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Insurers must restrict loans or temporary advances to full-time employees to specific purposes under a board-approved policy. The total loan amount for one employee cannot exceed one crore rupees and must link to the fixed remuneration. Insurers cannot grant loans except for vehicles, computers, furniture, housing, education, festivals, or board-approved purposes. The interest rate for whole-time directors and officers cannot be lower than the rate for other employees. These loans are not admissible for the available solvency margin.
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रजिस्ट्री सं० डी० एल०-33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 197] | नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, मई 12, 2016/वैशाख 22, 1938 |
|---|---|
| No. 197] | NEW DELHI, THURSDAY, MAY 12, 2016/VAISAKHA 22, 1938 |
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिसूचना हैदराबाद, 4 मई, 2016
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमाकर्ताओं के पूर्णकालिक कर्मचारियों को ऋण अथवा अस्थायी अग्रिम) विनिर्युम, 2016
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनिर्युम/13/125/2016. – बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 29(3)(ए) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धाराओं 14 और 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 114ए की उप-धारा (2) के खंड (आईबी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनिमय बनाता है, अर्थात्:-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
2. (1) परिभाषाएँ - इन विनिमय में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(2) इन विनिमय में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) अथवा उनके अधीन बनाये गये नियमों अथवा विनिमयों में परिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन अधिनियमों, नियमों अथवा विनिमयों में क्रमशः उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
ऋण अथवा अस्थायी अग्रिम
3. कोई भी बीमाकर्ता किसी अधिकारी, जो पूर्णकालिक निदेशक नहीं है, को कोई ऋण अथवा अस्थायी अग्रिम अधिनियम की धारा 29 (1) के अंतर्गत की गई व्यवस्था को छोड़कर संपत्ति के दृष्टिवन्धक पर अथवा वैयक्तिक जमानत पर अथवा अन्य प्रकार से प्रदान नहीं करेगा।
4. कोई भी बीमाकर्ता अपने पूर्णकालिक कर्मचारियों को कोई ऋण अथवा अस्थायी अग्रिम अधिनियम की धारा 29 (1) के अंतर्गत की गई व्यवस्था को छोड़कर संपत्ति के दृष्टिवन्धक पर अथवा वैयक्तिक जमानत पर अथवा अन्य प्रकार से प्रदान नहीं करेगा;
बशर्ते कि बीमाकर्ता अपने पूर्णकालिक कर्मचारियों को केवल निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए ही ऋण अथवा अस्थायी अग्रिम प्रदान कर सकता हैः
परंतु आगे यह भी शर्त होगी कि एक पूर्णकालिक कर्मचारी द्वारा लिये गये सभी ऋणों को एकसाथ लेने पर उनकी कुल राशि एक करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगी तथा उसे कर्मचारियों के नियत पारिश्रमिक के साथ संबद्ध किया जाएगा।
बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति
5. अपने कर्मचारियों को ऋण अथवा अस्थायी अग्रिम प्रदान करनेवाले प्रत्येक बीमाकर्ता के पास उपर्युक्त ऋण अथवा अस्थायी अग्रिम प्रदान करने के लिए उसके निदेशक बोर्ड द्वारा विधिवत् अनुमोदित एक योजना होगी।