IRDAI regulation F.No. IRDAI/Reg/11/205/2024 · 01 Apr 2024
Summary
Check the official recordThe IRDAI (Protection of Policyholder's Interests, operations and allied matters of insurers) Regulations, 2024, establish a comprehensive framework for insurers and distribution channels to ensure policyholder protection and operational transparency. The regulations mandate board-approved policies for policyholder interests, grievance redressal, and claim settlement. They introduce requirements for electronic policy issuance, customer information sheets, and strict guidelines on advertisements, outsourcing, and business locations. Insurers must ensure fair treatment, data confidentiality, and adherence to specified turnaround times. These regulations repeal eight previous sets of regulations, including those concerning premium receipt, e-insurance policies, and outsourcing, to streamline governance and enhance policyholder-centric operations.
What you must do
Key dates
Who is affected
Thresholds
Exceptions
If you do not comply
रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र The Gazette of India
सी.जी.-टी.एल.-अ.-22032024-253330 CG-TL-E-22032024-253330
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 208] नई दिल्ली, शुक्रवार, मार्च 22, 2024/चैत्र 2, 1946 No. 208] NEW DELHI, FRIDAY, MARCH 22, 2024/CHAITRA 2, 1946
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 20 मार्च, 2024
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पालिसीधारकों के हितों का संरक्षण, बीमाकर्ताओं के परिचालन और संबद्ध कार्य) विनियम, 2024
फा.सं.भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/11/205/2024.—बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए की उप-धारा (2), धारा 14, धारा 38 की उप-धारा (7), धारा 39 की उप-धारा (3), धारा 64वीसी, धारा 64वीबी की उप-धारा (6) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 14 और धारा 26 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :
1. संक्षिप्त शीर्षक, प्रयोज्यता और प्रारंभ
(1) ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पालिसीधारकों के हितों का संरक्षण, बीमाकर्ताओं के परिचालन और संबद्ध कार्य) विनियम, 2024 कहलाएंगे।
(2) ये विनियम उन बीमाकर्ताओं और वितरण माध्यमों को छोड़कर जो एकमात्र पुनर्बीमा व्यवसाय में लगे हुए हैं, अन्य सभी बीमाकर्ताओं और वितरण माध्यमों के लिए लागू हैं, जब तक कि अन्यथा विनिर्दिष्ट नहीं किया जाता।
(3) ये विनियम सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख अथवा 1 अप्रैल 2024, जो भी बाद में हो, से प्रवृत्त होंगे।
(4) इन विनियमों की समीक्षा अधिसूचना की तारीख से प्रत्येक 3 (तीन) वर्ष में एक बार की जाएगी, जब तक कि उसके पहले इनकी समीक्षा या निरसन या संशोधन की आवश्यकता उत्पन्न न हो।
2. उद्देश्य
(1) बीमा पालिसियों की अपेक्षा (सलिसिटेशन) और विक्रय के स्तर पर संभावित ग्राहकों के प्रति उचित व्यवहार।
(2) यह सुनिश्चित करना कि पालिसीधारकों के हितों का संरक्षण किया जाए, तथा बीमाकर्ता और वितरण माध्यम का व्यवहार पालिसीधारकों के हितों के प्रतिकूल नहीं हो।
(3) यह सुनिश्चित करना कि बीमाकर्ता और वितरण माध्यम पालिसीधारकों के प्रति अपने दायित्व पूरे करें तथा विक्रय और पालिसीधारकों की सेवा के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं सहित मानक प्रक्रियाएँ लागू करें।
(4) शिकायत निवारण पर बल सहित, बीमाकर्ताओं और वितरण माध्यमों द्वारा पालिसीधारक-केन्द्रित अभिशासन सुनिश्चित करना।
(5) यह सुनिश्चित करना कि बीमाकर्ता नकारात्मक प्रणालीगत प्रभाव को रोकने और पालिसीधारकों के हितों का संरक्षण करने की दृष्टि से बाह्यस्रोतीकरण (आउटसोर्सिंग) से उत्पन्न होने वाले जोखिमों का प्रबंध करने के संबंध में विवेकपूर्ण प्रथाओं का अनुसरण करें। बीमाकर्ताओं द्वारा कार्यकलापों के बाह्यस्रोतीकरण के संबंध में प्रभावी पर्यवेक्षण और पर्याप्त समुचित सावधानी के लिए सुदृढ़ और अनुक्रियाशील प्रबंध को सुनिश्चित करना।
(6) यह सुनिश्चित करना कि बीमाकर्ताओं द्वारा भारत के अंदर और बाहर व्यवसाय के स्थान खोलने और बंद करने का संचालन ऐसे तरीके से किया जाए जो पालिसीधारकों के हितों के विपरीत न हो।
3. इन विनियमों को निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया गया है:
(1) भाग क में पालिसीधारकों के हितों के संरक्षण से संबंधित उपबंध शामिल हैं।
(2) भाग ख में बीमाकर्ताओं के परिचालन और संबद्ध विषयों से संबंधित उपबंध शामिल हैं।
भाग-क पालिसीधारकों के हितों के संरक्षण से संबंधित उपबंध
4. भाग क में निम्नलिखित विषय शामिल हैं :
(1) अध्याय 1 : बीमा पालिसियों के विक्रय से पहले के कार्यकलाप
(2) अध्याय 2 : बीमा पालिसियों के विक्रय के लिए प्रस्ताव
(3) अध्याय 3 : बीमा पालिसियों का विक्रय और निर्गम
(4) अध्याय 4 : प्रीमियम के भुगतान और वापसी, नामांकन और समनुदेशन
(5) अध्याय 5 : पालिसीधारकों की सर्विसिंग