IRDAI regulation F. No. IRDAI/Reg/ 8/222/2026 · 31 Jul 2026
Official title
IRDAI (Insurance Intermediaries) (Amendment) Regulations, 2026
Summary
Check the official recordThe Insurance Regulatory and Development Authority of India amends regulations for insurance intermediaries to align with the Sabka Bima Sabki Raksha Act 2025 and the Indian Insurance Companies Foreign Investment Amendment Rules 2025. The update introduces a new registration framework, mandates annual fee payments, and requires specific disclosures for intermediaries with foreign majority shareholding or high commission earnings. It establishes training requirements for principal officers and specified persons. Existing intermediaries must apply for fresh registration certificates by 31 January 2027, with a late submission window until 31 March 2027. The regulations standardize record-keeping, policy tagging, and procedures for registration suspension or cancellation due to non-payment of fees. Entities must remit annual fees electronically before 31 January of the preceding financial year.
What you must do
Key dates
Who is affected
Thresholds
Exceptions
If you do not comply
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
The Gazette of India
सी.जी.-टी.एल.-अ.-30072026-274988 CG-TL-E-30072026-274988
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 30 जुलाई, 2026
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा मध्यवर्ती) (संशोधन) विनियम, 2026
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./आरईजी/ 8/222/2026.—बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धाराओं 42डी और 42ई, धारा 2सी की उप-धाराओं (5) और (6) के साथ पठित धारा 114ए की उप-धारा (2) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 14 और 26 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात्: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभः
1.1 ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा मध्यवर्ती) (संशोधन) विनियम, 2026 कहलाएँगे।
1.2 ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. उद्देश्यः
2.1 इन विनियमों का उद्देश्य बीमा मध्यवर्तियों को नियंत्रित करनेवाले विनियामक ढाँचे को सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधियों का संशोधन) अधिनियम, 2025 तथा भारतीय बीमा कंपनियाँ (विदेशी निवेश) संशोधन नियम, 2025 के उपबंधों के साथ संयोजित करना है;
2.2 बीमा मध्यवर्तियों के आचरण में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता में वृद्धि करना और पालिसीधारकों के हितों का संरक्षण करना।
अध्याय I
आईआरडीएआई (कारपोरेट एजेंटों का पंजीकरण) विनियम, 2015 का संशोधन
(1) विनियम 4 में, उप-विनियम (3) को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“उप-विनियम (2) के अंतर्गत आवेदन के साथ अनुसूची VI में विनिर्दिष्ट रूप में आवेदन शुल्क अदा किया जाएगा।”
(2) विनियम 7, उप-विनियम (3) में,
क) खंड (ग) छोड़ दिया जाएगा।
ख) खंड (घ) छोड़ दिया जाएगा।
ग) खंड (ङ) छोड़ दिया जाएगा।
(3) विनियम 9 में, उप-विनियम (3) को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“यदि इन विनियमों के अधीन जारी किया गया अथवा इन विनियमों की अधिसूचना से पहले प्रचलन में प्रवृत्त विनियमों के अधीन जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र निरस्त या अभ्यर्पित किया जाता है, अथवा जहाँ इन विनियमों के अधीन पंजीकरण हेतु प्रस्तुत आवेदन, अथवा वर्तमान कारपोरेट एजेंट द्वारा नये पंजीकरण प्रमाणपत्र के निर्गम के लिए प्रस्तुत आवेदन उसमें विनिर्दिष्ट कारणों से अस्वीकृत किया जाता है, वहाँ आवेदक ऐसे निरसन, अभ्यर्पण, या अस्वीकरण, जैसी स्थिति हो, की प्रभावी तारीख से एक वर्ष की समाप्ति के बाद ही नया आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
प्राधिकरण ऐसे नये आवेदन पर विनियम 7 के अनुसार उसके गुण-दोष के आधार पर विचार कर सकता है।
बशर्ते कि जहाँ पंजीकरण अनुसूची V के खंड III के उप-खंड (2) के अधीन निरस्त किया गया है, वहाँ इस विनियम के अंतर्गत एक वर्ष की प्रतीक्षा अवधि की अपेक्षा लागू नहीं होगी।”
(4) विनियम 10 को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“पंजीकरण की विधिमान्यता — एक बार जारी किया गया पंजीकरण अनुसूची VI में यथाविनिर्दिष्ट वापस न करने योग्य वार्षिक शुल्क के भुगतान के अधीन तक तक प्रचलन में होगा जब तक वह प्राधिकरण द्वारा निलंबित या निरस्त नहीं किया जाता अथवा कारपोरेट एजेंट के द्वारा अभ्यर्पित नहीं किया जाता। ।”
(5) विनियम 11 को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“वर्तमान कारपोरेट एजेंटों को नये प्रमाणपत्र के निर्गम के लिए प्रक्रिया
(1) इन संशोधन विनियमों के प्रारंभ होने से पहले तीन वर्ष की विधिमान्यता अवधि के साथ पंजीकरण प्रदत्त कारपोरेट एजेंट, 31 जनवरी, 2027 से पहले किसी भी समय, अनुसूची VI में विनिर्दिष्ट रूप में वार्षिक शुल्क के भुगतान के साथ इन विनियमों के अंतर्गत पंजीकरण प्रमाणपत्र के निर्गम के लिए प्राधिकरण को फार्म ए में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
बशर्ते कि इस प्रकार जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र उस तारीख से प्रभावी होगा जब इस विनियम के अधीन प्रदान किया गया पंजीकरण और उसके पहले जारी किया गया कोई भी पंजीकरण प्रमाणपत्र अमान्य माना जाएगा।
बशर्ते कि जहाँ कारपोरेट एजेंट 31 जनवरी, 2027 से पहले आवेदन प्रस्तुत नहीं करता, वहाँ वह उक्त आवेदन 31 मार्च, 2027 तक, ऐसे विलंब के लिए कारणों तथा लागू वार्षिक शुल्क और सात सौ पचास रुपये के अतिरिक्त शुल्क के भुगतान सहित प्रस्तुत कर सकता है, तथा प्राधिकरण यदि संतुष्ट होता है कि अन्यथा अनुचित कठिनाई उत्पन्न होगी, तो ऐसे आवेदन पर विचार कर सकता है।
आगे यह भी शर्त होगी कि जहाँ आवेदन कारपोरेट एजेंट द्वारा 31 मार्च 2027 तक प्रस्तुत नहीं किया जाता, वहाँ वह पूर्वोक्त अवधि की समाप्ति की तारीख को और उस तारीख से कारपोरेट एजेंट के रूप में कार्य करना बंद करेगा तथा उसके बाद कारपोरेट एजेंट विनियम 4 के अनुसार पंजीकरण के लिए नये सिरे से आवेदन प्रस्तुत करेगा।
(2) उप-विनियम (1) के अंतर्गत आवेदन का प्रसंस्करण विनियम 6 और विनियम 7 के अंतर्गत विनिर्दिष्ट पद्धति में किया जाएगा।
(3) प्राधिकरण, इस बात से संतुष्ट होने पर कि आवेदक इन विनियमों के अंतर्गत अपेक्षाओं का अनुपालन करता है, फार्म बी में पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी कर सकता है।