IRDAI regulation फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/2/196/2024 · 24 Jan 2024
Official title
IRDAI (EOM including Commission) Regulations,2024
Summary
Check the official recordThe IRDAI (Expenses of Management including Commission) Regulations, 2024, establish a framework for insurers to manage expenses and commissions to optimize resources and improve insurance penetration. Insurers must adopt board-approved policies for management expenses and commission payments, and prepare annual business plans. The regulations set specific limits on management expenses for life, general, and health insurance businesses, with provisions for additional allowances for InsurTech, insurance awareness, head office expenses, and specific government schemes. Insurers are required to file annual returns on management expenses and commission payments, certified by statutory auditors. Non-compliance may lead to penalties, including restrictions on new business, financial assessments, or removal of key management personnel. These regulations supersede the 2023 versions.
What you must do
Key dates
Who is affected
Thresholds
If you do not comply
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र The Gazette of India
सी.जी.-टी.एल.-अ.-23012024-251565 CG-TL-E-23012024-251565
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 54] नई दिल्ली, मंगलवार, जनवरी 23, 2024/माघ 3, 1945 No. 54] NEW DELHI, TUESDAY, JANUARY 23, 2024/MAGHA 3, 1945
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 22 जनवरी, 2024
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (कमीशन सहित, बीमाकर्ताओं के प्रबंधि-व्यय) विनियम, 2024
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/2/196/2024.—बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 31बी, 40, 40बी और 40सी तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 14 की उप-धारा (1) और उप-धारा (2) के खंड (ङ) एवं धारा 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए की उप-धारा (2) के खंड (आईसी), खंड (जेडी) और खंड (जेई) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात्-
उद्देश्य - पालिसीधारकों को मिलनेवाले लाभों में वृद्धि करने हेतु अपने संसाधनों का इष्टतम रूप में उपयोग करने के लिए प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट समग्र सीमाओं के अंदर, कमीशनों सहित, अपने व्ययों का प्रबंधन करने के लिए बीमाकर्ताओं को समर्थ बनाना और उन्हें लचीलापन प्रदान करना एवं बीमा व्यापन में सुधार लाना।
भाग-I
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (कमीशन सहित, बीमाकर्ताओं के प्रबंधि-व्यय) विनियम, 2024 कहलाएँगे।
(2) ये विनियम भारत में जीवन बीमा व्यवसाय, साधारण बीमा व्यवसाय अथवा स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय करनेवाले बीमाकर्ताओं के लिए लागू होंगे।
(3) ये विनियम 1 अप्रैल, 2024 से प्रवृत्त होंगे।
(4) इन विनियमों की समीक्षा अधिसूचना की तारीख से प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार की जाएगी, जब तक इसके पहले समीक्षा अथवा निरसन अथवा संशोधन की आवश्यकता न हो।
2. परिभाषाएँ
(1) इन विनियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो –
(क) “अधिनियम” से बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है।
(ख) “प्राधिकरण” से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है।
(ग) “प्रभार” से लाभों पर लगाये जानेवाले प्रभार अभिप्रेत हैं जैसे बीमाकर्ता द्वारा वहन किये जानेवाले आय कर तथा वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) एवं अन्य प्रभार जो लाभों पर लगाये जाते हैं।
(घ) “कमीशन” से बीमा व्यवसाय की अपेक्षा करने या उसे प्राप्त करने या उसके संबंध में लेनदेन करने के लिए, बीमा एजेंट, मध्यवर्ती या बीमा मध्यवर्ती, जैसा लागू हो, को बीमाकर्ता द्वारा अदा किये जानेवाले पारिश्रमिक, या प्रतिफल, चाहे वह किसी भी नाम से कहलाए, सहित कमीशन अभिप्रेत है।
(ङ) “व्यवसाय की अवधि” से व्यवसाय के प्रारंभ के वित्तीय वर्ष की शुरुआत से गणना की गई बीमाकर्ता के व्यवसाय की अवधि, यदि प्रारंभ की तारीख वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में हो, तथा तत्काल अनुवर्ती वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से गणना की गई बीमाकर्ता के व्यवसाय की अवधि, यदि प्रारंभ की तारीख वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में हो, अभिप्रेत है।
(च) “प्रबंधन-व्यय” में निम्नलिखित शामिल होंगे:
(i) जीवन या साधारण या स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय के परिचालन व्ययों के स्वरूप के सभी व्यय।
(ii) बीमा एजेंटों, मध्यवर्तियों या बीमा मध्यवर्तियों को कमीशन।
(iii) आवक पुनर्बीमा पर कमीशन और व्यय, जो राजस्व लेखे में प्रभारित किये जाते हैं।
बशर्ते कि इसमें इन विनियमों में यथापरिभाषित प्रभार शामिल नहीं किये जाएँगे।
(छ) “इंश्योरटेक व्यय” से बीमा सेवाओं (पालिसीधारक उन्मुख) में प्रौद्योगिकी-समर्थित नवोन्मेषण के लिए किये गये व्यय अभिप्रेत हैं जो नये व्यवसाय मॉडलों, अनुप्रयोगों, प्रक्रियाओं अथवा उत्पादों में परिणत हो सकते हैं।
(ज) “बीमा जागरूकता” से (i) शाखा कार्यालयों, सोशल मीडिया अभियान के द्वारा अभियानों सहित प्रत्यक्ष अभियानों और/या (ii) उनकी बीमा आवश्यकताओं के आधार पर सही विकल्पों का चयन करने में अपने ग्राहकों और कुल मिलाकर जनसाधारण को शिक्षित करने के लिए जीवन बीमा परिषद अथवा साधारण बीमा परिषद, जैसा लागू हो, के समर्थन एवं बीमा एजेंटों, मध्यवर्तियों अथवा बीमा मध्यवर्तियों की भूमिका के माध्यम से जागरूकता का निर्माण अभिप्रेत है;