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The Insurance Regulatory and Development Authority of India amends multiple regulations to remove foreign equity investment caps for insurance intermediaries and introduce new foreign investment compliance rules. Every applicant that is a company incorporated under the Companies Act, 2013 and has a majority foreign shareholding must submit a formal undertaking in Schedule AA. The undertaking requires that the chairman, chief executive officer, managing director or principal officer, a majority of board directors, and a majority of key management persons are resident Indian citizens. The intermediary must obtain prior permission from the Authority before repatriating dividends, bring in latest technological and managerial skills, and restrict payments other than dividends to related parties to ten percent of total company expenses in a financial year.
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रजिस्टर्ड सं० डी० एल०-33004/99
REGD. NO. D. L.-33004/99
असाधारण EXTRAORDINARY भाग III—खण्ड 4 PART III—Section 4 प्राधिकार से प्रकाशित PUBLISHED BY AUTHORITY
| सं. 386] | नई दिल्ली, शुक्रवार, नवम्बर 1, 2019/ कार्तिक 10, 1941 |
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| No. 386] | NEW DELHI, FRIDAY, NOVEMBER 1, 2019/ KARTIKA 10, 1941 |
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिसूचना हैदराबाद, 30 अक्तूबर, 2019
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा मध्यवर्ती) (संशोधन) विनियमन, 2019
फा. सं. भा.बी.िव.वि.प्रा./विनियम/13/164/2019.—बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 42डी और 42ई तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 2(1)(च), 14 और 26 के साथ पठित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 114ए की उप-धारा 2 के खंड (वीबी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्राधिकरण बीमा सलाहकार समिति के साथ परामर्श करने के बाद इसके द्वारा निम्नलिखित विनियमन बनाता है, अर्थात्:-
उद्देश्य: केन्द्र सरकार द्वारा, अन्य बातों के साथ-साथ मध्यवर्तीस अथवा बीमा मध्यवर्तियों के लिए विदेशी ईक्विटी निवेश की उच्चतम सीमा को हटाते हुए जारी किये गये भारतीय बीमा कंपनियाँ (विदेशी निवेश) संशोधन नियम, 2019 के द्वारा भारतीय बीमा कंपनियाँ (विदेशी निवेश) नियम, 2015 में किये गये संशोधन के अनुसरण में इन विनियमों का उद्देश्य मध्यवर्तियों अथवा बीमा मध्यवर्तियों के लिए लागू विभिन्न विनियमों के तदनुरूप उपबंधों का संशोधन करना है।
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ: 1.1 ये विनियमन भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा मध्यवर्ती) (संशोधन) विनियमन, 2019 कहलाएँगे। 1.2 ये विनियमन सरकारी राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
अध्याय I
1. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा दलाल) विनियमन, 2018 का संशोधन
“21क – विदेशी निवेश
प्रत्येक आवेदक, जो कंपनी अधिनियम, 2013 के अधीन निगममित कंपनी है और अधिकांश विदेशी निवेशकों की शेयरधारिता से युक्त है, अनुसूची – एए में दिये गये रूप में एक वचनपत्र प्रस्तुत करेगा।”
अध्याय II
2. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा वेब संग्राहक) विनियमन, 2017 का संशोधन
“8क – विदेशी निवेश
प्रत्येक आवेदक, जो कंपनी अधिनियम, 2013 के अधीन निगममित कंपनी है तथा अधिकांश विदेशी निवेशकों की शेयरधारिता से युक्त है, अनुसूची – एए में दिये गये रूप में एक वचनपत्र प्रस्तुत करेगा।”
अध्याय III
3. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (बीमा विपणन फर्म का पंजीकरण) विनियमन, 2015 का संशोधन
“6क – विदेशी निवेश
प्रत्येक आवेदक, जो कंपनी अधिनियम, 2013 के अधीन निगममित कंपनी है तथा अधिकांश विदेशी निवेशकों की शेयरधारिता से युक्त है, अनुसूची – एए में दिये गये रूप में एक वचनपत्र प्रस्तुत करेगा।”
अध्याय IV
4. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (कारपोरेट एजेंटों का पंजीकरण) विनियमन, 2015 का संशोधन