Laws and sections by number or title, due dates, pages, and updates.
Insurers must undertake business obligations for rural and social sectors starting from financial year 2016-17. Life insurers, general insurers, and standalone health insurers must achieve graduated percentages of policies or gross premium written in rural areas and specific percentages of lives in social sectors based on their years of operation. Insurers implement operational procedures for accurate classification, exclude reinsurance premium, and submit an annual certificate by the chief executive officer or principal officer within ninety days from the end of the financial year. These regulations supersede the 2002 regulations.
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रजिस्ट्री सं० डी० एल०-33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 292] नयी दिल्ली, शुक्रवार, अगस्त 28, 2015/भाद्र 6, 1937 No. 292] NEW DELHI, FRIDAY, AUGUST 28, 2015/BHADRA 6, 1937
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिसूचना हैदराबाद, 24 अगस्त, 2015
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्रों के प्रति बीमाकर्ताओं के दायित्व) विनियम, 2015
फा. सं. भा.बी.िव.िव.प्रा./विनियम/13/103/2015.– बीमा अधिनियम, 1938 की धाराओं 32बी और 32सी के साथ पठित धारा 114ए (2) (आईडी) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 26 के साथ पठित धारा 14(2)(पी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है :
1.1 ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्रों के प्रति बीमाकर्ताओं के दायित्व) विनियम, 2015 के नाम से जाने जाएँगे। 1.2 ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रभावी होंगे तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (ग्रामीण या सामाजिक सेक्टर के बारे में बीमाकर्ता के दायित्व) विनियम, 2002 का अधिक्रमण करेंगे। 1.3 इन विनियमों में उल्लिखित दायित्व वित्तीय वर्ष 2016-17 से लागू होंगे। वित्तीय वर्ष 2015-16 तक, समय-समय पर यथासंशोधित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (ग्रामीण या सामाजिक सेक्टर के बारे में बीमाकर्ता के दायित्व) विनियम, 2002 के अनुसार दायित्व लागू होंगे। 1.4 भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड और भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम के लिए उनके व्यवसाय के स्वरूप के कारण ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्र के प्रति दायित्वों के रूप में व्यवसाय के कोई विशिष्ट प्रतिशत विनिर्दिष्ट नहीं किये गये हैं।
इन विनियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -- 2.1 "अधिनियम" से समय-समय पर यथासंशोधित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है; 2.2 "प्राधिकरण" से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 3 के उपबंधों के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है; 2.3 "ग्रामीण क्षेत्र" से नवीनतम उपलब्ध दशवार्षिक जनसंख्या की गणना (भारत की जनगणना) संचालित करते समय "ग्रामीण" के रूप में वर्गीकृत स्थान अथवा क्षेत्र अभिप्रेत है; 2.4 "सामाजिक क्षेत्र" के अंतर्गत दोनों ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में असंगठित क्षेत्र, अनौपचारिक क्षेत्र, आर्थिक रूप से कमजोर अथवा पिछड़े वर्ग तथा अन्य श्रेणियों के व्यक्ति शामिल हैं; 2.5 "असंगठित क्षेत्र" के अंतर्गत विनियोजित श्रमिक शामिल हैं, जैसे खेतिहर मजदूर, बीड़ी मजदूर, ईंट-भट्ठी मजदूर, बढ़ई, मोची, निर्माण श्रमिक, मछुए, हमाल, हस्तशिल्प कारीगर, हथकरघा और खादी श्रमिक, महिला टेलर, चमड़ा और चम शोधन मजदूर, पापड़ निर्माता, बिजलीकरघा मजदूर, विकलांग विनियोजित व्यक्ति, प्राथमिक दुग्ध उत्पादक, रिक्शा चालक, सफ़ाई कर्मचारी, नमक उत्पादक, रेशम उत्पादन मजदूर, गन्ना काटनेवाले श्रमिक, तेंदू पत्ता संग्राहक, ताड़ी निकालनेवाले, साग-भाजी विक्रेता, धोबिनें, पहाड़ों पर श्रमिक महिलाएँ, दिहाड़ी मजदूर, किराये पर कार्यरत ड्राइवर और कुली अथवा ऐसी अन्य श्रेणियों के व्यक्ति; 2.6 "आर्थिक रूप से कमजोर अथवा पिछड़े वर्ग" से वे व्यक्ति अभिप्रेत हैं जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करते हैं; 2.7 "अन्य श्रेणियों के व्यक्तियों" के अंतर्गत निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 में यथापरिभाषित अशक्तता से युक्त व्यक्ति शामिल हैं और ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो लाभकारी रूप में नियुक्त न किये गये हों; तथा ऐसे अभिभावक भी इनमें सम्मिलित हैं जिन्हें मानसिक रूप से असमर्थ व्यक्तियों अथवा अशक्तता से युक्त व्यक्तियों का संरक्षण करने के लिए बीमे की आवश्यकता हो; 2.8 "अनौपचारिक क्षेत्र" में लघु मान के, विनियोजित व्यक्ति शामिल हैं जो विशिष्ट रूप से संगठन और प्रौद्योगिक के तौर पर निम्न स्तर पर हैं, तथा यह क्षेत्र रोजगार और आय उत्पन्न करने के प्राथमिक उद्देश्य से युक्त है और इसके अंतर्गत बहुविध कार्यकलाप शामिल हैं, जैसे खुदरा व्यापार, परिवहन, मरम्मत और रखरखाव, निर्माण, वैयक्तिक और घरेलू सेवाएँ और विनिर्माण। यह क्षेत्र अधिकांशतः श्रम-प्रधान कार्य से युक्त है तथा इसमें प्रायः अलििखित और अनौपचारिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध निहित है; 2.9 इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु समय-समय पर यथासंशोधित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4), अथवा समय-समय पर यथासंशोधित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 अथवा बीमा नियम, 1939 अथवा उनके अधीन जारी किये गये किन्हीं अन्य विनियमों में परिभाषित सभी शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन अधिनियमों अथवा नियमों अथवा विनियमों में क्रमशः उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।