IRDAI regulation F. No. IRDAI/Reg/2/209/2025 · 10 Jan 2025
Official title
IRDAI(Insurance Advisory Committee) (Amendment) Regulations, 2025
Summary
Check the official recordThe Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) has amended the Insurance Advisory Committee Regulations, 2000, to improve the clarity and efficiency of the committee's advisory functions. Key changes include replacing the term 'Designated Officer' with 'Secretary' throughout the regulations and updating meeting protocols. The committee is now expected to meet generally twice per financial year. The Chairperson is empowered to decide the meeting venue, mode, and time, and may call emergent meetings with at least 24 hours' notice. Additionally, the amendment introduces formal procedures for the resignation and removal of committee members, specifying grounds such as insolvency, incapacity, conviction for offenses involving moral turpitude, conflict of interest, abuse of position, or absence from three consecutive meetings.
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र The Gazette of India
सी.जी.-टी.एल.-अ.-08012025-260050 CG-TL-E-08012025-260050
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 19] नई दिल्ली, शुक्रवार, जनवरी 3, 2025/पौष 13, 1946 No. 19] NEW DELHI, FRIDAY, JANUARY 3, 2025/PAUSHA 13, 1946
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिसूचना हैदराबाद, 1 जनवरी, 2025
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सलाहकार समिति) (संशोधन) विनियम, 2025
फा.सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/2/209/2025.—बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 25 के साथ पठित धारा 26 की उप-धारा (2) के खंड (ङ) और उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सलाहकार समिति) विनियम, 2000 का संशोधन करने के लिए निम्नलिखित विनियम बनाता है,अर्थात् :
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभः (1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सलाहकार समिति) (संशोधन) विनियम, 2025 कहलाएंगे। (2) ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
2. उद्देश्यः इन संशोधन विनियमों का उद्देश्य बीमा सलाहकार समिति के परामर्शी कार्यों में स्पष्टता और कार्यकुशलता को बढ़ाना है।
3. बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा सलाहकार समिति) विनियम, 2000 में, -
(1) विनियम 2 के खंड (ङ) में, शब्द पदनामित अधिकारी’ को सचिव’ से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
(2) विनियम 3 में
क) वर्तमान उप-विनियम (2) के लिए निम्नलिखित उप-विनियम (2) को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
(2) “सलाहकार समिति आवश्यक समझे गये रूप में बारंबारता के साथ बैठक कर सकती है, परंतु अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत विनियम बनाने से संबंधित विषयों तथा अधिनियम की धारा 25 की उप-धारा (5) के अंतर्गत निर्धारित किये जानेवाले अन्य विषयों पर भी प्राधिकरण को सलाह देने के लिए, सामान्यतः वित्तीय वर्ष में 2 बार बैठक कर सकती है।”
ख) वर्तमान उप-विनियम (3) के लिए निम्नलिखित उप-विनियम को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
(3) “सलाहकार समिति की बैठकें ऐसे स्थान, पद्धति और समय पर आयोजित की जाएँगी, जैसा कि अध्यक्ष के द्वारा निर्णय किया जाएगा।”
ग) वर्तमान उप-विनियम (5) के लिए निम्नलिखित उप-विनियम को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
(5) “बैठक के लिए सूचना और कार्यसूची सामान्यतः सचिव के द्वारा सात दिन पहले परिचालित की जाएँगी।
बशर्ते कि, यदि आवश्यक समझा जाता है, तो इन्हें प्राधिकरण के अध्यक्ष का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद सात दिन से कम समय में परिचालित किया जा सकता है।
अध्यक्ष सलाहकार समिति की आपाती बैठक कम से कम चौबीस घंटे की नोटिस देने के द्वारा बुला सकता है।”
(3) विनियम 5 के उप-विनियम (4) में, शब्द पदनामित अधिकारी’ को सचिव’ से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
(4) विनियम 5 के बाद, निम्नलिखित विनियम निर्दिष्ट किया जाएगा, अर्थात् :-
5क. त्यागपत्र और पदच्युतिः (1) बीमा सलाहकार समिति का कोई भी सदस्य प्राधिकरण के अध्यक्ष को संबोधित लिखित सूचना देने के द्वारा त्यागपत्र दे सकता है तथा ऐसा त्यागपत्र उस तारीख से प्रभावी होगा जिस तारीख को वह स्वीकृत किया जाएगा। (2) प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के किसी भी सदस्य को हटा सकता है जो- (क) दिवालिया है अथवा किसी भी समय दिवालिये के रूप में न्यायनिर्णीत किया गया है; अथवा (ख) सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक रूप से या मानसिक रूप से अक्षम हो गया है; अथवा (ग) किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध है अथवा ऐसे किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है जो प्राधिकरण की राय में अनैतिक चरित्रहीनता से संबद्ध है; अथवा (घ) ऐसा वित्तीय या अन्य हित प्राप्त किया है जो एक सदस्य के रूप में उसके कार्यों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है; अथवा (ङ) अपने पद का इस प्रकार से दुरुपयोग किया है जिससे सदस्य के रूप में उसका जारी रहना लोकहित के लिए हानिकारक है। (च) प्राधिकरण की राय में, समिति के सदस्य के रूप में रहने के लिए योग्य नहीं है। (छ) किसी उचित और पर्याप्त कारण के बिना समिति की लगातार तीन बैठकों में उपस्थित होना बंद किया है।