e-Gazette statutory gazette instrument G.S.R. 71(E) · 30 Jan 2026
Official title
The Mineral (Auction) Amendment Rules, 2026.
Official record
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Check the official recordThe Ministry of Mines amends the Mineral (Auction) Rules, 2015 to allow the use of insurance surety bonds as a form of security deposit or performance security. The rules now permit bidders to submit insurance surety bonds in specified formats for various auction-related obligations. The amendments also extend the timeline for furnishing performance security and other related payments from fifteen days to forty-five days across several rules. The government introduces new schedules, Schedule III-A and Schedule IV-A, which provide the standard formats for these insurance surety bonds. These changes apply to preferred bidders and principal debtors participating in mineral auctions. The rules take effect immediately upon their publication in the Official Gazette.
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Key dates
615 GI/2026 (1) रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण्ड 3—उप-खण्ड (i) PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
खान मंत्रालय अधिसूचना नई दिल्ली, 29 जनवरी, 2026 सा.का.सं. 71(अ).—केंद्रीय सरकार, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (1957 का 67) की धारा 13 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, खनिज (नीलामी) नियम, 2015 को और संशोधि त करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:—
(2) ये राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे। 2. खनिज (नीलामी) नियम, 2015 में,— (क) नियम 9 के उपनियम (5) के पहले परंतुक में, “सुरक्षा जमा के माध्यम से” शब्दों के पश्चात, “अथवा बीमा प्रतिभू बांड के माध्यम से” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे; (ख) नियम 10 के उपनियम (1क) में,— (i) आरंभिक भाग में "या विस्तारित अवधि" शब्दों का लोप किया जाएगा; (ii) खंड (ख) में, “पंद्रह दिनों के भीतर” शब्दों के स्थान पर “और नियम 12 में यथाविनिर्दिष्ट कार्य-निष्पादन प्रतिभूति पैंतालीस दिन के भीतर” शब्द और आंकड़े रखे जाएंगे; सं. 70] नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, जनवरी 29, 2026/माघ 9, 1947
No. 70] NEW DELHI, THURSDAY, JANUARY 29, 2026/MAGHA 9, 1947
सी.जी.-डी.एल.-अ.-30012026-269670 CG-DL-E-30012026-269670
2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(iii) परंतुक का लोप किया जाएगा; (ग) नियम 12 के उपनियम (2) में, “प्रतिभूति निक्षेपों के माध्यम से” शब्दों के पश्चात, निम्नलिखित अंतःस्थापित किए जाएंगे:— “या अनुसूची 3-क में यथाविनिर्दिष्ट रूप विधान में बीमा प्रतिभू बांड के माध्यम से”; (घ) नियम 13 के उपनियम (3) के खंड (i) में "न्यास" शब्द के स्थान पर "और विकास न्यास" शब्द रखे जाएंगे; (ड.) नियम 18 में,— (i) उप-नियम (1) में परंतुक का लोप किया जाएगा; (ii) उप-नियम (1क) में,— (क) आरंभिक भाग में "या विस्तारित अवधि" शब्दों, का लोप किया जाएगा; (ख) खंड (ख) में, “पंद्रह दिन” शब्दों के स्थान पर “पैंतालीस दिन” शब्द रखे जाएंगे; (ग) परंतुक का लोप किया जाएगा; (च) नियम 19 के उपनियम (4) में,— (i) “प्रतिभूति जमा के माध्यम से” के पश्चात निम्नलिखित अंतःस्थापित किए जाएंगे:— “अथवा अनुसूची 4-क में यथा विनिर्दिष्ट प्रारूप में बीमा प्रतिभू बांड के माध्यम से”; (ii) पहले परंतुक में, “प्रतिभूति जमा” शब्दों के पश्चात, “या बीमा प्रतिभू बांड” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे; (छ) नियम 19ड. में,— (i) उपनियम (6) में, “प्रतिभूति जमा के माध्यम से” शब्दों के पश्चात, “अथवा बीमा प्रतिभू बांड के माध्यम से” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे; (ii) उपनियम (10) में, खंड (3) में, “नीलामी के समापन पर” शब्दों के पश्चात, “सार्वजनिक अवलोकन के लिए ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक नीलामी प्लेटफार्म द्वारा स्वचालित रूप से” शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे; (ज) नियम 19छ में,— (i) उप—नियम (1) में,— (क) दोनों स्थानों पर “पंद्रह दिनों” शब्दों के स्थान पर “पैंतालीस दिन” शब्द रखे जाएंगे; (ख) परंतुक का लोप किया जाएगा; (ii) उपनियम (2) में,— (क) खंड (ख) में, “पंद्रह दिन” शब्दों के स्थान पर “पैंतालीस दिन” शब्द रखे जाएंगे; (ख) परंतुक का लोप किया जाएगा; (झ) नियम 19झ में, उपनियम (2) में, “प्रतिभूति जमा के माध्यम से” के पश्चात निम्नलिखित अंतःस्थापित किए जाएंगे:—, “या अनुसूची 4—क में यथा विनिर्दिष्ट प्रारूप में बीमा प्रतिभू बांड के माध्यम से”;
[भाग II—खण्ड 3(i)] भारत का राजपत्र : असाधारण 3
(ञ) “अनुसूची 3” के पश्चात, निम्नलिखित अनुसूची अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:— “अनुसूची 3-क बीमा प्रतिभू बांड का प्रपत्र [नियम 12(2) देखें] [प्रतिभू बीमाकर्ता की संदर्भ संख्या]
[तारीख]
सेवा में राज्यपाल [राज्य का नाम]
[पता] जबकि क. कंपनी अधिनियम 1956/2013 के अधीन भारत में निगमित [अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी का नाम], जिसकी कॉरपोरेट पहचान संख्या [अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी का सीआईएन], जिनका रजिस्ट्री कार्यालय [रजिस्ट्री कार्यालय का पता], भारत है और कारबार का प्रमुख स्थान [कारबार के प्रमुख स्थान का पता, यदि रजिस्ट्री कार्यालय से भिन्न हो] अथवा [व्यष्टिक का नाम] जो भारत का नागरिक है, जिसके पास आयकर स्थायी खाता संख्या [संख्या] है, [पता] का निवासी है, अथवा [भागीदारी फर्म/व्यष्टियों का समूह] जिसके सभी सदस्य भारतीय नागरिक हैं, और भारत के निवासी है जिनके कारबार का प्रमुख स्थान [कारबार के स्थान का पता] में है, [“अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी”] को (निष्पादन प्रतिभूति बीमा की समाप्ति की तारीख [“समाप्त तारीख”) तक वैध सुरक्षा निष्पादन के रूप में आईएनआर [आंकड़े] [भारतीय रुपए (शब्दों में)] के समान रकम के लिए शर्तहीन एवं अप्रतिसंहरणीय बीमा प्रतिभू बांड के रूप में प्रत्याभूति देना अपेक्षित है। ख. राज्य और अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के बीच निष्पादित किया जाने वाला खान विकास और उत्पादन करार (संयुक्त रूप से “करार”) नीलामी (नीलामी का विवरण) के संबंध में तारीख [तारीख] के संविदा दस्तावेज के अधीन कुछ बाध्यताओं की पूर्ति हेतु सुरक्षा निष्पादन राज्यपाल [राज्य का नाम], (“राज्य”) को प्रस्तुत करना अपेक्षित है। ग. अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के अनुरोध पर हम, (बीमा कंपनी का नाम) अपनी शाखा (“नाम”) इसमें अंतर्विष्ट निबंधनों एवं शतों पर राज्य की मांग पर करार के अधीन अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी की बाध्यताओं को सुरक्षित रखने हेतु आईएनआर (आंकड़े) (भारतीय रुपये) [शब्दों में] (“प्रतिभू बांड रकम”) तक की रकम राज्य को संदाय करने का वचन देते हैं। अतः अब, प्रतिभू बीमाकर्ता राज्य के पक्ष में अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी की ओर से यह अप्रतिसंहरणीय और शर्तरहित संदाय बीमा प्रतिभू बांड जारी करता है और निम्नानुसार पुष्टि करता है, अर्थात्:—
4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
कारणों को दर्शाने अथवा साबित करने की राज्य की आवश्यकता के बिना और किसी भी मामले पर राज्य और अभिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के मध्य किसी विवाद अथवा मतभेद के बावजूद वह राशि अथवा राशियां (एक अथवा अधिक दावों के माध्यम से) जो कि कुल की प्रत्याभूति मात्रा से अधिक न हो, बिना किसी आपत्ति, आरक्षण, कैजविएट, विरोध अथवा आश्रय के बिना शर्त रहित तथा स्थायी तौर पर संदाय करने का वचन देता है। संपूर्ण और स्पष्ट होने के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता के दायित्वों के संबंध में किसी न्यायालय अथवा अधिकरण के समक्ष लंबित किसी मामले अथवा कार्यवाही में अभिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी द्वारा उत्पन्न किसी विवाद अथवा विवादों के होते हुए भी मांगी गई राशि का संदाय राज्य को करने का वचन देता है। 3. प्रतिभू बीमाकर्ता यह स्वीकार करता है कि राज्य को प्रतिभू बीमाकर्ता द्वारा संदाय की जाने वाली रकम की राज्य द्वारा ऐसी कोई भी मांग करार के अधीन राज्य को अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी द्वारा संदाय की जाने वाली रकम के संबंध में अंतिम, बाध्यकारी और निर्णायक प्रमाण होगा। 4. प्रतिभू बीमाकर्ता द्वारा राज्य की पूर्वोक्त राशि अथवा अभिमान्य बोली दाता/प्रधान ऋणी से उसके किसी अंश की माग करने की आवश्यकता को हटाता है और साथ ही इस प्रतिभू बांड के अधीन संदाय हेतु प्रतिभू बीमाकर्ता की किसी लिखित मांग को प्रस्तुत करने से पूर्व अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के विरुद्ध अपने विधिक उपचार का राज्य द्वारा अपनाए जाने को अपेक्षित बनाने के प्रतिभू बीमाकर्ता के किसी अधिकार को भी हटाता है। 5. इसके अतिरिक्त प्रतिभू बीमाकर्ता बिना शर्त के राज्य से सहमति रखता है कि राज्य को छूट होगी कि, बिना प्रतिभू बीमाकर्ता की सहमति के और इस प्रतिभू बांड के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता के दायित्व को समय-समय पर, किसी रूप में प्रभावित किए बिना: (i) करार के निबंधनों और शतों को बदल और / या उपरांतुरत करेगाः (ii) करार के अधीन अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के कर्तव्यों के निष्पादन हेतु समय को विस्तृत और/ या स्थगित कर सकेगा, अथवा (iii) करार के निबंधनों और शतो के अधीन अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के विरुद्ध राज्य द्वारा अपनाए जाने वाले किसी अधिकारों को प्रज्वरत रहना या प्रवृत्त कर सकेगा। और प्रतिभू बीमाकर्ता को ऐसे किसी कृत्य के कारण अथवा राज्य की ओर से हुए लोप अथवा अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के राज्य द्वारा किसी अनुग्रह अथवा किसी अन्य कारण जो प्रतिभूतियों से संबंधित नियम के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता को उसके कर्तव्यों से मुक्त नहीं करेगा किन्तु इस उपबंध हेतु, इस प्रतिभू बांड के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता को उसकी बाध्यताओं से मुक्त करने का प्रभाव होगा। 6. इसके अधीन किया गया कोई भी संदाय किसी वर्तमान एवं भविष्य कर, उद्धहन, इम्पोस्ट्ट, शुल्क, प्रभारों, फीस, कमीशनों, कटौतियों अथवा किसी भी प्रकृति की रोकों, के कारण से, किसी कटौतियों से मुक्त होगा। 7. प्रतिभू बीमाकर्ता सहमति देता है कि राज्य अपने विकल्प पर अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के विरुद्ध प्रथम दृष्टा कार्यवाही के बिना प्रथम दृष्टांत में प्रमुख ऋणीदाता के रूप में, प्रतिभू बीमाकर्ता के विरुद्ध इस प्रतिभू बांड को लागू करने का हकदार होगा। 8. प्रतिभू बीमाकर्ता यह और स हमति देता है कि इसमें निहित प्रत्याभूति, करार में यथाविनिर्दिष्ट अवधि के दौरान पूरी तरह प्रभाव में एवं लागू रहेगी और यह कि यह तब तक लागू रहेगा जब तक अभिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के सुरक्षा निष्पादन के संबंध में कजर्त करार के आधार पर अथवा उसके अधीन सभी कर्तव्यों की पूरी तरह पूर्ति नहीं हो जाती और उसके दावों की संतुष्टि अथवा पूर्ति या जब तक राज्य यह प्रमाणित नहीं करता कि सुरक्षा निष्पादन के संबंध में अनुबंध की नियम एवं शतों का पूरी तरह एवं उचित रूप में अभिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी द्वारा पालन किया गया है और तिनुसार इस प्रत्याभूति का निर्वाह किया गया है। इसमें अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जब तक समाप्ति की तारीख तक अथवा उसके पूर्व लिखित में प्रतिभू बीमाकर्ता पर इस प्रत्याभूति के अधीन कोई मांग अथवा दावा नहीं पेश किया जाता प्रतिभू बीमाकर्ता को तिनंतर इस प्रत्याभूति के अधीन सभी दायित्वों से मुक्त रखा जाएगा। 9. इस प्रत्याभूति के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता द्वारा किया गया संदाय इस आधार पर संदाय हेतु प्रतिभू बीमाकर्ता के दायित्वों का वैध पूर्ति मानी जाएगी और राज्य ऐसा संदाय करने के लिए प्रतिभू बीमाकर्ता के विरुद्ध कोई दावा पेश नहीं कर पाएगा।
[भाग II—खण्ड 3(i)] भारत का राजपत्र : असाधारण 5
(ख) यह प्रतिभू बांड समाप्ति की तारीख तक मान्य होगा। 15. प्रतिभू बीमाकर्ता इस प्रतिभू बांड के अधीन प्रतिभू बांड की रकम अथवा उसके किसी अंश के संदाय का केवल सिफा और केवल तभी उत्तरदायी है यदि राज्य समाप्ति की तारीख को अथवा उसके पूर्व प्रतिभू बीमाकर्ता को लिखित दावा अथवा मांग पेश करता है।
तारीख (दिवस) को प्रतिभू बीमा कर्ता हेतु (महीने) वर्ष का दिन
साक्षी में जिसके प्रतिभू बीमाकर्ता ने, अपने प्राधिकृत अधिकार के द्वारा, अपना हस्ताक्षर और मोहर किया है। .................................. (हस्ताक्षर) .................................. (नाम और पदनाम) (प्रतिभू बीमाकर्ता की मोहर) (ट) उक्त नियमों में, "अनुसूची 4 " के पश्चात, निम्नलिखित अनुसूची अंतः स्थापित की जाएगी, अर्थात्:— "अनुसूची 4-क संयुक्त अनुज्ञप्ति और गवेषण अनुज्ञप्ति के लिए बीमा प्रतिभू बांड के लिए प्रपत्र [नियम 19 (4) और 19झ (2) देखें]
[प्रतिभू बीमाकर्ता की संदर्भ संख्या]
[तारीख] सेवा में राज्यपाल [राज्य का नाम]
[पता]
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जबकि (क) कंपनी अधिनियम 1956/2013 के अधीन भारत में निगमित [अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी का नाम], कॉरपोरेट पहचान संख्या [अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी का सीआईएन] सहित, जिनका रजिस्ट्री कार्यालय [रजिस्ट्री कार्यालय का पता], भारत है और कारबार का प्रमुख स्थान [कारबार के प्रमुख स्थान का पता, यदि रजिस्ट्री कार्यालय से भिन्न हो] अथवा [व्यष्टिक का नाम] जो भारत का नागरिक है, जिसके पास आयकर स्थायी खाता [संख्या] है, ........ [पता] का निवासी है, अथवा [भागीदारी फर्म/व्यष्टियों का संघ] जिसके सभी सदस्य भारतीय नागरिक हैं, और भारत के निवासी है जिनके कारबार का प्रधान स्थान [कारबार के स्थान का पता] है, [“अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी”] को (निष्पादन प्रतिभूति बीमा की समाप्ति की तारीख (“समाप्ति तारीख”) तक वैध सुरक्षा निष्पादन के रूप में आईएनआर [आंकड़े] [भारतीय रुपए (शब्दों में)] के समान रकम के लिए शर्तहीन एवं अप्रतिसंहरणीय बीमा प्रतिभू बांड के रूप में प्रत्याभूति देना अपेक्षित है जो (“समाप्ति की तारीख”) की तारीख से [* ] [* ] की आरंभिक अवधि के लिए वैध होगी। (ख) नीलामी (नीलामी का विवरण) के संबंध में तारीख [तारीख] के संविदा दस्तावेज के अधीन कुछ बाध्यताओं की पूर्ति हेतु [राज्य का नाम], (“राज्य”) के राज्यपाल को निष्पादन सुरक्षा प्रस्तुत करना अपेक्षित है और राज्य और अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के बीच खान विकास और उत्पादन करार (संयुक्त रूप से “करार”) निष्पादित किया जाना अपेक्षित है। (ग) अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के अनुरोध पर हम, (बीमा कंपनी का नाम) अपनी शाखा (“नाम”) इसमें अंतर्विष्ट निबंधनों एवं शतों पर राज्य की मांग पर करार के अधीन अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी की बाध्यताओं को सुरक्षित रखने हेतु आईएनआर (आंकड़े) (भारतीय रुपये) [शब्दों में] (“प्रतिभू बांड रकम”) तक की रकम राज्य को संदाय करने का वचन देते हैं। अतः अब, प्रतिभू बीमाकर्ता राज्य के पक्ष में अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी की ओर से यह अप्रतिसंहरणीय और शर्तरहित संदाय बीमा प्रतिभू बांड जारी करता है और निम्नानुसार पुष्टि करता है, अर्थात्:—
[भाग II—खण्ड 3(i)] भारत का राजपत्र : असाधारण 7
(ii) करार के अधीन अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के कर्तव्यों के निष्पादन हेतु समय को विस्तृत और/ या स्थगित कर सकेगा, अथवा (iii) करार के निबंधनों और शतो के अधीन अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के विरुद्ध राज्य द्वारा अपनाए जाने वाले किसी अधिकारों को प्रज्वरत रहना या प्रवृत्त कर सकेगा। और प्रतिभू बीमाकर्ता को किसी कार्य करने या करने से लोप के कारण अथवा राज्य की ओर से हुए लोप अथवा अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के राज्य द्वारा किसी अनुग्रह अथवा किसी कारण जो प्रतिभूतियों से संबंधित नियम के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता को उसके कर्तव्यों से मुक्त नहीं करेगा किन्तु इस उपबंध हेतु, इस प्रतिभू बांड के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता को उसकी बाध्यताओं से मुक्त करने का प्रभाव होगा। 6. इसके अधीन किया गया कोई भी संदाय किसी वर्तमान एवं भविष्य कर, उद्धहन, इम्पोस्ट्ट, शुल्क, प्रभारों, फीस, कमीशनों, कटौतियों अथवा किसी भी प्रकृति की रोकों, के कारण से, किसी कटौतियों से मुक्त होगा। 7. प्रतिभू बीमाकर्ता सहमति देता है कि राज्य अपने विकल्प पर अधिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के विरुद्ध प्रथम दृष्टा कार्यवाही के बिना प्रथम दृष्टांत में प्रमुख ऋणीदाता के तौर पर, प्रतिभू बीमाकर्ता के विरुद्ध इस प्रतिभू बांड को लागू करने का हकदार होगा। 8. प्रतिभू बीमाकर्ता यह भी स हमति देता है कि इसमें अंतर्विष्ट प्रत्याभूति और प्रत्याभूति बाध्यताएं, करार में यथाविनिर्दिष्ट अवधि के दौरान पूरी तरह प्रवृत्त ओर लागू रहेगी तथा यह कि यह तब तक प्रवृत्त रहेगा जब तक (i) अभिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी के सुरक्षा निष्पादन के संबंध में कजर्त करार के आधार पर अथवा उसके अधीन सभी बाध्यताएं तरह संवित्त नहीं हो जाती और उसके दावों का समाधान या उन्मोचन नहीं हो जाता अथवा (ii) पूर्ति अथवा जब तक राज्य यह प्रमाणित नहीं करता कि सुरक्षा निष्पादन के संबंध में करार के नियम और शतों का पूरी तरह एवं उचित रूप में अभिमानी बोलीदाता/प्रधान ऋणी द्वारा पालन किया गया है और तिनुसार इस प्रत्याभूति का उन्मोचन न हो जाए अथवा (iii) खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के नियम 19 के उप-नियम (2) के अधीन किसी संशोधित निष्पादन सुरक्षा का उपबंध करने पर, जो भी बाद में हो, निर्वाह न हो जाए। इसमें किसी बात के होते हुए भी, जब तक प्रतभूति के अधीन मांग या दावा प्रतिभू बीमाकर्ता पर लिखित मे यवन की तारीख पर या उससे पहले नहीं करता तब तक प्रतिभू बीमाकर्ता पर इस प्रत्याभूति के अधीन कोई मांग अथवा दावा नहीं पेश किया जाता प्रतिभू बीमाकर्ता को तिनंतर इस प्रत्याभूति के अधीन सभी दायित्वों से मुक्त रखा जाएगा 9. इस प्रत्याभूति के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता द्वारा किया गया संदाय इस आधार पर संदाय हेतु प्रतिभू बीमाकर्ता के दायित्वों का वैध पूर्ति मानी जाएगी और राज्य ऐसा संदाय करने के लिए प्रतिभू बीमाकर्ता के विरुद्ध कोई दावा पेश नहीं कर पाएगा। 10. यह प्रतिभू बांड भारत की विधि के अधीन है। इस प्रतिभू बांड अथवा इसकी विषय वस्तु के कारण राज्य में [संबंधित राज्य] उत्पन्न किसी वाद, कारावाई अथवा अन्य कारावाई राज्य के न्यायालयों के विशेष अधिकार क्षेत्र के अधीन होगी। 11. प्रतिभू बीमाकर्ता के पास इस प्रतिभू बांड को राज्य के पक्ष में जारी करने का अधिकार है। इस प्रतिभू बांड को प्रतिभू बीमाकर्ता के गठन में परिवर्तन के फलस्वरूप उन्मोचित नहीं किया जा सकेगा। 12. प्रतिभू बीमाकर्ता लिखित में राज्य की पूर्व सहमति के बिना इस प्रतिभू बांड को जारी रहने के दौरान प्रतिसंहररत नहीं करने के लिए वचनबद्ध है। 13. राज्य, प्रतिभू बीमाकर्ता को पूर्व सूचना द्वारा, किसी अन्य विभागों, मंत्रालयों अथवा अन्य सरकारी अभिकरणों को इस प्रतिभू बांड के अधीन अधिकार दे सकेगा, जो राज्यपाल के नाम पर लागू होंगे। इस खंड में उपबंधित के सिवाय, यह प्रत्याभूति समनुदेशनीय अथवा हस्तांतरणीय नहीं होगी। 14. इसमें अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, क. इस प्रतिभू बांड के अधीन प्रतिभू बीमाकर्ता का दायित्व प्रतिभू रकम से अधिक नहीं होगा।
ख. यह प्रतिभू बांड समाप्ति की तारीख तक मान्य होगा। 15. प्रतिभू बीमाकर्ता केवल इस प्रतिभू बांड के अधीन प्रतिभू बांड की रकम अथवा उसके किसी अंश के संदाय का केवल सिर्फ और केवल तभी उत्तरदायी है यदि राज्य अवसान की तारीख को अथवा उसके पूर्व प्रतिभू बीमाकर्ता को लिखित दावा अथवा मांग पेश करता है।
8 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
......................................(वर्ष).............................(माह)......................(तारीख) जिसके साक्ष्य में प्रतिभू बीमाकर्ता ने, अपने प्राधिकृत अधिकारी के माध्यम से, अपना हस्ताक्षर और मोहर लगाई है। .................................. (हस्ताक्षर) .................................. (नाम और पदनाम) (प्रतिभू बीमाकर्ता की मोहर)
[फा. सं. एम.IV—2306/10/2025—खान IV—भाग(1)] शकील आलम, आर्थिक सलाहकार
टिप्पण: मूल नियम भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग II, खंड 3, उप—खंड (i), संख्यांक सा.का.सं. 406(अ), तारीख 20 मई, 2015 द्वारा प्रकाशित किया गया था और अंतिम बार संख्यांक सा.का.सं. 776(अ), तारीख 22 अक्टूबर, 2025 द्वारा संशोधित किया गया था।
MINISTRY OF MINES NOTIFICATION New Delhi, the 29th January, 2026 G.S.R. 71(E).— In exercise of the powers conferred by section 13 of the Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 (67 of 1957), the Central Government hereby makes the following rules further to amend the Mineral (Auction) Rules, 2015, namely:—
(2) They shall come into force on the date of their publication in the Official Gazette. 2. In the Mineral (Auction) Rules, 2015,— (a) in rule 9, in sub-rule (5), in the first proviso, after the words “through security deposit”, the words “or through insurance surety bond” shall be inserted; (b) in rule 10, in sub-rule (1A),— (i) in the opening portion, the words “or extended period” shall be omitted; (ii) in clause (b), for the words “within fifteen days”, the words and figures “and furnish performance security as specified in rule 12 within forty-five days” shall be substituted; (iii) the proviso shall be omitted; (c) in rule 12, in sub-rule (2), after the words “through security deposit”, the following shall be inserted, namely:—
Who is affected
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