IRDAI regulation F. No. IRDAI/Reg/7/221/2026 · 31 Jul 2026
Official title
IRDAI (Insurance Surveyors and Loss Assessors) (Amendment) Regulations, 2026
Summary
Check the official recordThe Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) amends the 2015 regulations to replace the licensing regime for Insurance Surveyors and Loss Assessors (SLA) with a registration system. This change aligns the framework with the Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Act, 2025. Existing license holders must convert their licenses to registrations by submitting an online application 90 days before license expiry. The regulations introduce a new fee structure, including non-refundable processing fees and mandatory annual fees. Failure to pay annual fees results in automatic registration suspension and potential cancellation. The Authority also updates the registration forms and procedures for corporate and individual surveyors to improve operational efficiency.
What you must do
Key dates
Who is affected
Thresholds
Exceptions
If you do not comply
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
सी.जी.-टी.एल.-अ.-31072026-274981 CG-TL-E-31072026-274981
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 478] नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, जुलाई 30, 2026/श्रावण 8, 1948 No. 478] NEW DELHI, THURSDAY, JULY 30, 2026/SHRAVAN 8, 1948
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 30 जुलाई, 2026
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सर्वेक्षक और हानि निर्धारक) (संशोधन) विनियम, 2026
फा.सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./आरईजी/ 7/221/2026.— बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धाराओं 42डी, 42ई और 64यूएम के साथ पठित धारा 114ए की उप-धारा 2 के खंड (एक्स) और (एक्सए) तथा समय-समय पर यथासंशोधित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धाराओं 14 और 26 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सर्वेक्षक और हानि निर्धारक) विनियम, 2015 में निम्नलिखित संशोधन करता है, अर्थात् :-
1. विनियमों का संक्षिप्त नाम और प्रारंभ:
(1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सर्वेक्षक और हानि निर्धारक) (संशोधन) विनियम, 2026 कहलाएंगे।
(2) ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. उद्देश्य: इन विनियमों का उद्देश्य बीमा सर्वेक्षकों और हानि निर्धारकों (एसएलएएस) को नियंत्रित करनेवाले विनियामक ढाँचे को सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधियों का संशोधन) अधिनियम, 2025 ("एसबीएसआर अधिनियम") के उपबंधों के साथ संयोजित करना और परिचालनागत दक्षता बढ़ाना है।
3. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सर्वेक्षक और हानि निर्धारक) विनियम, 2015 में:
(1) शब्द “लाइसेंस” (license) अथवा “लाइसेंस” (licence) अथवा “लाइसेंसीकरण” को शब्द “पंजीकरण” से प्रतिस्थापित किया जाएगा, उन स्थितियों को छोड़कर जहाँ इन विनियमों में स्पष्ट रूप से विनिर्दिष्ट किया गया हो।
(2) शब्द “लाइसेंसप्राप्त” को “लाइसेंसप्राप्त/पंजीकृत” से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
4. विनियम 2 में
(1) उप-विनियम (2) में, वाक्यांश “उसका नवीकरण” को वाक्यांश “लाइसेंस का पंजीकरण में परिवर्तन” से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
(2) उप-विनियम (13) को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"“सर्वेक्षक और हानि निर्धारक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे सर्वेक्षक और हानि निर्धारक, संक्षेप में एसएलए, के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकार द्वारा लाइसेंसप्राप्त/पंजीकृत किया गया हो।"
5. विनियम 3 में
(1) उप-विनियम (9) में, शब्द “पंजीकरण प्रदान करने के लिए” के बाद शब्द “और विनियम 5(ख) में विनिर्दिष्ट वार्षिक शुल्क का भुगतान किया है” निविष्ट किये जाएँगे।
(2) उप-विनियम (10) को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
“प्रदान किया गया पंजीकरण, विनिर्दिष्ट वार्षिक शुल्क का भुगतान करने के अधीन तब तक प्रचलन में होगा जब तक वह वैयक्तिक सर्वेक्षक द्वारा अभ्यर्पित नहीं किया जाता अथवा प्राधिकरण द्वारा निलंबित या निरस्त नहीं किया जाता।"
6. विनियम 4 में
(1) उप-विनियम (13) में, शब्द “पंजीकरण प्रदान करने के लिए” के बाद शब्द “और विनियम 5(ख) में विनिर्दिष्ट वार्षिक शुल्क का भुगतान किया है” निविष्ट किये जाएँगे।
(2) उप-विनियम (14) को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"प्रदान किया गया पंजीकरण, विनिर्दिष्ट वार्षिक शुल्क का भुगतान करने के अधीन तब तक प्रचलन में होगा जब तक कारपोरेट सर्वेक्षक द्वारा अभ्यर्पित नहीं किया जाता अथवा प्राधिकरण द्वारा निलंबित या निरस्त नहीं किया जाता।"
7. विनियम 5 को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
“शुल्क संरचना:
क. प्रसंस्करण शुल्क: वापस न करने योग्य देय प्रसंस्करण शुल्क नीचे दिया गया है:
प्रसंस्करण शुल्क वैयक्तिक पंजीकरण रु. 5000 + लागू कर कारपोरेट पंजीकरण रु. 25000 + लागू कर ख. वार्षिक शुल्क: पंजीकरण प्रदान करने से पहले और उसके बाद प्रत्येक वर्ष प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट की गई भुगतान की पद्धति के माध्यम से देय वार्षिक शुल्क, नीचे दिया गया है:
वार्षिक शुल्क वैयक्तिक पंजीकरण रु. 1000 + लागू कर कारपोरेट पंजीकरण रु. 5000 + लागू कर