रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
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भारत का राजपत्र
The Gazette of India
सी.जी.-ए.पी.-अ.-10122022-240973
CG-AP-E-10122022-240973
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 635] | नई दिल्ली, शुक्रवार, दिसम्बर 9, 2022/अग्रहायण 18, 1944 |
|---|
| No. 635] | NEW DELHI, FRIDAY, DECEMBER 9, 2022/AGRAHAYANA 18, 1944 |
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 5 दिसम्बर, 2022
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (नियुक्त बीमांकक) विनियम, 2022
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनि./5/184/2022.—बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए की उप-धारा (2) के खंड (जेडडी) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धाराओं 14 और 26 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात्: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.—
- क. ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (नियुक्त बीमांकक) विनियम, 2022 कहलाएँगे।
- ख. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (नियुक्त बीमांकक) विनियम, 2017 और उसके बाद किये गये कोई भी संशोधन इन विनियमों के प्रवृत्त होने की तारीख से निरस्त हो जाएँगे।
- ग. ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
- घ. इन विनियमों की समीक्षा अधिसूचना की तारीख से प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार की जाएगी, जब तक समीक्षा अथवा निरसन अथवा संशोधन की आवश्यकता इससे पहले उत्पन्न नहीं होती।
2. परिभाषाएँ.—
- क. इन विनियमों में, जब तक संदर्भ के द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो---
- i. “अधिनियम” से बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है;
- ii. “बीमांकक” से बीमांकक अधिनियम, 2006 की धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (क) में यथापरिभाषित बीमांकक अभिप्रेत है;
- iii. “नियुक्त बीमांकक” से इन विनियमों के विनियम 3(क) में उल्लिखित बीमांकक अभिप्रेत है;
- iv. “प्राधिकरण” से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
- v. “भारतीय बीमांकक संस्थान” से बीमांकक अधिनियम, 2006 (2006 का 35) की धारा 3 के अधीन स्थापित सांविधिक निकाय अभिप्रेत है;
- vi. “व्यावसायिक मानक” से भारतीय बीमांकक संस्थान द्वारा अपने सदस्यों के लिए मार्गदर्शी नोट/व्यवहार मानक के निर्गम द्वारा विनिर्दिष्ट व्यवहार का मानक अभिप्रेत है।
- ख. यहाँ इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) में परिभाषित सभी शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो क्रमशः उन अधिनियमों में उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
3. नियुक्त बीमांकक की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया.---
- क. भारत में बीमा व्यवसाय करने के लिए पंजीकृत बीमाकर्ता इन विनियमों के विनियम 3(ख) और विनियम 3(च) के अधीन, बीमांकक को नियुक्त करता है, जो अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ‘नियुक्त बीमांकक’ के रूप में जाना जाएगा।
- ख. बीमाकर्ता के लिए नियुक्त बीमांकक के रूप में नियुक्त किये जाने के लिए कोई व्यक्ति पात्र होगा, यदि वहः
- i. साधारणतः भारत का निवासी है;
- ii. बीमांकक अधिनियम, 2006 के अनुसार एक फेलो सदस्य है;
- iii. जीवन बीमाकर्ता के मामले में निम्नलिखित अपेक्षाएँ पूरी करनेवाला, भारतीय बीमांकक संस्थान (आईएआई) का फेलो सदस्य है;
- क. जीवन बीमा के क्षेत्र में कम से कम 12 वर्ष का अनुभव रखता/रखती है तथा उसमें से कम से कम 7 वर्ष का फेलोशिप के बाद का अनुभव होगा।
परंतु कि, यदि आवेदक ने भारतीय बीमांकक संस्थान से अथवा किसी ऐसे संस्थान या निकाय से जिसके साथ आईएआई का पारस्परिक मान्यता करार हो, जीवन बीमा में विशेषज्ञ अनुप्रयोग अथवा विशेषज्ञ उन्नत स्तरीय विषय उत्तीर्ण किया है, तो ऊपर विनियम 3(ख)(iii)(क) में यथाउल्लिखित फेलोशिप के बाद के अनुभव सहित अनुभव के मानदंड को 2 वर्ष कम किया जाएगा।
- ख. विनियम 3ख(iii)(क) के अंतर्गत विनिर्दिष्ट रूप में 7 वर्ष अथवा 5 वर्ष, जैसा लागू हो, में से कम से कम 3 वर्ष का फेलोशिप के बाद का अनुभव किसी भारतीय जीवन बीमाकर्ता के संबंध में वार्षिक सांविधिक मूल्यांकन की तैयारी अथवा समीक्षा अथवा उत्पाद के कीमत-निर्धारण में होगा।
उपर्युक्त के बावजूद, जीवन बीमा के क्षेत्र में जीवन पुनर्बीमा व्यवसाय के लिए पुनर्बीमा विवरणियों को प्रमाणित करनेवाले समकक्ष समीक्षक अथवा स्वतंत्र बीमांकक अथवा पैनल बीमांकक अथवा बीमांकक के रूप में अनुभव अथवा जीवन बीमा व्यवसाय में बीमांकिक परामर्श कार्य में अथवा प्राधिकरण के पास संबंधित अनुभव पर भी विचार किया जाएगा।
- ग. कम से कम 3 वर्ष का अनुभव मध्यम अथवा वरिष्ठ स्तरीय प्रबंधन की भूमिका में होगा।
- iv. साधारण बीमाकर्ता के मामले में निम्नलिखित अपेक्षाएँ पूरी करनेवाला भारतीय बीमांकक संस्थान (आईएआई) का फेलो सदस्यः
- क. साधारण बीमा के क्षेत्र में कम से कम 9 वर्ष का अनुभव तथा उसमें से कम से कम 4 वर्ष का अनुभव फेलोशिप के बाद का अनुभव होगा।
परंतु कि, यदि आवेदक ने भारतीय बीमांकक संस्थान से अथवा किसी अन्य संस्थान अथवा निकाय से जिसके साथ आईएआई का पारस्परिक मान्यता करार हो, साधारण बीमा में विशेषज्ञ अनुप्रयोग अथवा विशेषज्ञ उन्नत स्तरीय विषय उत्तीर्ण किया है, तो विनियम 3(ख)(iv)(क) में यथाउल्लिखित फेलोशिप के बाद के अनुभव के मानदंड सहित अनुभव के मानदंड को 2 वर्ष कम किया जाएगा।
- ख. विनियम 3ख(iv)(क) के अंतर्गत विनिर्दिष्ट रूप में 4 वर्ष अथवा 2 वर्ष, जैसी स्थिति हो, में से कम से कम 2 वर्ष का फेलोशिप के बाद का अनुभव किसी भारतीय साधारण बीमाकर्ता के वार्षिक सांविधिक मूल्यांकन अथवा उत्पाद के कीमत-निर्धारण की तैयारी अथवा समीक्षा में होगा।
उपर्युक्त के बावजूद, साधारण बीमा के क्षेत्र में साधारण बीमा व्यवसाय के लिए पुनर्बीमा विवरणियों को प्रमाणित करनेवाले समकक्ष समीक्षक अथवा पैनल बीमांकक अथवा बीमांकक के रूप में अनुभव अथवा साधारण बीमा व्यवसाय में बीमांकिक परामर्श कार्य में अनुभव अथवा प्राधिकरण के पास संबंधित अनुभव पर भी विचार किया जाएगा।
- ग. कम से कम 3 वर्ष का अनुभव मध्यम अथवा वरिष्ठ स्तरीय प्रबंधन की भूमिका में होगा।
- v. स्वास्थ्य बीमाकर्ता के मामले में निम्नलिखित अपेक्षाएँ पूरी करनेवाला भारतीय बीमांकक संस्थान (आईएआई) का फेलो सदस्यः
- क. साधारण अथवा स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में कम से कम 9 वर्ष का अनुभव तथा उसमें से कम से कम 4 वर्ष फेलोशिप के बाद का अनुभव होगा।
परंतु कि, यदि आवेदक ने भारतीय बीमांकक संस्थान से अथवा किसी अन्य संस्थान या निकाय से जिसके साथ आईएआई का पारस्परिक मान्यता करार हो, साधारण अथवा स्वास्थ्य बीमा में विशेषज्ञ अनुप्रयोग अथवा विशेषज्ञ उन्नत स्तरीय विषय उत्तीर्ण किया है, तो विनियम 3(ख) (v)(क) में यथाउल्लिखित फेलोशिप के बाद के अनुभव के मानदंड सहित अनुभव के मानदंड को 2 वर्ष कम किया जाएगा।
- ख. विनियम 3(ख)(v)(क) में यथाउल्लिखित 4 वर्ष अथवा 2 वर्ष, जैसा लागू हो, में से कम से कम 2 वर्ष का फेलोशिप के बाद का अनुभव किसी भारतीय साधारण अथवा स्वास्थ्य बीमाकर्ता के वार्षिक सांविधिक मूल्यांकन अथवा उत्पाद के कीमत-निर्धारण की तैयारी अथवा समीक्षा में होगा।
उपर्युक्त के बावजूद, साधारण अथवा स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में साधारण अथवा स्वास्थ्य पुनर्बीमा व्यवसाय के लिए पुनर्बीमा विवरणियों को प्रमाणित करनेवाले समकक्ष समीक्षक अथवा पैनल बीमांकक अथवा बीमांकक के रूप में अनुभव अथवा साधारण अथवा स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय में बीमांकिक परामर्श कार्य में अनुभव अथवा प्राधिकरण के पास संबंधित अनुभव पर भी विचार किया जाएगा।
- ग. कम से कम 3 वर्ष का अनुभव मध्यम अथवा वरिष्ठ स्तरीय प्रबंधन में होगा।
- vi. पूर्णकालिक आधार पर बीमाकर्ता का कर्मचारी;
- vii. एक ऐसा व्यक्ति जिसने कोई व्यावसायिक अथवा अन्य कदाचार नहीं किया है;
- viii. भारत में किसी अन्य बीमाकर्ता का नियुक्त बीमांकक नहीं है;
- ix. एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास भारतीय बीमांकक संस्थान द्वारा जारी किया गया व्यवहार (प्रैक्टिस) का प्रमाणपत्र है;
- x. 70 वर्ष से अधिक आयु का/की नहीं है।
- ग. इन विनियमों की अधिसूचना की तारीख की स्थिति के अनुसार वर्तमान नियुक्त बीमांककों के लिए व्यवस्थाः
इन विनियमों की अधिसूचना की तारीख की स्थिति के अनुसार वर्तमान नियुक्त बीमांकक संबंधित बीमाकर्ता के नियुक्त बीमांकक के रूप में जारी रहने के लिए पात्र हैं।
- घ. बीमाकर्ता समय-समय पर विनिर्दिष्ट किये जानेवाले फार्मेट में आवेदन प्रस्तुत करते हुए नियुक्त बीमांकक की नियुक्ति के लिए प्राधिकरण के अनुमोदन की अपेक्षा करेगा।
- ङ. प्राधिकरण आवेदन की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन के अंदर उसे स्वीकार करेगा अथवा अस्वीकार करेगा।
परंतु कि आवेदन को अस्वीकार करने से पहले प्राधिकरण बीमाकर्ता को अपनी बात कहने के लिए सुनवाई का एक अवसर देगा।
- च. बीमाकर्ता जो विनियम 3(ख) के अनुसार नियुक्त बीमांकक की नियुक्ति करने में असमर्थ है, पात्रता की शर्तों में से किसी शर्त की छूट देने के लिए लिखित में प्राधिकरण को आवेदन प्रस्तुत करेगा। प्राधिकरण एक अथवा उससे अधिक शर्तों से छूट प्रदान कर सकता है। तथापि, विनियम 3(ख)(ii), 3(ख)(vii) और 3(ख)(ix) के अंतर्गत शर्तों के संबंध में कोई छूट नहीं होगी।
- छ. नियुक्त बीमांकक की नियुक्ति प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन की तारीख को अथवा उसके बाद प्रभावी होगी।