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Insurers must follow specific rules to issue other forms of capital like preference share capital and subordinated debt. The Insurance Regulatory and Development Authority of India sets these regulations for insurance companies. Insurers need prior approval from the Authority to issue these instruments. The total quantum of instruments must not exceed 25 percent of the paid up equity share capital and securities premium. The total quantum also must not exceed 50 percent of the net worth of the insurer at any point in time. Issuers file a report with the Authority within 15 days from the date of allotment. Instruments face a progressive hair cut during the final five years prior to maturity for solvency margin computation.
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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकारण अधिसूचना हैदराबाद, 13 नवम्बर, 2015
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकारण (अन्य प्रकार की पूँजी) विनियम, 2015
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/20/110/2015 – बीमा विनियामक और विकास प्राधिकारण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 6ए(1)(i) और धारा 114ए(2)(डीबी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.- (1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकारण (अन्य प्रकार की पूँजी) विनियम, 2015 के नाम से जाने जाएँगे।
(2) ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
(i) "अधिनियम" से बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है।
(ii) "प्राधिकरण" से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकारण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकारण अभिप्रेत है।
(iii) "अन्य प्रकार की पूँजी" से इन विनियमों में निर्धारित तरीके से बीमाकर्ता द्वारा जारी किये गये निम्नलिखित लिखत अभिप्रेत हैं :
(क) अधिमानी शेयर पूँजी; अथवा
(ख) गौण ऋण।
(iv) "अधिमानी शेयर पूँजी" से कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 43 के स्पष्टीकरण (ii) में यथापरिभाषित और इन विनियमों में निर्धारित मानदंड को पूरा करनेवाली अधिमानी शेयर पूँजी अभिप्रेत है।
(v) "गौण ऋण" से कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(30) में यथापरिभाषित और इन विनियमों में निर्धारित मानदंडों को पूरा करनेवाला ऋणपत्र (डिबेंचर); तथा प्राधिकरण द्वारा अनुमति प्रदान किया जानेवाला ई अन्य ऋण लिखत अभिप्रेत है।
(2) इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु कंपनी अधिनियम, 2013 अथवा बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकारण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) अथवा उन अधिनियमों के अधीन बनाये गये नियमों अथवा विनियमों में परिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन अधिनियमों अथवा नियमों अथवा विनियमों में क्रमशः उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
"अन्य प्रकार की पूँजी" के लिए अर्हता
i. पूर्णतः प्रदत्त : लिखत अवश्य जारी किये गये हों और नकद प्रदत्त हों;
ii. दावों की वरिष्ठता : दावों की वरिष्ठता निम्नलिखित क्रम से नियंत्रित की जाएगीः
(क) अधिमानी शेयरः अधिमानी शेयरधारकों के दावे ईक्विटी शेयर पूँजी धारित करनेवाले निवेशकों के दावों से श्रेष्ठ होंगे, परंतु पॉलिसीधारकों और सभी अन्य ऋणदाताओं के दावों से गौण होंगे;
(ख) गौण ऋणः गौण ऋण के धारकों के दावे उस क्रम में अधिमानी शेयरों और ईक्विटी शेयरों में निवेशकों के दावों से श्रेष्ठ होंगे, परंतु पॉलिसीधारकों और सभी अन्य ऋणदाताओं के दावों से गौण होंगे।
iii. इन विनियमों के अधीन जारी किये गये लिखत बीमाकर्ता की गारंटी अथवा बीमाकर्ता के पॉलिसीधारकों और ऋणदाताओं के दावों की तुलना में दावों की वरिष्ठता को कानूनी तौर पर बढ़ानेवाली अन्य व्यवस्थाओं द्वारा सुरक्षित अथवा बीमा-रक्षा प्राप्त नहीं होंगे;
iv. परिपक्वता अवधिः इन विनियमों के अधीन बीमाकर्ताओं द्वारा जारी किये गये लिखतों की परिपक्वता अवधि निम्नानुसार होगीः
(क) अधिमानी शेयर पूँजीः परिपक्वता अवधि अथवा मोचन अवधि निम्नलिखित से कम नहीं होगीः
(i) जीवन बीमा, साधारण बीमा और पुनर्बीमा कंपनियों के लिए दस वर्ष; और
(ii) स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के लिए सात वर्ष।
(ख) गौण ऋणः गौण ऋण का निर्गम या तो निरंतर होगा या परिपक्वता अवधि अथवा मोचन अवधि निम्नलिखित से कम नहीं होगीः
(i) जीवन बीमा, साधारण बीमा और पुनर्बीमा कंपनियों के लिए दस वर्ष; तथा
(ii) स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के लिए सात वर्ष;