IRDAI regulation · 06 May 2017
2945 GI/2017 (1) jftLVªh laö Mhö ,yö&33004@99 REGD. NO. D. L.-33004/99 vlk/kj.k EXTRAORDINARY Hkkx III—[k.M 4 PART III—Section 4 izkf/dkj ls izdkf'kr PUBLISHED BY AUTHORITY la - 184] ubZ fnYyh] ' kqØ okj ] ebZ 5 ] 201 7 @ oS 'k k[k 1 5 ] 193 9 No. 184] NEW DELHI, FRIDAY, MAY 5, 2017/VAISAKHA 15, 1939 भारतीय बीमा विवनया…
2945 GI/2017 (1) jftLVªh laö Mhö ,yö&33004@99 REGD. NO. D. L.-33004/99 vlk/kj.k EXTRAORDINARY Hkkx III—[k.M 4 PART III—Section 4 izkf/dkj ls izdkf'kr PUBLISHED BY AUTHORITY la - 184] ubZ fnYyh] ' kqØ okj ] ebZ 5 ] 201 7 @ oS 'k k[k 1 5 ] 193 9 No. 184] NEW DELHI, FRIDAY, MAY 5, 2017/VAISAKHA 15, 1939 भारतीय बीमा विवनयामक और विकास प्रावधकरण ऄवधसूचना हैदराबाद, 20 ऄप्रैल, 2017 भारतीय बीमा विवनयामक और विकास प्रावधकरण (भारतीय बीमाकतााओं द्वारा कायाकलापों का बाह्यस्रोतीकरण) विवनयम, 2017 फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विवनयम/5/142/2017.—बीमा ऄवधवनयम, 1938 की धारा 114ए (2) (जेडडी) तथा बीमा विवनयामक और विकास प्रावधकरण ऄवधवनय़म, 1999 की धारा 26 के साथ पठठत धारा 14 (2)(इ) द्वारा प्रदत्त शवियों का प्रयोग करते हुए एिं बीमा सलाहकार सवमवत के साथ परामशा करने के ईपरांत, प्रावधकरण एतद्द्वारा वनम्नवलवखत विवनयम बनाता है, ऄथाात् :— 1. संविप्त नाम और प्रारंभ— (i) ये विवनयम भारतीय बीमा विवनयामक और विकास प्रावधकरण (भारतीय बीमाकतााओं द्वारा कायाकलापों का बाह्यस्रोतीकरण) विवनयम, 2017 के नाम से जाने जाएँगे । (ii) ये विवनयम सरकारी राजपत्र में आनकी ऄवधसूचना की तारीख को प्रिृत्त होंगे तथा आस संबंध में ददनांक 01.02.2011 के संदभाः अइअरडीए/ जीिन/ सीअइअर/ जीएलडी/013/02 /2011 के ऄनुसार जारी दकये गये ददशावनदेशों और आस संबंध में जारी दकये गये दकन्हीं भी स्पष्टीकरण पठरपत्रों का ऄवधक्रमण करेंगे। 2. प्रयोज्यता (i) ये विवनयम पुनबीमा व्यिसाय में लगे हुए बीमाकतााओं को छोड़कर भारतीय बीमा विवनयामक और विकास प्रावधकरण के पास पंजीकृत सभी बीमाकतााओं पर लागू हैं। यदद कोइ बीमाकताा प्रत्यि बीमा और पुनबीमा व्यिसाय दोनों में लगा है, तो ये विवनयम केिल आस प्रकार के प्रत्यि बीमा व्यिसाय के संबंध में लागू हैं। (ii) ये विवनयम भारत में ऄथिा भारत के बाहर वस्थत दकसी बाह्यस्रोतीकरण (अईटसोर्ससग) सेिा प्रदाता के साथ बीमाकताा के द्वारा की गइ बाह्यस्रोतीकरण व्यिस्थाओं पर लागू हैं। 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC. 4] 3. ईद्देश्य (i) यह सुवनवित करना दक नकारात्मक प्रणालीगत प्रभाि को रोकने और पॉवलसीधारकों के वहतों का संरिण करने के ईद्देश्य से बाह्यस्रोतीकरण (अईटसोर्ससग) से ईत्पन्न होनेिाले जोवखमों के प्रबंध के संबंध में बीमाकताा वििेकपूणा प्रथाओं का ऄनुसरण करें। (ii) बीमाकतााओं द्वारा कायाकलापों के बाह्यस्रोतीकरण के संबंध में प्रभािी पयािेिण तथा पयााप्त समुवचत सािधानी के वलए सुदृढ़ और ऄनुदक्रयाशील प्रबंध प्रथाओं को सुवनवित करना। 4. पठरभाषाएँ (i) आन विवनयमों में, जब तक संदभा से ऄन्यथा ऄपेवित न हो, क) `ऄवधवनयम' से बीमा ऄवधवनयम, 1938 ऄवभप्रेत है; ख) `प्रावधकरण' ऄथिा `अइअरडीएअइ' से अइअरडीए ऄवधवनयम, 1999 की धारा 3 की ईप-धारा 1 के ऄधीन स्थावपत भारतीय बीमा विवनयामक और विकास प्रावधकरण ऄवभप्रेत है; ग) `समूह' से अइअरडीएअइ (वनिेश) विवनयम, 2016 के विवनयम 2(जी) में पठरभावषत रूप में ऄवभप्रेत है; घ) `संबंवधत पिकार' से कंपनी ऄवधवनयम, 2013 की धारा 2 (76) के ऄधीन पठरभावषत रूप में ऄवभप्रेत है; ङ) `बाह्यस्रोतीकरण' (अईटसोर्ससग) आस समय ऄथिा भविष्य में बीमाकताा के द्वारा सामान्य रूप से दकये जानेिाले कायाकलाप वनष्पाददत करने के वलए बीमाकताा द्वारा ऄन्य पिकार की सेिाओं के ईपयोग के रूप में पठरभावषत है, परंतु आसके ऄंतगात ऐसी सेिाएँ शावमल नहीं हैं वजन्हें सामान्य रूप से बीमाकतााओं द्वारा अंतठरक रूप से दकये जाने की ऄपेिा नहीं की जाती, जैसे कानूनी सेिाएँ, बैंककग सेिाएँ, कूठरयर सेिाएँ, डॉक्टरी जाँच, फोरेंवसक विश्लेषण; च) `बाह्यस्रोतीकरण सेिा प्रदाता' से ऄन्य पिकार सेिा प्रदाता ऄवभप्रेत है जो बीमाकतााओं के वलए बाह्यस्रोतीकरण (अईटसोसा) से संबंवधत सेिाएँ प्रदान करता है ; छ) `बाह्यस्रोतीकरण करार' से बाह्यस्रोतीकरण सेिा प्रदाता द्वारा प्रदान की जानेिाली सेिाओं के वलए शतों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बीमाकताा और बाह्यस्रोतीकरण सेिा प्रदाता के बीच दकया जानेिाला वलवखत करार ऄवभप्रेत है; ज) `महत्िपूणा बाह्यस्रोतीकरण' से िे बाह्यस्रोतीकरण व्यिस्थाएँ ऄवभप्रेत हैं जो ऄनुबंध I में िर्णणत कारकों के अधार पर महत्िपूणा के रूप में वनधााठरत हैं; (ii) आन विवनयमों में प्रयुि और ऄपठरभावषत, परंतु बीमा ऄवधवनयम, 1938, बीमा विवनयामक और विकास प्रावधकरण ऄवधवनयम, 1999 ऄथिा प्रावधकरण के द्वारा जारी दकये गये दकसी भी विवनयम में पठरभावषत सभी शब्दों ऄथिा ऄवभव्यवियों के ऄथा िही होंगे जो ईन संबंवधत विधानों में क्रमशः ईनके वलए वनधााठरत दकये गये हैं। 5. बाह्यस्रोतीकरण से वनवषद्ध कायाकलाप बीमाकतााओं के वलए (i से viii तक) के ऄंतगात ईवललवखत वनम्नवलवखत दकसी भी कायाकलाप का बाह्यस्रोतीकरण करना वनवषद्ध हैः i. वनिेश और संबंवधत काया; ii. वनवध प्रबंधन, एनएिी पठरकलन सवहत; iii. धन-शोधन वनिारण (एएमएल) और ऄपने ग्राहक को जावनए (केिाइसी) का ऄनुपालन; बशते, अइअरडीएअइ एएमएल मास्टर पठरपत्र ददनांक 28 वसतंबर 2015 के खंड 3.1.2 के ऄनुसार ऄन्य पिकार सेिा प्रदाताओं के माध्यम से केिाइसी सत्यापन की ऄनुमवत दी गइ है;