MeitY notification · 10 Feb 2026
967 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY इलेक्ट्रॉनिकी और सूचिा प्रौद्योनिकी मंत्रालय अजधसूचना नई दिल्ली, 10 फरवरी, 2026 सा.का.नि. 120(अ).…
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REGD. No. D. L.-33004/99
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The Gazette of India
सी.जी.-डी.एल.-अ.-10022026-269993 CG-DL-E-10022026-269993
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 114] नई दिल्ली, मंगलवार, फरवरी 10, 2026/माघ 21, 1947 No. 114] NEW DELHI, TUESDAY, FEBRUARY 10, 2026/MAGHA 21, 1947
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
अधिसूचना
नई दिल्ली, 10 फरवरी, 2026
सा.का.नि. 120(अ).— केन्द्रीय सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 87 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के खंड (य) और खंड (यछ) के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:—
“(गक) ‘श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना’ से कोई भी श्रव्य, प्रतिबिंब, फोटोग्राफ, ग्राफिक, वीडियो, गतिमान दृश्य अभिलेख, ध्वनि अभिलेख या कोई अन्य श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य अंतर्वस्तु अभिप्रेत है, चाहे वह संगत श्रव्य सहित हो या बिना संगत श्रव्य के, और चाहे वह किसी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से सृजित, जनित, उपांतरित या परिवर्तित की गई हो;”।
“(बक) ‘सिंथेटिक रूप से जनित सूचना’ से ऐसी श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना अभिप्रेत है, जो किसी कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके कृत्रिम रूप से या एल्गोरिद्मिक रूप से सृजित, जनित, उपांतरित या परिवर्तित की गई हो, इस प्रकार कि ऐसी सूचना वास्तविक, प्रामाणिक या सत्य प्रतीत होती हो और किसी भी व्यक्ति या घटना का इस प्रकार चित्रण या चित्रीकरण करती हो कि वह किसी प्राकृतिक व्यक्ति या वास्तविक संसार की घटना से अभेद्य होने के रूप में, या अभेद्य होने की संभावना के रूप में, प्रत्यक्ष हो अथवा प्रत्यक्ष होने की संभावना हो;
परंतु यह कि इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना को ‘सिंथेटिक रूप से जनित सूचना’ नहीं समझा जाएगा, जहां ऐसी श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना निम्नलिखित से उत्पन्न होती है—
- (क) नियमित या सद्भावपूर्वक संपादन, स्वरूपण, उन्नयन, तकनीकी सुधार, रंग समायोजन, शोर न्यूनीकरण, प्रतिलेखन, अथवा संपीड़न से उत्पन्न होती है, जिससे मूलभूत श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना के तत्व, संदर्भ या अर्थ में कोई भौतिक परिवर्तन, विकृति या मिथ्या प्रस्तुतीकरण नहीं होता है; या
- (ख) दस्तावेजों, प्रस्तुतियों, पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट (PDF) फाइलों, शैक्षिक या प्रशिक्षण सामग्रियों, शोध आउटपुट के नियमित या सद्भावपूर्वक सृजन, तैयारी, स्वरूपण, प्रस्तुतीकरण या अभिकल्पन से, जिसके अन्तर्गत दृष्टांतात्मक, काल्पनिक, मसौदा, टेम्पलेट-आधारित या अवधारणात्मक अंतर्वस्तु का उपयोग भी शामिल है, जहां ऐसा सृजन या प्रस्तुतीकरण किसी मिथ्या दस्तावेज या किसी मिथ्या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के सृजन या जनन का परिणाम नहीं होता है; या
- (ग) पहुंचनीयता, स्पष्टता, गुणवत्ता, अनुवाद, विवरण, खोजनीयता या अन्वेषणीयता में सुधार करने के लिए केवल कंप्यूटर संसाधनों के उपयोग से, और मूलभूत श्रव्य, दृश्य या श्रव्य-दृश्य सूचना के किसी भी भौतिक भाग को जनित किए बिना, उपांतरित किए बिना, परिवर्तित किए बिना या अभिचालित किए बिना;”।
“(1क) इन नियमों के प्रयोजनों के लिए, विधि-विरुद्ध कृत्य के कारित करने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली सूचना के संदर्भ में ‘सूचना’ के प्रति कोई भी संदर्भ, जिसके अन्तर्गत नियम 3 के उप-नियम (1) के खंड (ख) और खंड (घ) तथा नियम 4 के उप-नियम (2) और (4) शामिल हैं, तब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, सिंथेटिक रूप से जनित सूचना को भी शामिल करने के रूप में अर्थान्वित किया जाएगा।
(1ख) इन नियमों के प्रयोजनों के लिए और संदेहों को दूर करने के लिए, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि किसी मध्यवर्ती द्वारा इन नियमों के अनुपालन में, जिसके अन्तर्गत नियम 3 के उप-नियम (1), उप-नियम (2) या उप-नियम (3) के अनुसार, या उसके अन्तर्गत किसी उल्लंघन के प्रति युक्तियुक्त और उपयुक्त तकनीकी उपायों, जिसके अन्तर्गत ऑटोमेटेड उपकरण या अन्य उपयुक्त तंत्र भी हैं, को परिनियोजित करके अवगत होने पर, किसी भी सूचना, जिसके अन्तर्गत सिंथेटिक रूप से जनित सूचना, डेटा या संचार लिंक भी हैं, को हटाना या उस तक पहुंच को असमर्थ करना, अधिनियम की धारा 79 की उप-धारा (2) के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट शर्तों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।”।
“(ख) कोई मध्यवर्ती, अपने उपयोगकर्ताओं को आवधिक रूप से, कम-से-कम प्रत्येक तीन माह में एक बार, अपने नियमों और विनियमों, निजता नीति, उपयोगकर्ता करार, या किसी अन्य उपयुक्त माध्यम से, सरल एवं प्रभावी तरीके से, अंग्रेज़ी में अथवा संविधान की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी भी भाषा में, यह सूचित करेगा कि—
- (i) उक्त नियमों और विनियमों, निजता नीति या उपयोगकर्ता करार, चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाए, के अनुपालन में विफल रहने की स्थिति में, उसे यह अधिकार होगा कि वह तुरंत उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटर संसाधन तक पहुँच या उपयोग के अधिकारों को समाप्त या निलंबित कर दे, या अनुपालन न करने वाली सूचना को हटाए या उस तक पहुँच को असमर्थ कर दे, या यथास्थिति, दोनों कर दे;
- (ii) जहाँ ऐसा अनुपालन-भंग, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उल्लंघन में, किसी सूचना के सृजन, जनन, उपांतरण, परिवर्तन, होस्टिंग, प्रदर्शित करने, अपलोड करने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने, संग्रहीत करने, अद्यतन करने, साझा करने अथवा अन्यथा प्रचारित करने से संबंधित हो, वहाँ ऐसे अनुपालन-भंग के लिए उत्तरदायी उपयोगकर्ता, अधिनियम के उपबंधों या किसी अन्य लागू विधि के अधीन दण्ड या दण्डनीयता का भागी हो सकता है; और
- (iii) जहाँ ऐसा उल्लंघन, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अपराध के कारित करने से संबंधित हो, जैसे कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) अथवा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (2012 का 32) के अधीन ऐसा अपराध, जिसका अनिवार्य रूप से प्रतिवेदन किया जाना अपेक्षित है, वहाँ लागू विधि के उपबंधों के अनुसार, ऐसे अपराध का समुचित प्राधिकारी को प्रतिवेदन किया जाएगा;
(गक) (ग) के उप-खंड (i) और (ii) को प्रतिकूल प्रभावित किए बिना, जहाँ उप-नियम (3) के अधीन संदर्भित कोई मध्यवर्ती ऐसा कंप्यूटर संसाधन उपलब्ध कराता है, जो सिंथेटिक रूप से जनित सूचना के रूप में सूचना के सृजन, जनन, उपांतरण, परिवर्तन, प्रकाशन, प्रेषण, साझा करने या प्रचारित को सक्षम करता है, अनुमति देता है अथवा सुगम बनाता है, ऐसा मध्यवर्ती, अपने उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त रूप से यह भी सूचित करेगा कि—
- (i) उप-नियम (3) के खंड (क) के उप-खंड (i) के उल्लंघन में सिंथेटिक रूप से जनित सूचना के रूप में सूचना के सृजन, जनन, उपांतरण, परिवर्तन, प्रकाशन, प्रसारित, साझा करने या प्रचारित करने के लिए, मध्यवर्ती के कंप्यूटर संसाधन को निर्देशित करना, अनुदेश देना अथवा अन्यथा कारण कारित करना, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, जिसमें अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (2012 का 32), लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43), स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 (1986 का 60), महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (2013 का 14) तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (1956 का 104) के उपबंध शामिल हैं, लागू होने वाले दण्ड या दण्डनीयता को आकर्षित कर सकता है; और
- (ii) उप-नियम (3) के खंड (क) के उप-खंड (i) का ऐसा कोई उल्लंघन, निम्नलिखित का कारण हो सकता है—
- (I) ऐसी सूचना तक पहुँच को तुरंत असमर्थ किया जाना अथवा ऐसी सूचना का हटा दिया जाना;
- (II) साक्ष्य को किसी भी प्रकार से अधःप्रभावित किए बिना, इस उप-नियम का उल्लंघन करने वाले उपभोक्ता के उपभोक्ता एकाउंट का निलंबन या समापन;
- (III) लागू विधि के अनुसार, ऐसे उपभोक्ता की पहचान तथा उल्लंघनकारी उपभोक्ता की पहचान का शिकायतकर्ता को प्रकटीकरण, जहाँ ऐसा शिकायतकर्ता, ऐसे उल्लंघन का पीड़ित हो, अथवा पीड़ित की ओर से कार्यरत कोई व्यक्ति हो; और
- (IV) जहाँ ऐसा उल्लंघन, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अपराध के कारित करने से संबंधित हो, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) अथवा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (2012 का 32) के अधीन ऐसा अपराध भी शामिल है, जिसका अनिवार्य रूप से प्रतिवेदन किया जाना अपेक्षित है, वहाँ लागू विधि के उपबंधों के अनुसार, ऐसे अपराध का समुचित प्राधिकारी को प्रतिवेदन किया जाना;
(गख) जहाँ कोई मध्यवर्ती, स्वप्रेरणा से, अथवा वास्तविक जानकारी प्राप्त होने पर, अथवा इन नियमों के अधीन प्राप्त किसी शिकायत, परिवाद या सूचना के आधार पर, उप-नियम (3) के किसी भी उल्लंघन के संबंध में, उप-नियम (3) के खंड (क) के उप-खंड (ii) के अंतर्गत आच्छादित सिंथेटिक रूप से जनित सूचना के रूप में सूचना के सृजन, जनन, उपांतरण, परिवर्तन, होस्टिंग, प्रदर्शित करने, अपलोड करने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने, संग्रहीत करने, अद्यतन करने, साझा करने अथवा अन्यथा प्रचारित करने के संबंध में, अवगत हो जाता है, तो वह शीघ्रतम एवं उपयुक्त कार्रवाई करेगा, जिसमें खंड (गक) के उप-खंड (ii) में विनिर्दिष्ट कार्रवाई भी शामिल है;”।
“परंतु जहाँ ऐसी सूचना पुलिस प्रशासन द्वारा जारी की जानी हो, वहाँ एक या अधिक प्राधिकृत अधिकारी हो सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक पुलिस उप महानिरीक्षक के पद से नीचे का न हो, जिसे इस संबंध में विशेष रूप से समुचित सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया हो:”।
“(3) सिंथेटिक रूप से जनित सूचना के संबंध में उचित सावधानी: (क) जहाँ कोई मध्यवर्ती ऐसा कंप्यूटर संसाधन उपलब्ध कराता है, जो सिंथेटिक रूप से जनित सूचना के रूप में सूचना के सृजन, जनन, उपांतरण, परिवर्तन, प्रकाशन, प्रसारित, साझा करने या प्रचारित करने को सक्षम कर सकता है, अनुमति दे सकता है अथवा सुगम बना सकता है, वह यह सुनिश्चित करेगा कि,—
- (i) वह युक्तियुक्त और समुचित तकनीकी उपाय, जिसके अंतर्गत ऑटोमेटेड उपकरण या अन्य उपयुक्त तंत्र भी हैं, परिनियोजित करे, ताकि किसी भी उपभोक्ता को, यथास्थिति, ऐसी किसी भी सिंथेटिक रूप से जनित सूचना का सृजन, जनन, उपांतरण, परिवर्तन, प्रकाशन, प्रसारित, साझा करना या प्रचारित करना अनुमन्य न हो, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि का उल्लंघन करती हो, जिसमें अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (2012 का 32), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 (1908 का 6) के उपबंध भी शामिल हैं, तथा जिसमें ऐसी कोई भी सिंथेटिक रूप से जनित सूचना सम्मिलित है जो,—
- (I) बाल यौन शोषणकारी एवं दुर्व्यवहार सामग्री, अननुमोदित अंतरंग छविचित्रण अंतर्वस्तु अंतर्विष्ट करती अथवा अश्लील, कामोद्दीपक, बाल यौन शोषण संबंधी, शारीरिक निजता सहित दूसरे की निजता को भंग करने वाली, अशिष्ट, असभ्य, अथवा कामुकता व्यक्त करने वाली हो; या
- (II) किसी मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के सृजन, जनन, उपांतरण या परिवर्तन का परिणाम हो; या
- (III) विस्फोटक सामग्री, आयुध अथवा गोलाबारूद की तैयारी, विकास या प्राप्ति से संबंधित हो; या
- (IV) किसी प्राकृतिक व्यक्ति अथवा वास्तविक संसार की घटना का मिथ्या चित्रण या चित्रीकरण करे, किसी व्यक्ति की पहचान, स्वर, आचरण, कार्य, कथन, अथवा किसी घटना को घटित होने के रूप में, धोखा देने की संभावना वाली रीति से गलत ढंग से प्रस्तुत करके, चाहे प्राकृतिक व्यक्ति की संलग्नता सहित या बिना संलग्नता के; और
- (ii) खंड (क) के उप-खंड (i) के अंतर्गत आच्छादित नहीं होने वाली प्रत्येक ऐसी सूचना को, इस प्रकार स्पष्ट रूप से लेबल किया जाएगा कि दृश्य प्रदर्शन में उसकी प्रमुख दृश्यता सुनिश्चित हो, जो सहज रूप से दृष्टिगोचर तथा पर्याप्त रूप से बोधगम्य हो, या श्रव्य अंतर्वस्तु की दशा में, प्रमुख रूप से पूर्वसर्गित श्रव्य प्रकटीकरण के माध्यम से, जिससे तुरंत यह पहचान किया जा सके कि ऐसी सूचना सिंथेटिक रूप से जनित सूचना है, जिसे किसी कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके सृजित, जनित, उपांतरित या परिवर्तित किया गया है; और ऐसी सूचना में, तकनीकी रूप से संभव सीमा तक, स्थायी मेटाडेटा अथवा अन्य उपयुक्त तकनीकी उद्गम-प्रमाण तंत्र, जिसमें एक अद्वितीय पहचानकर्ता भी शामिल है, अंतर्निहित किया जाएगा, ताकि ऐसी सूचना के सृजन, जनन, उपांतरण या परिवर्तन के लिए प्रयुक्त मध्यवर्ती के कंप्यूटर संसाधन की पहचान की जा सके;
- (ख) मध्यवर्ती, खंड (क) के उप-खंड (ii) के अनुसार प्रदर्शित अथवा अंतर्निहित किए गए लेबल, स्थायी मेटाडेटा, जिसमें अद्वितीय पहचानकर्ता भी सम्मिलित है, के उपांतरण, दमन या हटाए जाने को सक्षम नहीं करेगा।”।
“(1क) कोई महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यवर्ती, जो अपने कंप्यूटर संसाधन पर किसी भी सूचना को प्रदर्शित करने, अपलोड करने या प्रकाशित करने को सक्षम करता है, ऐसी सूचना के प्रदर्शन, अपलोड या प्रकाशन से पूर्व,—
- (क) उपयोगकर्ताओं से यह घोषणा कराएगा कि क्या ऐसी सूचना सिंथेटिक रूप से जनित सूचना है;
- (ख) ऐसी घोषणा की शुद्धता का सत्यापन करने के लिए, ऐसी सूचना के स्वरूप, प्रारूप और स्रोत को ध्यान में रखते हुए, समुचित तकनीकी उपाय, जिसके अंतर्गत ऑटोमेटेड उपकरण या अन्य उपयुक्त तंत्र भी हैं, परिनियोजित करेगा; और
- (ग) जहाँ ऐसी घोषणा या तकनीकी सत्यापन से यह पुष्टि होती है कि सूचना सिंथेटिक रूप से जनित है, वहाँ यह सुनिश्चित करेगा कि उसी को एक उपयुक्त लेबल या सूचना-पत्र के साथ, यह दर्शाते हुए कि अंतर्वस्तु सिंथेटिक रूप से जनित है, स्पष्ट रूप से तथा प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए:
परंतु यह कि जहाँ ऐसा मध्यवर्ती अवगत हो जाता है, या यह अन्यथा स्थापित हो जाता है, कि ऐसे मध्यवर्ती ने, इन नियमों के उल्लंघन में, ऐसी सिंथेटिक रूप से जनित सूचना को जानबूझकर अनुमति दी, बढ़ावा दिया, अथवा उसके संबंध में कार्रवाई करने में विफल रहा, तो ऐसा मध्यवर्ती इस उप-नियम के अधीन उचित सावधानी बरतने में विफल माना जाएगा।
स्पष्टीकरण— संदेहों को दूर करने के लिए, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि महत्त्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यवर्ती का दायित्व, उपभोक्ता घोषणाओं की शुद्धता का सत्यापन करने हेतु युक्तियुक्त और समानुपाती तकनीकी उपाय करने तक तथा यह सुनिश्चित करने तक विस्तृत होगा कि किसी भी सिंथेटिक रूप से जनित सूचना का, ऐसी घोषणा या लेबल के बिना, प्रकाशन न किया जाए।”।