रजिस्ट्री सं० डी० ल०–33004/99
REGD. NO. D. L.–33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 184] | नई दिल्ली, शुक्रवार, मई 5, 2017/वैशाख 15, 1939 |
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| No. 184] | NEW DELHI, FRIDAY, MAY 5, 2017/VAISAKHA 15, 1939 |
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 20 अप्रैल, 2017
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (भारतीय बीमाकर्ताओं द्वारा कार्यकलापों का बाह्यस्रोतीकरण) विनियमन, 2017
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/5/142/2017.—बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 114ए (2) (जेडडी) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 26 के साथ पठित धारा 14 (2)(ई) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एवं बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के उपरांत, प्राधिकरण एतद्द्वारा निम्नलिखित विनियमन बनाता है, अर्थात्:—
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ—
- (i) ये विनियमन भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (भारतीय बीमाकर्ताओं द्वारा कार्यकलापों का बाह्यस्रोतीकरण) विनियमन, 2017 के नाम से जाने जाएँगे।
- (ii) ये विनियमन सरकारी राजपत्र में इनकी अधिसूचना की तारीख को प्रवृत्त होंगे तथा इस संबंध में दिनांक 01.02.2011 के संदर्भः आईआरडीए/ जीवन/ सीआईआर/ जीएलडी/013/02 /2011 के अनुसार जारी किये गये दिशानिर्देशों और इस संबंध में जारी किये गये किन्हीं भी स्पष्टीकरण परिपत्रों का अधिक्रमण करेंगे।
2. प्रयोज्यता
- (i) ये विनियमन पुनबीमा व्यवसाय में लगे हुए बीमाकर्ताओं को छोड़कर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के पास पंजीकृत सभी बीमाकर्ताओं पर लागू हैं। यदि कोई बीमाकर्ता प्रत्यक्ष बीमा और पुनबीमा व्यवसाय दोनों में लगा है, तो ये विनियमन केवल इस प्रकार के प्रत्यक्ष बीमा व्यवसाय के संबंध में लागू हैं।
- (ii) ये विनियमन भारत में अथवा भारत के बाहर स्थित किसी बाह्यस्रोतीकरण (आऊटसोर्ससंग) सेवा प्रदाता के साथ बीमाकर्ता के द्वारा की गई बाह्यस्रोतीकरण व्यवस्थाओं पर लागू हैं।
3. उद्देश्य
- (i) यह सुनिश्चित करना कि नकारात्मक प्रणालीगत प्रभाव को रोकने और पॉलिसीधारकों के हितों का संरक्षण करने के उद्देश्य से बाह्यस्रोतीकरण (आऊटसोर्सिंग) से उत्पन्न होनेवाले जोखिमों के प्रबंध के संबंध में बीमाकर्ता विवेकपूर्ण प्रथाओं का अनुसरण करें।
- (ii) बीमाकर्ताओं द्वारा कार्यकलापों के बाह्यस्रोतीकरण के संबंध में प्रभावी पर्यवेक्षण तथा पर्याप्त समुचित सावधानी के लिए सुदृढ़ और अनुक्रियाशील प्रबंध प्रथाओं को सुनिश्चित करना।
4. परिभाषाएँ
- (i) इन विनियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,
- क) ‘अधिनियम’ से बीमा अधिनियम, 1938 अभिप्रेत है;
- ख) ‘प्राधिकरण’ अथवा ‘आईआरडीएआई’ से आईआरडीए अधिनियम, 1999 की धारा 3 की उप-धारा 1 के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
- ग) ‘समूह’ से आईआरडीएआई (निवेश) विनियमन, 2016 के विनियमन 2(जी) में परिभाषित रूप में अभिप्रेत है;
- घ) ‘संबद्ध पक्षकार’ से कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (76) के अधीन परिभाषित रूप में अभिप्रेत है;
- ङ) ‘बाह्यस्रोतीकरण’ (आऊटसोर्सिंग) इस समय अथवा भविष्य में बीमाकर्ता द्वारा सामान्य रूप से किये जानेवाले कार्यकलाप निष्पादित करने के लिए बीमाकर्ता द्वारा अन्य पक्षकार की सेवाओं के उपयोग के रूप में परिभाषित है, परंतु इसके अंतर्गत ऐसी सेवाएँ शामिल नहीं हैं जिन्हें सामान्य रूप से बीमाकर्ताओं द्वारा आंतरिक रूप से किये जाने की अपेक्षा नहीं की जाती, जैसे कानूनी सेवाएँ, बैंकिंग सेवाएँ, कूरियर सेवाएँ, डॉक्टरी जाँच, फोरेंसिक विश्लेषण;
- च) ‘बाह्यस्रोतीकरण सेवा प्रदाता’ से अन्य पक्षकार सेवा प्रदाता अभिप्रेत है जो बीमाकर्ताओं के लिए बाह्यस्रोतीकरण (आऊटसोर्स) से संबंधित सेवाएँ प्रदान करता है;
- छ) ‘बाह्यस्रोतीकरण करार’ से बाह्यस्रोतीकरण सेवा प्रदाता द्वारा प्रदान की जानेवाली सेवाओं के लिए शतों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बीमाकर्ता और बाह्यस्रोतीकरण सेवा प्रदाता के बीच किया जानेवाला लिखित करार अभिप्रेत है;
- ज) ‘महत्वपूर्ण बाह्यस्रोतीकरण’ से वे बाह्यस्रोतीकरण व्यवस्थाएँ अभिप्रेत हैं जो अनुबंध I में वर्णित कारकों के आधार पर महत्वपूर्ण के रूप में निर्धारित हैं;
- (ii) इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु बीमा अधिनियम, 1938, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 अथवा प्राधिकरण के द्वारा जारी किये गये किसी भी विनियमन में परिभाषित सभी शब्दों अथवा अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन संबंधित विधानों में क्रमशः उनके लिए निर्धारित किये गए हैं।