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The Central Government issues the Information Technology Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code Amendment Rules, 2025 to update the removal timeframe and sources of actual knowledge for intermediaries. An intermediary removes or disables access to prohibited information within thirty-six hours of receiving actual knowledge. Actual knowledge arises through a court order or a reasoned written intimation from an authorised officer of the Appropriate Government or police administration. All intimations undergo a monthly periodic review by an officer not below the rank of Secretary. The rules come into force on November 15, 2025.
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
सं. 691] No. 691] नई दिल्ली, बुधवार, अक्टूबर 22, 2025/आश्विन 30, 1947 NEW DELHI, WEDNESDAY, OCTOBER 22, 2025/ASVINA 30, 1947
सी.जी.-डी.एल.-अ.-22102025-267089 CG-DL-E-22102025-267089
इलेक्ट्रॉजिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय अधिसूचना
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर, 2025
सा.का.नि. 775(अ).— केन्द्रीय सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 87 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के खंड (य) और खंड (यछ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:—
“(घ) कोई मध्यवर्ती, जिसके कंप्यूटर संसाधन पर ऐसी सूचना होस्ट, प्रदर्शित, प्रकाशित, प्रेषित या संगृहीत की गई है जिसका उपयोग विधिविरुद्ध कार्य करने के लिए किया गया है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित; राज्य की
सुरक्षा; विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों; लोक-व्यवस्था; शिष्टाचार या नैतिकता; किसी न्यायालय की अवमानना; मानहानि; उपर्युक्त के संबंध में किसी अपराध के उद्दीपन से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्रतिषिद्ध है, अथवा ऐसी किसी सूचना के संबंध में है जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्रतिषिद्ध है, अधिनियम की धारा 79 की उप-धारा (3) के खंड (ख) के तहत वास्तविक जानकारी प्राप्त होने पर ऐसी सूचना को वास्तविक जानकारी प्राप्त होने के छत्तीस घंटों के भीतर हटाएगा या उस तक पहुंच को अक्षम करेगा; और ऐसी वास्तविक जानकारी केवल निम्नलिखित तरीकों से उत्पन्न होगी, अर्थात्:—
(i) सक्षम न्यायालय के आदेश के माध्यम से; या
(ii) लिखित रूप में एक तर्कसंगत सूचना,—
परंतु जहाँ ऐसी सूचना पुलिस प्रशासन द्वारा जारी की जानी हो, वहाँ प्राधिकृत अधिकारी पुलिस उप महानिरीक्षक के पद से नीचे का न हो, जिसे इस संबंध में विशेष रूप से समुचित सरकार द्वारा प्राधिकृत किया गया हो:
परंतु यह और कि ऐसी सभी सूचनाएं संबंधित समुचित सरकार के कम से कम के सचिव के पद के अधिकारी द्वारा प्रत्येक माह में एक बार आवधिक समीक्षा के अधीन होंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी सूचनाएं आवश्यक, आनुपातिक हैं और अधिनियम की धारा 79 की उप-धारा (3) के खंड (ख) तथा इस खंड के अनुरूप हैं।
[फा. सं. 2(4)/2025-साइबर लॉँज़] अजीत कुमार, संयुक्त सचिव
टिप्पण.—मूल नियम भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग II, खंड 3, उप-खंड (i) में अधिसूचना संख्यांक सा.का.नि. 139(अ), तारीख 25 फरवरी, 2021 द्वारा प्रकाशित किए गए थे और तत्पश्चात् अधिसूचना संख्यांक सा.का.नि. 794(अ), तारीख 28 अक्टूबर, 2022 और अधिसूचना संख्यांक सा.का.नि. 275(अ), तारीख 6 अप्रैल, 2023 द्वारा संशोधित किए गए थे।