IRDAI regulation F. No. IRDAI/ Reg/5/193/2023 · 23 Aug 2023
Official title
IRDAI Reinsurance (Amendment) Regulation, 2023
Summary
Check the official recordThe IRDAI has amended its reinsurance regulations to harmonize provisions for Indian insurers, foreign reinsurance branches (FRBs), and IFSC Insurance Offices (IIOs). Key changes include a revised minimum retention requirement of 50% for Indian reinsurers, with a provision allowing up to 20% retrocession to IIOs to count toward this threshold. The amendments introduce new requirements for board-approved underwriting policies, CEO certifications for reinsurance treaties, and specific order-of-preference rules for seeking lead reinsurance support. Additionally, the minimum assigned capital for foreign reinsurer branch offices is increased to ₹50 crore. These regulations aim to encourage domestic capacity and enhance the ease of doing business. Existing arrangements for the 2023-24 financial year remain valid, while new agreements must comply immediately.
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
सी.जी.-डी.एल.-अ.-23082023-248261 CG-DL-E-23082023-248261
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 589] नई दिल्ली, बुधवार, अगस्त 23, 2023/भाद्र 1, 1945 No. 589] NEW DELHI, WEDNESDAY, AUGUST 23, 2023/BHADRA 1, 1945
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
अधिसूचना
हैदराबाद, 22 अगस्त, 2023
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पुनर्बीमा) (संशोधन) विनियम, 2023
फा.सं. भाबीविप्रा/ विनियम/5/193/2023.—बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धाराओं 14 और 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 114ए द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद, इसके द्वारा निम्नलिखित विनियमों का संशोधन करता है।
क. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पुनर्बीमा) विनियम, 2018 ख. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (लायड्स को छोड़कर अन्य विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के शाखा कार्यालयों का पंजीकरण और परिचालन) विनियम, 2015 ग. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (लायड्स इंडिया)विनियम,2016
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभः
i. ये विनियम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पुनर्बीमा) (संशोधन) विनियम, 2023 कहलाएंगे। ii. ये विनियम सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
अध्याय-I
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पुनर्बीमा) विनियम, 2018 का संशोधन
ये विनियम अधिनियम की धारा 2(9) के अंतर्गत यथापरिभाषित बीमाकर्ताओं तथा अधिनियम की धारा 118(सी) के अंतर्गत यथापरिभाषित छूट-प्राप्त बीमाकर्ताओं पर लागू होंगे।
“(4) इन विनियमों की समीक्षा भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (पुनर्बीमा) (संशोधन) विनियम, 2023 की अधिसूचना की तारीख से प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार की जाएगी, जब तक कि उक्त अवधि से पहले इनकी समीक्षा, निरसन अथवा संशोधन की आवश्यकता नहीं होती।”
विनियम 2 में, खंड (4) के उप-खंड (क) में, शब्द “आईआईओएस को छोड़कर अन्य” को शब्द “एफआरबीएस को छोड़कर अन्य” से प्रतिस्थापित किया जाएगा।
विनियम 2 में, खंड (4) के उप-खंड (ख) में, शब्द “और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र बीमा कार्यालय (आईआईओएस)” छोड़ दिये जाएंगे।
विनियम 2 में, खंड (14) को प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :
“14. ‘भारतीय बीमाकर्ता’ से इन विनियमों के प्रयोजन के लिए, अधिनियम की धारा 2(9) के अंतर्गत यथापरिभाषित ‘बीमाकर्ता’ अभिप्रेत है, जिसे प्राधिकरण द्वारा पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया गया हो तथा इसमें छूट-प्राप्त बीमाकर्ता भी शामिल होंगे।”
“17. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र प्राधिकरण, जो प्रथमाक्षर आईएफएससीए के रूप में भी उल्लिखित है, से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 की धारा 4 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र प्राधिकरण अभिप्रेत है।”
“17क. ‘अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र (आईएफएससी) बीमा कार्यालय’ जो इस विनियम में इसके बाद प्रथमाक्षर ‘आईआईओ’ के रूप में कहा गया है, का अर्थ वही होगा जो इसके लिए आईएफएससीए (बीमा व्यवसाय का पंजीकरण) विनियम, 2021 के अंतर्गत निर्धारित किया गया है।”