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The percentage cessions of the sum insured on each general insurance policy to be reinsured with the Indian Reinsurer is 5% for insurance attaching during the year from 1st April 2015 to 31st March 2016. Insurers and Indian reinsurers must follow the specified percentage and terms and conditions for reinsurance cessions. The Indian Reinsurer may require immediate notice with underwriting information for classes with no limit on cessions when a ceding insurer exceeds a specified amount per risk.
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रजिस्ट्री सं० डीडब्ल्यू० एल-33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 285] | नई दिल्ली, बुधवार, अगस्त 26, 2015/भाद्र 4, 1937 |
|---|---|
| No. 285] | NEW DELHI, WEDNESDAY, AUGUST 26, 2015/BHADRA 4, 1937 |
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिसूचना हैदराबाद, 18 अगस्त, 2015
फा. सं. भा.बी.वि.वि.प्रा./आरआई/11/101/2015.—बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 101ए की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण, बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 101बी के अधीन गठित सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद और केन्द्र सरकार के पूर्व-अनुमोदन से इसके द्वारा निम्नलिखित अधिसूचना जारी करता है, अर्थात् :-
भारतीय पुनर्बीमाकर्ता के पास पुनर्बीमा की जानेवाली प्रत्येक साधारण बीमा पॉलिसी पर बीमित राशि का प्रतिशत अध्यर्पण (सेशन्स) 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक के वर्ष के दौरान बीमा संलग्नता (अटैचिंग) के संबंध में 5% होगा।
धारा 101ए(4) में यह व्यवस्था है कि बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 101ए की उप-धारा (2) के अंतर्गत एक अधिसूचना के द्वारा भी इस धारा के अधीन लेन-देन करने हेतु अपेक्षित पुनर्बीमा के किसी भी व्यवसाय के संबंध में शतों को विनिर्दिष्ट किया जाए तथा ऐसी शर्तें भारतीय पुनर्बीमाकर्ताओं और अन्य बीमाकर्ताओं पर बाधकेंगी होंगी।
बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 101ए द्वारा प्रदत्त शक्ति के अनुसरण में प्राधिकरण उक्त अधिनियम की धारा 101बी के अधीन गठित सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद उक्त अधिनियम की धारा 101ए का अनुपालन करते हुए इसके द्वारा "भारतीय पुनर्बीमाकर्ता" को पुनर्बीमा अध्यर्पण (सेशन्स) के लिए प्रतिशत और शर्ते विनिर्दिष्ट करता है।
| वर्ग | बीमित राशि में अध्यर्पण की सीमा | कमीशन |
|---|---|---|
| अग्नि (फायर), आईएआर बड़े जोखिम | 750 करोड़ रुपये बीमित राशि (एमडी+एलओपी) प्रति जोखिम | क) तेल और ऊर्जा, विमानन, सामूहिक स्वास्थ्य तथा मोटर टीपी को छोड़कर सभी वर्गों के लिए न्यूनतम 15% |
| ख) सामूहिक स्वास्थ्य के लिए न्यूनतम 10% | ||
| ग) मोटर टीपी के लिए न्यूनतम 5% | ||
| घ) इससे कुछ भी अधिक जीआईसी और बीमा कंपनी के बीच परस्पर सहमत रूप में हो सकता है। | ||
| मरीन कार्गो/डीएसयू बीमा | 50 करोड़ रुपये बीमित राशि प्रति पॉलिसी/बॉटम/प्रेषण | |
| मरीन हल | 50 करोड़ रुपये बीमित राशि प्रति जलयान | |
| युद्ध (वार) और एसआरसीसी | 50 करोड़ रुपये बीमित राशि प्रति जलयान | |
| मोटर | कोई सीमा नहीं* | |
| कामगारों की क्षतिपूर्ति | कोई सीमा नहीं* | |
| साधारण विमानन हल | कोई सीमा नहीं* | |
| साधारण विमानन देयता | कोई सीमा नहीं* | |
| वित्तीय देयता को छोड़कर सभी देयता उत्पाद | 25 करोड़ रुपये प्रति पॉलिसी यूएसए सहित/50 करोड़ रुपये प्रति पॉलिसी यूएसए को छोड़कर | |
| वित्तीय, ऋण और गारंटी व्यवस्थाएँ, बंधक बीमा, विशेष आक्रामकता पॉलिसियाँ आदि | 50 करोड़ रुपये बीमित राशि प्रति पॉलिसी | |
| अन्य विविध | कोई सीमा नहीं* | |
| मशीनरी बिगड़ जाना, बॉयलर विस्फोट और संबंधित लाभ की हानि | 100 करोड़ रुपये प्रति जोखिम | |
| ठेकेदार के सभी जोखिम, निर्माण के सभी जोखिम, लाभ की अग्रिम हानि, डीएसयू बीमा | 500 करोड़ रुपये प्रति जोखिम (एमडी+एलओपी) | |
| तेल और ऊर्जा | 50 करोड़ रुपये बीमित राशि प्रति जोखिम | 5% |
| फसल/मौसम बीमा | 50 करोड़ रुपये बीमित राशि | 15% |
| विमानन (एअरलाइन्स) | कोई सीमा नहीं* | औसत शर्तें |
लाभ कमीशन
*टिप्पणीः ऊपर तारकिचिह्नांकित अध्यर्पण (सेशन्स) पर "कोई सीमा नहीं" से युक्त वर्गों के संबंध में "भारतीय पुनर्बीमाकर्ता" अध्यर्पण करनेवाले बीमाकर्ता से उसके द्वारा विनिर्दिष्ट प्रति जोखिम राशि से अधिक उसको किसी भी अध्यर्पण के विषय में जोखिम-अंकन की जानकारी सहित तत्काल नोटिस देने की अपेक्षा कर सकता है। ऐसी सीमाओं से अधिक अध्यर्पण (सेशन्स) उक्त नोटिस और जानकारी देने के अधीन बाध्यकारी होंगे।