रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
भारत का राजपत्र
The Gazette of India
सी.जी.-डी.एल.-अ.-10122022-240877
CG-DL-E-10122022-240877
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4
PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 631] | नई दिल्ली, मंगलवार, दिसम्बर 6, 2022/अग्रहायण 15, 1944 |
| No. 631] | NEW DELHI, TUESDAY, DECEMBER 6, 2022/AGRAHAYANA 15, 1944 |
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 5 दिसम्बर, 2022
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (भारतीय बीमा कंपनियों का पंजीकरण) विनियम, 2022
**फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./विनियम/9/188/2022.—**बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 3, धारा 3ए और धारा 6ए तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 26, बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण, बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के उपरांत इसके द्वारा निम्नलिखित विनियम बनाता है, अर्थात् :-
1. उद्देश्य, संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
- (1) उद्देश्यः भारतीय बीमा कंपनियों के पंजीकरण की प्रक्रिया का सरलीकरण करने के द्वारा बीमा क्षेत्र की संवृद्धि को बढ़ावा देना तथा व्यवसाय करने की सुगमता का संवर्धन करना।
- (2) संक्षिप्त नामः ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (भारतीय बीमा कंपनियों का पंजीकरण) विनियम, 2022 कहलाएँगे।
- (3) प्रारंभः ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे तथा उसके बाद तीन वर्ष की अवधि के लिए प्रचलित रहेंगे जब तक उसके पहले इनकी समीक्षा नहीं की जाती और इन्हें निरस्त नहीं किया जाता।
2. परिभाषाएँ
- (1) इन विनियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
-
(क) "अधिनियम" से बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) अभिप्रेत है;
-
(ख) "प्राधिकरण" से बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है;
-
(ग) "आवेदक" से कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 की उप-धारा (20) में यथापरिभाषित कंपनी अथवा संसद के अधिनियम के द्वारा स्थापित सांविधिक निकाय अथवा बीमा व्यवसाय करनेवाली सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है;
-
(घ) "भारग्रस्तता" में शामिल हैं.-
- (i) गिरवी, ग्रहणाधिकार, प्रभार चाहे किसी भी नाम से कहलाए;
- (ii) कोई प्रसंविदा (कोविनैंट), लेनदेन, भारग्रस्तता के स्वरूप की कोई स्थिति अथवा व्यवस्था, चाहे किसी भी नाम से कहलाए;
-
(ङ) "विदेशी निवेशक" का अर्थ वही होगा जो उसके लिए भारतीय बीमा कंपनियाँ (विदेशी निवेश) नियम, 2015 के नियम 2 के खंड (1) के उप-खंड (छ) में निर्धारित किया गया है।
-
(च) "विदेशी प्रवर्तक" से "विदेशी निवेशक" अभिप्रेत है जो निम्नलिखित में से एक या उससे अधिक शर्तें पूरी करता हैः
- (i) जो इस रूप में विवरणिका (प्रास्पेक्टस) में उल्लिखित है अथवा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 92 में संदर्भित वार्षिक विवरणी में कंपनी द्वारा अभिनिर्धारित है।
- (ii) कंपनी के कार्यों पर जिसका प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नियंत्रण है चाहे एक शेयरधारक के रूप में, निदेशक के रूप में या अन्य प्रकार से।
- (iii) जिसकी सलाह, निदेशों अथवा अनुदेशों के अनुसार कंपनी का निदेशक बोर्ड कार्य करने का अभ्यस्त है।
बशर्ते कि उप-खंड (iii) में निहित कोई भी बात ऐसे व्यक्ति पर लागू नहीं होगी जो केवल व्यावसायिक क्षमता में कार्य कर रहा है।
-
(छ) "भारतीय निवेशक" से विदेशी निवेशकों को छोड़कर अन्य "निवेशक" अभिप्रेत हैं।
-
(ज) "भारतीय प्रवर्तक" से अभिप्रेत है
- (i) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) में यथापरिभाषित कंपनी जो उस अधिनियम की धारा 2 के खंड (87) में यथापरिभाषित सहायक संस्था नहीं है।
बशर्ते कि एक सहायक कंपनी को आवेदक के प्रवर्तक के रूप में अनुमति दी जा सकती है यदि वह निम्नलिखित शर्तें पूरी करती हैः
- क. उपर्युक्त कंपनी भारत में शेयर बाजार(रों) में सूचीबद्ध है;
- ख. उपर्युक्त कंपनी की निधियों का अपना स्रोत है, जो उसकी धारक कंपनी से स्वतंत्र है;
- ग. उपर्युक्त कंपनी के पास आवेदन की तारीख से पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर कम से कम रु. 500 करोड़ की निवल मालियत (नेट वर्थ) है; तथा
- घ. उपर्युक्त कंपनी की धारक कंपनी किसी अन्य कंपनी की सहायक संस्था नहीं है।
- (ii) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5 के खंड (ग) में यथापरिभाषित बैंकिंग कंपनी, परंतु इसमें कोई विदेशी बैंक अथवा भारत में कार्यरत उसकी शाखा शामिल नहीं है।
- (iii) समय-समय पर यथासंशोधित कोर निवेश कंपनियाँ (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 के अंतर्गत कोर निवेश कंपनी (सीआईसी)।
- (iv) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (72) में यथापरिभाषित सरकारी वित्तीय संस्था।
- (v) फिलहाल प्रचलन में स्थित किसी संबंधित कानून के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी सोसाइटी।
- (vi) सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) के अंतर्गत बनाई गई सीमित देयता भागीदारी।
- (vii) भारतीय रिज़र्व बैंक के पास पंजीकृत गैर-सक्रिय (नान-आपरेटिव) वित्तीय धारक कंपनी (एनओएफएचसी)।
- (viii) समय-समय पर प्राधिकरण द्वारा अनुमत किया जानेवाला कोई अन्य व्यक्ति अथवा संस्था जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 के खंड (69) में स्थित एक या उससे अधिक शर्तें पूरा करता है।
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(झ) "निवेशक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो बीमा कंपनियों के ईक्विटी शेयरों में निवेश करने के लिए अन्यथा पात्र है, तथा वह या तो भारतीय निवेशक हो सकता है या विदेशी निवेशक।
-
(ञ) "प्रबंधन का प्रमुख व्यक्ति" में बीमाकर्ता अथवा आवेदक की कोर प्रबंधन टीम के सदस्य शामिल होंगे तथा इसमें सभी पूर्णकालिक निदेशक अथवा प्रबंध निदेशक अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा प्रबंध निदेशक अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी से एक स्तर नीचे के कार्यात्मक प्रमुख भी शामिल हैं, तथा मुख्य वित्तीय अधिकारी, नियुक्त बीमांकक, मुख्य निवेश अधिकारी, मुख्य जोखिम अधिकारी, मुख्य अनुपालन अधिकारी और कंपनी सचिव भी शामिल हैं।
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(ट) "प्रारंभिक व्यय" से आवेदक के गठन से संबंधित व्यय अभिप्रेत हैं। इनमें आवेदक के गठन के लिए किये गये विधिक, लेखांकन और शेयर निर्गम संबंधी व्यय तथा पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करने से पहले किये गये व्यय शामिल हैं।
-
(ठ) "निजी ईक्विटी निधि" अथवा "पीई निधि" में शामिल हैं-
- (i) एक वैकल्पिक निवेश निधि अथवा उसका प्रबंधक जो सेबी के पास पंजीकृत है (वैकल्पिक निवेश निधि) विनियम, 2012; और/या
- (ii) निवेश के प्रयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएँ केन्द्र प्राधिकरण के पास पंजीकृत एक निधि या उसका प्रबंधक; और/या
- (iii) निवेश के लिए विशिष्ट रूप से गठित निधियाँ जो किसी एफएटीएफ अनुपालनकर्ता क्षेत्राधिकार में किसी भी वित्तीय क्षेत्र विनियमनकर्ता के पास पंजीकृत हैं अथवा उनका प्रबंधक पंजीकृत है।
-
(ड) "प्रवर्तक" से भारतीय प्रवर्तक अथवा विदेशी प्रवर्तक अथवा दोनों अभिप्रेत हैं।
-
(ढ) "शेयरधारिता स्वरूप" से वह शेयरधारिता स्वरूप अभिप्रेत है जिसका अनुमोदन पंजीकरण प्रमाणपत्र के समय अथवा किसी परवर्ती समय पर प्राधिकरण द्वारा किया गया है।
-
(ण) "विशेष प्रयोजन माध्यम" अथवा "एसपीवी" से कंपनी अधिनियम, 2013 के उपबंधों के अंतर्गत पंजीकृत कंपनी अथवा किसी बीमाकर्ता में निवेश करने के प्रयोजन के लिए सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 के अधीन गठित सीमित देयता भागीदारी अभिप्रेत है।
-
(त) "शेयरों का अंतरण" में वर्तमान शेयरधारक(कों) से किसी अन्य व्यक्ति को शेयरों का अंतरण शामिल है तथा ईक्विटी शेयरों का हस्तांतरण और नया निर्गम इसमें सम्मिलित है जो किसी बीमा कंपनी के शेयरधारिता स्वरूप में परिवर्तन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
- (2) यहाँ इन विनियमों में प्रयुक्त और अपरिभाषित परंतु बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4), अथवा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम,1999 (1999 का 41) अथवा उनके अधीन बनाये गये नियमों अथवा विनियमों में परिभाषित सभी शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो क्रमशः उन अधिनियमों, नियमों अथवा विनियमों में उनके लिए निर्धारित किये गये हैं।
3. बीमा व्यवसाय के अनुमत वर्ग
- (1) बीमा व्यवसाय के जिन वर्गों के लिए पंजीकरण आवेदन हेतु माँग की जा सकती है, वे हैं:
- (i) जीवन बीमा व्यवसाय।
- (ii) साधारण बीमा व्यवसाय।
- (iii) एकमात्र तौर पर स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय।
- (iv) एकमात्र तौर पर पुनर्बीमा व्यवसाय।
- (v) प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट किया जानेवाला कोई अन्य वर्ग।
- (2) आवेदक विनियम 3(1) द्वारा विनिर्दिष्ट रूप में व्यवसाय के केवल किसी एक वर्ग के लिए ही पंजीकरण के आवेदन की माँग करेगा।
4. आवेदक के लिए निरर्हताएँ : आवेदक निम्नलिखित परिस्थितियों में माँग-पत्र के लिए आवेदन करने हेतु पात्र नहीं होगाः
- i. जहाँ आवेदन की तारीख से पूर्ववर्ती दो वित्तीय वर्षों के दौरान किसी भी समय पंजीकरण आवेदन के लिए माँग अथवा पंजीकरण के लिए आवेदन प्राधिकरण द्वारा अस्वीकृत किया गया हो अथवा आवेदक द्वारा वापस लिया गया हो; अथवा
- ii. जहाँ पंजीकरण प्रमाणपत्र आवेदन की तारीख से पूर्ववर्ती दो वित्तीय वर्षों के दौरान किसी भी समय प्राधिकरण द्वारा निरस्त किया गया हो; अथवा
- iii. जहाँ आवेदक के नाम में शब्द 'बीमा' (इंश्योरेंस) अथवा 'आश्वासन' (एश्योरेंस) अथवा 'पुनर्बीमा' (रीइंश्योरेंस) शब्द निहित न हो।
5. पंजीकरण के लिए प्रक्रिया
-
(1) अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी)
- i. कोई भी कंपनी अथवा सहकारी सोसाइटी प्राधिकरण से एक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त किये बिना 'बीमा' अथवा 'आश्वासन' अथवा 'पुनर्बीमा' शब्द से युक्त नाम के साथ संस्थापित नहीं की जा सकती।
- ii. विनिर्दिष्ट फार्मेट में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने के लिए आवेदक से अनुरोध किये जाने पर आवेदक को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया जा सकता है।
- iii. आवेदक को जारी किया गया अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) 6 महीने की अवधि के लिए विधिमान्य होगा जिसके अंदर आवेदक पंजीकरण आवेदन अर्थात् फार्म आईआरडीएआई/आर 1 के लिए माँग-पत्र के निर्गम के लिए आवेदन फाइल करेगा।
बशर्ते कि उक्त अनापत्ति प्रमाणपत्र की विधिमान्यता लिखित में दर्ज किये जानेवाले कारणों से तीन महीने की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाई जा सकती है।
-
(2) आर1 अनुमोदन
- i. प्राधिकरण फार्म आईआरडीएआई/आर 1 जारी करने के लिए आवेदन प्राप्त होने पर तथा जाँच करने के बाद विषयों को अपने संतोष के अनुरूप पाने के उपरांत फार्म आईआरडीएआई/आर 1 जारी करेगा जो तीन महीने की अवधि के लिए विधिमान्य होगा जिसके अंदर आवेदक विधिवत् भरा गया फार्म आईआरडीएआई/आर 1 प्राधिकरण को उनके विचारार्थ प्रस्तुत करेगा।
बशर्ते कि प्राधिकरण लिखित में कारण दर्ज करते हुए फार्म आईआरडीएआई/ आर 1 के निर्गम के लिए आवेदन को अस्वीकार कर सकता है।
आगे यह भी शर्त होगी कि प्राधिकरण लिखित में कारण दर्ज करने के द्वारा आईआरडीएआई/आर 1 की विधिमान्यता को आगे और तीन महीने के लिए बढ़ा सकता है।
- ii. विनिर्दिष्ट फार्मेट के अनुसार फार्म आईआरडीएआई/आर 1 में प्रत्येक आवेदन के साथ निम्नलिखित प्रस्तुत किये जाएँगेः
- क. कंपनी के मामले में कंपनियों के रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया गया संस्थापन का प्रमाणपत्र अथवा सहकारी सोसाइटी के मामले में पंजीकरण प्रमाणपत्र।
- ख. जहाँ आवेदक एक कंपनी है तथा कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) के अधीन निगमित है वहाँ संस्था के बहिर्नियम (एमओए) और संस्था के अंतर्नियम (एओए); अथवा बीमा व्यवसाय करने के लिए सांविधिक निकाय स्थापित करते हुए संसद के विधान की एक प्रमाणित प्रतिलिपि;
- ग. सहकारी सोसाइटी के मामले में, उप-विधियों की प्रमाणित प्रतिलिपि।
- घ. प्रवर्तक और आवेदक के निदेशकों का नाम, पता और व्यवसाय;
- ङ. पिछले पाँच वर्षों तक के लिए प्रवर्तक(कों) की वार्षिक रिपोर्ट, जैसा लागू हो, की एक प्रमाणित प्रतिलिपि;
- च. आवेदक के प्रवर्तक(कों) और निवेशक(कों) के बीच शेयरधारकों के करार की एक प्रमाणित प्रतिलिपि, जैसा लागू हो।
- छ. आवेदक के निदेशक बोर्ड द्वारा विधिवत् अनुमोदित पांच वर्ष के लिए व्यवसाय का पूर्वानुमान एक फेलो बीमांकक से प्राप्त प्रमाणपत्र के साथ कि उक्त पूर्वानुमान उचित और व्यवहार्य हैं।
- ज. इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण की किसी भी मान्यताप्राप्त पद्धति के माध्यम से फार्म आईआरडीएआई/आर 1 के प्रसंस्करण के प्रति लागू करों के साथ पाँच लाख रुपये के वापस न करने योग्य शुल्क के भुगतान के समर्थन में सबूत।
- iii. प्राधिकरण फार्म आईआरडीएआई/आर 1 का प्रसंस्करण करते समय संगत समझे जानेवाले विषयों का ध्यान रखेगा जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं, परंतु जो इन्हीं तक सीमित नहीं हैं :
- क. प्रवर्तक और निवेशक जिन कारोबार अथवा व्यवसाय के क्षेत्रों में लगे हुए हैं उनमें से प्रत्येक के आचरण और कार्यनिष्पादन का सामान्य पिछला रिकार्ड;
- ख. प्रवर्तकों, निवेशकों और आवेदक के प्रबंधक-वर्ग में निदेशकों और व्यक्तियों के आचरण और कार्यनिष्पादन का रिकार्ड;
- ग. प्रवर्तकों, निवेशकों और आवेदक की वित्तीय शक्ति;
- घ. प्रवर्तकों, निवेशकों और आवेदक की पूँजीगत संरचना;
- ङ. आवेदक की पूँजीगत आवश्यकताएँ पूरी करने के स्रोत;
- च. आवेदक और उसके प्रवर्तक(कों) की शेयरधारिता का स्वरूप;
- छ. ग्रामीण क्षेत्र में निवास करनेवाले व्यक्तियों, असंगठित क्षेत्र अथवा अनौपचारिक क्षेत्र में स्थित श्रमिकों को अथवा आर्थिक दृष्टि से असुरक्षित अथवा समाज के पिछड़े वर्गों तथा प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट अन्य श्रेणियों के व्यक्तियों के लिए जीवन बीमा अथवा साधारण बीमा अथवा स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने के लिए दायित्व की पूर्ति करने हेतु आवेदक और उसके प्रवर्तकों की क्षमता;
- ज. प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट रूप में मोटर वाहनों के अन्य पक्ष जोखिमों में बीमा व्यवसाय का जोखिम-अंकन करने के लिए दायित्व की पूर्ति करने हेतु क्षमता;
- झ. आवेदक की योजनाबद्ध बुनियादी संरचना;
- ञ. ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय के स्थान स्थापित करने, बीमा व्यवसाय को प्रभावी ढंग से संचालित करने सहित पाँच अनुवर्ती वर्षों के लिए प्रस्तावित व्यवसाय विस्तार योजना; तथा
- ट. अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए संबंधित अन्य विषय।
- iv. प्राधिकरण का अध्यक्ष मामलों की जाँच के बाद संगत और अपने संतोष के अनुरूप पाने पर उक्त अनुमोदन पत्र में विनिर्दिष्ट की जानेवाली शर्तों के अधीन "आर1" अनुमोदन जारी करेगा। उपर्युक्त अनुमोदन पत्र के साथ, आवेदक को पंजीकरण के लिए आवेदन अर्थात् फार्म आईआरडीएआई/आर 2 जारी किया जाएगा।
- v. उक्त "आर1" अनुमोदन उपर्युक्त अनुमोदन की तारीख से तीन महीने की अवधि के लिए विधिमान्य होगा जिसके अंदर आवेदक प्राधिकरण के विचारार्थ विधिवत् भरा गया फार्म आईआरडीएआई/आर 2 प्रस्तुत करेगा।
बशर्ते कि अध्यक्ष, लिखित में कारण दर्ज करते हुए, "आर1" अनुमोदन की विधिमान्यता को और तीन महीने की अवधि के लिए बढ़ा सकता है।
-
(3) आर 2 अनुमोदन
-
i. विनिर्दिष्ट फार्मेट के अनुसार फार्म आईआरडीएआई/आर 2 में प्रत्येक आवेदन के साथ निम्नलिखित मदें प्रस्तुत की जाएँगीः
- क. आवेदक और उसके प्रवर्तकों द्वारा एक शपथ-पत्र कि आवेदक की प्रदत्त शेयर पूँजी, प्रारंभिक व्यय घटाने के बाद, अधिनियम की धारा 6 की अपेक्षाओं का अनुपालन करने के लिए पर्याप्त होगी।
- ख. आवेदन की तारीख को विद्यमान स्थिति के अनुसार आवेदक की शेयरधारिता के स्वरूप को निर्दिष्ट करनेवाला विवरण।
- ग. आवेदक के प्रवर्तकों के प्रबंध निदेशक अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा पूर्णकालिक निदेशक तथा निवेशकों द्वारा यह प्रमाणित करते हुए एक शपथ-पत्र कि अधिनियम की धारा 2 के खंड (7ए) के उप-खंड (ख) में उल्लिखित ईक्विटी पूँजी की धारिता का परिकलन इन विनियमों के साथ पठित भारतीय बीमा कंपनियाँ (विदेशी निवेश) नियम, 2015 के अनुसार किया गया है तथा यह आवेदक की प्रदत्त पूँजी के चौहत्तर प्रतिशत से अधिक नहीं है।
बशर्ते कि भारतीय प्रवर्तक के सीमित देयता भागीदारी होने की स्थिति में, ऐसे शपथ-पत्र पर नामोद्दिष्ट भागीदार के द्वारा हस्ताक्षर किये जाएँगे।
बशर्ते आगे कि आवेदक के एक सहकारी सोसाइटी होने की स्थिति में, शपथ-पत्र यह प्रमाणित करेगा कि अधिनियम की धारा 2 के खंड (8ए) के उप-खंड (ग) में उल्लिखित विदेशी पूँजी की धारिता आवेदक की कुल पूँजी के छब्बीस प्रतिशत से अधिक नहीं है।
- घ. यदि आवेदक के पास विदेशी निवेश है, तो आवेदक के प्रबंध निदेशक अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा पूर्णकालिक निदेशक और प्रवर्तक(कों) द्वारा यह प्रमाणित करते हुए एक शपथ-पत्र कि विनियम 8 की अपेक्षा का अनुपालन किया जाएगा।
- ङ. यदि आवेदक के पास उनचास प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश है, तो आवेदक के प्रबंध निदेशक अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा पूर्णकालिक निदेशक और प्रवर्तकों के द्वारा यह प्रमाणित करते हुए एक शपथ-पत्र कि विनियम 9 की अपेक्षा का अनुपालन किया जाएगा।
- च. आवेदक के मानक फार्मों तथा बीमा पालिसियों के संबंध में प्रस्तावित की जानेवाली आश्वासित दरों, लाभों, शर्तों और निबंधनों के विवरणों की प्रमाणित प्रति एवं साथ ही, जीवन बीमा व्यवसाय की स्थिति में एक बीमांकक द्वारा प्रमाणपत्र कि ऐसी दरें, लाभ, शर्तें और निबंधन व्यवहार्य और युक्तियुक्त हैं।
- छ. प्रवर्तकों और निवेशकों के बीच, अथवा समग्र रूप में प्रवर्तकों के बीच किये गये सहमति ज्ञापन अथवा प्रबंध करार अथवा शेयरधारक करार अथवा मतदान अधिकार करार अथवा किसी भी स्वरूप के किसी अन्य करार, यदि कोई हो, की प्रमाणित प्रति, उक्त पक्षकारों के बीच विनिमय किये गये समर्थन अथवा सुविधा (कम्फर्ट) पत्रों की प्रतियों सहित।
- ज. एक व्यवसायी सनदी लेखाकार अथवा एक व्यवसायी कंपनी सचिव से यह प्रमाणित करते हुए प्रमाणपत्र कि अधिनियम सहित पंजीकरण शुल्क, ईक्विटी शेयर पूँजी, विदेशी निवेश सीमाओं संबंधी सभी अपेक्षाओं और वर्तमान में प्रचलित कानूनों की अन्य अपेक्षाओं का अनुपालन आवेदक द्वारा किया गया है।
- झ. इलेक्ट्रानिक निधि अंतरण की किसी भी मान्यताप्राप्त पद्धति के माध्यम से फार्म आईआरडीएआई/आर 2 के प्रसंस्करण के लिए लागू करों के साथ पाँच लाख रुपये के वापस न करने योग्य शुल्क के भुगतान के समर्थन में सबूत।
-
ii. फार्म आईआरडीएआई/आर 2 के प्रसंस्करण के समाप्त होने के बाद, परंतु प्राधिकरण द्वारा इसके अनुमोदन से पहले आवेदक निम्नलिखित का प्रस्तुतीकरण करेगाः
- क. अधिनियम की धारा 6 तथा प्राधिकरण द्वारा प्रदान किये गये आर1 अनुमोदन और अनुपालन की शर्तों के अनुसार आवेदक द्वारा ईक्विटी शेयर आवेदन राशि प्राप्त करने का साक्ष्य।
- ख. आवेदक, प्रवर्तकों और निवेशकों द्वारा एक शपथ-पत्र कि पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करने के उपरांत उपर्युक्त शेयर आवेदन राशि आवेदक की प्रदत्त ईक्विटी शेयर पूँजी के रूप में परिवर्तित की जाएगी।
-
iii. प्राधिकरण फार्म आईआरडीएआई/आर 2 के प्रसंस्करण के समय संगत समझे जानेवाले विषयों को ध्यान में रखेगा, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं परंतु जो केवल इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:
- क. आवेदक द्वारा प्रदान किये जाने के लिए प्रस्तावित बीमा उत्पादों का स्वरूप;
- ख. आवेदक के प्रबंधन के अंदर बीमांकिक, लेखांकन और अन्य व्यावसायिक विशेषज्ञता का स्तर;
- ग. अपने स्वयं के संगठन के अंदर निवेशों के प्रबंध सहित बीमा व्यवसाय के संबंध में सभी कार्य संचालित करने हेतु आवेदक के संगठन की संरचना;
- घ. आवेदक पात्र है, तथा उसकी राय में अधिनियम के अंतर्गत लागू किये गये अपने दायित्वों को वह प्रभावी ढंग से पूरा कर सकता है;
- ङ. आवेदक के प्रवर्तकों, निवेशकों की वित्तीय स्थिति और प्रबंधक-वर्ग का सामान्य चरित्र दोषरहित हैं;
- च. उपलब्ध होने की संभावना से युक्त व्यवसाय की मात्रा, तथा आवेदक की पूँजीगत संरचना और अर्जन की संभावनाएँ पर्याप्त होंगी;
- छ. आवेदन में विनिर्दिष्ट बीमा व्यवसाय के वर्ग के संबंध में यदि आवेदक को पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है तो आम जनता के हित सुरक्षित होंगे; तथा
- ज. आवेदक ने अधिनियम की धाराओं 2सी, 5 और 31ए के उपबंधों का अनुपालन किया है तथा उसके लिए लागू इन धाराओं की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया है।
- झ. अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए सभी अन्य संबंधित विषय।
-
iv. प्राधिकरण संगत समझे जानेवाले विषयों की जाँच करने के बाद और अपने संतोष के अनुरूप, अपने विवेकानुसार उपर्युक्त अनुमोदन पत्र में विनिर्दिष्ट की जानेवाली शर्तों के अधीन "आर2" अनुमोदन जारी करेगा।
-
(4) पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करनाः- संगत समझे जानेवाले विषयों की जाँच करने के बाद और स्वयं संतुष्ट होने पर, आवेदक को व्यवसाय के उस वर्ग के लिए एक बीमाकर्ता के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है जिसके लिए आवेदक को उपयुक्त पाया गया हो तथा प्राधिकरण का अध्यक्ष आवेदक को निम्नलिखित शर्तों के अधीन फार्म आईआरडीएआई/आर 3 में पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान कर सकता हैः
- i. आवेदक और उसके प्रवर्तक और निवेशक एक निरंतर आधार पर "योग्य और उपयुक्त" (फिट एण्ड प्रोपर) होंगे;
- ii. प्रवर्तक और निवेशक पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करने की तारीख से अपनी शेयरधारिता पर विनिर्दिष्ट अवरुद्धता अवधि (लाक इन पीरियड) का अनुपालन करेंगे।
-
iii. आवेदक के प्रवर्तक और निवेशक विनिर्दिष्ट की जानेवाली अवरुद्धता अवधि (लाक इन पीरियड) के दौरान आवेदक के ईक्विटी शेयरों पर कोई भारग्रस्तता निर्मित नहीं करेंगे।
-
iv. आवेदक के शेयरधारक अधिनियम की धारा 6ए की उप-धारा (4) के अनुसार प्राधिकरण के पूर्व लिखित अनुमोदन के बिना बीमाकर्ता के ईक्विटी शेयरों पर कोई भारग्रस्तता निर्मित नहीं करेंगे।
-
v. आवेदक और प्रवर्तक उक्त शर्तों के द्वारा लगातार आबद्ध होंगे तथा निवेशक लागू होनेवाली ऐसी शर्तों के द्वारा आबद्ध होंगे जिनके अधीन फार्म आईआरडीएआई/आर3 में प्रमाणपत्र जारी किया गया है।
-
vi. आवेदक 15 दिन के अंदर अधिनियम की धारा 6 के अनुसार अपने प्रवर्तकों और निवेशकों को शेयर आबंटित करने तथा प्राधिकरण द्वारा प्रदान किये गये आर1 अनुमोदन और आर2 अनुमोदन के अनुसार निर्धारित शर्तों का अनुपालन करने का साक्ष्य प्रस्तुत करेगा; तथा
-
vii. ऐसी अन्य शर्तें जो पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करते समय उपयुक्त समझी जा सकती हैं।