रजिस्ट्री सं० डी० एल०-33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 462] नई दिल्ली, मंगलवार, दिसम्बर 20, 2016/अग्रहायण 29, 1938
No. 462] NEW DELHI, TUESDAY, DECEMBER 20, 2016/AGRAHAYANA 29, 1938
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 14 दिसम्बर, 2016
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
(बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों को कमीशन अथवा पारिश्रमिक अथवा प्रतिफल का भुगतान) विनियम, 2016
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/25/137/2016 .—बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए की उपधारा 2 के खंड (आईसी) और (जेडी) के साथ पठित धारा 31बी तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 14 की उपधारा (1) के साथ पठित धारा 26 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात्:-
1. संक्षिप्त नाम और विनियमों का प्रारंभ:
- (क) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों को कमीशन अथवा पारिश्रमिक अथवा प्रतिफल का भुगतान) विनियम, 2016 के नाम से जाने जाएँगे ।
- (ख) ये विनियम 1 अप्रैल 2017 को प्रवृत्त होंगे।
2. परिभाषाएँ:
- (क) "अधिनियम" से समय-समय पर यथासंशोधित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है।
- (ख) "प्राधिकरण" से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 के उपबंधों के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है।
- (ग) "कमीशन" से बीमा पॉलिसी की अपेक्षा करने और उसे प्राप्त करने के लिए बीमाकर्ता से बीमा एजेंट को अदा किया जानेवाला और बीमा एजेंट द्वारा प्राप्त किया जानेवाला प्रतिकर (कॉम्पेंसेशन) अभिप्रेत है।
- (घ) "बीमा मध्यवर्ती" आईआरडीए अधिनियम, 1999 की धारा 2(1) (एफ) में परिभाषित रूप में है तथा इस विनियम के प्रयोजन के लिए इसमें निम्नलिखित शामिल है-
- कॉरपोरेट एजेंट
- बीमा दलाल
- वेब संग्राहक
- बीमा विपणन फर्म
- समय-समय पर प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित की जानेवाली कोई अन्य संस्था।
- (ङ) "पारिश्रमिक" से बीमा पॉलिसी की अपेक्षा करने और उसे प्राप्त करने के लिए बीमाकर्ता द्वारा अदा किया जानेवाला और बीमा मध्यवर्ती द्वारा प्राप्त किया जानेवाला प्रतिकर (कॉम्पेंसेशन) अभिप्रेत है।
- (च) "प्रतिफल" (रिवॉर्ड) से बीमाकर्ता द्वारा निम्नलिखित को प्रोत्साहन के रूप में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अदा की जानेवाली राशि अभिप्रेत है चाहे वह किसी भी नाम से कहलाए।
- i. बीमा एजेंट को उपदान (ग्रैच्युइटी), मीयादी बीमा रक्षा, विभिन्न सामूहिक बीमा रक्षाओं, टेलीफोन प्रभारों, कार्यालय भत्ता, विक्रय संवर्धन उपहार मदों, प्रतियोगिता पुरस्कारों और ऐसी अन्य मदों जैसे लाभों के लिए।
- ii. बीमा मध्यवर्ती को जोखिम विश्लेषण, अंतराल विश्लेषण, योजना अभिकल्पन, भविष्यसूचक प्रतिरूपण, डेटा प्रबंध, बुनियादी संरचना, विज्ञापन तथा किसी भी नाम से कहलानेवाले किसी अन्य प्रोत्साहन सहित ऐसी अन्य मदों जैसी सेवाओं के लिए।
- (छ) इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित, परंतु समय-समय पर यथासंशोधित अधिनियम, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 अथवा उनके अधीन बनाये गये किन्हीं भी विनियमों/ दिशानिर्देशों में परिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो क्रमशः उन अधिनियमों/ विनियमों/ दिशानिर्देशों में उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
3. विस्तार
- (क) इन विनियमों में बीमा अधिनियम, 1938, आईआरडीए अधिनियम, 1999 तथा उनके अधीन जारी किये गये विनियमों में परिभाषित रूप में बीमा एजेंटों और मध्यवर्तियों को कमीशन अथवा पारिश्रमिक अथवा प्रतिफल का भुगतान सम्मिलित होगा।
- (ख) प्रत्येक बीमाकर्ता के पास बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों को कमीशन अथवा पारिश्रमिक अथवा प्रतिफल के भुगतान के लिए एक लिखित नीति होगी जो कंपनी के बोर्ड द्वारा अनुमोदित की जाएगी।
- (ग) कमीशन अथवा पारिश्रमिक अथवा प्रतिफल के भुगतान के लिए नीति के उद्देश्यों में ऐसे तरीके से बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों का उपयोग सम्मिलित होगा जोः
- (i) देश में बीमा व्यापन और सघनता को बढ़ाए;
- (ii) पॉलिसीधारकों के हित में हो;
- (iii) अपनी व्यावसायिक कार्यनीति के अनुरूप हो;
- (iv) व्यवसाय के संचालन में तथा बीमा व्यवसाय के प्रबंधन के सरलीकरण में किफायत लाये; तथा
- (v) इनमें से प्रत्येक के लिए दिये गये महत्व के सापेक्ष परिमाण को निर्दिष्ट करे।
- (घ) बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों को कमीशन अथवा पारिश्रमिक अथवा प्रतिफल के भुगतान के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति में न्यूनतम स्तर पर निम्नलिखित मदें निहित होंगीः
- (i) निम्नलिखित के भुगतान के संबंध में विधि और शर्तें :
- (1) बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों को कमीशन अथवा पारिश्रमिक;
- (2) एजेंसी के समापन के बाद बीमा एजेंटों को नवीकरण कमीशन (ईआरसी स्थिति), यदि कोई हो;
- (3) बीमा एजेंट की मृत्यु होने की स्थिति में बीमा एजेंट के उत्तराधिकारियों को आनुवंशिक कमीशन।
- (ii) सेवारहित (ऑर्फ़न) पॉलिसियों के अंतरण के संबंध में विधि और शर्तें।
- (iii) बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों की नियुक्ति के समापन, निलंबन और निरसन के आधार और विधि।
- (iv) किसी भी बीमा एजेंट और बीमा मध्यवर्ती द्वारा विक्रय किये जानेवाले उत्पादों पर कोई प्रतिबंध।
- (ङ) कंपनी बीमा एजेंटों और बीमा मध्यवर्तियों को कमीशन अथवा पारिश्रमिक अथवा प्रतिफल के भुगतान के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति प्राधिकरण को वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में दाखिल करेगी तथा उसके बाद प्रत्येक वर्ष उक्त नीति की समीक्षा करेगी और यदि कोई परिवर्तन हों तो उन्हें ऐसे परिवर्तन करने से 30 दिन के अंदर दाखिल करेगी।