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Publishing Maritime Labour Rules 2026 under Merchant Shipping Act 2025

5922 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY पत्तन, पोत पररवहन और िलमागग मंत्रालय अजधसूचना नई दिल्ली, 30 िुलाई, 2026 सा.का.जन. 695(अ).—केन्द्…

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04 Aug 2026
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5922 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99

xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY

पत्तन, पोत पररवहन और िलमागग मंत्रालय अजधसूचना नई दिल्ली, 30 िुलाई, 2026

सा.का.जन. 695(अ).—केन्द्रीय सरकार, वाणिज्य पोत पररवहन अधिननयम, 2025 (2025 का 24) की िारा 5 की उपिारा (3), िारा 78,िारा 113 की उपिारा (1) और उपिारा (2) के खंड (घ), खंड (च), खंड (छ), खंड (ज), खंड (झ), खंड (ञ), खंड (ड),खंड(ढ) औरखंड (भ) तथा िारा 319 की उपिारा (2) के खंड (च), (ठ), और(ड) द्वारा प्रदत्त शक्ततयों का प्रयोग करते हुए तथा वाणिज्य पोत पररवहन (समुरीय श्रम) ननयम, 2016 को उन बातों के ससवाय अधिक्ांत करते हुए क्जन्द्हेऐसे अधिक्मि से पूवव ककया गया है या करने का लोप ककया गया है, ननम्नसलणखत ननयम बनाती है, अथावत् :—

  1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.-(1) इन ननयमों का संक्षिप्त नाम वाणिज्य पोत पररवहन (समुरीय श्रम) ननयम, 2026 है । (2) ये ननयम राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।

सं. 633] नई दिल्ली, िुक्रवार, िुलाई 31, 2026/श्रावण 9, 1948

No. 633] NEW DELHI, FRIDAY, JULY 31, 2026/SHRAVAN 9, 1948

सी.जी.-डी.एल.-अ.-05082026-275217 CG-DL-E-05082026-275217

2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

  1. लागू होना.-जब तक कक इन ननयमों में अन्द्यथा ववननर्दवष्ट न ककया गया हो, ये ननयम अधिननयम के अिीन रक्जस्ट्रीकृत सभी नाववकों और पोतों पर लागू होंगे, ककन्द्तु ननम्नसलणखत पर लागू नहीं होंगे, अथावत्— (क) ऐसे पोत जो ववशेष रूप से अंतदेशीय जल में अथवा संरक्षित जल या उन िेत्रों के भीतर या उनके ननकट संचासलत होते हैं जहां वतवमान में प्रवृत्त ककसी ववधि के अिीन पत्तनों से संबंधित उपबंि लागू होते हैं; (ख) मत्सस्ट्यन कक्याकलापों में संलग्न पोत; (ग) पारंपररक रूप से ननसमवत पोत, जैसे कक िाऊ और जंक; (घ) युद्िपोत अथवा नौसेना सहायक पोत; तथा (ङ) ऐसे अन्द्य पोत क्जन्द्हें महाननदेशक, समय-समय पर, असभसमय के अनुसार और संबंधित पोत का स्ट्वामी संघ और नाववक संघ से परामशव करने के पश्चात्, इन ननयमों के प्रयोजनों के सलए समकि मानने का ववननश्चय करे।
  2. पररभाषाएं.-(1) इन ननयमों में, जब तक कक संदभव से अन्द्यथा अपेक्षित न हो,— (क) “अधिननयम” से वाणिज्य पोत पररवहन अधिननयम, 2025 (2025 का 24) असभप्रेत है; (ख) “पोतों के ववरुद्ि सशस्ट्त्र डकैती” से ककसी पोत के ववरुद्ि अथवा ऐसे पोत पर क्स्ट्थत व्यक्ततयों या संपवत्त के ववरुद्ि ककसी देश के आंतररक जल, द्वीपसमूह जल और राज्यिेत्रीय जल में ननजी उद्देश्यों के सलए की गई र्हंसा, ननरोि, लूट अथवा उसकी िमकी का कोई अवैि कायव, जो समुरीय डकैती न हो, असभप्रेत है, तथा इसमें ऐसे कायों को उकसाना या जानबूझकर सुगम बनाना भी सक्म्मसलत है; (ग) “सामूर्हक करार” से नाववक संघ औरपोत का स्ट्वामी संघ के मध्य समय-समय पर संपार्दत ऐसा करार असभप्रेत है क्जसमें भारतीय ध्वज वाले पोतों पर कायवरत नाववकों के सलए असभसमय के अनुसार सेवा की शतें और पररक्स्ट्थनतयां ननर्हत हों; (घ) “सिम प्राधिकारी” से— (i) भारत के संबंि में, महाननदेशक; और (ii) भारत से सभन्द्न ककसी राज्य के संबंि में, उस राज्य में लागू ववधि के अिीन समुरीय प्रशासन के सलए उत्तरदायी प्राधिकारी या असभकरि, असभप्रेत है; (ङ) “संववदात्समक दावा” से ऐसा दावा असभप्रेत है जो— (i) ककसी नाववक की मृत्सयु से संबंधित हो, जो वह नाववकीय सेवा करार के अिीन सेवा करते समय ककसी भी कारि से हुई हो; या (ii) व्यावसानयक चोट, बीमारी अथवा जोणखम के कारि दीघवकासलक अिमता की दशा में, जैसा कक यथाक्स्ट्थनत, नाववकीय सेवा करार अथवा लागू सामूर्हक करार, में उपबंधित हो; (च) “असभसमय” से 23 फरवरी, 2006 को यथासंशोधित, जेनेवा में हस्ट्तािररत समुरीय श्रम असभसमय, 2006, असभप्रेत है; (छ) “प्ररूप” से इन ननयमों से उपाबद्ि प्ररूप असभप्रेत है; (ज) “कायव के घंटे” से वह समय असभप्रेत है क्जसके दौरान नाववकों को पोत के कायव के कारि कायव करना अपेक्षित हो;

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 3

(झ) “ववश्राम के घंटे” से कायव के घंटों से बाहर का समय असभप्रेत है, ककन्द्तु इसमें कायव के घंटों के दौरान एक घंटे तक के अल्प ववश्राम या भोजनावकाश सक्म्मसलत नहीं होंगे; (ञ) “रात्रत्र” से कम से कम नौ घंटे की वह अवधि असभप्रेत है जो 2100 बजे प्रारम्भ होकर 0600 बजे समाप्त होती है और जो पोत के स्ट्थान के समय िेत्र के अनुसार ननिावररत होगी; (ट) “जलदस्ट्युता” से समुरी जलदस्ट्युता रोिी अधिननयम, 2022 (2023 का 3) की िारा 2 की उपिारा (1) के खंड (ज) में पररभावषत जलदस्ट्युता असभप्रेत है; (ठ) “मान्द्यता प्राप्त संगठन” से ऐसा वगीकरि समाज अथवा अन्द्य ननकाय असभप्रेत है क्जसे केन्द्रीय सरकार द्वारा उसकी ओर से वैिाननक सवेिि, लेखापरीिा, ननरीिि, अनुमोदन और प्रमािन संबंिी कायों के ननष्पादन हेतु मान्द्यता प्रदान की गई हो; (ड) “नाववकीय सेवा करार” से अधिननयम की िारा 63 में ननर्दवष्ट करार असभप्रेत है; (ढ) “र्हंसा और उत्सपीड़न” से कायवस्ट्थल पर ऐसे अस्ट्वीकायव व्यवहार, आचरि, प्रथाएं अथवा उनकी िमककयां असभप्रेत हैं, चाहे वे एकल घटना हों या बार-बार होने वाली, क्जनका उद्देश्य या पररिाम अथवा संभाववत पररिाम शारीररक, मानससक, लैंधगक या आधथवक िनत पहुंचाना हो, और इसमें लैंधगक आिार पर र्हंसा तथा उत्सपीड़न भी सक्म्मसलत है। स्पष्टीकरण— इस खंड के प्रयोजनों के सलए, “लैंधगक आिार पर र्हंसा तथा उत्सपीड़न” से ऐसी र्हंसा और उत्सपीड़न असभप्रेत है जो ककसी व्यक्तत के सलंग अथवा जेंडर के कारि उसके ववरुद्ि ननदेसशत हो अथवा ककसी ववशेष सलंग या जेंडर के व्यक्ततयों को अनुपातहीन रूप से प्रभाववत करता हो, तथा इसमें लैंधगक उत्सपीड़न भी सक्म्मसलत है। (2) उन शब्दों और पदों के, जो इन ननयमों में प्रयुतत हैं और पररभावषत नहीं है ककंतु अधिननयम में पररभावषत हैं, वही अथव होंगे, जो उनके अधिननयम में हैं । 4. न्यूनतम आयु.-(1) सोलह वषव से कम आयु के ककसी व्यक्तत को ककसी पोत पर ननयोक्जत या कायव करने हेतु नहीं रखा जाएगा। (2) (क) अठारह वषव से कम आयु के ककसी व्यक्तत को रात्रत्र में कायव करने अथवा ऐसे कायव हेतु नहीं रखा जाएगा क्जससे उसके स्ट्वास्ट््य या सुरिा को जोणखम होने की संभावना हो। (ख) महाननदेशक, संबंधित नाववक संघ औरपोत का स्ट्वामी संघ से परामशव करने के पश्चात् तथा सुसंगत अंतरावष्रीय मानकों के अनुसार, ऐसे कायों के प्रकार ववननर्दवष्ट करेंगे क्जसमें ऐसे व्यक्तत को नहीं रखा जाएगा। 5. चिककत्सीय प्रमाणपत्र.-धचककत्ससीय प्रमािपत्र का प्ररूप और उसे प्रदान करने के सलए सिम प्राधिकारी अधिननयम के अिीन बनाए गए लागू ननयमों के अनुसार होगा। 6. प्रशििण और अहहता.-नाववकों का प्रसशिि और अहवता अधिननयम की िारा 61 के अनुसार होगी। 7. भती और ननयुक्तत.-(1) नाववकों की भती और ननयुक्तत, अधिननयम की िारा 62 तथा उसके अिीन बनाए गए ननयमों के अनुसार की जाएगी। (2)प्रत्सयेक भारतीय पोत का पोत का स्ट्वामी, जो ककसी नाववक को ननयोक्जत करता है, महाननदेशक द्वारा ववननर्दवष्ट शतों के अिीन, बीमा अथवा अन्द्य समकि उपयुतत व्यवस्ट्था के माध्यम से ऐसी सुरिा प्रिाली स्ट्थावपत करेगा क्जससे नाववकों को उस आधथवक हानन के सलए िनतपूनतव प्राप्त हो सके जो उन्द्हें पोत का स्ट्वामी द्वारा नाववक ननयोजनकरार के अिीन अपने दानयत्सवों का ननववहन करने में ववफल रहने के पररिामस्ट्वरूप हुई हो।

4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

  1. नाविकों के ननयोजनकरार.-(1)प्रत्सयेक भारतीय ध्वजिारी पोत ननम्नसलणखत अपेिाओं का पालन करेगा, अथावत्— (क)भारतीय ध्वजिारी पोतों पर कायवरत नाववकों के सलए नाववक, मासलक या पोत का स्ट्वामी अथवा अनुज्ञक्प्त प्राप्त भती और ननयुक्तत सेवा के मध्य हस्ट्तािररत नाववक ननयोजनकरार होना आवश्यक होगा; अथवा जहां वे कमवचारी नहीं हैं, वहां ऐसे संववदात्समक या समरूप प्रबंिों का साक्ष्य उपलब्ि होगा जो अधिननयम और उसके अिीन बनाए गए ननयमों के अनुसार उन्द्हें पोत पर सम्मानजनक कायव तथा जीवन-पररक्स्ट्थनतयां प्रदान करते हों। (ख)नाववकों को करार पर हस्ट्तािर करने से पूवव उसका परीिि करने, उस पर सलाह प्राप्त करने और ऐसी अन्द्य सुवविाएं प्राप्त करने का अवसर र्दया जाएगा क्जससे यह सुननक्श्चत हो सके कक उन्द्होंने अपने अधिकारों तथा दानयत्सवों को पयावप्त रूप से समझते हुए स्ट्वतंत्र रूप से करार ककया है। (ग)पोत का स्ट्वामीऔर संबंधित नाववक, दोनों के पास नाववक ननयोजनकरार की मूल हस्ट्तािररत प्रनत होगी। (घ)पोत का स्ट्वामी यह सुननक्श्चत करेगा कक नाववक ननयोजनकरार— (i)महाननदेशक अथवा अन्द्य ककसी सिम प्राधिकारी, क्जसमें भ्रमि ककए जाने वाले पत्तनों के पोटव स्ट्टेट प्राधिकरि भी सक्म्मसलत हैं, के सलए उपलब्ि हो; (ii)ननयोजन की शतों के संबंि में स्ट्पष्ट जानकारी समार्हत करता हो; (iii)मासलक सर्हत सभी नाववकों के सलए पोत पर आसानी से उपलब्ि हो। (ङ)करार की समाक्प्त अथवा समाप्त ककए जाने पर प्रत्सयेक नाववक के ननरंतर सेवा प्रमािपत्र पर पोत पर ककए गए ननयोजन का असभलेख अंककत ककया जाएगा। (2)नाववक ननयोजनकरार में लागू सामूर्हक करार को सक्म्मसलत ककया जाएगा और उसकी एक प्रनत पोत पर उपलब्ि रखी जाएगी। (3)नाववक ननयोजनकरार तथा कोई भी लागू सामूर्हक सौदेबाजी करार अंग्रेजी भाषा में होगा। (4)जहां सामूर्हक सौदेबाजी करार पूिवतः अथवा आंसशक रूप से नाववक ननयोजनकरार का र्हस्ट्सा बनता है, वहााँ उस समझौते की प्रनत पोत पर उपलब्ि कराई जाएगी। (5)पोत का स्ट्वामी अथवा उसकी अनुज्ञक्प्त प्राप्त भती और ननयुक्तत सेवा, नाववक ननयोजनकरार को इलेतरॉननक माध्यम से पोत पररवहन मासलक को प्रस्ट्तुत करेगी। (6)प्रत्सयेक क्स्ट्थनत में नाववक ननयोजनकरार में प्ररूप–8 में ववननर्दवष्ट वववरि सक्म्मसलत होंगे। (7)नाववक ननयोजनकरार की पूववकासलक समाक्प्त हेतु नाववक औरपोत का स्ट्वामी द्वारा र्दए जाने वाले नोर्टस की न्द्यूनतम अवधि सामूर्हक सौदेबाजी करार अथवा नाववक ननयोजनकरार के अनुसार होगी, ककन्द्तु ककसी भी क्स्ट्थनत में यह सात र्दन से कम नहीं होगी। (8)उपननयम (7) में ववननर्दवष्ट न्द्यूनतम अवधि से कम नोर्टस उन पररक्स्ट्थनतयों में र्दया जा सकता है क्जन्द्हें लागू सामूर्हक सौदेबाजी करार में कम अवधि के नोर्टस अथवा त्रबना नोर्टस के करार समाप्त करने के सलए उधचत माना गया हो। ऐसी पररक्स्ट्थनतयों का ननिावरि करते समय यह सुननक्श्चत ककया जाएगा कक अनुकंपा अथवा अन्द्य अत्सयावश्यक कारिों से नाववक को त्रबना दंड के कम अवधि के नोर्टस पर या त्रबना नोर्टस के करार समाप्त करने की अपेिा का समुधचत ध्यान रखा जाए। (9)पोत की हानन, डूब जाने अथवा ववनष्ट होने के कारि उत्सपन्द्न चोट, िनत या बेरोजगारी की क्स्ट्थनत में पोत का स्ट्वामी से िनतपूनतव प्राप्त करने का नाववक का अधिकार सामूर्हक सौदेबाजी करार अथवा नाववक ननयोजनकरार में ववननर्दवष्ट होगा।

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 5

(10)यर्द नाववक जलदस्ट्युताया पोतों के ववरुद्ि सशस्ट्त्र लूट के पररिाम स्ट्वरूप पोत पर अथवा पोत से बाहर बंिक बना सलया जाता है, तो नाववक ननयोजनकरार प्रभावी बना रहेगा, चाहे उसकी ननयत समाक्प्त र्दनांक बीत चुकी हो अथवा ककसी पि द्वारा उसे ननलंत्रबत या समाप्त करने का नोर्टस र्दया गया हो। (11)यर्द नाववक ननयोजनकरार की समाक्प्त या उसकी अवधि पूिव होने के बावजूद पोत पर सेवाएं प्रदान करता रहता है, तो पोत के ननरोिअथवा धगरफ्तारी की अवधि तक और नाववक के पोत से उतरनेतक करार प्रभावी बना रहेगा। 9. िेतन.-(1)पोत का स्ट्वामी यह सुननक्श्चत करेगा कक उसके पोतों पर कायवरत नाववकों को देय भुगतान अधिकतम एक माह के अंतराल से ककया जाए। (2)जहां लागू सामूर्हक सौदेबाजी करार में इससे कम अवधि का उपबंि हो, वहां वही अवधि लागू होगी। (3)यर्द उपननयम (1) में ववननर्दवष्ट माससक अवधि अथवा उपननयम (2) में ववननर्दवष्ट कम अवधि के भीतर वेतन का भुगतान नहीं ककया जाता है, तो पोत का स्ट्वामी देय वेतन पर प्रनतवषव छह प्रनतशत की दर से सािारि ब्याज देने के सलए उत्तरदायी होगा। यह ब्याज प्रत्सयेक ववलंत्रबत र्दन के सलए उस र्दनांक से गिना ककया जाएगा क्जस र्दन वेतन देय हुआ था, और वास्ट्तववक भुगतान की र्दनांक तक देय रहेगा। (4)पोत का स्ट्वामी यह सुननक्श्चत करेगा कक नाववकों को देय और प्रदत्त भुगतानों का माससक वववरि उपलब्ि कराया जाए, क्जसमें वेतन, अनतररतत भुगतान तथा ववदेशी मुरा में भुगतान ककए जाने की क्स्ट्थनत में प्रयुतत ववननमय दर का उल्लेख हो। (5)पोत का स्ट्वामी ऐसे उपाय करेगा, जैसा कक उपननयम (6) में वणिवत है, क्जससे नाववक अपनी आय का सम्पूिव या आंसशक भाग अपने पररवार, आधश्रतों अथवा ववधिक लाभाधथवयों को प्रेवषत कर सकें। (6)नाववकों को अपनी उपाक्जवत आय पररवार को भेजने में सिम बनाने हेतु ननम्नसलणखत उपाय ककए जाएंगे, अथावत्— (क)ऐसी व्यवस्ट्था क्जसके माध्यम से नाववक, ननयुक्तत ग्रहि करते समय अथवा सेवा अवधि के दौरान, यर्द वे चाहें, तो अपने वेतन का एक भाग ननयसमत अंतराल पर बैंक अंतरि अथवा अन्द्य समरूप माध्यमोंद्वारा अपने पररवार को भेजने हेतु आबंर्टत कर सकें; (ख)यह सुननक्श्चत करना कक ऐसी आबंर्टत िनरासश समय पर और सीिे उन व्यक्ततयों को अंतररत की जाए क्जन्द्हें नाववक द्वारा नासमत ककया गया हो। (7)उपननयम (5) और उपननयम (6) के खंड (क) तथा खंड (ख) के अिीन प्रदान की जाने वाली सेवा के सलए सलया जाने वाला कोई भी प्रभार उधचत होगा और, जब तक अन्द्यथा उपबंधित न हो, मुरा ववननमय दर भारतीय ररजवव बैंक द्वारा ववननर्दवष्ट आधिकाररक दर अथवा प्रचसलत बाजार दर के अनुसार होगी और वह नाववक के सलए प्रनतकूल नहीं होगी। (8)ककसी लागू सामूर्हक सौदेबाजी करारके अभाव में, नाववक के ननयोजन करार के अनुसार देय वेतन ननम्नसलणखत में से ककसी से कम नहीं होगा— (क) यथाक्स्ट्थनत, ववदेशी व्यापार अथवा तटीय व्यापार, या भारत में संबंधित िेत्र के ककसी सामूर्हक सौदेबाजी करारसेसुसंगत उच्चतम रासश; अथवा (ख)संयुतत समुरीय आयोगया अंतरावष्रीय श्रम कायावलयके शासी ननकाय द्वारा प्राधिकृत ककसी अन्द्य ननकाय द्वारा समय-समय पर ननिावररत रासश। (9)जहां कोई नाववकपोत पर या पोत से बाहर जलदस्ट्युता अथवा जहाजों के ववरुद्ि सशस्ट्त्र लूट के कृत्सयों के पररिाम स्ट्वरूप बंिक बना सलया जाता है, अथवा ननरुद्ि या कारावास में रखा जाता है, वहां उसके ननयोजन करार,

6 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

संबंधित सामूर्हक सौदेबाजी करार अथवा इन ननयमों के अिीन, यथाक्स्ट्थनत, देय वेतन और अन्द्य सभी अधिकार तथा लाभ, क्जनमें संप्रत्सयावतवनऔर उपननयम (6) में ववननर्दवष्ट आबंटनों का प्रेषि भी सक्म्मसलत है, पोत पोत के स्ट्वामी द्वारा बंिक बनाए जाने की सम्पूिव अवधि के दौरान तथा नाववक की ररहाई और ननयम 12 के अनुसार ववधिवत संप्रत्सयावतवन होने तक सुननक्श्चत ककए जाएंगे और उनका भुगतान ककया जाएगा; तथा यर्द नाववक की मृत्सयु बंिक अवस्ट्था में हो जाती है, तो उसकी मृत्सयु की तारीख तक यह भुगतान जारी रहेगा। 10. कायव और ववश्राम के घंटे.-(1)नाविकों के शलए सामान्य कायह समय का मानक प्रनत दिन आठ घंटे और प्रनत सप्ताह एक दििस का विश्राम तथा सामूदहक सौिेबाजी करार या नाविक ननयोजन करार के अनुसार सािहजननक अिकािों पर विश्राम होगा। (2)पोत का स्ट्वामीन्द्यूनतम ववश्राम अवधि ननिावररत करेगा, जो ननम्नसलणखत से कम नहीं होगी— (क)ककसी भी चौबीस घंटे की अवधि में दस घंटे; और (ख)सात र्दनों की अवधि में कुल सतहत्तर घंटे, जो ववसभन्द्न अवधियों में प्राप्त ककए जा सकते हैं। (3)न्द्यूनतम ववश्राम अवधि को अधिकतम दो भागों में ववभाक्जत ककया जा सकेगा, क्जनमें से एक अवधि कम से कम छह घंटे की होगी और लगातार दो ववश्राम अवधियों के मध्य का अंतराल चौदह घंटे से अधिक नहीं होगा। (4)मस्ट्टर, अक्ग्नशमन और जीवनरिक नौका अभ्यासतथा अधिननयम औरउसके अिीन बनाए गए ननयमों तथा अंतरराष्रीय सलखतोंके अिीन ववननर्दवष्ट अभ्यास इस प्रकार आयोक्जत ककए जाएंगे कक ववश्राम अवधि में न्द्यूनतम व्यविान उत्सपन्द्न हो और थकान न बढे। (5)जब कोई नाववक ड्यूटी पर तत्सपरहो, जैसे कक जब मशीनरी कित्रबना ननगरानी के हो, और उसके सामान्द्य ववश्राम में कायव हेतु बुलाए जाने के कारि व्यविान उत्सपन्द्न हो, तब उसे पयावप्त प्रनतपूरक ववश्राम अवधिप्रदान की जाएगी। (6)जहां कोई सामूर्हक सौदेबाजी करार या माध्यस्ट्थम् पंचाटअक्स्ट्तत्सव में न हो, अथवा महाननदेशकयह ननिावररत करे कक उपननयम (4) या उपननयम (5) से संबंधित करार या पंचाट के उपबंि अपयावप्त हैं, वहां महाननदेशक यह सुननक्श्चत करेगा कक संबंधित नाववकों को पयावप्त ववश्राम प्राप्त हो। (7)पोत का स्ट्वामीयह सुननक्श्चत करेगा कक पोत पर कायव व्यवस्ट्था की एक सारिी सुगम स्ट्थान पर प्रदसशवत की जाए, क्जसमें प्रत्सयेक पद के सलए कम से कम ननम्नसलणखत वववरि हों— (क)समुर में सेवा और पत्तन में सेवा का कायवक्म; और (ख)लागू सामूर्हक सौदेबाजी करारों के ढांचे के अंतगवत लागू न्द्यूनतम ववश्राम अवधि। (8)उपननयम (7) में उक्ल्लणखत सारिी महाननदेशक द्वारा ननर्दवष्ट मानकीकृत रूपवविान में अंग्रेजी भाषा में तैयार की जाएगी। (9)पोत का स्ट्वामीनाववकों के दैननक ववश्राम घंटों का असभलेख रखेगा क्जससे उपननयम (2) से उपननयम (8) तक के अनुपालन की ननगरानी की जा सके। (10)ववश्राम घंटों के असभलेख महाननदेशक द्वारा ववननर्दवष्ट मानकीकृत प्रारूप में, अंतरावष्रीय श्रम संगठन के उपलब्ि र्दशा-ननदेशों को ध्यान में रखते हुए, अथवा उतत संगठन द्वारा तैयार ककसी मानक रूपवविानअंग्रेजी में रखे जाएंगे। (11)नाववकों को उनके संबंि में रखे गए असभलेखों की एक प्रनत प्रदान की जाएगी, क्जसेपोत के मासलकया उसके द्वारा अधिकृत व्यक्तत और संबंधित नाववकद्वारा पृष्ठांककत ककया जाएगा । (12)इस ननयम में ननर्हत कोई भी उपबंिपोत के मासलक के उस अधिकार को प्रभाववत नहीं करेगा क्जसके अंतगवत वह पोत, पोत पर उपक्स्ट्थत व्यक्ततयों या माल की तत्सकाल सुरिा हेतु, अथवा समुर में संकटग्रस्ट्त अन्द्य

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 7

पोतों या व्यक्ततयों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, ककसी नाववक से आवश्यक कायव घंटे करवाने की अपेिा कर सकता है। (13)उपननयम (12) में वणिवत पररक्स्ट्थनतयों में, मासलक कायव अथवा ववश्राम घंटों की अनुसूची को स्ट्थधगत कर सकता है और ककसी नाववक से सामान्द्य क्स्ट्थनत बहाल होने तक आवश्यक कायव करवा सकता है। (14)उपननयम (13) में उक्ल्लणखत सामान्द्य क्स्ट्थनत बहाल होने के पश्चात, यथाशीघ्र मासलक यह सुननक्श्चत करेगा कक क्जन नाववकों ने अपने ननिावररत ववश्राम काल के दौरान कायव ककया है, उन्द्हें पयावप्त ववश्राम अवधि प्रदान की जाए। (15)उपननयम (2) और (3) में ननर्हत कोई भी बात महाननदेशक को ऐसे सामूर्हक सौदेबाजी करारों को अधिकृत या रक्जस्ट्रीकृत करने से नहीं रोकेगी क्जनमें उतत सीमाओं से अपवादों का उपबंि हो; तथावप, ऐसे अपवाद यथासंभव इन ननयमों के अनुरूप होंगे और इनमें अधिक बार या अधिक अवधि के अवकाश, अथवा पहरा ड्यूटीकरने वाले नाववकों या अल्प दूरी की यात्राओं वाले पोतों पर कायवरत नाववकों को प्रनतपूरक अवकाश प्रदान करने का उपबंि ककया जा सकेगा। (16)अठारह वषव से कम आयु के युवा नाववकों के सलए— (क)कायव घंटे प्रनत र्दन आठ घंटे और प्रनत सप्ताह चालीस घंटे से अधिक नहीं होंगे; (ख)सुरिा कारिों से अपररहायव होने के ससवायअनतकाल की अनुमनत नहीं होगी; (ग)र्दन के मुख्य भोजन हेतु कम से कम एक घंटे का अवकाश सुननक्श्चत ककया जाएगा; (घ)प्रत्सयेक दो घंटे के ननरंतर कायव के पश्चात यथाशीघ्र पंरह समनट का ववश्राम प्रदान ककया जाएगा। परंतु यह उपननयम उन युवा नाववकों पर लागू नहीं होगा— (क)जो डेक, इंजन कि अथवा खानपान ववभाग में पहरा-ड्यूटीपर ननयुतत हों या रोस्ट्टर आिाररत सशफ्ट प्रिाली में कायवरत हों; अथवा (ख)क्जनका स्ट्थावपत प्रसशिि कायवक्मों और समय-साररणियों के अनुसार प्रभावी प्रसशिि इससे प्रभाववत होता हो। 11. अिकाि की हकिारी.-(1)पोत का स्ट्वामी यह सुननक्श्चत करने हेतु पररचालन मानक और प्रकक्याएं स्ट्थावपत और बनाए रखेगा कक नाववकोंको पयावप्त अवकाश प्रदान ककया जाए। (2)पोतों पर ननयोक्जत नाववक, असभसमयके अनुसार, प्रत्सयेक माह की सेवा के सलए कम से कमढाई कैलेंडर र्दवस के वेतन सर्हत वावषवक अवकाश अथवा आनुपानतक अवकाश के हकदार होंगे। ऐसे अवकाश में कायव से उधचत अनुपक्स्ट्थनत, जैसे बीमारी, चोट, मातृत्सव अवकाश अथवा अन्द्य प्राधिकृत अवकाश, सक्म्मसलत नहीं ककए जाएंगे। (3)कोई भी नाववक उपननयम (1) में ववननर्दवष्ट न्द्यूनतम वेतन सर्हत वावषवक अवकाश को न त्सयाग सकेगा, न छोड़ सकेगा या न ही उससे वंधचत होगा। (4)न्द्यूनतम वेतन सर्हत वावषवक अवकाश को छोड़ने संबंिी कोई भी करार ननवषद्ि होगा, जब तक कक महाननदेशक द्वारा प्रत्सयेक मामले में सलणखत रूप से कारि असभसलणखत करते हुए अन्द्यथा अनुमनत न दी जाए: परंतु ऐसी कोई अनुमनत उस क्स्ट्थनत में प्रदान नहीं की जाएगी जहां ऐसा करार केवल वाणिक्ज्यक सुवविापर आिाररत हो। (5)वावषवक अवकाश को भागों में ववभाक्जत करना अथवा एक वषव के देय वावषवक अवकाश को आगामी अवकाश अवधि के साथ संधचत करना, केवल पोत स्ट्वामी और संबंधित नाववक के पारस्ट्पररक करार से ही अनुमत होगा, तथा इससे नाववक के न्द्यूनतम वावषवक अवकाश अधिकार में ककसी प्रकार की कमी नहीं होगी।

8 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(6)जब कोई पोत भारत के ककसी पत्तन पर पहुंचे, तब उस पोत पर कायवरत नाववकों को संबंधित लोक प्राधिकाररयों द्वारा तटीय अवकाश प्रदान ककया जाएगा: परंतु आवश्यक औपचाररकताओं की पूनतव कर दी गई हो और लोक प्राधिकाररयों के पास जन-स्ट्वास्ट््य, लोक सुरिा और संरिा, अथवा लोक व्यवस्ट्था के कारि अनुमनत अस्ट्वीकार करने का कोई कारि न हो। (7)तटीय अवकाश ककसी भी प्रकार के भेदभाव के त्रबना प्रदान ककया जाएगा, चाहे नाववक क्जस पोत पर ननयोक्जत, ननयुतत अथवा कायवरत हो, उसका ध्वज राज्य कोई भी हो। (8)ककसी भी नाववक को केवल तटीय अवकाश प्राप्त करने के उद्देश्य से वीजा या ववशेष परसमट रखने के सलए बाध्य नहीं ककया जाएगा। (9)जहां तटीय अवकाश की अनुमनत अस्ट्वीकार की जाती है, वहां संबंधित लोक प्राधिकारी उस अस्ट्वीकृनत के कारिों की सूचना संबंधित नाववकऔरपोत के मासलकको देगा तथा अनुरोि ककए जाने पर उन कारिों को सलणखत रूप में उपलब्ि कराएगा। (10)पोतके स्ट्वामी यह सुननक्श्चत करेंगे कक भारतीय ध्वजिारी पोतों पर कायवरत नाववकों को, ड्यूटी से मुतत होने पर औरपोत के पत्तन पर पहुंचने के पश्चात, उनके स्ट्वास्ट््य और कल्याि के र्हत में तटीय अवकाश लेने की अनुमनत दी जाए; ससवाय उन पररक्स्ट्थनतयों के जब— (क) पत्तन राज्यके प्राधिकाररयों द्वारा पोत से बाहर जाने पर प्रनतबंि या सीमा लगाई गई हो; अथवा (ख) सुरिा या पररचालन कारिों से पोत से बाहर जाना प्रनतबंधित या सीसमत हो। (11) अंतरावष्रीयसमुरीय यातायात सुवविा असभसमय (एफएएल असभसमय)के उपबंिों के अनुसार प्रदान ककया गया तटीय अवकाश, उपननयम (6) से उपननयम (10) तक की अपेिाओं की पूनतव माना जाएगा। 12. संप्रत्याितहन- (1)पोत का स्ट्वामी यह सुननक्श्चत करेगा कक उसके पोतों पर कायवरत नाववकों को ननम्नसलणखत पररक्स्ट्थनतयों में, उनके ऊपर कोई व्यय डाले त्रबना, संप्रत्सयावनतवतककया जाए, अथावत्— (क)जब नाववक का ननयोजन करार समाप्त हो जाए; (ख)जब नाववक का ननयोजन करार समाप्त ककया जाए— (i) पोत के स्ट्वामी द्वारा; या (ii) नाववक द्वारा, उधचत कारिों के आिार पर, जैसा कक सामूर्हक सौदेबाजी करारया नाववक के ननयोजन करार में ववननर्दवष्ट हो; (ग)जब नाववक अपने ननयोजन करार के अिीन अपने कतव्यों का ननववहन करने में सिम न रहे अथवा ववसशष्ट पररक्स्ट्थनतयों में उससे ऐसा करने की अपेिा करना उधचत न हो, जैसा कक सामूर्हक सौदेबाजी करार या ननयोजन करार में ववननर्दवष्ट हो; (घ)सामूर्हक सौदेबाजी करार अथवा ननयोजन करार में ववननर्दवष्ट अनुकंपा के आिार पर; (ङ)पररत्सयतत नाववक की क्स्ट्थनत में। (2) उपननयम (1) के अिीन संप्रत्सयावतवन हेतु पोत के स्ट्वामी द्वारा वहन की जाने वाली लागत में ननम्नसलणखत सक्म्मसलत होंगे, अथावत्— (क)संप्रत्सयावतवन हेतु चयननत गंतव्य तक यात्रा व्यय; (ख)नाववक के पोत छोड़ने के समय से लेकर संप्रत्सयावतवन गंतव्य तक पहुंचने तक आवास और भोजन की व्यवस्ट्था;

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