e-Gazette statutory gazette instrument G.S.R. 900(E) · 17 Oct 2026
Official title
Court Fee (Adjudication of Penalties and Appeal) Rules 2026
Official record
Open source pageSummary
Check the official recordThe Central Government establishes procedures for the adjudication of penalties and appeals under the Court-fees Act, 1870 for Union territories. Revenue officers, licensed vendors, or individuals may file complaints regarding rule violations with an adjudicating officer. The officer issues a show cause notice to the accused person, who has at least thirty days to respond. The officer conducts an inquiry and may impose penalties based on factors such as the amount of court-fee involved, the duration of the violation, and public hardship. Aggrieved parties may file an appeal with the appellate authority within thirty days of receiving an order. The appellate authority must dispose of the appeal within sixty days. Unpaid penalties are recoverable as arrears of land revenue.
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रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99
REGD. No. D. L.-33004/99
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सी.जी.-डी.एल.-अ.-17102026-277237 CG-DL-E-17102026-277237
असाधारण EXTRAORDINARY
भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i)
प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 829] | नई दिल्ली, शुक्रवार, अक्तूबर 16, 2026/आश्विन 24, 1948 |
|---|---|
| No. 829] | NEW DELHI, FRIDAY, OCTOBER 16, 2026/ASVINA 24, 1948 |
विधि और न्याय मंत्रालय
(न्याय विभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 16 अक्तूबर, 2026
सा.का.नि. 900(अ).— केन्द्रीय सरकार न्यायालय शुल्क अधिनियम, 1870 (1870 का 7) की धारा 34 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ -(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम संघ राज्य क्षेत्र न्यायालय शुल्क (शास्ति और अपील का न्यायनिर्णयन) नियम, 2026 है।
(2) ये राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
2. परिभाषाएँ -(1) इन नियमों में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,—
(2) इन नियमों में प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ जो यहाँ परिभाषित नहीं हैं, परन्तु अधिनियम में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो अधिनियम में उन्हें क्रमशः दिया गया है।
3. शिकायत दर्ज करना - (1) धारा 34 के अधीन बनाए गए किसी नियम के उल्लंघन की जानकारी रखने वाला कोई राजस्व अधिकारी, अनुज्ञप्ति प्राप्त विक्रेता या व्यक्ति, न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकता है।
(2) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक शिकायत प्ररूप -I में दर्ज की जाएगी और उसे प्रस्तुत किया जा सकता है—
4. जांच का संचालन- (1) अधिनियम की धारा 34क के अधीन न्यायनिर्णयन के प्रयोजन हेतु, न्यायनिर्णायक अधिकारी शिकायत प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर उल्लंघन करने के आरोपी व्यक्ति को प्ररूप -2 में नोटिस जारी करेगा, जिसमें ऐसे व्यक्ति से नोटिस में निर्दिष्ट अवधि के भीतर, जो नोटिस की तामील की तारीख से तीस दिनों से कम नहीं होगी, यह कारण बताने को कहा जाएगा कि नियम 3 के उप-नियम (1) में निर्दिष्ट उल्लंघन के लिए ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही क्यों प्रारंभ नहीं की जानी चाहिए।
(2) उप-नियम (1) के अधीन जारी नोटिस के जवाब में प्राप्त उत्तर पर विचार करने पर, यदि कोई हो, तो न्यायनिर्णायक अधिकारी, यदि संतुष्ट हो कि यह आवश्यक है, तो उत्तर प्राप्त होने के पंद्रह दिनों के भीतर सुनवाई का नोटिस जारी कर सकता है, जिसमें संबंधित व्यक्ति को स्वयं उपस्थित होने या किसी प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने या मामले के न्यायनिर्णय के लिए आवश्यक अतिरिक्त प्रस्तुतियाँ करने के लिए कहा जा सकता है।
(3) न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर न दिया गया हो।
(4) जहां उप-नियम (2) के अधीन, यथास्थिति, सुनवाई की सूचना प्राप्त व्यक्ति उपस्थित होने या अपना पक्ष रखने में विफल रहता है, तो न्यायनिर्णायक अधिकारी लिखित में कारण दर्ज करने के बाद एकपक्षीय कार्यवाही कर सकता है।
(5) जहां रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री अपर्याप्त है, या जहां न्यायनिर्णायक अधिकारी को आगे साक्ष्य या दस्तावेज प्राप्त करना आवश्यक लगता है जो न्यायनिर्णायक अधिकारी की राय में जांच की विषय-वस्तु के लिए उपयोगी या सुसंगत हो सकता है, तो न्यायनिर्णायक अधिकारी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी व्यक्ति को बुला सकता है और उसकी उपस्थिति को लागू कर सकता है।
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