद में हो, प्रवृत्त होंगे।
2. उद्देश्यः इन विनियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि: (1) वित्तीय विवरण बीमाकर्ता की परिस्थिति का एक सही और उचित अवलोकन उपलब्ध कराने के लिए प्रयोज्य भारतीय लेखांकन मानकों (इंड एएस), सिद्धांतों और नीतियों के अनुसार तैयार किये जाएं और रिपोर्ट किये जाएं।
3. अध्याय - II में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्य) विनियम, 2024 के विनियम 6 में उप-विनियम (2) के बाद, निम्नलिखित को निविष्ट किया जाएगा, अर्थात् :- “(2क), अनुसूची – II-क: इंड एएस वित्तीय कार्य”
4. अध्याय – II में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्त और निवेश कार्य) विनियम, 2024 के विनियम 6 के बाद, निम्नलिखित को निविष्ट किया जाएगा, अर्थात् :- “6क. इंड एएस वित्तीय विवरण तैयार करने के लिए स्थगन (फारबेअरन्स) का प्रयोग करने की शक्ति (1) सक्षम प्राधिकारी बीमाकर्ता की तैयारी, परिवर्तन की जटिलता और संगत समझे जानेवाले विचारयोग्य अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए, बीमाकर्ता के संबंध में भारतीय लेखांकन मानकों का अनुपालन करते हुए वित्तीय विवरण तैयार करने और प्रस्तुत करने के लिए असमर्थ है, स्थगन का प्रयोग कर सकता है। इस प्रकार का स्थगन सक्षम प्राधिकारी के द्वारा एक वर्ष के लिए प्रदान किया जा सकता है।
बशर्ते कि स्थगन के लिए अनुरोध 30 अप्रैल, 2026 को या उसके पहले किया जाएगा। (2) सक्षम प्राधिकारी बीमाकर्ता की प्रणालियों, प्रक्रियाओं, और अधिवासन ढांचे का ध्यान रखते हुए, ऐसे बीमाकर्ता को इंड एएस के कार्यान्वयन के लिए मासिक तैयारियों के विवरण से युक्त बोर्ड-अनुमोदित कार्य योजना के प्रस्तुतीकरण के अधीन, एक वर्ष के लिए इन विनियमों की अनुसूची II के अनुसार वित्तीय विवरण तैयार करना जारी रखने के लिए ऐसे बीमाकर्ता को अनुमति दे सकता है। (3) बीमाकर्ता ऐसी कार्य योजना के भाग के रूप में समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए मीलपत्थरों, प्रणाली के लिए सामजस्यता और डेटा की तैयारी, बीमांकिक और वित्त कार्य तत्परता और अधिवासन ढांचे की स्थिति सहित, इंड एएस के परिवर्तन के लिए एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करेगा। (4) उस अवधि के दौरान जिसके लिए स्थगन प्रदान किया जाता है, बीमाकर्ता एक तिमाही आधार पर इन विनियमों की अनुसूची-IIक के अनुसार वित्तीय सूचना भी तैयार करेगा और प्राधिकरण को प्रस्तुत करेगा। (5) इस विनियम के अंतर्गत स्थगन का प्रदाय इस शर्त के अधीन होगा कि बीमाकर्ता सक्षम प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट रूप में समय-सीमा के अंदर इंड एएस का संपूर्ण अनुपालन प्राप्त करेगा।