IRDAI regulation F. No. IRDAI/Reg/11/225/2026 · 31 Jul 2026
Official title
IRDAI (Manner and Procedure for imposing penalties) Regulations, 2026
Summary
Check the official recordThe Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) establishes the procedure for imposing penalties for defaults or contraventions under the Insurance Act, 1938, and the IRDAI Act, 1999. The Authority initiates proceedings based on inspection reports, investigations, or complaints. It issues a show cause notice to the concerned person, who must submit a written reply within 21 days. The Authority may grant a personal hearing and may summon witnesses or documents. After considering the evidence, the Authority passes a reasoned order. Penalties must be paid within 45 days and are credited to the Policyholders’ Education and Protection Fund. Aggrieved persons may appeal to the Securities Appellate Tribunal within 45 days of receiving the order.
What you must do
Key dates
Who is affected
If you do not comply
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
[Image omitted. See the official document.]
The Gazette of India
सी.जी.-टी.एल.-अ.-30072026-274985 CG-TL-E-30072026-274985
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 482] | नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, जुलाई 30, 2026/श्रावण 8, 1948 |
|---|---|
| No. 482] | NEW DELHI, THURSDAY, JULY 30, 2026/SHRAVAN 8, 1948 |
हैदराबाद, 30 जुलाई, 2026
फा.सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./आरईजी/11/225/2026.— बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए की उप-धारा (2) के खंड (जेडडी) के साथ पठित धारा 105ई की उप-धारा (3), तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 14 और धारा 26 के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात्:-
(1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (अर्थदंड लगाने के लिए पद्धति और प्रक्रिया) विनियम, 2026 कहलाएँगे।
(2) ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
(3) ये विनियम अधिनियम अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 अथवा उनके अधीन बनाये गये नियमों अथवा विनियमों अथवा सहायक अनुदेशों के अधीन अर्थदंड लगाने के लिए उद्दिष्ट सभी कार्यवाहियों पर लागू होंगे।
(4) इन विनियमों की समीक्षा प्रकाशन की तारीख से प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार की जाएगी, जब तक उसके पहले इनकी समीक्षा करने, इनका निरसन करने अथवा इनमें संशोधन करने की आवश्यकता उत्पन्न नहीं होती।
अधिनियम अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 अथवा उनके अधीन बनाये गये नियमों अथवा विनियमों अथवा सहायक अनुदेशों के अधीन उल्लंघनों हेतु अर्थदंड लगाने के लिए पद्धति और प्रक्रिया निर्धारित करना।
(1) इन विनियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) “अधिनियम” से बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है;
(ख) “प्राधिकरण” से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 के उपबंधों के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
(ग) “न्यायनिर्णयन अधिकारी” से अधिनियम की धारा 105सी के अधीन न्यायनिर्णयन अधिकारी के रूप में प्राधिकरण के द्वारा नियुक्त अधिकारी होगा।
(2) यहाँ इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु अधिनियम में, अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) में, अथवा उनके अधीन बनाये गये किन्हीं अन्य नियमों और विनियमों में परिभाषित सभी शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन अधिनियमों, नियमों और विनियमों में क्रमशः उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
(1) प्राधिकरण द्वारा अर्थदंड की कार्यवाही निम्नलिखित के आधार पर प्रारंभ की जा सकती है—
(क) किसी निरीक्षण रिपोर्ट, जाँच रिपोर्ट, लेखा-परीक्षा के निष्कर्ष, विनियामक निगरानी, अथवा शिकायत प्राप्त होने पर पाये गये किसी उल्लंघन अथवा चूक के आधार पर; अथवा
(ख) यह देखने के लिए कि क्या किसी व्यक्ति ने अधिनियम की धारा 2सीबी की उप-धारा (2) अथवा धारा 34बी की उप-धारा (4) अथवा धारा 40 की उप-धारा (3) अथवा धारा 41 की उप-धारा (2) अथवा धारा 42 की उप-धाराओं (4) और (5) अथवा धारा 52एफ अथवा धारा 105बी अथवा धारा 105बीए में विनिर्दिष्ट रूप में उल्लंघन किये हैं या नहीं, संचालित की गई जाँच के अनुसरण में धारा 105सी के अधीन न्यायनिर्णयन अधिकारी की सिफारिश के आधार पर।
(2) प्राधिकरण ऐसी कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए लिखित में कारण दर्ज करेगा।
(3) प्राधिकरण के अधिकारी जो निरीक्षण अथवा जाँच में संबद्ध हैं, इन विनियमों के अधीन अर्थदंड की कार्यवाही का भाग नहीं बनेंगे।
(1) जहाँ प्राधिकरण की राय है कि अधिनियम अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 अथवा नियमों अथवा विनियमों अथवा सहायक अनुदेशों के अधीन चूक अथवा उल्लंघन हुआ है, वहाँ वह संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा, जिसके द्वारा उस व्यक्ति से कारण बताने की अपेक्षा करेगा कि अधिनियम अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 अथवा उनके अधीन बनाये गये नियमों अथवा विनियमों अथवा सहायक अनुदेशों के संबंधित उपबंध के अधीन अर्थदंड क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।