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Offshore Areas Mineral Adjudication of Penalties Rules, 2026

Official title

The Offshore Areas Mineral Adjudication of Penalties Rules, 2026

Official record

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What changed

The Central Government establishes rules for the adjudication of penalties under the Offshore Areas Mineral (Development and Regulation) Act, 2002. The rules define the process for filing complaints, conducting inquiries, and imposing civil penalties for contraventions. An authorized gazetted officer may file a complaint within three years of a violation. The adjudicating officer issues show-cause notices and conducts hearings, which may occur via video conference. The rules specify factors for determining penalty amounts and provide a summary disposal mechanism for rectifying violations. Parties aggrieved by an order may file an appeal with the appellate authority within 30 days, subject to a 10 percent deposit of the penalty. The government mandates electronic submission for all filings and communications.

Who is affected
  • Persons or entities subject to the Offshore Areas Mineral (Development and Regulation) Act, 2002.
Required action
  • File complaints regarding contraventions or failures with the adjudicating officer.
  • Respond to show-cause notices within the specified period.
  • Deposit 10 percent of the penalty amount to file an appeal.
Key dates
  • Commencement date — 31 Jul 2026
  • Complaint filing deadline
  • Inquiry completion deadline
  • Appeal filing deadline
Thresholds
  • Maximum of three contraventions of the same rule within five years for summary disposal eligibility.
  • Maximum 90-day extension for filing documents.
Consequences
  • Imposition of civil penalties as specified in the Schedule.
  • Inquiry conducted in the absence of the person if they fail to appear.

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Source details

Source
Gazette of India (e-Gazette)
Type
statutory gazette instrument
Published by source
30 Jul 2026
Document number
G.S.R. 686(E)
Issuing division
Ministry of Mines
Effective date
31 Jul 2026
Coverage area
gazette

Document text

Prepared for reading; wording retained from the source.

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5866 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99

xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार से प्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY

खान मंत्रालय अजधसूचना नई दिल्ली, 30 िुलाई, 2026 सा.का.जन. 686(अ).— केंद्रीय सरकार, अपतट क्षेत्र खजनि (जिकास और जिजनयमन) अजधजनयम, 2002 (2003 का 17) की धारा 35 की उप-धारा (2) के खंड (ढ़), धारा 28 की उप-धारा (3) और धारा 34 की उप-धारा (2) द्वारा प्रित्त िजियों का प्रयोग करते हुए, जनम्नजलजखत जनयम बनाती है, अर्ाात्:—

  1. संजक्षप्त नाम और प्रारंभ.- (1) इन जनयमों का संजक्षप्त नाम अपतट क्षेत्र खजनि िाजस्ट्त का न्यायजनणायन जनयम, 2026 है। (2) ये जनयम 1 अगस्ट्त, 2026 को प्रिृत्त होंगे।
  2. पररभाषाएं.- (1) इन जनयमों में, िब तक दक संिभा से अन्यर्ा अपेजक्षत न हो, - (क) ''अजधजनयम'' से अपतट क्षेत्र खजनि (जिकास और जिजनयमन) अजधजनयम, 2002 (2003 का 17) अजभप्रेत है; (ख) “न्यायजनणाायक अजधकारी” से अजधजनयम की धारा 28 की उपधारा (3) के अधीन जनयुि कोई अजधकारी, अजभप्रेत है; (ग) ''अपीलार्ी'' से ऐसा व्यजि अजभप्रेत है िो न्यायजनणाायक अजधकारी के आिेि से व्यजर्त है और अजधजनयम की धारा 34 की उपधारा (1) के अधीन अपील प्राजधकारी के समक्ष अपील करता है; सं. 624] नई दिल्ली, बृहस्ट् पजतिार, िुलाई 30, 2026/श्रािण 8, 1948

No. 624] NEW DELHI, THURSDAY, JULY 30, 2026/SHRAVAN 8, 1948

सी.जी.-डी.एल.-अ.-31072026-274998 CG-DL-E-31072026-274998

2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(घ) ''अपील प्राजधकारी'' से अजधजनयम की धारा 34 की उपधारा (1) के अधीन जनयुि अजधकारी अजभप्रेत है; (ड.) ''प्ररूप'' से इन जनयमों के सार् संलग्न प्ररूप अजभप्रेत है; (च) ''िांच'' से अजधजनयम की धारा 28 की उपधारा (3) में जनर्दिष्ट िांच अजभप्रेत है; और (छ) "अनुसूची" से इन जनयमों के सार् संलग्न अनुसूची अजभप्रेत है। (2) उन िब्िों और पिों के, िो इन जनयमों में प्रयुि हैं और पररभाजषत नहीं है, दकन्तु अजधजनयम मे पररभाजषत है, िही अर्ा होंगे, िो उनके अजधजनयम में हैं। 3. जिकायत.— केंद्रीय सरकार द्वारा प्राजधकृत रािपत्रित अजधकारी, अजधजनयम की धारा 28 की उपधारा (1) के अधीन दकसी भी उल्लंघन या जिफलता की तारीख से न्यायजनणाायक अजधकारी को प्ररूप 1 में, इलेक्ट्रॉजनक रूप में या स्ट्पीड पोस्ट्ट रजिस्ट्रेिन सजहत और पररिान के प्रमाण के सार् या व्यजिगत रूप से, तीन िषा की अिजध के भीतर जिकायत ििा कर सकता है। स्ट्पष्टीकरण.— इस जनयम के प्रयोिनों क जलए, जनयम 4 के उपजनयम (11) के खंड (ख) और जनयम 11 में, "इलेक्ट्रॉजनक रूप" का िही अर्ा होगा िो उसका सूचना प्रौद्योजगकी अजधजनयम, 2000 (2000 का 21) की धारा 2 के उपजनयम (1) के खंड (ि) में दिया गया है। 4. िांच करना.—(1) जनयम (3) के अधीन दकसी उल्लंघन या जिफलता की कोई जिकायत प्राप्त होने पर, न्यायजनणाायक अजधकारी, उस व्यजि को प्ररूप 2 में नोरटस िारी कर, नोरटस में जिजनर्दिष्ट अिजध के भीतर (िो नोरटस की तामील की तारीख से पंद्रह दिन से कम नहीं होगी) कारण बताने को कहा िाएगा दक उसके जिरुद्ध िांच क्ट्यों न की िाए। (2) उप-जनयम (1) के अधीन प्रत्येक नोरटस में उसके द्वारा कजर्त रूप से दकए गए उल्लंघन की प्रकृजत का उल्लेख दकया िाएगा। (3) ऐसे व्यजि द्वारा उत्तर जमलने पर, न्यायजनणाायक अजधकारी की यह राय है दक िांच होनी चाजहए, तो िह उस व्यजि को, जिसके जिरूद्ध कायािाही की गयी है और ऐसे दकसी आिश्यक अन्य व्यजियों को, जिन्हें व्यजिगत रूप से या उसके द्वारा सम्यक रूप से प्राजधकृत प्रजतजनजध के माध्यम से, नोरटस में तय की गई तारीख को उपजस्ट्र्त होने की आिश्यकता है, प्ररूप 3 में नोरटस िारी करेगा: परंतु िीजडयो कॉन्रेंस के माध्यम से पेि होने की अनुमजत िी िाएगी। (4) सुनिाई के जलए जनयत तारीख को न्यायजनणाायक अजधकारी उस व्यजि को, जिसके जिरुद्ध कायािाही की िा रही है या उसके प्राजधकृत प्रजतजनजध को, उसके द्वारा दकए गए उल्लंघन या जिफलता तर्ा अजधजनयम के उस उपबंध के बारे में बताएगा, जिसके संबंध में उल्लंघन दकया िाना अजभकजर्त है। (5) न्यायजनणाायक अजधकारी ऐसे व्यजि तर्ा अन्य आिश्यक व्यजियों को ऐसे िस्ट्तािेि या साक्ष्य प्रस्ट्तुत करने का अिसर िेगा, जिन्हें िह िांच के जलए सुसंगत समझे और यदि आिश्यक हो, तो सुनिाई दकसी आगे की तारीख तक स्ट्र्जगत की िा सकेगी (प्रर्म तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर और अजधकतम तीन तारीखों तक) और ऐसा साक्ष्य लेते समय न्यायजनणाायक अजधकारी भारतीय साक्ष्य अजधजनयम, 2023 (2023 का 47) के उपबंधों का पालन करने के जलए बाध्य नहीं होगा। (6) यदि कोई व्यजि और संबंजधत व्यजि अपेजक्षत रूप से न्यायजनणाायक अजधकारी के समक्ष सुनिाई के जलए जनयत तारीख पर उपजस्ट्र्त होने में जिफल रहता है, उपेक्षा करता है या उपजस्ट्र्त होने से इनकार करता है, तो िह अजभजलजखत कारणों सजहत ऐसे व्यजि की अनुपजस्ट्र्जत में िांच को आगे बढ़ा सकेगा। (7) यदि न्यायजनणाायक अजधकारी के समक्ष प्रस्ट्तुत साक्ष्य पर जिचार करने पर, िह इस बात से संतुष्ट हो िाता है दक व्यजि ने उल्लंघन या जिफलता की है, तो िह जनयम 6 में जिजनर्दिष्ट कारकों को ध्यान में रखते हुए जलजखत आिेि द्वारा, िह अनुसूची में जिजनर्दिष्ट िाजस्ट्त अजधरोजपत करेगा। (8) उपजनयम (7) के अधीन दकए गए प्रत्येक आिेि में अजधजनयम के उपबंधों, इसके अधीन बनाए गए जनयम अर्िा संदिया संबंधी अजधकार के जनबंधन तर्ा ितें जिजनर्दिष्ट दकए िाएंगे जिनके संबंध में उल्लंघन दकया गया है या असफल हुए हैं और उसमे िाजस्ट्त अजधरोजपत करने के कारणों को सजम्मजलत दकया िाएगा। (9) इस जनयम के अधीन दकये गये आिेि की एक प्रजत तर्ा कायािाही की अन्य सभी प्रजतयां जिकायतकताा तर्ा व्यजि को जनिःिुल्क िी िायेंगी, जिसके जिरूद्ध िांच की गयी र्ी।

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 3

(10) न्यायजनणाायक अजधकारी, उस व्यजि को जिसके जिरूद्ध िांच की गई र्ी, को नोरटस िारी करने की तारीख से छह महीने के भीतर कायािाही पूरी करेगा। (11) इन जनयमों के अधीन िारी नोरटस या आिेि जनम्न में से दकसी एक रीजत से उस व्यजि को तामील की िाएगी, जिसके जिरूद्ध िांच की िा रही है, अर्ाात:— (क) उस व्यजि या उसके प्राजधकृत प्रजतजनजध को िेना या जनजिदित्त करना; या (ख) इसे इलेक्ट्रॉजनक रूप में या पंिीकरण सजहत स्ट्पीड पोस्ट्ट और पररिान के प्रमाण के सार् या उसके जनिास स्ट्र्ान या उसके अंजतम ज्ञात जनिास स्ट्र्ान के पते पर भेिकर या उस स्ट्र्ान पर िहां िह व्यिसाय करता र्ा या व्यजिगत रूप से काया करता र्ा या लाभ के जलए अंजतम काया दकया र्ा को भेिकर; या (ग) यदि इसे खंड (क) या (ख) के अधीन जिजनर्दिष्ट दकसी भी रीजत से नोरटस तामील नहीं की ि सकती है तो उस पररसर के बाहरी िरिािे या दकसी अन्य जिजिष्ट भाग पर उसे जचपकाया िाएगा िहां िह व्यजि रहता है या अंजतम बार जनिास करता र्ा या व्यिसाय करता र्ा या व्यजिगत रूप से काया करता र्ा या लाभ हेतु काया दकया र्ा। 5. िाजस्ट्त की रकम जनधााररत करते समय ध्यान में रखने िाले कारक.— न्यायजनणाायक अजधकारी, िाजस्ट्त की मात्रा का जनधाारण करते समय, जनम्नजलजखत सभी या इनमें से दकसी कारकों को सम्यक रूप से ध्यान रखेगा, अर्ाात्:— (क) संदिया संबंधी अजधकार के जनयमों या जनबंधनों और ितों के अधीन प्रित्त मानक से जिचलन या उल्लंघन की मात्रा; (ख) उल्लंघन से प्राप्त अनुजचत अजभलाभ या लाभ और इसकी रकम, िहां भी मापा िा सके; (ग) उल्लंघन की पुनरािती प्रकृजत या आिृजत्त; (घ) उल्लंघन की अिजध; (ड.) जिस व्यजि के जिरूद्ध कायािाही की गई है उसका जपछला अनुपालन ररकॉडा; (च) क्ट्या उल्लंघन प्रदियात्मक, तकनीकी या मूलभूत है; (छ) क्ट्या उल्लंघन को तुरंत ठीक कर दिया गया र्ा; (ि) क्ट्या उल्लंघन से कोई पयाािरणीय क्षजत, सुरक्षा िोजखम, सािािजनक हाजन या सरकार को जित्तीय हाजन हो सकती है; (झ) सरकारी पोटालों के डाउनटाइम या तकनीकी जिफलता के कारण िेरी की क्षमा; या (ञ) कोई अन्य सुसंगत कारण। 6. संजक्षप्त जनपटान.- (1) जनयम 4 में अंतर्विष्ट दकसी बात के होते हुए, अजधजनयम की धारा 28 के अधीन दकसी उल्लंघन या जिफलता के संबंध में दकसी व्यजि के जिरूद्ध कोई भी िांच प्रारंभ या िारी नहीं रखी िाएगी, यदि ऐसा व्यजि अनुसूची में जिजनर्दिष्ट न्यूनतम रकम का भुगतान करता है और संदिया संबंधी अजधकार के जनयमों या जनबंधनों और ितों के उल्लंघन को, या तो जनयम 4 के अधीन प्रारंभ से पहले या िांच के दकसी भी चरण के िौरान सुधार लेता है: परंतु यदि व्यजि पांच िषा की अिजध के भीतर तीन बार से अजधक संदिया संबंधी अजधकार के उसी जनयम या जनबंधनों और ितों का उल्लंघन करता है तो इस जनयम के उपबंध लागू नहीं होंगे। स्ट्पष्टीकरण- इस उपजनयम के प्रयोिन के जलए, "अनुसूची में जिजनर्दिष्ट न्यूनतम रकम" से जनम्नजलजखत अजभप्रेत होगा, - (क) संदिया संबंधी अजधकार के जनयमों या जनबंधनों और ितों के उल्लंघन की जस्ट्र्जत में, जिनमें ररपोटा या सूचना प्रस्ट्तुत करने की समयािजध जिजनर्दिष्ट करते हैं, ऐसे उल्लंघन की जनरंतरता तक अनुसूची में प्रत्येक दिन के जलए जिजनर्दिष्ट रकम के योग के बराबर। (ख) अन्य उल्लंघन के मामलो में, अनुसूची में जिजनर्दिष्ट रकम की सीमा में जिजनर्दिष्ट न्यूनतम रकम । (2) उपजनयम (1) के प्रयोिन के जलए, जिस व्यजि ने उल्लंघन दकया है, िह जिजनर्दिष्ट िपर्-पत्र के प्ररूप में न्यायजनणाायक अजधकारी के समक्ष आिेिन फाइल करेगा:— (क) उल्लंघन का ब्यौरा जिसके जलए आिेिन फाइल दकया िा रहा है, उल्लंघन के संबंध में प्राप्त नोरटस सजहत, यदि कोई हो,

4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(ख) जनयम के उल्लंघन के पश्चातिती दकए गए सुधार की िानकारी और उसके समर्ान में िस्ट्तािेज़ की एक प्रजत; और (ग) उपजनयम (1) के अधीन रकम िमा करने का िचन-पत्र। (3) न्यायजनणाायक अजधकारी उपजनयम (2) के अधीन आिेिन प्राप्त होने के पन्द्रह दिन के भीतर, आिेिक को उपजनयम (1) के अधीन रकम िमा करने के जलए सूजचत करेगा। (4) आिेिक उप-जनयम (3) के अधीन सूचना के पंद्रह दिनों के भीतर रकम िमा कराएगा और रकम िमा होने के सत्यापन पर न्यायजनणाायक अजधकारी सात दिनों के भीतर समापन आिेि िारी करेगा और उि उल्लंघन के संबंध में दकसी व्यजि के जिरूद्ध कोई िांच आरंभ नहीं की िाएगी या िारी नहीं रखी िाएगी। 7. जिकायत का अंतरण .— (1) यदि न्यायजनणाायक अजधकारी का यह जिचार है या ऐसा प्रतीत होता है दक इन जनयमों के अधीन दकसी जिकायत पर जिचार करना उसके अजधकार में नहीं है, तो िह ऐसे कारणों को जलजखत मे अजभजलजखत करके और जिकायतकताा को सूचना िेकर, ऐसी जिकायत की प्राजप्त की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर मामले को संबंजधत न्यायजनणाायक अजधकारी को अंतररत कर िेगा। (2) न्यायजनणाायक अजधकारी जिसे ऐसा मामला अंतररत दकया गया है, िांच उसी चरण से आगे बढ़ाएगा जिस चरण पर मामला उसे अंतररत दकया गया है। 8. अपील.- (1) कोई व्यजि िो न्यायजनणाायक अजधकारी द्वारा पाररत आिेि से व्यजर्त है तो िह प्ररूप 4 में उस आिेि की प्राजप्त की तारीख से तीस दिन की अिजध के भीतर, जिसके जिरूद्ध अपील फाइल की गई है, अपील प्राजधकारी को अपील फाइल कर सकता है। (2) िब तक अपीलार्ी न्यायजनणाायक अजधकारी द्वारा अजधरोजपत िाजस्ट्त की रकम का िस प्रजतित अपील प्राजधकारी के पास िमा नहीं कर िेता हो तब तक अपील ग्रहण नहीं दकया िाएगा। (3) अपील के सार् न्यायजनणाायक अजधकारी के आिेि की प्रजत संलग्न होगी तर्ा उन तथ्यों का जििरण प्रिान दकया िाएगा, जिसके जिरूद्ध अपील की गई है, अपील का आधार तर्ा अजधजनयम की सुसंगत धारा का उल्लेख होगा। (4) अपीलार्ी द्वारा स्ट्ियं या जलजखत रूप में सम्यक रूप से प्राजधकृत उसके प्रजतजनजध द्वारा स्ट्पीड पोस्ट्ट पंिीकृत और पररिान के प्रमाण के सार् या इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से फाइल की िा सकेगी। (5) भेिी गई अपील, अपील प्राजधकारी के समक्ष प्राप्त होने िाले दिन को फाइल मानी िाएगी। (6) यदि िांच करने पर अपील आिेि में सही पाई िाती है, तो उसे स्ट्िीकार कर जलया िाएगा और यदि अपील त्रुरटपूणा पाई िाती है, तो अपील प्राजधकारी त्रुरट के बारे में अपीलार्ी को सूजचत करेगा और उसे पंद्रह दिन के भीतर त्रुरट को ठीक करने की अनुज्ञा िेगा और यदि अपीलार्ी इस समयािजध के भीतर ऐसे त्रुरट को िूर करने में जिफल रहता है, तो अपील प्राजधकारी आिेि द्वारा और जलजखत में अजभजलजखत कारणों से ऐसी अपील को पंिीकृत करने से इंकार कर सकता है और अपीलार्ी को सात दिन की अिजध के भीतर ऐसी अस्ट्िीकृजत से सूजचत करा सकता है। (7) अपील स्ट्िीकार होने पर, अपील प्राजधकारी प्रजतिािी को अपील की एक प्रजत नोरटस के सार् भेिेगा जिसमें उससे अपेक्षा की िाएगी दक िह अपील प्राजधकारी द्वारा जनयत अिजध के भीतर, अपील पर अपना उत्तर तीस दिन से अनजधक की अिजध के भीतर िाजखल करे। (8) नोरटस व्यजिगत रूप से या स्ट्पीड पोस्ट्ट पंिीकरण और पररिान के प्रमाण के सार् या इलेक्ट्रॉजनक माध्यम से दिया िा सकता है। (9) अपील प्राजधकारी न्यायजनणाायक अजधकारी की कायािाही से संबंजधत अजभलेख मंगिा सकता है। (10) अपील प्राजधकारी, अपील के पक्षकारों को सुनिाई का अिसर िेने के पश्चात्, एक तकासंगत आिेि पाररत करेगा। (11) अपील प्राजधकारी अपील की तारीख से साठ दिनों के भीतर अपील का जनपटान करेगा। (12) िाजस्ट्त में कमी करने अर्िा उसे अपास्ट्त करने की ििा में उप-जनयम (2) के अधीन िमा की गई अजतररि रकम अपील प्राजधकारी के आिेि के साठ दिन के भीतर िापस कर िी िाएगी। 9. समयािजध बढ़ाना.— न्यायजनणाायक अजधकारी या अपील प्राजधकारी, अजभजलजखत दकए गए कारणों सजहत, िहां कारािाई करने में जिलंब या जिफलता के जलए पयााप्त कारण है या सरकारी पोटालों के डाउनटाइम या तकनीकी जिफलता का

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 5

सबूत है, जिकायत, अपील या अन्य संबंजधत िस्ट्तािेि फाइल करने के जलए इन जनयमों में जिजनर्दिष्ट दकसी अिजध को अजधकतम नब्बे दिन के अध्यधीन ऐसी अिजध तक बढ़ा सकता है, जिसे िह युजियुि समझे। 10. आिेि और िाजस्ट्तयों को िमा करना.— (1) इन जनयमों के अधीन प्रत्येक आिेि पर तारीख अंदकत होगी, हस्ट्ताक्षररत होगा तर्ा सभी पक्षकारों को सूजचत दकया िाएगा। (2) इन जनयमों के अधीन िाजस्ट्त के रूप में िसूल की गई सभी राजि, भारत की संजचत जनजध में िमा की िाएगी। 11. ऑनलाइन इलेक्ट्रॉजनक सुजिधा.– केन्द्रीय सरकार इन जनयमों के प्रयोिनों और अनुपालन को इलेक्ट्रॉजनक प्ररूप से पूरा करेगी, जिसमें जनम्नजलजखत िाजमल हैं, अर्ाात:— (क) नोरटस और अन्य संचार िारी करना; (ख) जिकायत, आिेिन, उत्तर, अपील और ऐसे अन्य िस्ट्तािेि का प्रस्ट्तुतीकरण या फाइल करना; (ग) न्यायजनणाायक अजधकारी और अपील प्राजधकारी द्वारा िचुाअल सुनिाई का संचालन; (घ) न्यायजनणाायक अजधकारी और अपील प्राजधकारी के समक्ष मामलों की जस्ट्र्जत का प्रिर्वित करना; (ड.) न्यायजनणाायक अजधकारी और अपील प्राजधकारी के आिेि अपलोड करना; और (च) िाजस्ट्त और अन्य रकम का भुगतान करना। अनुसूची (जनयम 4(7) िेखें) जसजिल िाजस्ट्त की रकम भाग-क. उत्पािन पट्टा के संबंध में जसजिल िाजस्ट्त की रकम ि.सं. उत्पािन पट्टे का क्षेत्र उल्लंघन की प्रकृजत जसजिल िाजस्ट्त की रकम (1) (2) (3) (4) 1 25 मानक खंड तक (i) अजधजनयम, जनयम या संदिया संबंधी अजधकार की जनबंधनों और ितों का उल्लंघन, िो ररपोटा, ब्यौरा, िानकारी या िस्ट्तािेज़ िमा करने की समयािजध जिजनर्दिष्ट करते हैं। (ii) अन्य उल्लंघनों के जलए। (i) अजधकतम तीस लाख रुपये की सीमा के अध्यधीन उल्लंघन के प्रत्येक सप्ताह के जलए िस लाख रुपये।

(ii) िस लाख रुपये से कम नहीं िो पचास लाख रुपये तक बढ़ाई िा सकती है। 2 25 मानक खंड से अजधक (i) अजधजनयम, जनयम या संदिया संबंधी अजधकार की जनबंधनों और ितों का उल्लंघन, िो ररपोटा, ब्यौरा, िानकारी या िस्ट्तािेज़ िमा करने की समयािजध जिजनर्दिष्ट करते हैं। (ii) अन्य उल्लंघनों के जलए। (i) अजधकतम पचास लाख रुपये की सीमा के अध्यधीन उल्लंघन के प्रत्येक सप्ताह के जलए िस लाख रुपये।

(ii) बीस लाख रुपये से कम नहीं िो एक करोड़ रुपये तक बढ़ाई िा सकती है।

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