e-Gazette statutory gazette instrument G.S.R. 741(E) · 20 Aug 2026
Official record
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Check the official recordThe Central Government establishes procedures for the adjudication of penalties under the Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority Act, 1985. The rules define the appointment of an adjudicating officer and an appellate authority. The adjudicating officer issues a show cause notice to persons suspected of contravention. The officer conducts an inquiry, considers evidence, and imposes penalties through written orders. Aggrieved persons may file an appeal with the appellate authority within thirty days of receiving an order. The appellate authority disposes of appeals within sixty days. The adjudicating officer must complete proceedings within six months of notice issuance. All penalty amounts go to the Consolidated Fund of India.
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
The Gazette of India
सी.जी.-डी.एल.-अ.-20082026-275625 CG-DL-E-20082026-275625
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
अधिसूचना
नई दिल्ली, 19 अगस्त, 2026
सा.का.नि. 741(अ).— कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 (1986 का 2) की धारा 25क के साथ पठित धारा 32 की उप-धारा (2) के खंड (एमए) और (एमबी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय सरकार, एतद्द्वारा, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.- इन नियमों को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (शास्तियों का न्यायनिर्णयन) नियम, 2026 कहा जा सकेगा।
(2) ये आधिकारिक राजपत्र में इनके प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।
2. परिभाषाएँ.- (1) इन नियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
क. "अधिनियम" से तात्पर्य कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 (1986 का 2) से है;
ख. "न्यायनिर्णायन अधिकारी" से तात्पर्य उस अधिकारी से है जिसे अधिनियम की धारा 25क के अंतर्गत अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया गया हो;
ग. "अपीलकर्ता" से तात्पर्य ऐसे किसी पीड़ित व्यक्ति से है जो अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष कोई अपील करता है;
घ. "अपीलीय प्राधिकारी" से तात्पर्य अधिनियम की धारा 25क की उप-धारा (2) के तहत नामित प्राधिकरण के अध्यक्ष से है;
ङ. "शिकायतकर्ता" से तात्पर्य ऐसे किसी पीड़ित व्यक्ति से है जो न्यायनिर्णायन अधिकारी के समक्ष कोई शिकायत दर्ज करता है;
च. "प्रपत्र" से तात्पर्य इन नियमों के साथ संलग्न किसी प्रपत्र से है;
छ. "धारा" से तात्पर्य अधिनियम की धारा से है।
(2) जिन शब्दों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग इन नियमों में किया गया है और जिन्हें परिभाषित नहीं किया गया है, परन्तु अधिनियम में परिभाषित किया गया है, उनके वही अर्थ होगें जो क्रमशः अधिनियम में उनके लिए निर्धारित किए गए हैं।
3. जाँच का आयोजन.- (1) अधिनियम की धारा 25क के तहत शास्तियों के न्यायनिर्णयन के उद्देश्य से, उसमें विनिर्दिष्ट प्रावधानों के किसी भी उल्लंघन की शिकायत प्राप्त होने पर, न्यायनिर्णयन अधिकारी, ऐसे व्यक्ति को प्रपत्र-I में एक नोटिस जारी करेगा, जिसमें उसे ऐसी अवधि के भीतर कारण बताने की अपेक्षा होगी जो उसमें निर्दिष्ट की जा सकती है (उसकी सेवा की तारीख से सात दिन से कम नहीं होगी) कि उसके विरूद्ध जांच क्यों न की जाए।
(2) उप-नियम (1) के अंतर्गत प्रत्येक नोटिस में कथित रूप से किए गए उल्लंघन की प्रकृति का उल्लेख होगा।
(3) ऐसे व्यक्ति द्वारा कारण बताए जाने पर, यदि कोई हो, और उस पर विचार करने के बाद, यदि न्यायनिर्णायन अधिकारी की यह राय है कि जाँच की जानी चाहिए, तो वह एक नोटिस जारी करेगा जिसमें उस व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से या उसके द्वारा विधिवत अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से नोटिस में निर्धारित तिथि और समय पर उपस्थित होने की अपेक्षा की जाएगी।
(4) निर्धारित तिथि पर, न्यायनिर्णायन अधिकारी उस व्यक्ति को, जिसके विरूद्ध कार्यवाही की गई है या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को, उसके द्वारा किए गए कथित उल्लंघन और अधिनियम के उस प्रावधान के बारे में समझाएगा, जिसके संबंध में उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
(5) न्यायनिर्णायन अधिकारी ऐसे व्यक्ति को दस्तावेज़ या साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा, जिन्हें वह जांच के लिए प्रासंगिक समझे और यदि आवश्यक हो, तो सुनवाई को किसी अन्य तिथि (प्रथम तिथि से पंद्रह दिन के भीतर तथा अधिकतम तीन तिथियों तक) के लिए स्थगित किया जा सकेगा और ऐसे साक्ष्य लेते समय न्यायनिर्णायन अधिकारी भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (2023 का अधिनियम सं. 47) के प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होगा।
(6) इन नियमों के अधीन जांच करते समय न्यायनिर्णायन अधिकारी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी व्यक्ति को साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज पेश करने के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता लागू कर सकता है और उसे बाध्य कर सकता है, जो न्यायनिर्णायन अधिकारी की राय में जांच के विषय के लिए उपयोगी या प्रासंगिक हो सकता है